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भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 : कब जरूरी हो जाता है सरकार का कर्फ्यू लगाना और क्यों?

भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 : कब जरूरी हो जाता है सरकार का कर्फ्यू लगाना और क्यों?

वैश्विक स्तर पर खतरा बने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अब देश भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 (Epidemic Diseases Act, 1897) के तहत धारा-2 का सहारा ले रहा है। बता दें कि, यह पहली बार नहीं है कि कोई वायरस देश और दुनिया में पहली बार किसी महामारी के तौर पर फैल रहा हो। महामारी बने कोरोना वायरस से पहले 2009 में स्वाइन फ्लू को भी महामारी घोषित किया गया था। इससे पूर्व, 123 साल पहले 1897 में प्लेग को भी महामारी घोषित किया गया था। महामारी उन बीमारियों को घोषित किया जाता है, जिनके वायरस किसी व्यक्ति से अन्य व्यक्तियों में बहुत तेजी और खतरनाक रूप से फैलते हैं। ऐसे में सरकार को इनकी रोकथाम के लिए कुछ खास फैसले लेने पड़ते हैं। आपको बताते चले कि भारत में कोरोना महामारी के कारण 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की जा चुकी है।

जानिए 123 साल पहले बने भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 के बारे में

भारतीय महामारी रोग अधिनियम साल 1897 में जारी किया गया है। उस दौरान वैश्विक स्तर पर देश में प्लेग का प्रकोप फैला हुआ है। प्लेग एक महामारी है जिसके कारण लाखों लोगों की जानें गई थीं। प्लेग के बाद भारत सरकार ने स्वाइन फ्लू, हैजा, मलेरिया और डेंगू जैसे विभिन्न बीमारियों की रोकथाम के लिए भी ऐतिहासिक रूप से भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 का इस्तेमाल किया। बता दें कि, महामारी रोग अधिनियम अंग्रेजों द्वारा बनाया गया है। जिसे बिना किसी बदलाव के भारत सरकार भी लागू करती है।

भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 को चार सेक्शन में बांटा गया है।

सेक्शन-1

जब सरकार को इस बात की पुष्टि हो जाती है कि किसी बीमारी के रोकथाम और उपचार के लिए सभी प्रयास असफल हो रहे हैं और यह एक महामारी का रूप ले रहा है, तो सरकार सेक्शन-1 के तहत किसी व्यक्ति या किसी खास वर्ग के व्यक्ति को पब्लिक नोटिस जारी करके रोकथाम या बचाव करने के जरूरी निर्देश जारी करने की शक्ति प्रदान करता है।

सेक्शन-2

सेक्शन-2 के तहत सरकार को रोकथाम करने के लिए जरूरी उपाय करने की पूरी शक्ति प्रदान होती। इसके तरह केंद्र सरकार अपने संदेह पर किसी भी व्यक्ति की जांच-पड़ताल, संक्रमित व्यक्ति का उपचार, यात्रा पर प्रतिबंध, प्रवास या परिवार से पीड़ित को अलग रखने संबंधी जैसे कदम उठा सकती है।

सेक्शन-3

सेक्शन-3 के तहत भारतीय महामारी रोग अधिनियन का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ जुर्माना या आईपीसी, 1860 की धारा 188 के तहत उसे दंड दिया जा सकता है।

सेक्शन-4

सेक्शन-4 के तहत कानून लागू कराने वाले व्यक्ति को सरकार संरक्षण प्रदान करती है यानी उसके खिलाफ वाद दाखिल या कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

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कब लागू किया जाता है भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897?

केंद्र सरकार भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 कानून को उस वक्‍त लागू करती है जब उसे लगता है कि महामारी को रोकने के लिए उठाए जा रहे सभी अन्य कदम नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 का सहारा लेती है। भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 केंद्र सरकार की मर्जी और जरूरत के मुताबिक एक साथ पूरे देश या सिर्फ किसी राज्य या किसी एक छोटे क्षेत्र में लागू किया जा सकता है। भारतीय महामारी रोग अधिनियम के तहत सरकार के पास कुछ तरह के खास अधिकार होते हैं, जिनका वे इस्तेमाल इसे लागू करने के दौरान कर सकती हैं, जिसमें शामिल हैंः

