HLHS: हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम क्या है? जानिए HLHS के लक्षण, कारण और इलाज

    HLHS: हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम क्या है? जानिए HLHS के लक्षण, कारण और इलाज

    जन्म के बाद शारीरिक अंगों का विकास होता है और शरीर के काम करने के तरीकों में भी बदलाव आता है। हालांकि अगर आप गौर करें, तो मुनष्य का हृदय हमेशा एक तरह से ही काम करता है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार स्वस्थ्य व्यक्ति का हृदय प्रतिमिनट 60 से 100 बार धड़कता है। अगर धड़कन की गति सामान्य से कम या ज्यादा हुई तो दिल से जुड़ी समस्या दस्तक दे सकती है। वहीं कुछ ऐसी भी हृदय संबंधी समस्या है, हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम (Hypoplastic left heart syndrome)। हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम जन्म से होने वाली बीमारी है, इसलिए इसे जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) की श्रेणी में रखा गया है। ऐसी ही एक बीमारी है हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम (Hypoplastic left heart syndrome)। आज इस आर्टिकल में हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारी आपके साथ शेयर करेंगे और समझेंगे कि कैसे हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम से बचा जा सकता है।

    • हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम क्या है?
    • हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं?
    • हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम के कारण क्या हैं?
    • HLHS का निदान कैसे किया जाता है?
    • HLHS का इलाज क्या है?

    चलिए अब हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम (HLHS) से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं।

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    हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम (Hypoplastic left heart syndrome)

    हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम (Hypoplastic left heart syndrome)

    हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम हृदय के बाईं ओर होने वाली समस्या है। अगर हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम को आसान शब्दों में समझें, तो इस सिंड्रोम में हृदय का बायां हिस्सा ठीक तरह से विकसित नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में हृदय का बायां हिस्सा ब्लड पंप करने में सक्षम नहीं हो पाता है और हृदय का दाहिना हिस्सा ब्लड पंप कर
    फेफड़ें एवं शरीर के अन्य हिस्सों में ब्लड पहुंचाने का काम करता है। कई बार शिशु के जन्म के बाद हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम की समस्या से बचाव के लिए सर्जरी भी की जा सकती है। इसलिए इसे क्रिटिकल कॉनजेनाइटल हार्ट डिफेक्ट भी कहा जाता है। HLHS के लिए ओपन हार्ट सर्जरी या हार्ट ट्रांसप्लांट शिशु के जन्म के बाद जल्द से जल्द किया जा सकता है।

    सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Center for Disease Control and Prevention) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार यूनाइटेड स्टेट्स में हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम की समस्या से जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या 4,344 है।

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    हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Hypoplastic left heart syndrome)

    कॉनजेनाइटल हार्ट डिफेक्ट शिशु को गर्भावस्था (Pregnancy) से ही शुरू हो जाती है। इसलिए जन्म के बाद ही इसके लक्षण देखे जा सकते हैं, जो इस प्रकार हैं-

    • शिशु की त्वचा, होठों और नाखूनों का रंग नीला होना।
    • भूख नहीं (Lack of appetite) लगना।
    • बच्चे का सुस्त (Drowsiness) रहना।
    • डायलेटेड प्यूपिल्स (Dilated pupils) यानी आंखों का रिएक्ट नहीं करना।
    • शरीर का पीला (Paleness) पड़ना।
    • अत्यधिक पसीना (Sweaty skin) आना
    • त्वचा पर धब्बा (Mottled skin) नजर आना।
    • तेजी से सांस (Rapid breathing) लेना।
    • हार्ट रेट (Increased heart rate) बढ़ना।
    • हाथ एवं पैरों का ठंडा (Cold hands and feet) रहना।
    • पल्स (Weak pulse) कमजोर पड़ना।

    इन लक्षणों को आसानी से देखा या समझा जा सकता है। इसलिए कुछ केसेस में डॉक्टर शिशु की सेहत को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द सर्जरी (Surgery) का विकल्प चुन सकते हैं। HLHS एक जन्मजात दोष (Congenital Heart Disease) है और पीछे कई कारण भी हैं, जिनके बारे में आगे समझेंगे।

    हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम के कारण (Cause of Hypoplastic left heart syndrome)

    HLHS के मुख्य कारणों की जानकारी तो नहीं है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि परिवार में किसी बच्चे को इस सिंड्रोम की समस्या हुई है तो जन्म लेने वाले अन्य शिशुओं में भी हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम की समस्या हो सकती है। इसके अलावा ऐसा भी माना जाता है कि शिशु में जीन्स (Genes) या क्रोमोसोम (Chromosome) में होने वाले बदलाव की वजह से भी हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम (Hypoplastic left heart syndrome) का खतरा बना रहता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम की समस्या से बचा नहीं जा सकता है। इसके लिए डॉक्टर डायग्नोसिस करते हैं और फिर रिपोर्ट के अनुसार इलाज शुरू करते हैं। वैसे इनसबके बीच पेरेंट्स या परिवार के सदस्यों को डॉक्टर द्वारा बताये गए निर्देशों का पालन करना चाहिए और समय-समय पर संपर्क करना चाहिए।

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    HLHS का निदान (Diagnosis of Hypoplastic left heart syndrome)

    HLHS शिशु को जन्म के पहले से ही वाली बीमारी है। इसलिए डायग्नोसिस की प्रक्रिया शिशु के जन्म से पहले और जन्म के बाद भी जा सकती है।

    • शिशु के जन्म से पहले- गर्भावस्था के दूसरी तिमाही के दौरान किये जाने वाले अल्ट्रासाउंड में हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम की जांच की जाती है।
    • शिशु के जन्म के बाद- हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम के लक्षण अगर शिशु के जन्म के बाद नजर आते हैं, तो ऐसी स्थिति में इकोकार्डियोग्राम की सहायता से शिशु के हार्ट वॉल्व के असमान होने की जानकारी मिलती है। वहीं शिशु के चेस्ट की एक्स-रे (Chest X-Ray) एवं हार्ट एमआरआई (Heart MRI) भी की जा सकती है।

    टेस्ट रिपोर्ट्स एवं शिशु के हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखते हुए HLHS (हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम) के इलाज की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

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    HLHS का इलाज (Treatment for Hypoplastic left heart syndrome) क्या है?

    हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम (HLHS) का इलाज मेडिसिन, न्यूट्रिशन एवं सर्जरी के माध्यम से किया जाता है।

    • मेडिसिन (Medicine)- कुछ नवजात शिशुओं के हार्ट मसल्स को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए एवं हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) को कम करने के लिए मेडिसिन प्रिस्क्राइब की जा सकती है।
    • न्यूट्रिशन (Nutrition)- हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम (HLHS) की समस्या से पीड़ित शिशु या बच्चे फीडिंग के दौरान थक जाते हैं और ऐसे में उन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है। इसलिए HLHS से पीड़ित बच्चों को आहार में कैलोरी की मात्रा ज्यादा देने की सलाह दी जाती है और फीडिंग के लिए फीडिंग ट्यूब का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
    • सर्जरी (Surgery)- हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम की समस्या से पीड़ित कुछ शिशुओं में ब्लड फ्लो बेहतर बनाने के लिए सर्जरी की मदद ली जा सकती है।

    नोट: अगर आपके परिवार में पहले से हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम की समस्या से पीड़ित बच्चों का जन्म हो चुका है, तो ऐसे में प्रेग्नेंसी के शुरुआत से ही अपने गायनोकोलॉजिस्ट की इसकी जानकारी जरूर दें।

    हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम की समस्या होने पर पेरेंट्स को परेशान ना हों और डॉक्टर द्वारा दिए गए सलाह का पालन करें। अगर आप हायपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम से जुड़े किसी भी सवालों का जवाब जानने के लिए आप हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं हमारे हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों का जवाब जल्द से जल्द देने की कोशिश करेंगें।

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    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 21/12/2021 को
    Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड