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स्किन कैंसर के संकेत देते हैं ये लक्षण, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

स्किन कैंसर के संकेत देते हैं ये लक्षण, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

कैंसर, एक ऐसी खतरनाक बीमारी जिसका नाम सुनते ही दिल दहल उठता है। वैसे तो कैंसर के कई प्रकार होते हैं, जैसे कि ब्रेस्ट कैंसर, ब्लड कैंसर, ओवरी कैंसर, लंग कैंसर और स्किन कैंसर आदि। लेकिन आज हम बात करेंगे स्किन कैंसर की। वैसे त्वचा के कैंसर के भी कई प्रकार होते हैं, पर आज हम जानेंगे स्किन कैंसर के उन प्रकारों की, जिसे हम रैशेज समझने की गलती कर बैठते हैं। त्वचा पर दिखने वाले लाल रंग के चक्कते कई बार कैंसर का कारण हो सकता है। लेकिन लोग के धूप के कारण होने वाले रैशेज या एलर्जी समझकर अनदेखा कर देते हैं। वैसे रैशेज के कारण होने वाले स्किन कैंसर का कारण भी कई बार सूर्य की यूवीए किरणें होती हैं। तो आइए जानते हैं, रैशेज और स्किन कैंसर में क्या संबंध है?

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स्किन कैंसर रैशेज क्या है?

वैसे तो, कई कारणों से त्वचा पर दाने या रैशेेज हो सकते हैं। कई बार धूप की तेज किरणों या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण एलर्जी हो जाती है। जिनमें से कुछ आगे चलकर स्किन कैंसर का रूप ले लेती है। त्वचा में रैशेज और इंफेक्शन के लक्षण शुरूआत में लगभग सामान ही होते हैं। जिस कारण अक्सर लोगों को पता नहीं चल पाता है। लेकिन स्किन कैंसर के शिकार लोग कुछ समय बाद रैशेज या दाने में दर्द, पिंक लाइनस और अधिक खुजली जैसे लक्षण महसूस कर सकते हैं। इनके अलावा और भी बहुत से लक्षण हैं, जानें इन्हें-

स्किन कैंसर के लक्षण

इसके अलावा, अन्य भी बहुत से लक्षण होते हैं, जैसे कि कई बार गर्दन, गालों और चेहरे के आसपास के हिस्से में जलन महसूस होना आदि। अधिकतर लोग, इसे अनदेखा कर देते हैं, पर ऐसा नहीं करना चाहिए। क्याेकि ये आपकी त्वचा में स्किन कैंसर का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। त्वचा में रैशेज सामान्य है या कैंसर, इसकी पहचान डॉक्टर ही कर सकते हैं। यह लाल चक्कते, जो कि सोरायसिस भी हो सकते हैं।

कुछ लोगों में त्वचा के कैंसर की पहचान, अक्सर कुछ समान विशेषताओं के साथ मौजूद होते हैं, जैसे कि गुलाबी और लाल मलिनकिरण या रक्तस्राव का होना आदि। स्किन कैंसर में घाव भी हो जाता है। इसके अलावा, सोरायसिस में होने वाले घाव भी कई बार त्वचा कैंसर का कारण हो सकते हैं।

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रैशेज और स्किन कैंसर में अंतर

  • धीरे-धीरे समय के साथ रैशेज का साइज बड़ा होना। 6 मिलीमीटर से अधिक बड़ा हो सकता है।
  • अलग-अलग रंगों की एक किस्म के साथ नजर आना।
    समय के साथ बदलावा महसूस करना
  • त्वचा कैंसर चकत्ते आमतौर पर अपने आप ठीक नहीं होते हैं, लगातार बने रहते हैं। एलर्जी कुछ समय में ठीक हो जाती है। लेकिन कैंसर में, जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है, घाव या दाने का आकार बदलने लगता है और घाव बन जाता है।

इसलिए इन पर जल्दी पहचान करना अक्सर अन्य प्रकार के कैंसर की तुलना में आसान होता है। ऐसा करने से सफल उपचार की अधिक संभावना होती है।

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प्रकार

मेलानोमा

सभी प्रकार के स्किन कैंसर की शुरूआत जरूरी नहीं है कि रैशेज से ही हो, उदाहरण के लिए, मेलानोमा – जो मेलानोसाइट कोशिकाओं से विकसित होते हैं जो त्वचा को वर्णक प्रदान करते हैं – अक्सर मिसहैपेन मोल्स जैसा दिखता है। मेलानोमा त्वचा कैंसर के सबसे जानलेवा रूपों में से एक है, इसलिए शीघ्र ही इसका उपचार किया जाना जरूरी है। वैसे विभिन्न प्रकार के स्किन कैंसर में चकत्ते विकसित हो सकते हैं। इसलिए शुरूआती उपचार बहुत जरूरी है।

