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लोगों में हो रही हैं लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां, जानें इनसे बचने का तरीका

लोगों में हो रही हैं लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां, जानें इनसे बचने का तरीका

कोरोना के कारण पूरा देश लॉकडाउन के दौर से गुजर रहा है। कोरोना महामारी का दंश झेल रहा हर भारतवासी इस समय अपने घरों में बंद है। हर वीकेंड पर घूमने जाना, मजे करना, ऑफिस जाना और बस यूं ही तफरीह करने की आदत हम सभी की है। ऐसे में जब हम खुद को चार दीवारी से घिरे हुए देख रहे हैं तो अंदर से अजीब सी घुटन हो रही है। यही घुटन लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियों का कारण बन रही हैं। लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां और उनके साइड इफेक्ट्स निकल कर सामने आने लगे हैं।

वहीं, लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां उन लोगों में भी देखी जा रही है, जिन्हें होम क्वारंटाइन किया गया। क्योंकि जिन्हें होम क्वारंटाइन किया गया है उन्हें एक कमरे में अकेले रहने की सलाह दी गई है। ऐसे में होम क्वारंटाइन और लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां होना लाजमी है। इस दौरान देश के कई इलाकों से आई हुई खबरों से तो यही जान पड़ता है कि लोग लॉकडाउन को सहन नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में सर

कार भी सभी को आश्वासन दे रही है कि किसी भी हाल में घर में रहना है क्योंकि तभी कोरोना से जीता जा सकता है।

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लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां हो तो इस नंबर पर करें संपर्क

लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां कौन सी हैं, इस पर हम बाद में बात करेंगे। लेकिन इससे पहले आपको भारत सरकार द्वारा जारी किए गए हेल्प लाइन नंबर के बारे में बता दें। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (NIMHANS), बेंग्लुरू ने भारत सरकार के साथ मिलकर देश भर के लिए एक हेल्प लाइन नंबर जारी किया है। लॉकडाउन के कारण मानसिक समस्याएं होने पर आप टोल फ्री नंबर 08046110007 पर संपर्क करें। जब आप इस नंबर पर फोन करेंगे तो आपको हर संभव मदद मिलेगी, जिससे आप लॉकडाउन के कारण मानसिक समस्याएं डॉक्टर के साथ शेयर कर सकेंगे।

लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां बन रही मौत की वजह

लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां

लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां मौत का कारण बन रही हैं। अभी तक तो ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं कि कोरोना होने की आशंका होने पर होम क्वारंटाइन होने के डर से कई लोगों ने आत्महत्या तक कर ली।

  1. दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में एक कोरोना वायरस के मरीज ने 7वीं मंजिल से कूदकर सुसाइड कर लिया। उस व्यक्ति की उम्र महज 35 साल थी। उसे हॉस्पिटल में आइसोलेट किया गया था, जिस कारण से वह सुसाइड टेंडेसी का शिकार हो गया और सुसाइड कर लिया।
  2. कर्नाटक में एक 57 साल के शख्स ने सिर्फ इसलिए फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। क्योंकि उन्हें इस बात का शक था कि वो कोविड-19 का शिकार हो गए हैं। व्यक्ति ने एक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उसने “अपने परिवार के लोगों से माफी मांगी और कहा कि उन सभी को अपनी जांच करानी चाहिए। सुसाइड करने के वजह के रूप में उसने ये बात लिखी कि वह अकेलेपन सेकाफी डर गया है। इसलिए वह यह खौफनाक कदम उठा रहा है।”
  3. पंजाब के अमृतसर के रहने वाले एक बुजुर्ग शिक्षक दंपति ने बस इस लिए सुसाइड कर लिया कि वो लॉकडाउन के कारण तनाव में थे। गुरजिंदर कौर (पत्नी) और बलविंदर सिंह (पति) थे। उन्होंने मरने से पहले एक सुसाइड नोट में लिखा कि “हम कोरोना महामारी के कारण नहीं मरना चाहते हैं। हमें लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां हो रही है, जिससे हम तनाव में रहते हैं।”
  4. उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 38 साल के एक क्लर्क ने अपने ऑफिस में पंखे से लटक कर सुसाइड कर लिया। जब पुलिस ने लाश की तलाशी ली तो उसके पास से एक सुसाइड नोट मिला। जिसमें लिखा था कि “वो अपनी मर्जी से आत्महत्या कर रहे हैं। ऑफिस में काम करने के कारण उन्हें कोविड-19 होने का डर था। जिसके कारण उन्हें डिप्रेशन हो गया है और वह ये दर्दनाक कदम उठा रहे हैं, क्योंकि वे जी नहीं पा रहे हैं।”

ये तो सिर्फ चार मामले हैं, जबकि जाने अनजाने हम सब लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां होने के खतरे पर हैं। इसलिए हमें चेतना होगा और मानसिक समस्याओं से बचना होगा।

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लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां : जानें एक्सपर्ट की राय

वाराणसी के जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक राय से हैलो स्वास्थ्य ने बातचीत की। डॉ. अशोक राय ने बताया कि, ”इस वैश्विक महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है। अगर किसी को लॉकडाउन के कारण मानसिक समस्याएं हो रही हैं तो उसे खुद इस बात को समझना होगा और इसका हल निकालन होगा। लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां जैसे- डिप्रेशन, एंग्जायटी, टेंशन और सुसाइड टेंडेंसी हो रही है। अगर किसी को इनमें सो कोई भी समस्या होती है तो उन्हें सबसे पहले अपने परिवार से इस बारे में बात बतानी चाहिए। इसके अलावा परिवार की भी जिम्मेदारी बनती है कि अगर घर के किसी भी सदस्य के व्यवहार में किसी भी तरह का बदलाव देखने को मिलता है तो अपने डॉक्टर से तुरंत जरूर बात करे। कोशिश करें कि किसी मनोचिकित्सक से मिलें।”

लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां कौन सी हो सकती हैं?

लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां निम्न होती हैं :

डिप्रेशन

लॉकडाउन के कारण मानसिक समस्याओं में डिप्रेशन होना सबसे आम समस्या है। डिप्रेशन, जिन्हें मेजर डिप्रेसिव डिऑर्डर और क्लिनिकल डिप्रेशन के तौर पर भी जाना जाता है, वह मूड डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति लगातार उदास रहता है और उसका बाकी चीजों से दिल हटने लगता है। डिप्रेशन के कारण व्यक्ति के मन में सुसाइड करने तक के भी ख्याल आने लगते हैं। अगर आपको डिप्रेशन के लक्षण दिखें, तो अपने डॉक्टर का संपर्क करने में देरी न करें।

डिप्रेशन के लक्षण क्या हैं?

डिप्रेशन के लक्षण हर किसी में अलग-अलग हो सकते हैं। जैसे- बहुत ज्यादा सोना या फिर किसी को भूख न लगने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, डिप्रेशन के अन्य कई लक्षण हो सकते हैं :

  • किसी भी काम में ध्यान नहीं लगा पाना।
  • उदास रहना
  • अकेलापन महसूस करना।
  • ऐसा महसूस होना कि भविष्य अच्छा नहीं है।
  • बेचैनी महसूस होना।
  • सेक्स में इंट्रेस खोना।
    गंभीर डिप्रेशन में सुसाइड के विचार आते हैं।

ऊपर दिए गए कुछ लक्षण हो सकते हैं। अगर आप किसी लक्षण से परेशान हैं, तो आप अपने डॉक्टर का संपर्क करें।

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डिप्रेशन का इलाज क्या है?

