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साइनस में डायट: क्या खाएं और क्या नहीं, जरूरी है इन चीजों से परहेज

साइनस में डायट: क्या खाएं और क्या नहीं, जरूरी है इन चीजों से परहेज

जिनको साइनस (Sinus) या साइनोसाइटिस (Sinusitis) की समस्या होती है, उनके लिए मौसम का बदलना बीमारी को नींद से जगाने की तरह होता है। साइनस की बीमारी दो तरह की होती हैं- एक्यूट साइनोसाइटिस (Acute sinusitis) और क्रॉनिक साइनोसाइटिस (Chronic sinusitis)। एक्यूट साइनस में इसके लक्षण लगभग चार हफ्ते तक रहते हैं, जबकि क्रॉनिक साइनस के लक्षण तीन महीने से भी ज्यादा समय तक रह सकते हैं। डॉक्टर आम तौर पर इसके लक्षणों से राहत पाने के लिए पेरासिटामोल जैसे पेनकिलर या एंटीहिस्टामाइन नेजल स्प्रे देते हैं। इसके अलावा इंफेक्शन को कम करने के लिए एंटीबायोटिक्स भी देते हैं, लेकिन ये सारी दवाएं प्राथमिक रूप से आराम तो देती हैं, पर लंबे समय के लिए नहीं दे पाती हैं। सिर्फ दवा लेने से इस बीमारी से राहत नहीं मिल सकती है। इसके लिए साइनस में डायट (Diet for Sinus) का ध्यान रखना जरूरी होता है।

साइनस में डायट- sinus diet

अक्सर हम न जानते हुए भी, कुछ ऐसा खा-पी लेते हैं, जो इस बीमारी को और ज्यादा खराब हालत में ले जाते हैं। इसलिए साइनोसाइटिस से राहत पाने के लिए दवाओं के अलावा साइनस में क्या खाना चाहिए (साइनस में डायट) और क्या नहीं, यह जानना भी जरूरी है। साइनस में डायट (Sinus diet) के बारे में जानने के पहले साइनोसाइटिस बीमारी के बारे में थोड़ी-सी जानकारी ले लेते हैं। साइनोसाइटिस बीमारी असल में पैरानैसल साइनस (Paranasal sinuses) में होनेवाली सूजन के कारण होता है। साइनस का मेडिकल टर्म होता है ‘राइनो-साइनोसाइटिस’ (Rhinosinusitis), क्योंकि यह नाक और साइनस दोनों के म्यूकस मेमब्रेन के लाइनिंग को प्रभावित करता है।

पैरानैसल साइनस, एयरवेज का ऊपर वाला भाग होता है, जो नैजल कैविटी से संबंधित होता है। साइनस संक्रमण के कारण होता है, जिसमें साइनस में ब्लॉकेज हो जाता है। जिनकी साइनस की बीमारी क्रॉनिक होती हैं, उनके मामले में म्यूकस मेमब्रेन बढ़ जाता है, जिसको नैजल पॉलिप कहा जाता है। इसके कारण सांस लेने में समस्या, सिरदर्द, महक लेने में परेशानी आदि समस्याएं होती हैं।

और पढ़ें : साइनस से राहत पाने के लिए किन घरेलू उपायों को कर सकते हैं ट्राय?

साइनोसाइटिस के लक्षण (Symptoms of Sinusitis)

साइनस के आम लक्षण कुछ इस प्रकार के होते हैं-

साइनस होने पर नैजल पैसेज में सूजन और फ्लूइड बनने के कारण वह ब्लॉक हो जाता है। इसके कारण सांस लेने में समस्या होती है और नाक हमेशा बंद रहती है। अगर नाक से पीला या हरा रंग जैसा फ्लूइड डिस्चार्ज हो रहा है, तो वह जर्म के मौजूद होने का संकेत होता है। साइनस के कारण अक्सर सिर में दर्द होने के साथ-साथ जबड़ा और आंख के आस-पास की जगह में दर्द जैसा महसूस होता रहता है। कभी-कभी तो दांत तक में दर्द होता है। जब आप सोकर उठते हैं, तो यह दर्द (Pain) और नाक बंद जैसा एहसास बहुत कष्टदायक हो जाता है। इसके अलावा सांस लेने की क्षमता भी बहुत प्रभावित होती है।

और पढ़ें : बच्चों में साइनसाइटिस का कारण: ऐसे पहचाने इसके लक्षण

साइनोसाइटिस का कारण (Cause of Sinusitis)

आम तौर पर एक्यूट साइनोसाइटिस कोल्ड या फ्लू (Flu) के कारण होता है। सर्दी तो सामान्य रूप से रेस्पिरेटरी वायरस या बैक्टिरीया के कारण होती है, लेकिन इसके साथ वायरल इंफेक्शन भी हो सकता है। वायरस या बैक्टिरीया के कारण सूजन बढ़ जाती है, जिसके कारण म्यूकस मेमब्रेन में भी सूजन आ जाती है। ऐसी अवस्था में नाक से तरल पदार्थ निकलता है, जो बाद में पीला या हरा रंग का गाढ़ा पदार्थ बन जाता है। एलर्जी (Allergy) का असर नैजल पॉलीप्स पर भी पड़ता है, जिसके कारण इस अवस्था का असर इम्यून सिस्टम (Immune System) पर भी पड़ता है। इसी वजह से शारीरिक अवस्था बदतर हो जाती है।

साइनोसाइटिस का इलाज (Treatment of Sinusitis)

साइनस के दर्द से राहत दिलाने के लिए डॉक्टर लक्षण के आधार पर एंडोस्कोपी टेस्ट या अल्ट्रासाउन्ड आदि करते है। फिर एंटीहिस्टामाइन नेजल स्प्रे (Nasal spray), एंटीबायोटिक, पेनकिलर आदि दवा से अवस्था को संभालते हैं।

अब तक आप समझ ही गए होंगे कि साइनस को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस बीमारी का इलाज प्रथम अवस्था में ही करवा लेनी चाहिए एवं साथ ही खान-पान पर ध्यान रखना चाहिए। इससे बीमारी को क्रॉनिक अवस्था में जाने से रोका जा सकता है। इसलिए आगे हम साइनस में डायट के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे कि इस हालत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।

सबसे पहले बात करते हैं कि साइनस में क्या नहीं खाना चाहिए या किन चीजों से परहेज करना चाहिए-

और पढ़ें : Pilonidal Sinus Surgery : पिलोनिडल साइनस सर्जरी क्या है?

साइनस में डायट (Diet for Sinus) – किन चीजों से करें परहेज?

साइनस में डायट (Diet for Sinus)

साइनस में डायट फॉलो करें, नीचे बताये गए डायट को फॉलो या ध्यान रखें-

रिफाइन्ड कार्बोहाइड्रेड – साइनस में डायट में आलू और मैदा जैसे कार्बोहाइड्रेड का सेवन कम करें, इससे सूजन को कम करने में मदद मिलती है।

अतिरिक्त ओमेगा-6 फैटी एसिड – एक मिनट, आप गलती से इसे ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty acid) न समझ लें। ओमेगा-6 फैटी एसिड में सनफ्लावर, कॉर्न, बादाम तेल आदि आते हैं। इसके अलावा मेयोनीज और कई सलाद ड्रेसिंग को भी साइनस में डायट शामिल करने से परहेज करना चाहिए।

प्रोसेस्ड शुगर- क्या आप जानते हैं कि पेस्ट्री, सोडा, फ्रूट जूस, डेजर्ट, चॉकलेट बार आदि में कितना प्रोसेस्ड शुगर रहता है? ऐसे में इन चीजों का सेवन साइनस को बढ़ा सकता है।

मोनो सोडियम ग्लूटामेट- अगर आप फास्ट फूड खाने के आदि हैं, तो आज से ही अपने आहार में से इनको मायनस कर दें, क्योंकि इनके सेवन से साइनस की बीमारी हद से ज्यादा बढ़ सकती है।

ग्लूटन और केसीन– ये तत्व डेयरी प्रोडक्ट्स और सोयाबीन आदि में ये पाए जाते हैं। इनसे एलर्जी बढ़ने की संभावना रहती है।

नोट- ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी घरेलू उपचार, दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

और पढ़ें- साइनस (Sinus) को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं ये योगासन, जरूर करें ट्राई

साइनस में डायट (Sinus diet) – किन चीजों को करें शामिल?

अब तक हमने बात कि साइनस होने पर किन फूड्स (साइनस में डायट) से परहेज करनी चाहिए, चलिए अब जानते हैं कि क्या खाना इस हालत में अच्छा होता है।

ताजे फल और सब्जियां- इनका सेवन नियमित तौर पर करने से शरीर की इम्यूनिटी बढ़ने के साथ-साथ एनर्जी भी भरपूर मात्रा में मिलती है।

पानी- अचरज में न पड़े। पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है और कंजेस्शन होने की संभावना कुछ हद तक कम हो जाती है।

एप्पल साइडर विनेगर- सलाड ड्रेसिंग आदि में एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल करने से शरीर को पोटाशियम और मिनरल दोनों मिल जाएगा, जिससे म्यूकस का उत्पादन भी कम हो जाएगा।

अनानास- इस फल में ब्रोमेलिन प्रोटियोलिटिक एंजाइम होता है, जिसका एंटी-इफ्लामेटरी गुण कंजेस्शन को रोकने में मदद करता है।

हर्बल टी– क्या आपको पता है कि हर्बल टी पीने से शरीर का इम्यून सिस्टम बेहतर तरीके से काम करने लगता है। इसके कारण सूजन और म्यूकस का प्रोडक्शन भी कम होने लगता है। अदरक, कैमोमाइल, ग्राउंड आइवी या पेपरमिंट, म्यूकस या बलगम को नैचुरल तरीके से निकालने में मदद करते हैं।

ग्रीन टी- ग्रीन टी का सेवन करने से साइनस के कारण जो सिर दर्द होता है, उससे जल्दी आराम मिलने के साथ-साथ सर्दी और छींक की समस्या से भी आराम मिलता है।इसलिए साइनस में डायट फॉलो कर रहें हैं, तो ग्रीन टी का सेवन करें।

खट्टे फल या साइट्रस फ्रूट- संतरा, अंगूर और बेर विटामिन सी (Vitamin C) से भरपूर होते हैं, जो साइनस के लक्षणों से आराम दिलाने में सहायता करते हैं। इसके अलावा टमाटर, ब्रोकली ओर स्ट्रॉबेरी में भी विटामिन सी होता है।

विटामिन ए– इस विटामिन को मेमब्रेन कंडिशनर भी कहते हैं। यह छाती, सिर और गले के म्यूकस मेमब्रेन को हेल्दी रखने के साथ-साथ त्वचा और आंखों को स्वस्थ रखने में सहायता करता है। विटामिन ए (Vitamin A) मूल रूप से गाजर, स्क्वाश, पीली और लाल शिमला मिर्च, गहरे हरे रंग के सब्जियों, पत्तेदार सब्जियों आदि में बहुतायत मात्रा में पाया जाता है।

और पढ़ें : साइनस की परेशानी को आसानी से दूर करते हैं ये घरेलू नुस्खे

फैटी एसिड और एन्टीऑक्सिडेंट- जिन लोगों को एलर्जी के कारण साइनस की बीमारी ज्यादा होती है, उन लोगों को फैटी एसिड (Fatty acid) और एन्टीऑक्सिडेंट (Antioxidant) से भरपूर डायट लेनी चाहिए। इससे शरीर में हिस्टामाइन (Histamine) और ल्यूकोट्रिएनेस का उत्पादन ज्यादा होता है, जो इलाज में मदद करता है।

लहसुनयह तो जानी-मानी बात है कि लहसुन (Garlic) शरीर के इम्यून सिस्टम (Immune System) को मजबूत करता है, जिससे मरीज सर्दी-खांसी (Cold and cough) जैसे समस्याओं से लड़ पाता है।

मछली- यह तो आपको पता ही है कि मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 fatty acid) होता है, विशेष रूप से सालमन, सार्डिन और कॉड मछली में। इसलिए साइनस होने पर इन मछलियों को अपने आहार में शामिल करने की कोशिश करें।

इन खाद्द पदार्थों में मूल रूप से एंटीऑक्सिडेंट (Antioxidant), ओेमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 fatty acid) ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं, जो साइनस के कारण होनेवाली सूजन की समस्या से राहत दिलाने में बहुत सहायता करते हैं। साथ ही ये पूरे शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करके सेहतमंद रहने में मदद करते हैं। इसलिए कहते हैं, स्वस्थ आहार सेहत का द्वार। इनके अलावा ये भी ध्यान रखें कि ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी घरेलू उपचार, दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें और साइनस में डायट (Sinus diet) का ख्याल रखें और स्वस्थ रहें।

अपर रिस्पायरेटरी इंफेक्शन 3 D से जुड़ी जानकारी के लिए नीचे दिए इस मॉडल पर क्लिक करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Mousumi dutta द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 23/04/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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