एक्टिनिक केराटोसिस

एक्टिनिक केराटोसिस, या सौर केराटोसिस, शरीर के किसी विशेष हिस्सों पर अत्यधिक सूरज के संपर्क में आने के कारण हो सकता है। एक्टिनिक केराटोसिस वाले लोगों की त्वचा पर छोटे, लाल, पैचज विकसित हो सकते हैं। एक्टिनिक केराटोसिस सबसे अधिक शरीर के खुले भाग वाले हिस्से में होता है, जैसे हाथ, सिर या गर्दन। ये पैच घाव का भी रूप ले सकते हैं। समय के साथ, जोखिम बढ़ता जाता है। फिर एक प्रकार के कैंसर में विकसित हो जाते हैं, यह घाव। जिसे स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (एससीसी) कहते हैं। डॉक्टरों के लिए यह निर्धारित करना मुश्किल हो सकता है कि एक्टिनिक केराटोसिस पैच समय के साथ बदल जाएगा या नहीं और कैंसर बन जाएगा।हालांकि एक्टिनिक केराटोसिस के अधिकांश मामले कैंसर में नहीं बदलते हैं, फिर भी डॉक्टर कैंसर के विकास को रोकने के लिए शुरुआती उपचार और नियमित जांच में भाग लेने की सलाह देते हैं। यहां, एक्टिनिक केराटोसिस के बारे में अधिक जानें।

और पढ़ें: स्टमक इंफेक्शन दूर करने के लिए आजमाएं ये घरेलू उपाय

बेसल सेल कार्सिनोमस

बेसल सेल कार्सिनोमा (बीसीसी) एक प्रकार का कैंसर है, जो किअक्सर एक बम्प के रूप में शुरू होता है और फिर धीरे-धीरे नाक या चेहरे पर भी फैलेन लगता है। इसमें शरीर में अन्य हिस्सों में भी रैशेज के साथ और भी लक्षण नजर आते हैं। यह एक छोटे, पपड़ीदार, गुलाबी पैच के रूप में इसके लक्षण नजर आ सकते हैं। इन रैशेज से खून भी आ सकता है।

एक्टिनिक एलिलिटिस

एक्टिनिक एलिलिटिस, जोकि होंठों में होने वाला कैंसर है। इस स्थिति में टेढ़े-मेढ़े या खुरदरे रैशेज हो सकते हैं और धीरे-धीरे होंठ का शेप बिगड़ने लगता है। इस प्रकार के दाने अक्सर लगातार पराबैंगनी किरणों के संपर्क के कारण विकसित होने लगते हैं।

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एस.सी.सी (स्कवैमस सेल कार्सिनोमा)

एस.सी.सी. (स्कवैमस सेल कार्सिनोमा) की समस्या में स्किन में रैशेज के साथ गुलाबी रंग के दाने नजर आने लगते हैं और धीरे-धीरे उनका आकार भी बड़ा होने लगता है। हालांकि, इसके बजाय त्वचा का खुरदरा, लाल, लाल पैच दिखाई दे सकता है। यह अक्सर नॉनकैंसरस या प्रीकैंसरस स्किन घावों के साथ निकटता से मिलता है। समय के साथ होने वाले त्वचा पर चकत्ते के विपरीत, एसएससी के कारण होने वाले चकत्ते धीरे-धीरे बढ़ते हैं और एक ऐसी गांठ के रूप में दिखाई देने लगते हैं । एससीसी आमतौर पर हाथों, हाथों, गर्दन और सिर के अलावा शरीर के अन्य क्षेत्रों में भी विकसित हो सकता है।

अन्य कैंसर से जुड़े रैशेज

अन्य और भी कई चकत्ते कैंसर का संकेत हो सकता है, जो त्वचा से दूर से विकसित होता है, जैसे कि लिम्फोमा के विभिन्न रूप। लिम्फोमा एक खतरनाक स्टेज है, कैंसर कोशिकाएं पूरे शरीर में फैल जाती हैं। ये कोशिकाएं एक साथ कई अंगों या ऊतकों में विकसित करती हैं।

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ध्यान रखें कुछ बातों का

यदि किसी व्यक्ति को, किसी भी प्रकार का लगातार चकत्ते है, तो उन्हें जल्द ही डॉक्टर से मिलना चाहिए और सयम पर इलाज शुरू करना चाहिए। कई कैंसर चकत्ते का कारण बन सकते हैं, जो कम गंभीर त्वचा की स्थिति के समान हो सकते हैं। एक त्वचा विशेषज्ञ की जांच द्वारा इसे कैंसर के रूप में तबदील होने से रोका जा सकता है।सूर्य की सुरक्षा कुछ लोगों को सूर्य के संपर्क में आने के साथ त्वचा के कैंसर को रोकने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण है। प्रभावी उपायों में शामिल हैं:

  • सूर्य की किरणों में अधिकदेर रहने से बचें
  • धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल हमेशा करें
  • रेशेज अगर लंबे समय तक बने रहे, तो तरुंत डॉक्टर से मिलें
  • दानों को फोड़ने की गलती बिल्कुल भी न करें
  • रैशेज पर कॉस्टमेटिक के इस्तेमाल से बचें

इस तरह के लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। तव्चा पर साधारण दिखने वाले रैशेेज कैंसर का कारण हो सकते हैं। जिसे आप एलर्जी समझकर अनदेखा न करें। इन सभी सावधानियों के साथ समय रहते इलाज करवाएं।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 06/05/2021 को
और Admin Writer द्वारा फैक्ट चेक्ड
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