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न्यू ईयर टार्गेट्स को पूरा करने की राह में स्ट्रेस मैनेजमेंट ऐसे करें

न्यू ईयर टार्गेट्स को पूरा करने की राह में स्ट्रेस मैनेजमेंट ऐसे करें

नए वर्ष के आने से पहले हम कुछ टार्गेट (लक्ष्य) तय करते हैं। यह सभी लक्ष्य एक समान नहीं होते। नए वर्ष में अक्सर इन लक्ष्यों की प्राप्ति में हमें विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है। स्ट्रेस इनमें सबसे बड़ी समस्या होती है। हम हर हाल में नए साल के टार्गेट को पूरा करना चाहते हैं। इस स्थिति में हमारे दिमाग पर अतिरिक्त रूप से काफी स्ट्रेस रहता है। यदि स्ट्रेस मैनेजमेंट उचित तरीके से किया जाए तो आपके आधे टार्गेट्स का रास्ता साफ हो जाता है। इस स्थिति में नए साल के टार्गेट्स या लक्ष्यों को पूरा करने के लिए स्ट्रेस मैनेजमेंट के बारे में जानना बेहद ही जरूरी है। आड हम इस आर्टिक में स्ट्रेस मैनेजमेंट के बारे में बताने जा रही हैं।

स्ट्रेस क्या होता है?

स्ट्रेस एक असामान्य अहसास है, जो दबाव के दौरान पैदा होता है। हालांकि, यह दबाव रोजाना की दिनचर्या में कई रूपों में आ सकता है। दफ्तर में काम का दबाव बढ़ने, बदलाव, परिवार के साथ वाद विवाद या नई और मौजूदा वित्तीय जिम्मेदारियों के लेकर चिंता करने से स्ट्रेस बढ़ता है। इन परिस्थितियों के दौरान आपको खतरा महसूस होता है या आप उदास होते हैं।

इस स्थिति में आपकी एक स्ट्रेस रिस्पॉन्स पैदा करती है। इससे शारीरिक रूप से अनेक प्रकार के लक्षण पैदा होते हैं, जो आपके बर्ताव करने के तरीके को बदलते हैं और आपको तीव्रता से भावनात्मकता का अहसास होता है। स्ट्रेस कई तरह से जैसे शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित करता है।

स्ट्रेस मैनेजमेंट में सबसे पहला कदम होता है कि आपको कैसे पता चलेगा कि आप स्ट्रेस (तनाव) में हैं। हालांकि, इसमें कोई दोहराय नहीं कि स्ट्रेस का अनुभव हर व्यक्ति करता है। स्ट्रेस का पता चलते ही इससे जल्द से जल्द निपटा जाना चाहिए। स्ट्रेस के कुछ लक्षण होते हैं, जिन्हें देखकर इसका पता लगाया जा सकता है।

स्ट्रेस के लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • लगातार चिंता या उत्कुंठा का अहसास
  • पूरी तरह हारा हुआ महसूस करना
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
  • मूड स्विंग या मूड में बदलाव होना
  • चिड़चिड़ा या जल्दी गुस्सा आ जाना
  • आराम करने में समस्या आना
  • डिप्रेशन
  • कम आत्म सम्मान का अहसास
  • सामान्यतः अधिक या कम खाना
  • नींद के तरीके में बदलाव आना
  • राहत पाने के लिए एल्कोहॉल, तंबाकू या गैर कानून नशीली दवाइयों का इस्तेमाल
  • विशेषकर मांसपेशियों में दर्द और पीढ़ा का अहसास
  • डायरिया और कब्ज
  • उबकाई और चक्कर आने का अहसास
  • सेक्स ड्राइव में कमी आना

यदि आपको लंबे समय से उपरोक्त लक्षणों का अहसास हो रहा है और यह आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर रहे हैं और आपको अस्वस्थ का अहसास हो रहा है तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें। न्यू ईयर टार्गेट्स को पूरा करने की राह में आने वाले स्ट्रेस का समाधान करना बेहद ही जरूरी है। संभवतः ऑफिस के कार्यों की वजह से आपको स्ट्रेस हो गया हो।

