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कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन एज्युकेशन का बच्चों की सेहत पर क्या असर हो रहा है?

कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन एज्युकेशन का बच्चों की सेहत पर क्या असर हो रहा है?

कोविड-19 की वजह से पूरी दुनिया और भारत में मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन की प्रक्रिया अब तक जारी है और इस लॉकडाउन ने स्कूल-कॉलेजों में पढ़ रहे करोड़ों बच्चों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। लॉकडाउन के कुछ महीनों बाद जब यह लगने लगा कि कोरोना वायरस इतनी जल्दी जाने वाला नहीं है तो स्कूलों ने बच्चों के लिए ऑनलाइन एज्युकेशन शुरू कर दिया। शहरों में अधिकांश स्कूल-कॉलेज ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं, लेकिन क्या इससे क्लासरूम पढ़ाई की भरपाई की जा सकती है? क्या यह बच्चों की सेहत के लिए ठीक है? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब जानते हैं इस आर्टिकल में।

कोरोना वायरस की वजह से सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के करोड़ों बच्चे घर बैठकर पढ़ने पर मजूबर हो गए हैं, क्योंकि इस महामारी के दौर में स्कूल-कॉलेज खोलना खतरे से खाली नहीं है, इसलिए बच्चों को ऑनलाइन एज्युकेशन शुरू किया गया। आज के समय में यह मजबूरी है क्योंकि स्कूल-कॉलेज कब तक बंद रहेंगे किसी को पता नहीं है ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का बहुत नुकसान हो रहा था, इसलिए बच्चों के लिए ऑनलाइन एज्युकेशन लगभग हर स्कूल-कॉलेज ने शुरू कर दिया है, लेकिन क्या यह क्लासरूम की पढ़ाई का विकल्प हो सकता है। जहां तक बच्चों के पैरेंट्स का सवाल है तो अधिकतर पैरेंट्स इसे सिरदर्द मानते हैं। 8 साल की बेटी की मां मोनिका का कहना है, “मैंने बेटी को लैपटॉप दिया और हमारे घर पर वाईफाई भी है, फिर भी कई बार नेटवर्क इश्यू के कारण पढ़ाई मुश्किल हो जाती है। कभी टीचर की आवाज़ तो कभी वीडियो क्लियर नहीं दिखता है जिससे बेटी स्क्रीन पर और नज़रें गड़ा लेती है। उसे पहले से ही चश्मा लगा है और ऑनलाइन क्लास शुरू होने के बाद से अक्सर सिरदर्द की शिकायत होने लगी है। बच्चों को समझने में भी दिक्कत आ रही है।’’

दसवीं में पढ़ने वाले प्रियांशु की मां भी ऑनलाइन एज्युकेशन को सही नहीं मानती, लेकिन उनका कहना है कि फिलहाल हमारे पास कोई विकल्प भी तो नहीं है। उनके मुताबिक, “स्कूलों की ऑनलाइन शिक्षा खानापूर्ति से ज़्यादा कुछ नहीं है, बच्चों को पढ़ाया जरूर जा रहा है, लेकिन उससे कुछ फायदा होता दिख नहीं रहा। एक साथ कई बच्चे होते हैं और सब एक साथ टीचर से सवाल करने लगते हैं, तो टीचर उनके डाउट क्लियर नहीं कर पाती है। बच्चे कुछ सीख भी नहीं पा रहे हैं।”

यह सच है कि ऑनलाइन एज्युकेशन के फायदे से ज़्यादा नुकासन हैं खासतौर पर बच्चों के लिए। जहां तक युवाओं का सवाल है तो उनके लिए यह ज़रूर फायदेमंद हो सकता है क्योंकि वह नौकरी के साथ ही ऑनलाइन कोर्स करके कुछ नया सीख सकते हैं।

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बच्चों के लिए ऑनलाइन एज्युकेशन के फायदे

कोविड-19 ने बच्चों के लिए ऑनलाइन एज्युकेशन की अहमियत को बहुत बढ़ा दिया है। ऐसे में इसे पूरी तरह से नकारा भी नहीं जा सकता। ऑनलाइन शिक्षा के बहुत फायदे भी हैं।

घर बैठे होती है पढ़ाई- सुबह जल्दी उठकर स्कूल-कॉलेज जाने की जरूरत नहीं होती। आराम से घर के बिस्तर और चेयर पर बैठकर ही बच्चे पढ़ाई कर सकते हैं। कुछ डाउट होने पर पूरे दिन में कभी भी टीचर से चैट के जरिए बात कर सकते हैं।

नौकरी और पढ़ाई- जो युवा नौकरी के साथ ही पढ़ाई करना चाहते हैं, उनके लिए तो ऑनलाइन एज्युकेशन बेस्ट ऑप्शन है, क्योंकि उन्हें कॉलेज जाने की ज़रूरत ही नहीं होती तो वह आराम से नौकरी और पढ़ाई कर सकते हैं।

सोशल डिस्टेंसिंग– आज के समय में जब पूरी दुनिया सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने की सलाह दे रही है, ऐसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए ऑनलाइन तरीका ही बेहतर है, क्योंकि क्लासरूम में बहुत ज्यादा सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रख पाना संभव नहीं होता है।

बच्चे बिज़ी रहते हैं- कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लंबा चलने वाला है ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा की वजह से बच्चों को पढ़ाई का ज्यादा नुकसान नहीं होगा।

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बच्चों के लिए ऑनलाइन एज्युकेशन के नुकासन

भले ही बच्चों के लिए ऑनलाइन एज्युकेशन आज समय की ज़रूरत है, लेकिन इससे होने वाले नुकसान से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। बच्चों और युवाओं पर इसके बहुत नकारात्मक असर होता है।

आंखों पर असर- ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से बच्चों का स्क्रीन टाइम बहुत बढ़ गया है जिससे सिरदर्द, आंखों में जलन आदि की परेशानी बढ़ गई है। बहुत ज़्यादा देर तक स्क्रीन देखने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्कीन ज्यादा देखने से आंखों का पानी सूख सकता है जिससे बच्चों की आंखें कमजोर हो सकती है।

लगातार बैठे रहने से समस्या- विशेषज्ञों के मुताबिक, लगाकार लंबे समय तक बैठे रहने से बच्चों की लंबाई पर भी असर पड़ता है। साथ ही उनकी गर्दन और कमर में दर्द भी होने लगता है, इससे रीढ़ की हड्डी में भी समस्या आने लगती है।

चिड़चिड़ापन- आजकल बच्चों का बाहर खेलना वैसे ही बंद ऐसे में बहुत देर तक लैपटॉप, मोबाइल पर पढ़ाई करते रहने से उन्हें थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है, जिससे वह चिड़चिड़े और आलसी हो जाते हैं।

सोशल आइसोलेशन – क्योंकि इसमें आमने-सामने टीचर और बाकी बच्चों के साथ बातचीत नहीं हो पाती, ऐसे में लंबे समय तक ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों की कम्यूनिकेशन स्किल भी बहुत खराब हो जाती है। बहुत ज़्यादा इंटरेक्शन न होने की वजह से सोशल आइसोलेशन की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। सोशल आइसोलेशन तनाव और एंग्जाइटी को जन्म देता है।

नहीं रहते एनर्जेटिक- स्कूल से आने के बाद बच्चों के जो ऊर्जा और उत्साह दिखता था, वह ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान नहीं दिखता है। बच्चों को इससे बोरियत होने लगती है और फिर इसका उनकी सेहत पर असर पड़ता है।

ऑनलाइन एज्युकेशन के लिए ज़रूरी है इन बातों का ध्यान रखना

  • पैरेंट्स को बच्चे के बैठने के तरीके पर ध्यान देना चाहिए और बैठने की ऐसी व्यवस्था करें ताकि वह अपनी पीठ सीधी रखकर आराम से बैठ सकें।
  • बीच-बीच में थोड़ा उठकर चलने के लिए कहें।
  • ध्यान दें कि पढ़ाई के बीच में बच्चे सोशल मीडिया या गेम तो नहीं खेल रहें।
  • जो होमवर्क दिया जाता है उसे ऑनलाइन कराने की बजाय नोटबुक में लिखकर करवाएं।
  • स्कूल और कॉलेजों को भी इस तरह शेड्यूल बनाना चाहिए कि एक क्लास 30 मिनट या 45 मिनट से ज़्यादा की न हो और बीच में ब्रेक देना चाहिए।

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Kanchan Singh द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 15/08/2020 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड