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पेट्स पालना नहीं है कोई सिरदर्दी, बल्कि स्ट्रेस को दूर करने की है एक बढ़िया रेमेडी

पेट्स पालना नहीं है कोई सिरदर्दी, बल्कि स्ट्रेस को दूर करने की है एक बढ़िया रेमेडी

क्या आपको एंग्जायटी, अवसाद या स्ट्रेस को कम करने वाली रेमेडी की तलाश है? अगर मैं आप से कहूं कि अपने स्ट्रेस को दूर करने के लिए एक पालतू जानवर पाल लें, तो आपको मुझपर हंसी आ सकती है। लेकिन यह बात तो अब साइंस भी मानता है कि ज्यादातर पेट ओनर्स को डिप्रेशन और एंग्जायटी की समस्या नहीं होती। हालांकि हम में से बहुत से लोग पेट्स से होने वाले मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य लाभों से अंजान रहते हैं। कई रिसर्च कहती हैं कि पालतू जानवर, विशेष रूप से कुत्ते और बिल्लियां, तनाव, चिंता और अवसाद को कम कर सकते हैं। ये आपके अकेलेपन को दूर करके व्यायाम और खेल के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। यहां तक ​​कि आपके हृदय स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं। वहीं, पालतू जानवर अधिक उम्र के वयस्कों के लिए एक बेहतर साथी साबित होते हैं। पेट्स पालने के इतने सारे स्वास्थ्य लाभ को देखते हुई ही 1960 के दशक में पहली बार पेट थेरेपी पर औपचारिक शोध भी शुरू हुई थी। वर्ल्ड एनिमल डे (4 अक्टूबर) पर जानते हैं, आखिर पेट थेरेपी क्या है और यह कैसे काम करती है?

पेट थेरेपी (Pet therapy) क्या है?

पेट थेरेपी एक व्यक्ति और प्रशिक्षित जानवर के बीच एक गाइडेड इंटरैक्शन है। इसे एनिमल असिस्टेड थेरेपी (Animal Assisted Therapy) भी कहते हैं। इस थेरेपी का उद्देश्य किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य समस्या या मानसिक विकार (mental disorder) से उबरने या उससे निपटने में मदद करना है। आपको बता दें कि एनिमल थेरेपी (animal therapy) में सबसे ज्यादा कुत्तों और बिल्लियों का उपयोग किया जाता है। एनिमल असिस्टेड थेरेपी (एएटी) एक फॉर्मल और स्ट्रक्चर्ड सेशंस (structured sessions) का सेट होता है, जो लोगों को उनके ट्रीटमेंट में मदद करता है।

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पेट थेरेपी कैसे काम करती है?

ऑक्सफोर्ड ट्रीटमेंट सेंटर के अनुसार, ‘पालतू जानवरों में स्ट्रेस, एंग्जायटी (anxiety) और डिप्रेशन को दूर करने और रोगियों को आराम प्रदान करने की क्षमता होती है। सामान्य तौर पर एक पालतू जानवर के साथ बातचीत करने मात्र से ही मूड में सुधार होता है।’ दरअसल, जानवर के साथ बातचीत करने वाले व्यक्ति में एंडोर्फिन रिलीज में वृद्धि देखी जाती है। एंडोर्फिन (endorphin) तनाव और दर्द से राहत देने के लिए शरीर द्वारा उत्पादित मस्तिष्क रसायन है। यह ओपिओइड्स नामक दवाओं के एक ग्रुप की तरह काम करता है। ओपियोइड्स में एनाल्जेसिक (Analgesic) और सेडेटिव इफेक्ट्स (sedative effects) होते हैं और आमतौर पर दर्द को मैनेज करने के लिए इनका उपयोग किया जाता है।

एनिमल थेरेपी से मरीजों में न केवल एंडोर्फिन रिलीज बढ़ता है, बल्कि कोर्टिसोल (Cortisol), नॉरपेनेफ्रिन (Norepinephrine) और एपिनेफ्रीन (Epinephrine) जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन (stress hormone) के स्राव में कमी आती है। यह ओवरऑल हेल्थ में सुधार लाता है।

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पेट थेरेपी : पालतू जानवर आपकी मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करते हैं?

ह्यूमन एनिमल बॉन्ड रिसर्च इंस्टिट्यूट (HABRI) के द्वारा पेट ओनर्स पर किए गए एक सर्वे से पता चलता है कि-

  • 74% पालतू जानवरों के मालिकों ने पेट ओनरशिप से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार की सूचना दी और 75% ने बताया कि पेट ओनरशिप से दोस्त या परिवार के सदस्य के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार पेट्स की वजह से हुआ।
  • जिन लोगों के पास पेट्स होते हैं उनमें अवसाद से पीड़ित होने की संभावना कम होती है।
  • कुत्ते या बिल्ली के साथ खेलना सेरोटोनिन और डोपामाइन के स्तर को बढ़ा सकता है, जो दिमाग को शांत और रिलैक्स करता है।
  • पर्ड्यू विश्वविद्यालय (Purdue University) ने पेट थेरेपी के प्रभाव के बारे में जानने के लिए 14 नैदानिक ​​परीक्षणों की समीक्षा की। उसमें पाया गया कि जिन ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से ग्रसित बच्चों को एनिमल थेरेपी दी गई, उनमें प्रत्येक 30 में से 27 बच्चों में सुधार के लक्षण दिखाई दिए।

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पेट थेरेपी का फायदा किन्हें हो सकता है?

पेट थेरेपी से लोगों में दर्द, चिंता, अवसाद और थकान सहित कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी हो सकती है। यह थेरेपी इन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है:

पेट थेरेपी का इस्तेमाल नॉन-मेडिकल सेटिंग्स जैसे-विश्वविद्यालयों और सामुदायिक कार्यक्रमों में भी किया जाने लगा है, ताकि लोगों को चिंता और तनाव से निपटने में मदद मिल सके।

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पेट थेरेपी : ये बीमारियां हुई दूर

ऑक्सफोर्ड ट्रीटमेंट सेंटर की एक रिपोर्ट में पाया गया कि 1997 से 2009 तक 28 अलग-अलग पेट थेरेपी ट्रीटमेंट का सर्वेक्षण किया। 28 अध्ययनों में से प्रत्येक में पाया गया कि सिजोफ्रेनिया, अल्जाइमर रोग, डाउन सिंड्रोम जैसे विकारों से ग्रस्त लोगों ने एनिमल थेरेपी के लाभ प्राप्त किए थे। साथ ही बच्चों में डेवलपमेंटल डिसेबिलिटीज (developmental disabilities) के उपचार में भी यह थेरेपी बहुत प्रभावी साबित हुई।

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पालतू जानवर और आपका मानसिक स्वास्थ्य

अवसाद, चिंता, तनाव, बाइपोलर डिसऑर्डर और पीटीएसडी के लक्षणों को कम करने में लाइफस्टाइल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पालतू जानवरों की देखभाल करने से आप एक स्वस्थ जीवन शैली के लिए प्रेरित होते हैं। नतीजन, मेंटल हेल्थ दुरुस्त रहती है।

एक्सरसाइज

अपने पेट्स को टहलाने ले जाने से आपकी भी मॉर्निंग वॉक हो जाती है। सुबह की सैर आपको मानसिक स्पष्टता और दिन भर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। एक अध्ययन में यह भी पाया गया है कि वृद्ध वयस्कों में (जिन्होंने सुबह की सैर के साथ अपने दिन की शुरुआत की) उन लोगों की तुलना में कॉग्निटिव फंक्शन में सुधार आया, जो गतिहीन रहे। अध्ययनों से पता चला है कि पेट ओनर्स में अपनी डेली एक्सरसाइज रिक्वायरमेंट्स को पूरा करने की अधिक संभावना होती है। इससे पालतू जानवर और आपके बीच कनेक्शन भी मजबूत होता है।