निम्नलिखित तरीकों से स्ट्रेस मैनेजमेंट किया जा सकता है:

कैफेन, एल्कोहॉल और निकोटीन का सेवन बंद करें

यदि आप कैफेन (कॉफी), एल्कोहॉल और निकोटीन का सेवन कर रहे हैं तो इनका सेवन तुरंत बंद कर दें। यदि आप इसका सेवन बंद नहीं कर सकते तो उन सभी चीजों का सेवन कम से कम करें, जिनमें उपरोक्त पदार्थ मिले हों। कैफीन और निकोटीन स्टिमुलेंट्स होते हैं, जो हमारे सेंट्रल नर्वस सिस्टम को अतिरिक्त रूप से सक्रिये कर देते हैं। इससे आपके स्ट्रेस का स्तर घटने के बजाय बढ़ सकता है।

एल्कोहॉल एक डिप्रेसेंट है। अधिक मात्रा में इसके सेवन करने से यह स्टिमुलेंट्स की तरह ही कार्य करता है। हालांकि, यह कम संख्या में कार्य करता है। कैफीन और एल्कोहॉल वाली ड्रिंक्स की जगह आप पानी, हर्बल चाय या नैचुरल फलों के जूस को जगह दें। इससे आपकी बॉडी हाइड्रेट भी बनी रहेगी। इससे आपको स्ट्रेस से निकलने में आसानी होगी।

उपरोक्त ड्रिंक्स के अलावा भी आपको रिफाइन्ड शुगर को भी कम करना है। यह कई प्रकार के फूड्स जैसे सलाद ड्रेसिंग और ब्रेड में होते हैं। इससे एनर्जी क्रैश की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे आपको थकावट का अहसास हो सकता है और आप चिड़चिड़े हो सकते हैं। आमतौर पर हेल्दी, संतुलित और पोषक डायट लें।

फिजिकल एक्टिविटी जरूर करें

कोर्टिसोल एक स्टेरॉयड हॉर्मोन है। यह ग्लुकोकोर्टिकॉइड्स हॉर्मोन्स के क्लास से संबंधित हैं। स्ट्रेस के दौरान हमारी बॉडी कोर्टिसोल हार्मोन पैदा करने लगती है। स्ट्रेस मैनेजमेंट में फिजिकल एक्टिविटी काफी महत्वपूर्ण और उपयोगी साबित होती हैं। स्ट्रेस के दौरान एड्रेनलिन (adrenaline) ग्लैंड में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। यह ‘फाइट या फ्लाइट’ (fight or flight) हॉर्मोन होते हैं, जो दिमाग में डेवलप्मेंट में मदद करते हैं। साथ ही जब हमारी बॉडी खतरे में होती है तो यह तत्काल होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान से हमारी रक्षा करती है।

हालांकि, आज के युग में स्ट्रेस का फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स से इलाज नहीं किया जा सकता। इस स्थिति में अतिरिक्त स्ट्रेस हॉर्मोन को ऊर्जा के रूप में तोड़ने के लिए फिजिकल एक्सरसाइज काफी कारगर है। फिजिकल एक्सरसाइज करने से स्ट्रेस की स्थिति में यह इस हार्मोन के स्तर को कम करती और शरीर में पुनः ऊर्जा का प्रवाह करके हमारे दिमाग को शांति और अधिक राहत प्रदान करती है।

न्यू ईयर के टार्गेट्स को पूरा करने के दौरान यदि आपको स्ट्रेस या टेंशन का अहसास होता है तो आप ताजी हवा में एक ब्रिस्क वॉल्क के लिए जा सकते हैं। ऐसे में रोजान की दिनचर्या में कुछ फिजिकल एक्टिविटी को जरूर शामिल करें। ऑफिस में लंच से पहले या लंच के बाद ब्रिस्क वॉल्क पर जा सकते हैं। नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटी आपकी नींद की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगी। स्ट्रेस के दौरान नींद की गुणवत्ता सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। स्ट्रेस मैनेजमेंट यह तरीका बेहद ही सरल और सस्ता है।

अन्य लोगों से जरूर बात करें

स्ट्रेस या दबाव के अहसास की स्थिति में अन्य लोगों से बात करना काफी कारगर साबित होता है। यहां पर अन्य लोगों का मतलब सभी लोगों से नहीं है। इस बात का खास ध्यान रखें कि आप नकारात्मक ऊर्जा देने वाले लोगों से दूर रहें। यह आपके स्ट्रेस को और बढ़ा सकते हैं। स्ट्रेस मैनेजमेंट में उन लोगों से बात करना काफी कारगर साबित होता है, जो आपको उत्साहित और प्रेरित करते हैं।

स्ट्रेस होने पर इन लोगों के साथ एक अच्छा समय व्यतीत कर सकते हैं, जिससे आपको खुशी होगी। साथ ही यह लोग आपको समझेंगे भी। हकीकत में आमने सामने बैठकर बात करने से बॉडी में कई हॉर्मोंस पैदा होते हैं, जो शरीर के रक्षात्मक तंत्र ‘फाइट या फ्लाइट’ के संपर्क में आते हैं। स्ट्रेस को कम करने का यह प्राकृतिक तरीका है।

इस स्थिति में नियमित रूप से अपने दोस्त या परिवार से संपर्क बनाए रखें। जिन लोगों से आप बात करते हैं वो आपका स्ट्रेस कम नहीं कर पाएंगे। सामान्यतः उन्हें एक अच्छा श्रोता बनना पड़ेगा। ऐसे में उनके सामने आपको कमजोर दिखने या खुलकर बात करने में किसी बोझिलता का अहसास नहीं करना है, जो लोग आपकी परवाह करते हैं वो आपके भरोसे के मुताबिक होंगे। इससे आप दोनों का संबंध और मजबूत होगा।

एमरजेंसी स्ट्रेस स्टॉपर्स

कुछ ही समय में स्ट्रेस को कम करने के लिए एमरजेंसी स्ट्रेस स्टॉपर्स मदद कर सकते हैं। इसके लिए आपको हर तरह के स्ट्रेस को कम करने के लिए अलग-अलग स्ट्रेस स्टॉपर्स की जरूरत पड़ सकती है।

और पढ़ें: बच्चों का पढ़ाई में मन न लगना और उनकी मेंटल हेल्थ में है कनेक्शन

अपने आप से करें पॉजिटिव बातें

हम सभी अपने आपसे बात करते हैं, जिसको लेकर हमें ईमानदार होना चाहिए। कई बार हम चिल्लाकर बात करें, लेकिन आमतौर पर हम अपने हिसाब से ऐसा करते हैं। अपने आप से बात करना सकारात्मक हो सकता है। अपने आप से नकारात्मक बातें करना स्ट्रेस को बढ़ावा दे सकता है। अपने आप से सकारात्मक बातें करने से आप शांत रहेंगे और स्ट्रेस नियंत्रण में रहेगा। अभ्यास से आप नकारात्मक बातों से सकारात्मक बातों पर आना भी सीख सकते हैं।

स्ट्रेस मैनेजमेंट में योग करें

आज के दौर में स्ट्रेस को कम करने के लिए योग सभी आयु वर्ग के लोगों में काफी प्रचलित माध्यम बन चुका है। हालांकि योग करने का तरीका अलग हो सकता है। ज्यादातर लोग अपनी बॉडी और दिमाग को तरोताजा रखने के लिए योग करते हैं।

प्राथमिक रूप से योग सांस लेते वक्त आपकी सक्रियता और जागरुकता को बढ़ा देता है। कुछ अध्ययनों में योग के मानसिक प्रभाव पर अध्ययन किया गया है। कुल मिलाकर अध्ययनों में यह पाया गया है कि योग आपके मूड को अच्छा कर सकता है और यह डिप्रेशन और एंजाइटी के इलाज में एक एंटीडिप्रेसेंट दवा के रूप में कारगर होता है। हालांकि, इसमें से कुछ अध्ययनों में सीमित शोध किया गया है। योग स्ट्रेस को कम करने में कैसे कार्य करता है, इन सवालों के विस्तृत जवाब मिलना अभी भी बाकी है।