  • सरकार रेलवे या किसी अन्य माध्यम से यात्रा करने वाले यात्रियों की जांच-पड़ताल कर सकती है।
  • किसी भी वायरस संदिग्ध व्यक्ति को कब्जे में ले सकती है या बल पूर्वक उसे अस्पताल में भर्ती भी कर सकती है।
  • इसके अलावा उचित निर्देश और सलाह के बाद भी अगर कोई व्यक्ति भारतीय महामारी रोग अधिनियम का उल्लंघन करता है, तो केंद्र सरकार उसे हिरासत में लेने का भी अधिकार रखती है। ऐसा करने पर व्यक्ति पर आईपीसी की धारा 188 के तहत एक अपराध का केस दायर किया जा सकता है।

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क्यों जरूरी है भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 लागू करना?

महामारी बन चुके कोरोना वायरस की बात करें, तो यह चीन से पूरी दुनिया में फैला है। चीन से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित करने में कोरोना वायरस ने 6 माह से भी काफी कम का समय लिया है। भारत की बात करें, तो देश की राजधानी दिल्ली समेत आर्थिक राजधानी मुंबई में भी कोरोना बाहरी देशों से आए लोगों की वजन से ही फैला है। हालांकि, इसका मुद्दा गंभीर होते ही सभी राज्य सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर लोगों को जरूरी सूचनाएं जारी कर दी थी। जिसे अनदेखा करने के कारण ही इस समस्या को बढ़ावा दिया गया है। ऐसे में अब केंद्र सरकार को लगता है कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 का लागू करना ही सबसे आखिरी विकल्प है। इस भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 के लागू होने से सरकार इस महामारी को फैलने में काफी आसानी से कंट्रोल कर सकती है।

स्‍पेन की मंत्री और ब्रिटेन की स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री भी कोरोना वायरस से संक्रमित

हाल ही में, स्‍पेन की मंत्री और ब्रिटेन की स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री में कोरोना वायरस पाए गए हैं। इसके अलावा कनाडा के प्रधानमंत्री की पत्‍नी में भी कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए हैं।

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महामारी क्या होती है?

महामारी बीमारी की उस अवस्था को कहा जाता है जब कोई बीमारी बड़ी तेजी से एक भोगौलिक क्षेत्र से होते हुए किसी दूसरे फिर तीसरे और बहुत ही कम समय कई सारे क्षेत्रों में विस्‍तार करने लगता है। बात दें कि, भारत में महामारी को अन्य विश्वास से भी जोड़ कर देखा जाता है। लेकिन अन्य देशों की बात करें, तो महामारी कोरोना वायरस से पीडि़त टॉप-10 देशों में भारत की स्थिति काफी बेहतर है। विश्वव स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 114 देशों में 1,18,000 कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामले पाए गए हैं। जिनमें से 90 फीसदी से अधिक मामले सिर्फ चार देशों में ही पाए गए हैं। वहीं, 81 देशों में कोविड-19 यानी कोरोना वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आया है और 57 देशों में 10 या उससे कम कोरोना वायरस के मामले सामने आए हैं।

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महामारी कोरोना वायरस से पीडि़त टॉप-10 देशों के नाम

  • चीन
  • इटली
  • ईरान
  • रिपब्लिक ऑफ कोरिया
  • फ्रांस
  • स्‍पेन
  • जर्मनी
  • यूएसए
  • स्विट्जरलैंड
  • जापान

हाल ही में भारत में उपयोग हुआ भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897

  • साल 2018 में गुजरात के एक गांव में फैले हैजा की रोकथाम के लिए भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 को लागू किया गया था।
  • इससे पहले साल 2015 में चंडीगढ़ में डेंगू और मलेरिया पर काबू करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य में भारतीय महामारी रोग अधिनियम लागू किया था।
  • इससे पहले, साल 2009 में पुणे में स्वाइन फ्लू को नियंत्रित करने के लिए भी सरकार ने इसी एक्ट को लागू किया था।

हालांकि, जहां कुछ विशेषज्ञ इस एक्ट को अपना समर्थन देते हैं, वहीं बहुत से लोग इस एक्ट के खिलाफ भी हो सकते हैं। लेकिन, ध्यान रखें कि कोरोना वायरस से भी पहले देश में पहले महामारी की स्थितियों को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने भारतीय महामारी रोग अधिनियम 1897 का ही सहारा लिया था। जिसे सफल माना गया है।

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सूत्र

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Ankita mishra द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 25/06/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड