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ज्यादा दबाव से हो सकता है सेल्फ-पीयर प्रेशर !

ज्यादा दबाव से हो सकता है सेल्फ-पीयर प्रेशर !

सेल्फ-पीयर प्रेशर (Self Peer-Pressure) क्या है ?

‘श्रद्धा सुनो ना तुम्हें पता है शर्माजी का बेटा तो बड़ा तेज निकला उसकी एक बड़े कंपनी में जॉब लग गई है और एक अपना बेटा है, इसे अभी तक नौकरी नहीं मिली है।’ यह सब विनोद सुन रहा था। विनोद के माता-पिता अपने बेटे को सीधे तौर पर कुछ बोल तो नहीं रहें थें लेकिन, वह सब समझ रहा था। विनोद के ऊपर सीधे तौर से दवाब पड़ रहा था।

देखा जाए तो हमसभी अपने जीवन में चल रहे किसी न किसी तरह के प्रेशर (दबाव) की बात करते हैं। ठीक उसी तरह से कई लोग सेल्फ पीयर-प्रेशर के शिकार हो जाते हैं। अगर सेल्फ-पीयर प्रेशर को सामान्य भाषा में समझा में कहा जाए तो ‘कोई व्यक्ति अगर कुछ कर रहा है और उसे देखकर खुद भी वही करने की इच्छा या जिद होना सेल्फ-पीयर प्रेशर कहलाता है।’ दरअसल यह ऐसी स्थिति है जिसमे व्यक्ति खुद-ब-खुद दवाब में आ जाता है। इसका सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव दोनों ही पड़ता है। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि आखिर क्या होता है सेल्फ-पीयर प्रेशर।

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सेल्फ-पीयर प्रेशर बच्चों और बड़ों दोनों में ही हो सकते हैं।

1. स्पोकेन पीयर-प्रेशर (Spoken Peer Pressure)

अगर एक फ्रेंड अपने किसी दूसरे फ्रेंड को यह कहे की तुम अभी पढ़ाई क्यों कर रहे हो, एग्जाम में अभी काफी समय है। तुम हमारे साथ चलो हमसभी एक साथ सिगरेट पिएंगे। इसे स्पोकेन पीयर प्रेशर कहा जाता है। एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को बोल कर प्रभावित करता है, जिसका दूसरे व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसा भी हो सकता है की सामने वाला व्यक्ति सकारात्मक प्रभाव भी आप पर डाले। जैसे मैं पढ़ रहा हूं तुमभी पढ़ लो।

2. अनस्पॉकेन पीयर-प्रेशर (Unspoken Peer Pressure)

अगर कोई बच्चा या वयस्क सिर्फ अपने किसी साथी या घर के सदस्यों को देखकर किसी गलत आदत का शिकार हो जाता है जैसे एल्कोहॉल का सेवन करना या सिगरेट पीना आदि तो इसे अनस्पॉकेन पीयर-प्रेशर कहेंगे। वहीं ऐसा भी हो सकता है की सामने वाला व्यक्ति पढ़ाई करने के लिए किसी दूसरे इंसान को प्रेरित कर सके।

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3. नेगेटिव पीयर-प्रेशर (Negative Peer Pressure)

इससे खासकर बच्चे प्रभावित होते हैं। बच्चे जैसा अपने सामने देखते हैं ठीक वैसा ही करने लगते हैं। इसलिए हम कई बार यह भी कहते हैं की बच्चे के सामने झगड़ा मत करो या बुरे शब्दों को नहीं बोलें।

4. पॉजिटिव पीयर-प्रेशर (Positive Peer Pressure)

सहकर्मी का दबाव हमेशा नकारात्मक ही नहीं होता है। कभी-कभी यह किशोरों के बीच जीवन में सफल होने के लिए नए शौक, खेल, स्वास्थ्य विवेक या एक फिर एक दृढ़ संकल्प पैदा करता है।

5. एडल्ट पीयर-प्रेशर (Adult Peer Pressure)

एडल्ट पीयर-प्रेशर वयस्कों में होता है। जब कोई व्यक्ति अपने सामने वाले व्यक्ति को देखकर कुछ नकारात्मक प्रभाव पड़ने वाली जैसे सिगरेट पीना या एल्कोहॉल का सेवन करना शुरू कर दे तो इसे एडल्ट पीयर-प्रेशर कहते हैं।

सेल्फ पीयर-प्रेशर से बचने के कुछ खास टिप्स:

  • बच्चों को छोटी उम्र से ही सही और गलत चीजों की जानकारी देना।
  • बच्चों या किसी भी व्यक्ति पर दवाब न डालें।
  • सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति के संपर्क में रहें।
  • वयस्क भी सही और गलत का चयन समझदारी के साथ करें।

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खुद को सेल्फ-पीयर प्रेशर से कैसे रोक सकते हैं?

सबसे पहले खुद को थोड़ा वक्त दें। अपने आपको समझें और सोचे ये दबाव (प्रेशर) किसी और की वजह से नहीं बल्कि खुद की वजह से तो नहीं हो रहा है। अपने माता-पिता, भाई-बहन या किसी और व्यक्ति से खुलकर बात करें। अत्यधिक दबाव में आकर आप अपना ही नुकसान करेंगे और तो और यह किसी अन्य बीमारी को भी न्योता देने के लिए काफी हो सकता है।

हालांकि ऐसी मिथ है की सभी पीयर प्रेशर नकारात्मक होते हैं लेकिन, पीयर प्रेशर अच्छा भी हो सकता है अगर यह किसी व्यक्ति को उनके कम्फर्ट जोन से बाहर निकालता है और उन्हें नई चीजों की खोज करने का मौका देता है।

सेल्फ-पीयर प्रेशर के शिकार बच्चे या स्कूल जाने वाले बच्चे भी हो सकते हैं।

कई बार हम किसी के दवाब में आकर गलत आदते करना शुरू कर देते हैं। जैसे सिगरेट पीना, एल्कोहॉल पीना या फिर कोई अन्य कार्य जिसे नहीं करना चाहिए। अगर आप पर कोई नुकसान पहुंचाने वाले काम का प्रेशर बना रहा है, तो उसे सीधे शब्दों में मना कर दें। वैसे ऐसी में अगर आप सामने वाले व्यक्ति के बातों को नजरंअदाज करना सीखें और अगर तभी वो व्यक्ति आपको सिगरेट या एल्कोहॉल के लिए दवाब डालते हैं तो उन्हें साफ-साफ मना कर दें.

पेरेंट्स निभाएं अहम भूमिका

अब तक आप ये बात समझ ही गए होंगे कि प्रेशर हमेशा नकारात्मक यानी निगेटिव ही नहीं होता है। अगर इसे पॉजिटिव वे में लिया जाए तो बच्चे हो या फिर टीनएजर्स, काफी कुछ नया सीख भी सकते हैं। आप इस बात को ऐसे समझिए कि अगर स्कूल में बच्चे के ऊपर कोई प्रोजेक्ट समय पर देने का प्रेशर है तो इस कारण वो अपना काम समय पर करेगा। पेरेंट्स को बच्चों की गतिविधियों से खुद को अपडेट रखना होगा। स्कूल में क्या हो रहा है या फिर कॉलेज में क्या एक्टिविटी चल रही है। पेरेंट्स को न्यू टेक्नोलॉजी से भी अपडेट रहना होगा ताकि उन्हें मालूम हो कि उनका बच्चा क्या कर रहा है या किस तरह का प्रेशर वो फील कर रहा है। जब भी पेरेंट्स को फील हो कि बच्चे पर पड़ने वाला प्रेशर नकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है तो पेरेंट्स को तुरंत उसे रोकने का प्रयास करना चाहिए। पीयर प्रेशर को कम करने के लिए आप रेगुलर अपने टीनएज से उस विषय से संबंधित बात कर सकती हैं और साथ ही उसकी एक्टिविटी की अपडेट भी ले सकती हैं।