डिप्रेशन के इलाज में दवाओं और इलेक्ट्रोकंवल्सिव थेरिपी (electroconvulsive therapy) का उपयोग किया जाता है। इस्तेमाल की जाने वालीं दवाएं एंटीडिप्रेसेंट हैं। कुछ और सामान्य दवाएं हैं जैसे एसिटालोप्राम (escitalopram), पैरोक्सेटीन (paroxetine), सेराट्रलीन (sertraline), फ्लुओक्सेटिन (fluoxetine) और सीटालोप्राम (citalopram)। ये सेलेक्टिव सेरोटोन रीपटेक इनहिबिटर (SSRI) हैं। वहीं, वेनलाफैक्सीन (venlafaxine), डुलोक्सेटीन (duloxetine) और बुप्रोपियन (bupropion) हैं।

साइकोथेरिपी भी डिप्रेशन के इलाज में मदद करती हैं। साइकोथेरिपी नए तरीकों को सोचने, बर्ताव करने और आदतों को बदलने में मदद करती है। यह थेरिपी आपको मुश्किल रिलेशनशिप या हालत को समझने में मदद कर सकती है। इस दवाओं के उपायोग से लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां नहीं होगी।

इलेक्ट्रोकंसल्सिव थेरिपी गंभीर डिप्रेशन के लिए होती है, जिसका इलाज करना बहुत मुश्किल है। ऐसे डिप्रेशन में दवा भी असर नहीं कर पातीं। इलेक्ट्रोकंसल्सिव थेरिपी (ECT) का उपयोग कभी-कभी किया जाता है। हालांकि, पहले ईसीटी को खराब माना जाता था, लेकिन इसमें काफी सुधार हुआ है और यह उन लोगों के लिए अच्छा है, जिनके लिए और कोई ट्रीटमेंट काम नहीं करता।

हालांकि, ईसीटी साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं, जैसे कन्फ्यूजन होना, याद्दाश्त कमजोर पड़ना आदि। हालांकि, ये इफेक्ट आमतौर पर कम समय के लिए होते हैं, लेकिन वे कभी-कभी तकलीफ देते हैं।

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सुसाइडल (suicidal) टेंडेंसी या आत्महत्या के विचार

जैसा कि हम पहले ही ऐसे कई मामले बता चुके हैं, जिसमें लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां होने पर लोगों ने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या या सुसाइडल टेंडेंसी (Suicidal Tendency) एक व्यक्तिगत निजी फैसला होता है। जिसकी वजह से लोग अपनी जान दे देते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण तनावपूर्ण जीवन होता है। अगर आपको किसी में भी सुसाइड के लक्षण दिखते हैं, तो आप उस व्यक्ति को सुसाइड करने से रोक सकते हैं। जब लोगों को लगता है कि उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है तो वे सुसाइड का फैसला कर सकते हैं। लेकिन ऐसी स्थितियों से निकलकर आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं और दोबारा अपने जीवन का आनंद ले सकते हैं।

सुसाइडल टेंडेंसी के लक्षण क्या हैं?

सुसाइडल टेंडेंसी के लक्षण निम्न हैं :

  • आत्महत्या के बारे में बात करना- उदाहरण के तौर पर, इस तरह की बातें करना “मैं खुद को मारने जा रहा हूं,” “काश मैं मर चुका होता” या “काश मैं पैदा ही नहीं हुआ होता”।
  • जानलेवा वस्तुएं खरीदना जैसे- बंदूक या तरह-तरह की दवाओं को इकट्ठा करना।
  • सामाजिक जीवन से दूरी बनाना, अकेले रहना।
  • मूड स्विंग होना, कभी बहुत ज्यादा भावनात्मक होना।
  • मरने की कोशिश करना।
  • किसी स्थिति में उलझना और निराश रहना।
  • बहुत ज्यादा शराब या दवाएं लेना।
  • खाने या सोने के पैटर्न सहित सामान्य दिनचर्या में बदलाव।
  • खुद के लिए जोखिम भरे या खतरनाक कदम उठाना, जैसे बहुत तेज वाहन चलाना।
  • लोगों से ऐसे अलविदा कहना जैसे फिर से उनसे मिलने वाले नहीं हो।
  • गंभीर तौर पर परेशान रहना, चिंता करना या अकेले में रहना

बता दें कि हर किसी व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों की इन स्थितियों के बारे में आसानी से पता लगाया जा सकता है, जबकि कुछ लोग अपनी स्थितियों के बारे में कोई बात नहीं करते हैं। वे आमतौर पर अपनी भावनाओं को सीक्रेट के तौर पर रखते हैं।

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आत्महत्या का इलाज क्या है?

व्यक्ति के आत्मघाती विचारों और व्यवहारों के अनुसार उसका इलाज किया जा सकता है। सुसाइड के ज्यादातर मामलों में, उपचार में टॉक थेरेपी और दवाएं शामिल हो सकती हैं।

टॉक थेरेपी

टॉक थेरेपी को मनोचिकित्सा के रूप में भी जाना जाता है। यह आत्महत्या करने के जोखिम को कम करने के लिए सबसे मददगार उपचार विधि होती है। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) (Cognitive behavioral therapy) टॉक थेरेपी का एक रूप है जो अक्सर उन लोगों के लिए उपयोग किया जाता है जो आत्महत्या के विचार रखते हैं। इस थेरेपी की मदद से यह सिखाया जाता है कि तनावपूर्ण जीवन की घटनाओं और भावनाओं को कैसे कम किया जा सकता है। सीबीटी नकारात्मक विचारों को सकारात्मक लोगों के साथ बदलने में भी मदद कर सकता है और आपके जीवन में संतुष्टि और नियंत्रण की भावना वापस ला सकता है।

मेडिकेशन

अगर टॉक थेरेपी इसके इलाज के लिए असफल होती है, तो दवाओं का सहारा लिया जा सकता है जो शारीरिक और मानसिक स्थिति को बदलने में मददगार हो सकती हैं। इस दौरान आपको निम्न दवाओं की सलाह दी जा सकती है और कोरोना के दौरान मानसिक बीमारियां दूर भगाई जा सकती हैं।

  • एंटीडिप्रेसन्ट
  • एंटीसाइकोटिक दवाएं
  • एंटी-एंग्जाइटी दवाएं

स्ट्रेस या तनाव

आइसोलेशन में तनाव कई लोगों की समस्या का कारण बन चुका है। फिलहाल कोरोना वायरस की दवा को लेकर भी तेजी से काम चल रहा है। लोगों के पास सिर्फ एक ही विकल्प है और वो है आइसोलेशन में रहना। घरों के अंदर रहकर ही लोग खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। आपको आइसोलेशन के दौरान स्ट्रेस न हो, उसके लिए आशावादी विचार बहुत जरूरी है। अगर आप नेगेटिव थॉट ही दिनभर सोचेंगे, तो आपकी तबियत खराब हो सकती है। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि किस तरह से आइसोलेशन के दौरान स्ट्रेस से बचा जा सकता है। अगर आप स्ट्रेस से बच गए तो आपको लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां नहीं होंगी।

तनाव के लक्षण क्या हैं?

तनाव के लक्षण कुछ डिप्रेशन के लक्षणों से मिलते-जुलते हैं। क्योंकि तनाव डिप्रेशन के पहले की चीज है। जिसमें व्यक्ति हर पल टेंशन में रहता है। वहीं, सिर में दर्द या माइग्रेन जैसी समस्या भी होती है।

तनाव का इलाज क्या है?

तनाव का एक ही इलाज है, अपने ध्यान को भटकाना। इससे लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां नहीं होगी। अपने माइंड को डायवर्ट करने के लिए हम निम्न चीजें कर सकते हैं :

  • तनाव से दूर रहने के लिए साउंड स्लीप बेहद जरूरी है। 7 से 8 घंटे की नींद आपको रिलैक्स रहने में मददगार होती है। यही नहीं नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद अवश्य लेनी चाहिए। अच्छी नींद सेहत के लिए बेहतर होने के साथ-साथ किसी भी संक्रमण से बचाने में मददगार है।
  • पौष्टिक आहार इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाए रखने में सबसे पहली और अहम भूमिका निभाता है। इसलिए कोरोना वायरस का डर मन में न लाएं और पौष्टिक आहार जैसे विटामिन-सी युक्त फलों का सेवन करें, साबुत आनाज, डेयरी प्रोडक्ट, हरी सब्जियां, नट्स और 2 से 3 लीटर तक रोजाना पानी पिएं।
  • स्वस्थ रहने के लिए जिस तरह से हेल्दी फूड की अहम भूमिका होती है ठीक वैसे ही एक्सरसाइज करना भी जरूरी है। कोरोना वायरस न फैले इसलिए जिम और स्वीमिंग पूल जैसी जगह बंद कर दी गई है। ऐसे घर पर ही रहकर वर्कआउट करना बेहतर विकल्प तनाव से बचने के लिए और स्वस्थ्य रहने के लिए।

