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आप में होने वाले मेमोरी लॉस का कारण हो सकती है डायबिटीज की समस्या, जानें दोनों में क्या है संबंध!

आप में होने वाले मेमोरी लॉस का कारण हो सकती है डायबिटीज की समस्या, जानें दोनों में क्या है संबंध!

क्या आपको भी भूलने की बीमारी है, कहीं आपको डायबिटीज तो नहीं। अब आप यही सोच रहे होगें कि डायबिटीज (Diabetes) और मेमाेरी लाॅस में क्या संबंध है? हम आपको बता दें कि इन दोनों में बहुत ही गहरा संबंध है। मेमोरी लॉस (Memory loss) होने के वैसे तो कई कारण हो सकते हैं, उनमें से एक डायबिटीज भी है। जब शरीर में इंसुलिन के लेवल में अंसतुलन आता है, तो इसका प्रभाव मस्तिष्क पर भी पड़ता है। फिर यह समस्या होना शुरु हो जाती है। आइए जानें कि इन दोनों में क्या संबंध है। लेकिन इससे पहले ये जानें कि डायबिटीज और मेमोरी लॉस (Diabetes and memory loss) क्या है। डायबिटीज और मेमोरी लॉस के बारे में जानने से पहले ये जानें कि डायबिटीज के प्रकार क्या हैं, जानें यहां:

और पढे़:आपके शरीर में दिखने वाले स्किन टैग, हो सकते हैं डायबिटीज का संकेत…

डायबिटीज टाइप-1 (Type 1 diabetes)

टाइप-1 डायबिटीज को जुवेनाइल डायबिटीज (Juvenile diabetes) भी कहते हैं। जो कम उम्र में डायबिटीज के शिकार ( Diabetes Patient) हो जाते हैं या जो बच्चों में डायबिटीज की समस्या होती है, वो टाइप-1 डायबिटीज के शिकार कहलाते हैं। इस प्रकार की डायबिटीज में आपके इम्यून सेल्स पैनक्रियाज में बीटा सेल्स को हानि पहुंचाते हैं। बीटा सेल्स इंसुलिन हार्मोन का निमार्ण करती है। यानि कि ऐसी स्थिति में पर्याप्त मात्रा में हॉर्मोन (Hormone) नहीं बन पाता है। हमारे शरीर ग्लूकोज (Glucose) को कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिए इंसुलिन की जरूरत होती है। जब ग्लूकोज कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं, तो शरीर में ऊर्जा (Energy) का निमार्ण होता है। जब ऐसा नहीं हो पाता है, तो ग्लूकोज ब्ल्ड (Blood Glucose) में मिलने लगता है। जिस कारण रक्त में शुगर की मात्रा (Sugar Level) हाय हो जाती है। तो ऐसे में टाइप-1 डायबिटीज के केस में इंसुलिन इंजेक्शन लेना जिंदगी का हिस्सा बन जाता है।

टाइप-1 डायबिटीज का खतरा (Type 1 diabetes Risk) किन्हें ज्यादा होता है:

  • जिनके पेरेंट्स यानि कि माता-पिता को पहले से ही डायबिटीज की समस्या (diabetes problem) हो
  • बच्चों में पैंक्रियाज से जुड़ी प्रॉब्लम होने पर, जैसे कि कोई इंफेक्शन या घाव होने पर (infection problem)
  • कम उम्र में अधिक मोटापा (over weight)
  • अधिक जंक फूड का सेवन (Junk Food)

टाइप 1 डायबिटीज के नुकसान (Diabetes loss) इस तरह के हो सकते हैं, जैसे कि

  • हार्ट की प्रॉब्लम (Heart Problem) पैदा हो सकती है
  • किडनी फेलियर का खतरा (Kidney Failure)
  • आंखों में धुंधलापन होना (eye problem)
  • नसो के डैमेज होने का खतरा (Nerve Damage)
  • इंफेक्शन होने का खतरा (Infection Risk)

और पढ़ें: क्या पेरीफेरल नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर्स का मुख्य कारण डायबिटीज है?

डायबिटीज टाइप-2 (Type 2 diabetes)

डायबिटीज और मेमोरी लॉस के बीच के संबंध को जानने से पहले जानें डायबिटीज 2 के बारे में। विश्वभर में सबसे ज्यादा अधिक लोग डायबिटीज टाइप-2 (Type 2 diabetes) के शिकार होते हैं। इस प्रकार की डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन का निमार्ण ( Insulin Function )होता है, पर शरीर इसका इस्तेमाल नहीं कर पाता है, जैसा कि होना चाहिए। इसमें पैनक्रियाज की क्षमता कम हो जाती है, जिसके कारण इंसुलिन (Insulin) हॉर्मोन का उत्पादन कम हो जाता है। इस वजह से ब्लड शुगर (Blood Sugar) की मात्रा बढ़ जाती है। टाइप 2 डायबिटीज होने के दाैरान कोशिकाओं को इंसुलिन मिलना बंद हो जाता है। जिससे शरीर में बहुत कम मात्रा में इंसुलिन बनता है। यानि कि अग्नाशय उन्हें इंसुलिन नहीं भेज पाता है। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस भी कहते हैं। ऐसे में शरीर में ग्लूकोज के स्तर को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मेडिकेशन (Medication) की जरूरत हो जाती है।

टाइप-2 डायबिटीज का खतरा किन्हें ज्यादा होता है:

  • अधिक वजन वालों में (over weight)
  • बढ़ती उम्र (Aging)
  • जेनेटिक प्रॉब्लम यानि कि फैमिली हिस्ट्री होने पर (Genetic Problem)
  • लाइफस्टाइल खराब होने पर (Lifestyle Problem)
  • जंक फूड का अधिक सेवन करने पर (Junk food)
  • वर्कआउट न करने में (workout)
  • चीनी का अधिक सेवन करने पर (high sugar)
  • दूसरी कोई क्रॉनिक डिजीज होन पर (Chronic Disease)

टाइप -2 डायबिटीज के नुकसान इस तरह के हो सकते हैं, जैसे कि

  • हार्ट अटैक का खतरा (Heart attack risk)
  • स्ट्रोक का खतरा (Stroke Risk)
  • किडनी फेलियर (Kidney failure) हो सकता है
  • आंखों की रोशनी जा सकती है
  • क्लॉटेज हो सकता है (Clot)
  • नसे डैमेज हो सकती है (Nerve Damage)
  • इंफेक्शन होने पर कम नहीं होना
  • लिवर की प्रॉब्लम (Liver Problem)
  • ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम हो सकती है

और पढ़ें: क्या टाइप 1 डायबिटीज और सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज (STD) में संबंध है?

जानें मेमोरी लॉस क्या है? (What is memory loss)

डायबिटीज और मेमोरी लॉस के बारे में जानने से पहले जानें मेमोरी लॉस के बारे में। मेमोरी लॉस यानि कि भूल जाने की बीमारी होना, जिसका एक कारण लोगों की बढ़ती उम्र भी हो सकती है। इसे भूलने की बीमारी भी कही जाती है। यह बीमारी मस्तिष्क से जुड़ी हुई है। वैसे तो कई व्यक्तियों में मेमोरी लॉस की वजह अल्जामइर या डेमेंशिया हो सकती है। लेकिन बुहुत से लोगों में इसके अलग-अलग कारण भी हो सकते हैं, जैसे कि बढ़ती उम्र, ब्रेन की कोई प्रॉब्लम (Brain problem) या डायबिटीज का साइड इफैक्ट (Diabetes side effect)आदि। जिसमें लोग नाम भूल जाते हैं, क्या कर रहे थें या कोई समान रखकर भूल जाना आदि अब मेमोरी लॉस के ही लक्षण हैं।

मेमाेरी लाॅस के कुछ गंभीर लक्षण इस प्रकार हैं, जैसे कि:

ऐसे लक्षणों के दिखने पर मरीज को तुरंत डॉक्टर से मिलने की जरूरत है। इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

डायबिटीज और मेमोरी लॉस के बीच संबंध देखा जा सकता है। बढ़ती उम्र इन दोनों के बीच कॉमन फैक्टर का काम करती है। यानि उम्र बढ़ने के साथ लोगों में डायबिटीज होने पर इसका प्रभाव नसों पर भी पड़ता है। एजिंग के साथ भूलने की समस्या (Alzheimer’s disease) भी होना स्वाभाविक है। मेमोरी लॉस और जनर्ल कॉग्नेटिव इम्पेयरमेंट, दोनों ही एक-दूसरे के लक्षण हैं, यह दोनों टाइप 2 डायबिटीज से जुड़े हुए हो सकते हैं। शुगर पेशेंट (Diabetes Patient) के रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुचना आम है। डायबिटीज और मेमोरी लॉस को लेकर एक अध्ययन के स्रोत के परिणाम में इस बात का पता चला है कि डिमेंशिया मस्तिष्क की समस्या ब्रेन में इंसुलिन सिग्नलिंग और मेटाबॉलिज्म से जुड़ा हुआ है। मस्तिष्क में इंसुलिन रिसेप्टर्स होते हैं और ये संरचनाएं इंसुलिन (Insulin) को पहचानती हैं। जब शरीर में इंसुलिन का असंतुलन होता है, तो इससे मेमोरी भी प्रभावित होती है। इससे अल्जामइमर डिजीज (Alzheimer’s disease)के लिए आपका जोखिम बढ़ जाता है। यह असंतुलन टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में ज्यादा देखा गया है।