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कम्पैनियनशिप

कम्पैनियनशिप से बीमारी को रोकने और यहां तक ​​कि लाइफ को बेहतर तरीके से जीने में मदद मिल सकती है। वहीं, अलगाव और अकेलापन अवसाद के लक्षणों को ट्रिगर कर सकता है। एक पालतू जानवर की देखभाल करने से आपका ध्यान अपनी समस्याओं से हटा रह सकता है, खासकर यदि आप अकेले रहते हैं। इससे आप बेवजह की नकारात्मक सोच (negative thinking) के शिकार नहीं होते हैं।

चिंता कम करना

एक पेट का साथ आपको कंफर्ट दे सकता है और चिंता को कम करने में मदद कर सकता है। आपको पता है कि पालतू जानवर आज में जीते हैं। वे इस बात की चिंता नहीं करते हैं कि कल क्या हुआ था या कल क्या हो सकता है? वे आपको भी वर्तमान में जीना सीखते हैं। इससे आपकी एंग्जायटी (anxiety) कम होती है।

संवेदी तनाव से राहत प्रदान करना

तनाव को जल्दी से प्रबंधित करने के लिए टच (touch) और मूवमेंट (movement) दो तरीके हैं। एक कुत्ते, बिल्ली या अन्य जानवर को थपथपाकर आप अपने ब्लड प्रेशर को कम कर सकते हैं। ऐसा करना आपको जल्दी से शांत कर देता है। नतीजन, आप कम तनाव महसूस करेंगे।

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आपको एक रूटीन में लाने में मददगार

कई पालतू जानवरों, विशेष रूप से डॉग्स को एक नियमित दिनचर्या की आवश्यकता होती है। उसकी सेट दिनचर्या उसे संतुलित और शांत रहने में मददगार साबित होती है और यह आपके लिए भी काम कर सकता है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप डिप्रेस्ड, स्ट्रेस्ड या चिंतित हैं। आपको अपने पेट्स के सेट रूटीन (फीड, एक्सरसाइज और केयर) के लिए आपको बेड से उतरना ही होगा। इस तरह से आप खुद-ब-खुद भी एक रूटीन में बंध जाते हैं, जो कि आपकी ओवरऑल हेल्थ लाभकारी है।

एनिमल थेरेपी में ट्रेंड जानवरों और उनके हैंडलर्स के साथ नियमित सेशन शामिल होते हैं। इसकी मदद से लोगों को शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य विकारों से निपटने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कुछ लोग कई कारणों की वजह से एनिमल थेरेपी का लाभ नहीं पा सकते हैं। इसके लिए वे दूसरे वैकल्पिक उपायों को चुन सकते हैं। कोई भी मानसिक समस्या से ग्रस्त व्यक्ति अपनी समस्या के इलाज के लिए एनिमल थेरेपी के बारे में डॉक्टर या मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से बात कर सकता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Ontological security and connectivity provided by pets: a study in the self-management of the everyday lives of people diagnosed with a long-term mental health condition. https://habricentral.org/resources/58595. Accessed On 07 Sep 2020

Survey: Pet Owners and the Human-Animal Bond. https://habri.org/2016-pet-owners-survey. Accessed On 07 Sep 2020

Alleviating Anxiety, Stress and Depression with the Pet Effect. https://adaa.org/learn-from-us/from-the-experts/blog-posts/consumer/alleviating-anxiety-stress-and-depression-pet. Accessed On 07 Sep 2020

Pets and mental health. https://www.mentalhealth.org.uk/a-to-z/p/pets-and-mental-health. Accessed On 07 Sep 2020

The Health and Mood-Boosting Benefits of Pets. https://www.helpguide.org/articles/mental-health/mood-boosting-power-of-dogs.htm. Accessed On 07 Sep 2020

Animal assisted intervention: A systematic review of benefits and risks. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC7185850/. Accessed On 07 Sep 2020

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Shikha Patel द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 01/10/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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