अगर बच्चा खुद को अकेला महसूस करेगा तो वो गलत दिशा की ओर भी जा सकता है। पेरेंट्स का साथ बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने का काम करता है। बच्चों की कमी गिनाने के साथ ही उनकी हौसलाफजाई भी करें। पेरेंट्स का बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम उन्हें कई प्रकार के प्रेशर से बचाने का काम कर सकता है।सेल्फ-पीयर प्रेशर की समस्या बच्चों में न हो इसलिए उन्हें हां और नहीं बोलना दोनों सिखाएं। दरअसल बच्चों को गलत आदतों से होने वाले नुकसान के बारे में भी जरूर समझाएं। माता-पिता को अपने बच्चों से हमेशा खुलकर बात करना चाहिए। माता-पिता के साथ पेरेंट्स को एक दोस्त भी अपने बच्चों के साथ बनना चाहिए। दोस्त की तरह पेश आने से आपका बच्चा आपसे आपके अनुपस्थिति में हुई बातों को आपसे शेयर करेगा। दरअसल जिस तरह बच्चे को सबसे पहली शिक्षा घर से मिलती है थी वैसे ही अगर आप अपने बच्चों के पेरेंट्स और दोस्त दोनों रहेंगे तो वह आपके सामने अपने विचारों को रखेगा। ऐसा करने से बच्चा सेल्फ-पीयर प्रेशर की समस्या से बच सकता है।

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सेल्फ-पीयर प्रेशर में व्यक्ति या बच्चा क्या कर सकता है?

सेल्फ-पीयर प्रेशर के कारण कोई भी व्यक्ति या बच्चा निम्नलिखित गलत आदतें अपना सकता है। जैसे-

  • दोस्तों या फिल्मों में देखकर एल्कोहॉल का सेवन करना
  • हुक्का, सिगरेट या तंबाकू का सेवन करना
  • कई लोग ड्रग्स के भी शिकार हो जाते हैं
  • बच्चे प्रायः स्कूल या कॉलेज से बिना बताये कहीं और जाते हैं
  • एग्जाम में चीटिंग करना क्योंकि वो किस तरह से पास होना चाहते हैं। कई बार तो पेरेंट्स की ओर से एग्जाम को लेकर इतना प्रेशर होता है की वो किसी तरह सिर्फ पास होना चाहते हैं
  • दवाब में आकर शारीरिक संबंध बनाना
  • बढ़ते वजन को कम करने के लिए और लुक्स के लिए दवाइयों का सेवन करना
  • कई बच्चे तो हमेशा ही किसी न किस गैजेट की डिमांड लेकर अपने पेरेंट्स के पास पहुंच जाते हैं।
  • ऐसे में बच्चे उन लोगों के साथ समय बिताना शुरू कर सकते हैं, जिनसे वो अपने मन की बात कर सके। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं रहती है कि वो सही व्यक्ति से बात कर रहे हैं या फिर गलत व्यक्ति से।

अगर आप सेल्फ-पीयर प्रेशर से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। उम्मीद करते हैं कि आपको इस आर्टिकल की जानकारी पसंद आई होगी और आपको सेल्फ-पीयर प्रेशर से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। स्वास्थ्य संबंधि अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Peer Pressure/https://kidshealth.org/en/teens/peer-pressure.html/Accessed on 06/02/2020

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Peer pressure and influence: teenagers/ https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4777050//Accessed on 06/02/2020

Do Peers Matter? Resistance to Peer Influence as a Mediator between Self-Esteem and Procrastination among Undergraduates/https://www.frontiersin.org/articles/10.3389/fpsyg.2016.01529/full/Accessed on 06/02/2020

 

लेखक की तस्वीर
Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 28/08/2020 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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