सामान्यतः स्ट्रेस और एंजाइटी में योग के फायदे के रूप में यह नर्वस सिस्टम और स्ट्रेस रिस्पॉन्स पर प्रभाव डालता है। योग कोर्टिसोल लेवल, ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को कम करने और गामा एमिनोबुट्रासिक एसिड (gamma-aminobutyric acid) (GABA) को बढ़ाता है। यह एक न्यूरोट्रांसमीटर है, जो मूड से जुड़ी समस्याओं को कम करता है।

और पढ़ें: बच्चों के मानसिक तनाव को दूर करने के 5 उपाय

सुखदायक या स्लो म्यूजिक सुनें

स्ट्रेस मैनेजमेंट में सुखदायक संगीत सुनने से बॉडी पर राहत देने वाला प्रभाव पड़ता है। पियानो के जैसा धीमा म्यूजिक सुनने से यह ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट के साथ स्ट्रेस हार्मोन को धीमा करके राहत देने वाली प्रतिक्रिया पैदा करता है।

भारतीय, सेल्टिक, नेटिव अमेरिकन म्यूजिक राहत देने वाले हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सिर्फ म्यूजिक सुनना और उसका आनंद लेना भी स्ट्रेस मैनेजमेंट में प्रभावी साबित होता है। वहीं, प्राकृतिक ध्वनियां (साउंड्स) भी शांति देने वाली होती हैं। इसी के चलते इन्हें आराम और ध्यान केंद्रित करने वाले म्यूजिक के साथ सुना जाता है।

जिंदगी को धीमा करें

आज की आधुनिक जिंदगी काफी व्यस्त है। कई बार स्ट्रेस को कम करने में हमें इस जिंदगी को थोड़ा धीमा करने की जरूरत होती है। इस स्थिति में स्ट्रेस मैनेजमेंट में आप अपनी रोजाना की जिंदगी में कुछ चीजों की पहचान करके स्ट्रेस से राहत पा सकते हैं।

घड़ी को 5-10 मिनट आगे रखें

अक्सर दफ्तर पहुंचते वक्त आपको काफी स्ट्रेस हो जाता है। ऑफिस देरी से पहुंचने पर आपको अक्सर स्ट्रेस होता है। इस स्थिति में अपनी घड़ो को चंद मिनट आगे रखकर आप समय पर ऑफिस पहुंच सकते हैं और गैर जरूरी स्ट्रेस को पैदा होने से पहले ही रोक सकते हैं। ऑफिस जाते वक्त जब आप गाड़ी चला रहे हों तो धीमी लाइन में रहें। इससे आप रोड रेज से बचेंगे। रोड रेज में कई बार एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में आप स्ट्रेस में फंस जाते हैं।

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बड़े कामों को छोटों में विखंडित करें

उदाहरण के लिए जब आपके मेल बॉक्स में 100 ईमेल्स पड़ीं हों और आपको सिर्फ कुछ का ही जवाब पता हो तो सभी मेल्स का जवाब न दें। सिर्फ उन्हीं का जवाब दें, जिनके बारे में आपको सही जानकारी हो। किसी भी ईमेल का गलत जवाब देने से आप परेशानी में फंस सकते हैं, जिससे आपको स्ट्रेस होगा।

अंत में हम यही कहेंगे कि नए साल के टार्गेट्स में आपको कई बार स्ट्रेस का सामना करना पड़ सकता है। सही स्ट्रेस मैनेजमेंट तकनीक से आप इससे आसानी से छुटकारा पा सकते हैं।

हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार मुहैया नहीं कराता।

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लेखक की तस्वीर
Dr. Hemakshi J के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Sunil Kumar द्वारा लिखित
अपडेटेड 02/01/2020
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