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क्या सुरक्षा के लिए कॉन्डम की तरह जरूरी हो जाएगा मास्क का इस्तेमाल भी ?

क्या सुरक्षा के लिए कॉन्डम की तरह जरूरी हो जाएगा मास्क का इस्तेमाल भी ?

दुनियाभर में रोजाना हजारों लोग कोरोना वायरस से संक्रमित होते जा रहे हैं, हजारों लोग अपनी जान गंवाते जा रहे हैं, हजारों वैज्ञानिक और शोधकर्ता कोविड-19 का इलाज खोजने में लगे हुए हैं। लेकिन, कहीं भी कुछ नहीं सही हो रहा है। विशेषज्ञों की SARS-CoV-2 इंफेक्शन को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं और उनका कहना है कि, हो सकता है आने वाले कुछ दिनों, महीनों या सालों के लिए दुनिया में मास्क का उपयोग कॉन्डम की तरह जरूरी हो जाए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि, आने वाले कुछ समय तक इस महामारी को नियंत्रित करने व इससे बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल कॉन्डम की तरह हर बार करना होगा। आइए, जानते हैं कि, इस कथन से वह कहना क्या चाहते हैं।

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कॉन्डम की तरह कैसे होगा मास्क का उपयोग

कॉन्डम का उपयोग मुख्य रूप से यौन संचारित रोगों और खासतौर से एचआईवी/एड्स से बचाव के लिए किया जाता है। इसी तरह कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क का उपयोग प्रभावशाली माना जा रहा है। लेकिन, विशेषज्ञों का मानना है कि, आने वाले कुछ समय में लोगों को इस खतरनाक संक्रमण से बचाव के लिए घर से बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल करना ही होगा, जैसा कि हर बार सेक्शुअल इंटरकोर्स के दौरान कॉन्डम का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि कोविड-19 संक्रमण उन लोगों के जरिए भी फैल रहा है, जिनमें इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, इन लोगों को असिंप्टोमेटिक पेशेंट (asymptomatic patient) कहा जाता है। इस स्थिति में लोगों को खुद नहीं पता होता कि, उनमें संक्रमण है और इस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मास्क जैसी जरूरी एहतियात पर ध्यान नहीं रखा जाता है।

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कोरोना वायरस के साथ जीने की आदत डाल लें- केजरीवाल

मुलुंद स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल की फिजिशियन एंड इंफेक्शियस डिजीज स्पेशलिस्ट और सीनियर कंसेल्टेंट, डॉ. अनिता मैथ्यू का कहना है कि, “आने वाले कुछ साल (एक या दो साल) के लिए मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाना एक नई सामान्य प्रक्रिया हो सकती है। आशंका है कि, हम कंम्युनिटी में कोविड-19 इंफेक्शन को इंफ्लुएंजा जैसी बीमारी की तरह देख सकते हैं, जो कि जल्द ही इस दुनिया से नहीं जाने वाली है। इसलिए हाइजीन, फिजीकल डिस्टेंसिंग, खांसने व छींकने के समय टिश्यू का इस्तेमाल और मास्क का उपयोग हमें जीने के तरीके में शामिल कर लेना चाहिए।” वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक प्राइवेट न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि, ‘यह वायरस जल्द ही कहीं जाने वाला नहीं है। यह अभी यहीं रहेगा, हमारे बीच, जबतक कि इसका इलाज नहीं मिल जाता और हम सभी लोगों को इसके साथ जीने की आदत डाल लेनी चाहिए।’

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वायरस को फैलने से रोकने के लिए मास्क का उपयोग क्यों जरूरी है?

कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलते समय उनके मुंह व नाक से निकलने वाली ड्रॉप्लेट्स के जरिए फैलता है, इसलिए विशेषज्ञों के मुताबिक इसे रोकने के लिए मास्क का उपयोग काफी जरूरी है, ताकि यह वायरस दूसरे व्यक्ति तक न पहुंच पाए। लेकिन, पहले सिर्फ संक्रमण के लक्षण दिखने वाले लोगों या उनकी देखरेख व इलाज करने वाले लोगों को ही मास्क का उपयोग करने की सलाह दी गई थी। लेकिन, जब यह पता चला कि यह वायरस असिंप्टोमेटिक पेशेंट्स के जरिए भी फैलता है, तो मरीजों को पहचानना में कठिनाई का सामना करना पड़ा। इसलिए, स्वास्थ्य संगठनों की तरफ से सभी लोगों के लिए मास्क का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया।

कोविड-19 और एचआईवी/एड्स में क्यों बताई जा रही है समानता?

कॉन्डम और मास्क का उपयोग के बीच संबंध के बारे में जानने के लिए आपको कोविड-19 और एचआईवी/एड्स के बीच की समानता को जानना चाहिए। क्योंकि, मास्क और कॉन्डम इन्हीं बीमारियों से बचाव करने का एक तरीका है। एचआईवी का पहला मामला 1960 के आसपास दर्ज किया गया था, जिसके बाद इस वायरस का इलाज ढूंढने के लिए कई प्रयास किए गए और किए जा रहे हैं। लेकिन, 21वीं शताब्दी के दूसरे दशक तक इसका कोई इलाज नहीं मिल पाया है। इस वजह से 1985 के करीब विशेषज्ञों ने इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए कॉन्डम के इस्तेमाल के प्रति जागरुकता फैलाने का सुझाव दिया, जो कि काफी प्रभावशाली साबित हुआ। ठीक इसी तरह, कई प्रयासों के बाद भी कोविड-19 का इलाज नहीं मिल पा रहा है और इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए मास्क ही एकमात्र रास्ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में कॉन्डम की तरह मास्क का उपयोग करने के लिए जागरुकता कैंपेन चलाने का सुझाव दिया जा सकता है।

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मास्क को इस्तेमाल करने के लिए उससे जुड़ी सावधानियां

भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, मास्क का उपयोग करने के साथ आपको कुछ सावधानियों के बारे में भी ध्यान रखना चाहिए। जैसे, आपको डिस्पोजेबल मास्क को सिर्फ एक बार पहनना है और उसे पहनने के बाद हाथों को चेहरे पर नहीं लगाना है और मास्क को उतारने से पहले हाथों को सैनिटाइज करें और उतारने के बाद फिर से सैनिटाइज करें। लेकिन, डॉक्टर, कोविड-19 संक्रमित मरीज की देखभाल करने वाले लोगों के लिए मास्क की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए लोगों को घर में बने मास्क का उपयोग करने की सलाह दी गई है। जिन्हें साफ करने के लिए निम्नलिखित तरीके इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

  • मास्क को गर्म पानी और साबुन से धोकर साफ करें और 4 से 5 घंटे के लिए धूप में डाल दें।
  • अगर आपके घर में धूप नहीं आती, तो मास्क को गर्म पानी में नमक डालकर 15 मिनट तक उबलने दें और फिर किसी साफ जगह सूखा दें।
  • अगर आपके पास गर्म पानी उपलब्ध नहीं है, तो मास्क को सिर्फ साबुन और पानी से अच्छी तरह धोया जा सकता है। इसके बाद इसे इस्त्री से प्रेस कर लें। इससे भी मास्क से सभी तरह के कीटाणु मारे जा सकते हैं।

देश से कोरोना वायरस की महामारी को खत्म करने के लिए आप सभी को लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही मास्क व पर्सनल हाइजीन जैसी सावधानियों का पालन करना चाहिए। इसके अलावा, सिर्फ सरकार या हेल्थ एक्सपर्ट द्वारा दी गई जानकारी पर ही विश्वास करें। हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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सूत्र

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Surender aggarwal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 05/05/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड