विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को उम्मीद है कि डिप्रेशन अन्य बीमारी का दूसरा बड़ा कारण बन सकता है। अवसाद और चिंता को अक्सर एक साथ देखा जाता है। बहुत ज्यादा मानसिक तनाव के चलते मेंटल डिस्टर्बेंस, अवसाद या चिंता का कारण बन सकता है। स्ट्रेस एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है।
हालांकि, बहुत ज्यादा तनाव मानसिक विकारों जैसे डिप्रेशन और एंग्जायटी सहित कई मेंटल डिसऑर्डर का परिणाम हो सकता है। ऐसे मानसिक विकारों के लिए कई ट्रीटमेंट मौजूद हैं। अल्टरनेटिव ट्रीटमेंट के रूप में डिप्रेशन का आयुर्वेदिक इलाज 100% सुरक्षित और इफेक्टिव सिद्ध होता है। आयुर्वेद में डिप्रेशन से कैसे छुटकारा पाएं? डिप्रेशन की आयुर्वेदिक दवा क्या है, डिप्रेशन का घरेलू इलाज कैसे करें, जानते है सब “हैलो स्वास्थ्य’ के इस आर्टिकल में –

आयुर्वेद में अवसाद तीन प्रकार से आता है। हर अवसाद का इलाज अलग-अलग होता है। कोलन से वात, आंत से पित्त या पेट से कफ सामान्य सर्क्युलेशन में प्रवेश करता है और नर्वस सिस्टम (nervous system) को प्रभावित करता है। इससे नर्वस सिस्टम फंक्शन भी हस्तक्षेप करता है।
डिप्रेशन कितने दिन तक रहता है? यह बात अवसाद के प्रकार पर निर्भर करती है। अवसाद निम्न प्रकार के हो सकते हैं-
रिकरेन्ट डिप्रेसिव डिसऑर्डर (Recurrent depressive disorder)
इस प्रकार के अवसाद में पीड़ित में बार-बार डिप्रेसिव एपिसोड आते हैं। इन एपिसोड के दौरान, व्यक्ति उदास, भूख में कमी, रुचि और ख़ुशी की कमी का अनुभव करता है और कम से कम यह दो सप्ताह के लिए रहता है।
बाइपोलर इफेक्टिव डिसऑर्डर (Bipolar effective disorder)
इस प्रकार के अवसाद में आमतौर पर मैनिक और डिप्रेसिव एपिसोड दोनों देखने को मिलते हैं। यह सोशल, साइकोलॉजिकल और बायोलॉजिकल फैक्टर्स के परिणामस्वरूप होता है।

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निदान परिवर्जना (Nidana parivarjana)
आयुर्वेद में अवसाद का इलाज करने के लिए, ट्रामा, स्टेरॉयड का उपयोग, दर्द निवारक दवाएं जैसे कारकों से बचना होता है। यदि कोई पुरानी बीमारी है तो पहले इससे ही निपटना चाहिए और अकेले रहने से बचना चाहिए।
शोधन चिकित्सा (बायो-क्लिनिंग थेरिपी) के बाद समन चिकित्सा (Palliative therapy) की जा सकती है। डिप्रेशन से बाहर निकलने का उपाय शोधन प्रक्रिया के अंतर्गत शामिल हैं :
स्नेपना (internal oleation)
आयुर्वेद में डिप्रेशन के इलाज के लिए स्नेपना की सलाह दी जाती है।
विरेचन (Purgation)
विरेचन में जड़ी बूटियों के मिश्रण से तैयार रेचक को अवसाद पीड़ित को दिया जाता है जिससे शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
नास्य कर्म
पुराने गाय के घी या अनु तेल (Anu taila) या पंचगव्य घी को सात दिनों तक नोस्ट्रिल्स में 8-8 बूँद डालकर अवसाद को ठीक किया जाता है।
शिरो वस्ति
इस विधि से आयुर्वेद में अवसाद के इलाज के लिए सात दिन तक रोजाना 45 मिनट तक सिर पर मालिश की जाती है।
अभ्यंगम
इसमें औषधीय हर्बल तेलों के साथ पूरे शरीर की मालिश की जाती है। अभ्यंगम चिकित्सा से शरीर से अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों को हटाने में मदद मिलती है। यह शरीर के महत्पूर्ण प्रेशर पॉइंट्स को उत्तेजित करता है, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद में कमी होती है।
शिरोधारा
इस उपचार में एक निश्चित समय के लिए पेंडुलम गति के साथ माथे पर लगातार तेल डाला जाता है। माथे पर लगातार तेल डालने से तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है। 0 से 60 मिनट तक यह आयुर्वेदिक प्रक्रिया की जाती है। हाई ब्लड प्रेशर और अनिद्रा के इलाज के लिए यह प्रभावी होता है।
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अश्वगंधा
अश्वगंधा में स्टेरॉइडल लैक्टोन, सैपोनिन, एल्कलॉइड्स और विथेनाओलाइड्स जैसे सक्रिय यौगिक होते हैं। इससे तनाव और चिंता को दूर करने में मदद मिलती है। इसके लिए अश्वगंधा चूर्ण या अर्क का सेवन किया जा सकता है।
ब्राह्मी
