माता-पिता बनना एक सुखद अनुभव है। परिवार में एक नए सदस्य के आ जाने के बाद आपकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपना समय और ध्यान नवजात शिशु पर केंद्रित करें।

इस दौरान हो सकता है कि कई ऐसे पल भी आएंगे, जब आप अपने शिशु को घंटों तक निहारते रहेंगे और वो आपको दुनिया में सबसे प्यारा लगेगा। शिशु के हाथ और पैर अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुए हैं, हो सकता है कि ये देखकर आपको थोड़ा अलग लगे। लेकिन, इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है। नौ महीने गर्भ में रहने के बाद, आपके शिशु को निश्चित रूप से स्ट्रेच आउट करने के लिए कुछ समय की आवश्यकता होती है, जिसमें छ: महीने के करीब समय लग जाता है।
नवजात शिशु का वजन लगभग 2.5 किग्रा और 4.5 किग्रा के बीच होता हैं, लंबाई 48 सेमी से 51 सेमी तक हो सकती है। शिशुओं का औसतन अच्छा वजन आमतौर पर 3.5 किलोग्राम माना जाता है, जबकि औसत लंबाई 50 सेमी है। अगर शिशु का वजन कम है तो कोई घबराने की बात नहीं है। हां, बस आप इस बात का ख्याल रखें कि आपके शिशु के विकास के लिए उसे स्वस्थ आहार और बेहतर देखभाल मिलती रहे।
शिशु का नौ महीने मां के गर्भ में रहने के बाद उसे बाहर के वातावरण में अनुकूलन होने में कुछ समय लगता है। इसलिए जरूरी है कि पहले सप्ताह में आप शिुश और खुद को कंबल से ढ़क कर रखें ताकि इससे आपके बच्चे को गर्माहट मिल सके। इसके अलावा, बच्चे को अपने सीने के करीब रखें। त्वचा से त्वचा का संपर्क और आपसे मिलने वाली गर्माहट शिशु को सुरक्षित महसूस कराने में मदद करेगी।
आपको अपने 1 सप्ताह के शिशु के विकास के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिसमें शामिल हैंः
1 सप्ताह के शिशु यानी सात दिन के नवजात बच्चे। 1 सप्ताह के शिशु की त्वचा बहुत ही नाजुक होती है। उसकी हड्डियां भी काफी नाजुक होती हैं। इनका इम्यूनिटी भी विकास की स्थिति में होता है। ऐसे में इन्हें सर्दी और गर्मी लगने की समस्या बहुत तेजी से हो सकती है। आपको अपने 1 सप्ताह के शिशु को नहलाने से बचना चाहिए। हालांकि, आपको हर दिन अपने नवजात शिशु के शरीर की त्वचा को साफ करना चाहिए। इसके लिए आप किसी स्पंज या किसी कॉटन के कपड़े को पानी में भिगोकर उसके शरीर को हल्के हाथों से पोंछ सकते हैं। इसके बाद अपने 1 सप्ताह के शिशु को कॉटन के बने मुलायम और हल्के कपड़े पहना सकते हैं।
1 सप्ताह के शिशु दिन में लगभग 18 से 20 घंटे सो सकते हैं। इसलिए अपने 1 सप्ताह के शिशु के शिशु को सोने दें। अगर आपका 1 सप्ताह के शिशु सो रहा है, तो उसके आस-पास किसी भी तरह का शोर-शराबा न करें जिससे उसकी नींद प्रभावित हो। ध्यान भी रखें कि जब आपका बच्चा सो रहा हो, तब उसे खिलाने का भी प्रयास न करें। बच्चे को तभी खिलाएं जब वो नींद से जाग गया हो।
इन बातों का भी रखें ख्याल
शिशु के जन्म के बाद उसके कई तरह के टेस्ट जरूरी होते हैं। यदि आपके बच्चे में पीलिया, मुंह में इन्फेक्शन जैसे लक्षण नजर आते हैं, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। अधिकांश नवजात शिशुओं को ये बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए घबराएं नहीं और अपने शिशु को डॉक्टर के पास ले जाएं ताकि सही समय पर शिशु का इलाज हो जाए।
और पढ़ें : शिशुओं में गैस की परेशानी का घरेलू उपचार