वैज्ञानिकों ने भी यह पाया है कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम के लक्षणों का प्रभाव मेमोरी पर भी देखा गया है। जिसके कारण मेमोरी लाॅस की प्रॉब्ल्म (Memory Loss Problem) हो जाती है। मेटाबोलिक सिंड्रोम टाइप 2 मधुमेह के लिए जोखिम के कुछ कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। डायबिटीज और मेमोरी लॉस से संबंधित सिंड्रोम के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

  • बल्ड प्रेशर में वृद्धि (Blood Pressure)
  • हाय ब्लड शुगर लेवल (Sugar Level)
  • असामान्य कोलेस्ट्रॉल का स्तर (cholesterol)
  • विशेष रूप से कमर के आसपास शरीर में वसा का बढ़ना (Fat)

और पढ़ें: आपकी ये आदतें बताती हैं कि आपकी मेमोरी कैसी है, जानें यहां

अध्ययनों में यह निष्कर्ष मिला है कि डायबिटीज और एडी यानि अल्जाइमर डिजीज (Alzheimer’s Disease) के उच्च स्तर के बीच संबंध है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम वाले लोगों में एडी विकसित होने का खतरा ज्यादा होता है। एडी के शिकार वाले लोग अक्सर हायपरग्लाइसेमिया (Hyperglycemia) और इंसुलिन प्रतिरोध विकसित करते हैं।

ये निष्कर्ष फ्रंटियर्स इन न्यूरोसाइंसेसट्रस्ट (Neurosciences) सोर्स में प्रकाशित समीक्षा द्वारा प्रबलित हैं। हालांकि शोधकर्ता इस समय कनेक्शन की पूरी सीमा को नहीं जानते हैं, इंसुलिन सिग्नलिंग और अल्जाइमर रोग के बीच संबंध स्पष्ट हूं।

इसी के साथ ही ऐसे मरीजों में कई चीजों को लेकर दिलचस्पी भी समय के साथ खत्म होने लगती है। कई बार लोग सुस्त महसूस करने लगते हैं। वह काफी सुस्त महसूस करने लगते हैं। कई बार पेशेंट रो कुछ भी समझने में असमर्थ महसूस करता है, तो ऐसे में उसका स्वभाव में चिड़चिड़ापन आने लगता है। जो उसके साथ-साथ अन्य लोगों के लिए भी परेशान करता है। ऐसे में डाॅक्टर की मेडिकेशन (Medication) बहुत जरूरी है।

और पढ़ें: क्या पेरीफेरल नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर्स का मुख्य कारण डायबिटीज है?

डॉक्टर से मिलें (Treatment of memory loss)

अगर आपको डायबिटीज और मेमोरी लॉस की समस्या हो रही है, तो आपको डॉक्टर से मिलने की जरूरत है। उसी के बाद ही आपको पता चल पाएगा कि आपकी मेमोरी लॉसस प्रॉब्लम की वजह डायबिटीज है या कुछ और वजह है। उसी के अनुसार डॉक्टर आपका मेडिकेशन शुरु कर देंगे। हो सकता है कि आपको कुछ लाइफस्टाइल बदलाव की जरूरत हो, जो आपके इस रिस्क को कम कर सकती है। यदि अल्जाइमर डिजीज (Alzheimer’s disease) है आपके मेमोरी लॉस का कारण, तो डॉक्टर कोलेलिनेस्टरेज (Cholinesterase) इनहिबिटर शुरू करने की सलाह दे सकते हैं। यह आपकी मानसिक हालत और मेमोरी लॉस (Memory loss)की प्रॉब्ल्म में सुधार ला सकत हैं। इसके अलावा बाकी का मेडिकेशन (Medication) इस बात पर निर्भर करता है कि आपको मेमोरी लॉस किस स्टेज की है और उसके होने के कारण पर।

इसके अलावा अपने खानपान में ऐसे फूड को शामिल करें, जैसे कि हर पत्तेदार सब्जियां (Leafy Vegetable), दूध, दही, विटामिन (Vitamin) वाले फूड। इसके अलावा, ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले फूड को भी डायट (Diet) में शामिल करना जरूरी है। नट़स में अखरोट (Nuts) का सेवन जरूर करें। इस बीमारी के इलाज में आपकी डायट की भी अहम भूमिका है।

आपको डायबिटीज और मेमोरी लॉस के बीच के संबंध समझ में आ गया होगा शायद। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर बार मेमोरी लॉस का कारण डायबिटीज की समस्या हो, और भी बहुत से कारण हो सकते है, जैसे कि ब्रेन टयूमर (Brain Tumor), कोई चोट या एक्सिडेट या कोई हादसा होने पर। इसका कारण कोई क्रॉनिक डिजीज भी हो सकती है। कई बार हैवी डोज की दवाइयों के कारण भी लोगों को मेमोरी लॉस की शिकायत हो जाती है। इस तहर के कोई भी लक्षण दिखने पर आपको देर नहीं करनी चाहिए, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से मिलें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Niharika Jaiswal द्वारा लिखित
अपडेटेड 4 weeks ago
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