ब्राह्मी तनाव को ठीक करने की एक पुरानी जड़ी-बूटी है। ब्राह्मी एडाप्टोजेन के रूप में कार्य करता है, जिसका मतलब है कि यह शरीर को नई या तनावपूर्ण स्थितियों के अनुकूल बनाने में मदद करता है। इसके सेवन से मस्तिष्क में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है जो मन को शांत रखने में मदद करता है और चिंता और घबराहट में राहत देता है।
जटामांसी (स्पाइकेनार्ड)
जटामांसी अनिद्रा और अन्य नींद संबंधी विकारों को ठीक करने में मदद करती है। यह अपने अवसाद-रोधी, तनाव-रोधी और थकान-रोधी गुणों के लिए जानी जाती है। मूड स्विंग और तनाव विकारों के लिए यह बहुत ही प्रभावकारी है।
अवसाद का इलाज आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से करने के लिए वच, शतावरी, मुलेठी, गुडुची (Guduchi), कपिकछु (बेनसिसा हेस्पिडा) आदि भी सहायक होती हैं।
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ऊपर बताई गई दवाओं के अलावा अश्वगंधारिष्ठ (Ashvagandharishta), कल्याण घृत आदि को भी डिप्रेशन की आयुर्वेदिक दवा के रूप में डॉक्टर द्वारा दी जाती है। डिप्रेशन का होम्योपैथिक इलाज हो या आयुर्वेदिक किसी भी दवा को लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी जरूरी है। उपचार की अवधि हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती है।
डिप्रेशन के लिए योग
निम्नलिखित योगाभ्यास डिप्रेशन में फायदेमंद हैं; हालाँकि, ये केवल योग एक्सपर्ट के मार्गदर्शन में किए जाने चाहिए।
सबसे आम मानसिक विकार अवसाद, चिंता और नशे की लत है। अवसाद के लिए उपचार में एंटीडिप्रेसेंट दवा शामिल है जिसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। अवसादग्रस्तता विकार के उपचार के लिए एक हर्बल और शिरोधारा थेरिपी की प्रभावशीलता बहुत ही कारगर है। एनसीबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार हर्बल और शिरोधारा का उपयोग अवसाद के इलाज में किया जा सकता है। यह बहुत ही प्रभावी होता है और इसके कोई भी साइड इफेक्ट्स नहीं दिखाई दिए।
कैंसर के मरीजों को अश्वगंधा का सेवन थोड़ी मात्रा में ही करना चाहिए, अन्यथा इसके दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं। इसके अलावा ब्राह्मी का सेवन करने से खुजली का खतरा रहता है, इसलिए उसकी खुराक को अपने अनुसार न बढ़ाएं। डॉक्टर या अपने स्वास्थ्य प्रदाता से सलाह लें।
इसके अलावा आयुर्वेदिक दवाएं संपूर्ण रूप से सुरक्षित होती हैं और इनके अधिक दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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क्या करें?
क्या न करें?
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अश्वगंधा पर किए गए अध्ययन में यह पाया गया कि वह एक एंटीडिप्रेसेंट दवा की ही तरह काम करता है और मन को शांत करने में मदद करता है। इसके अलावा अश्वगंधा में कई ऐसे गुण होते हैं, जो व्यक्ति को अवसाद और चिंता से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। इसमें मौजूद एंग्जियोलाइटिक प्रभाव व्यक्ति को और डर से बचाने में भी मदद करते हैं।
इसके अलावा ब्राम्ही आयुर्वेदिक दवा भी बेहद कारगर होती है। इसमें भी अश्वगंधा की ही तरह एंग्जियोलाइटिक गुण होते हैं, जो याददाश्त की क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। चूहों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार ये प्रभाव बौद्धिक शक्तियों को बढ़ावा देते हैं।
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आपको इस आर्टिकल के माध्यम से डिप्रेशन के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जानकारी मिल गई होगी। अगर मन में अधिक प्रश्न हैं, तो बेहतर होगा कि इस बारे में डॉक्टर से पूछें। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर
हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।
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Current Version
18/05/2021
Shikha Patel द्वारा लिखित
के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. पूजा दाफळ
Updated by: Bhawana Awasthi