कई बार शिशु की देखभाल करते समय आपको चिंता और तनाव भी हो सकता है। यदि आप भी ऐसी स्थिति में हैं, तो यहां कुछ बातें हैं, जो आपके काम आ सकती हैं :
अधिकांश लोग शिशुओं के डायपर एक ही तरह से बदलते हैं, लेकिन, आपको डायपर बदलने के अन्य तरीके भी आने चाहिए। इनमें से जो बच्चे के लिए सबसे आरामदायक तरीका हो आप उसका इस्तेमाल करें। शुरुआत में शायद आपके लिए ये थोड़ा कठिन हो सकता है, लेकिन आदत हो जाने के बाद आप नींद में भी बच्चे का डायपर आराम से बदल पाएंगे।
और पढ़ें : नवजात शिशु की मालिश के लाभ,जानें क्या है मालिश करने का सही तरीका
डायपर बदलने और उन्हें स्तनपान कराने के बाद आप बच्चे को नहला सकती हैं। लेकिन रोज अपने बच्चे को नहलाने की जरूरत नहीं है। शुरुआती 1 सप्ताह में, अपने बच्चे को सप्ताह में दो से तीन बार नहलाएं। बाकी के दिनों में गीले तौलिये शिशु के शरीर को पोछें। वैसे तो आप अपने बच्चे को कभी भी नहला सकते हैं। लेकिन आप रात में सोने से पहले बच्चे को नहलाएंगे तो वो असानी से सो सकता है।
नियमित रूप से बच्चे के बाल धोना आवश्यक नहीं है। सप्ताह में एक या दो बार बाल धो सकते है। कोशिश करें कि रोजाना तेल लगाने की वजह से बच्चे का बाल जब ज्यादा ऑयली हो जाए, तब शैंपू करें।
और पढ़ें : शिशु की बादाम के तेल से मालिश करना किस तरह से फायदेमंद है? जानें, कैसे करनी चाहिए मालिश
पहले सप्ताह में शिशु की देखभाल करते हुए ऐसी बहुत सी बातें हैं, जो आपको चिंता में डाल सकती हैं, उनमें से एक आपके बच्चे का ज्यादा सोना है, ऐसा होना स्वाभाविक भी है। शुरूआती महीने में बच्चा ज्यादा सोता है और फिर धीरे-धीरे यह सामान्य होने लगता है। शुरूआती कुछ हफ्तों में, कुछ बच्चों को उल्टी या कफ जैसी समस्या हो सकती है। फेफड़ों में बलगम भी इसका कारण हो सकता है।
डिस्क्लेमर
हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।
Murkoff, Heidi. What to Expect, The First Year. New York: Workman Publishing Company, 2009. Print version.
American Academy Of Pediatrics. American Academy of Pediatrics Caring for Your Baby and Young Child, Birth to Age 5 6th Edition. New York: Bantam, 2014. Print version.
Newborn care and safety. https://www.womenshealth.gov/pregnancy/childbirth-and-beyond/newborn-care-and-safety. Accessed On 13 October, 2020.
Child development (1) – newborn to three months. https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/healthyliving/child-development-1-newborn-to-three-months. Accessed On 13 October, 2020.
Maternal and child health – visit 2 – two week visit. https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/healthyliving/Maternal-and-child-health-two-week-visit. Accessed On 13 October, 2020.
Skin care for your baby. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2528704/. Accessed On 13 October, 2020.
BREASTFEEDING, CARE, PREVENTIVE MEASURES AND TREATMENT FOR THE NEWBORN. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK326679/. Accessed On 13 October, 2020.
Current Version
05/11/2021
Bhawana Awasthi द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: Bhawana Awasthi