चिंता या एंग्जायटी

एंग्जायटी स्ट्रेस के प्रति आपकी बॉडी की नैचुरल प्रतिक्रिया है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि एंग्जायटी उस डर या भावना को कहते हैं जिसमें आप यह सोचते हैं कि आगे क्या होने वाला है। साथ ही एंग्जायटी के कारण अगर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है, तो समझ लीजिए कि आप एंग्जायटी डिसऑर्डर का शिकार हो चुके हैं।

एंग्जायटी के लक्षण क्या हैं?

एंग्जायटी के लक्षण स्ट्रेस जैसे ही होते हैं, लेकिन एंग्जायटी के कारण पैनिक अटैक भी आते हैं, जिसके लक्षण निम्न हो सकते हैं :

  • बेहोशी
  • सांस उखड़ना
  • मुंह सूखना
  • पसीना आना
  • चिंता करना
  • बेचैनी
  • डर
  • अंगो का सुन्न पड़ना

एंग्जायटी का इलाज क्या है?

कुछ साधारण उपाय करके आप एंग्जायटी से बच सकते हैं :

  • कोरोना के कारण मानसिक बीमारियां परेशान कर रही हैं और आप इस चिंता का उपाय चाहते हैं, तो आप जरूरत से ज्यादा चिंता न करें और अपने दिमाग को शांत रखें।
  • अपने आपको हर मुश्किल से लड़ने के काबिल समझें और दिमाग में नेगेटिव विचारों को न आने दें। इससे आपको बुरे और नेगेटिव ख्याल नहीं आएंगे और मन शांत रहेगा।
  • आपको यह तय करना होगा कि जिस भी बात को लेकर आप चिंतित हैं, उसका कोई समाधान है या नहीं। यदि है, तो उसके बारे में सोचना सही है, अन्यथा व्यर्थ है।
  • अपनी चिंताओं के बारे में अपने करीबी से बात करें। इससे आप के भीतर की एंग्जायटी कम हो सकती है।
  • अपनी एंग्जायटी को कम करने के लिए आप मेडिटेशन भी कर सकते हैं, जिससे आपका दिमाग शांत और फ्रेश रहेगा।
  • रिसर्च में पता चला है कि संगीत सुनने से दिमाग शांत होता है। इसलिए, एंग्जायटी को कम करने के लिए आप मधुर संगीत सुन सकते हैं। जरूरी नहीं कि आप दिमाग को उत्तेजित करने वाला संगीत सुनें। आप बांसुरी की धुन, कुछ लोक संगीत, ट्रांस, नेचर साउंड जैसे पानी का बहना, चिड़ियों का चहकना जैसे साउंड या बैकग्राउंड साउंड को सुन कर खुद को रिलैक्स कर सकते हैं।
  • जब भी आपको बहुत ज्यादा चिता या एंग्जायटी हो रही हो, तो गहरी सांस लें। इससे आपका मन और दिमाग दोनों शांत होंगे। गहरी सांस लेने से आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और कई बार ध्यान केंद्रित करने में भी मदद मिलती है।

ये सभी समस्याएं लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां बन कर उभर रही हैं। कोरोना को हराने के साथ-साथ हमें घर में रहते हुए खुद से भी लड़ना है। हमें उम्मीद है कि लॉकडाउन के कारण मानसिक बीमारियां विषय पर लिखा यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित होगा।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई मेडिकल जानकारी नहीं दे रहा है। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Shayali Rekha द्वारा लिखित
अपडेटेड 09/04/2020
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