ऐसी 5 बातें जो नवजात शिशु की देखभाल के लिए हैं जरूरी

By Medically reviewed by Mayank Khandelwal

नवजात शिशु की देखभाल कैसे की जाए? यह सवाल हर नए पेरेंट्स के मन में होता है। न्यू बॉर्न बेबी खुशियां लाने के साथ ही माता-पिता के लिए ढेरों जिम्मेदारियां लेकर आता है। उन्हीं में से एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है नवजात शिशु की देखभाल। दरअसल, कुछ छोटी-छोटी चीजें हैं जो अनजाने में पेरेंट्स करते हैं और ये शिशु के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं।

डॉ. दिग्विजय सिंह (शिशु रोग विशेषज्ञ, रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल और नोबल आई केयर के निदेशक) ने द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया कि “शिशु की फोटो क्लिक करना पेरेंट्स को खूब पसंद आता है लेकिन, यह शिशु के लिए कितना असुरक्षित है इस बात से वे अंजान होते हैं। दरअसल, जिन कैमरों के लिए कोई मानक तय नहीं है (शादी की फोटोग्राफी के लिए उपयोग किए जाने वाले, जिनमें रोशनी का स्तर उच्च और फ्लैश बड़ा होता है) एक महीने से कम उम्र के शिशु को नुकसान का खतरा पहुंचा सकता है।”

दूसरी ओर, डॉक्टर सलाह देते हैं कि “बिना फ्लैश के फोटोग्राफी से नवजात शिशुओं को हानि नहीं पहुंचती। हालांकि, एक से दो सप्ताह के न्यू बॉर्न बेबी की अंधेरे कमरे में फ्लैश लाइट फोटोग्राफी नहीं करनी चाहिए।”

“हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में ऐसी ही छोटी-छोटी बातें जानेंगे जो नवजात शिशु की देखभाल और नवजात शिशु के स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी हैं।

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नवजात शिशु की देखभाल करते वक्त समय पर डायपर न बदलना

नवजात शिशु की देखभाल के दौरान डायपर का उपयोग पेरेंट्स के साथ-साथ शिशु के लिए भी सुविधाजनक होता है लेकिन, अगर नवजात शिशु का डायपर समय पर न बदला जाए तो यह उसके लिए नुकसानदायक हो सकता है। दरअसल, न्यू बॉर्न बेबी छह महीने के शिशु से ज्यादा यूरिन पास करता है, जिसकी वजह से डायपर को जल्दी-जल्दी बदलने की आवश्यकता होती है। अगर डायपर को समय पर न बदला जाए तो स्किन रैशेज, खुजली और संक्रमण जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए नवजात शिशु की देखभाल करते समय डायपर समय से बदलना प्राथमिकता होनी चाहिए।

लोगों का बच्चे को किस करना

नवजात शिशु पर सभी को प्यार आता है और वे उनको किस करके अपना प्यार जताते हैं लेकिन, ध्यान दें इससे आप अनजाने में शिशु की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। दरअसल, जन्म के शुरुआती दिनों में न्यू बॉर्न बेबी बेहद संवेदनशील होता है। उसे किस करने से बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है। जैसे-एक मामले में 18 दिन की एक नवजात शिशु की मृत्यु वायरल मैनिंजाइटिस (viral meningitis) से हो गई थी जो हर्पीस वायरस एचएसवी-1 (herpes virus HSV-1) की वजह से होता है। इस बात की डॉक्टरों ने भी पुष्टि की थी कि नवजात शिशु को किस करने से वायरस शिशु के अंदर पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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उंगली से बच्चे की नाक साफ करना

जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं उनमें नाक और कान को साफ करने के तरीके खुद-ब-खुद डेवलप होते रहते हैं। हालांकि, शिशु ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं जिसकी वजह से उनकी नाक में गंदगी जम जाती है लेकिन, पेरेंट्स टिशू या अपने हाथ से नाक से म्यूकस बाहर न निकालें। इससे नवजात शिशु की नाक की झिल्ली (nasal membrane) को नुकसान पहुंच सकता है। नवजात शिशु की देखभाल के लिए डॉक्टर की सलाह से आप नेसल एस्पिरेटर (nasal aspirator) या सेलाइन नेजल ड्रॉप का उपयोग कर सकते हैं।

रेगुलर जांच न करवाना

नवजात शिशु की देखभाल के लिए शिशु का नियमित रूप से हेल्थ चेकअप करवाना बहुत जरूरी होता है। हो सकता है कि बच्चा हेल्दी और स्वस्थ लग रहा है लेकिन, उसको कोई स्वास्थ्य समस्या हो। ऐसे में माता-पिता बच्चे का रेगुलर चेक-अप करवाना न भूलें। साथ ही शिशु की किसी भी बीमारी के लिए घरेलू उपाय ट्राई करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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बच्चे को पेट के बल सुलाना

बच्चे को पेट के बल सुलाने की गलती माता-पिता को नहीं करनी चाहिए। इससे शिशु को नुकसान पहुंच सकता है। एक साल से कम उम्र के शिशु को पेट के बल सुलाने से सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम (sudden infant death syndrome) होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बच्चे को पीठ के बल सुलाना ही सही रहता है।

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नवजात शिशु को कैसे नहलाएं?

नवजात शिशु की देखभाल के दौरान नवजात शिशु को नहलाना सबसे मुश्किल काम होता है। छोटे बच्चों की स्किन और हड्डियां बहुत ही नाजुक होती हैं। ऐसे में उन्हें नहलाते समय सावधानी का खास ख्याल रखना चाहिएः

स्पंज बाथ

जन्म के लगभग एक से डेढ़ माह तक बच्चे को नहलाने के लिए स्पंज बाथ सबसे बेहतर तरीका होता है। इस दौरान बच्चे को हफ्ते में सिर्फ दो से तीन बार ही नहलाएं। ज्यादा बार नहलाने से बच्चे की त्वचा रूखी हो सकती है। साथ ही, स्पंज बाथ के लिए हल्के गुनगुने पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए। नहाने के तुरंत बंद बच्चे के शरीर का पानी पोछें और उसे कपड़े पहनाएं। ज्यादा समय तक बच्चे के शरीर को भीखा हुआ नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे को बहुत जल्द सर्दी-जुकाम या ठंड लगने की समस्या हो सकती है।

अपने बच्चे को नहलाने से पहले इन वस्तुओं को तैयार रखें:

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नवजात शिशु की देखभाल के दौरान स्पंज बाथ से कैसे नहलाएं

छोटे बच्चे को हमेशा बंद कमरे में ही नहलाएं। खुले में नहलाने से बच्चे को ठंड लग सकती है। साथ ही, बच्चे को धूप वाले स्थान में भी नहीं नहलाना चाहिए। सबसे पहले एक टब में हल्का गुनगुना साफ पानी भरें। सबसे पहले वॉश क्लॉथ से बच्चे की आंखों को साफ करें। उसके बाद बच्चे के कान साफ करें। इसके बाद बच्चे के शरीर को कपड़े की मदद से गीला करें, फिर साबुन लगाएं। इसके बार गीले कपड़े से बच्चे के शरीर को फिर से साफ करें। इसी तरह बच्चे के सिर को पहले कपड़े की मदद से गीला करें, फिर शैंपू लगाएं और फिर उसे गीले कपड़े की मदद से साफ कर दें।

ध्यान रखें कि, इस दौरान साबुन या शैंपू बच्चे की आंख में आंख के आस-पास न जाएं। साथ ही, बाथ के दौरान बच्चे के शरीर को लगातार गीला रखें, ताकि उसे ठंडा का एहसास न हो।

बच्चे के पूरे शरीर को इसी तरह साफ करने के बाद अब मुलायम कपड़े से उसके शरीर को अच्छे से पोछें और साफ कपड़े पहनाएं।

नवजात शिशु की देखभाल से जुड़ी ये कुछ साधारण बातें हैं पेरेंट्स जिन पर ध्यान नहीं देते हैं। नवजात शिशु को किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर माता-पिता का पहला कदम डॉक्टर से सलाह लेना ही होना चाहिए।

नवजात शिशु की देखभाल के लिए हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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रिव्यू की तारीख सितम्बर 10, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया जनवरी 17, 2020

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