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बच्चों के खाने में फूंक मारना पड़ सकता है भारी, ध्यान रखें इन बातों का

बच्चों के खाने में फूंक मारना पड़ सकता है भारी, ध्यान रखें इन बातों का

कई पेरेंट्स की आदत हाेती है कि वो बच्चे को गर्म खाना खिलाने से बचाने के लिए उसे खाना फूंक-फूंक कर खिलाते हैं। सुनने में यह भले ही छोटी सी बात लगे, पर हम आपको बता दें कि यह आपकी यह आदत बच्चे सेहत पर भारी पड़ सकती है। ऐसा करने से आप बच्चे को बैक्टीरिया खिला रहे होते हैं। जी हां, ये फैक्ट है। बच्चों के खाने में फूंक मारना (Blowing children’s food) , ऐसा करने से बच्चे में इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है, जो कि बच्चे की हेल्थ के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। खाने में फूंक मारने को लेकर क्या है सच, आज हम इसके बारे में बात करेंगे यहां। डॉक्टर्स भी इसे न करने की सलाह देते हैं कि ऐसा न करें। तो बच्चों काे खाना खिलाते समय पेरेंट्स ये गलतिया न करें। जानें यहां कि बच्चों के खाने में फूंक मारना (Blowing children’s food) क्यों भारी पड़ सकता है?

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बच्चों के खाने में फूंक मारना (Blowing children’s food) पड़ सकता है भारी, जानिए यहां?

अब आप सोच रहे होंगे की ऐसा कैसे होता है, तो आइए जानते हैं जब अब इसके बारे में विस्तार में यहां।बच्चों के खाने में फूंक मारना, इसलिए मना किया जाता है कि ऐसा करने पर हमारे मुंह के इंफेक्शन और बैक्टीरिया बच्चों के खाने में पहुंच जाता है। फिर धीरे-धीरे इससे बच्चे को नुकसान पहुंचने लगता है। बच्चों का इम्यून वैसे भी बहुत कमजोर होता है। दरअसल हमारे दांतों पर बैड बैक्टेरिया का जमाव होता है। ऐसे में जब खाने में फूंक मारा जाता है, तो हमारे सांस के जरिये बैक्टेरिया खाने में पहुंच सकता है। जिस कारण बाद में शिशु की तबयत भी खराब हो सकती है।

बच्चों के खाने में फूंक मारना : बच्चे के दांत को हो सकता है नुकसान (Baby teeth can be damaged)

आपको यह जानकार हैरानी होगी की दांतों में मौजूद कैविटी यानि कीड़ा या अन्य बैक्टेरिया एक मुंह से दूसरे मुंह में आसानी से जा सकता है। जी हां, किसी दूसरे का झूठा खाना खाने, झूठा पाने पीने या खाने में फूंक मारने आदि से भी फैल सकता है। कई बार यह बच्चों में भारी इंफेक्शन का कारण भी बन सकता है। बच्चों के खाने में फूंक मारना इसलिए भी गलत है, क्योंकि, इसकी वजह से मां मुहं का बैक्टीरिया दूसरे बच्चे के मुंह में भी पहुंच सकता है, जिससे बच्चे के दांतों में कैविटी की समसया भी देखी जा सकती है। बच्चों के खाने में फूंक मारना उनकी सेहत के लिए भी हानिकारक साबित हो सकता है। बच्चे को दांत के अलावा और भी कई गंभीर हेल्थ प्राॅब्लम हो सकती है।

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बच्चों के खाने में फूंक मारना : बढ़ सकता है इंफेक्शन का रिसक (The risk of infection may increase in children)

बच्चों के खाने में फूंक मारना इसलिए भी हानिकारक है, क्योंकि आप जब खाने में फूंक मारते हैं, तो इसकी वजह से बैड बैक्टेरिया खाने में पहुंचकर शिशु के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिसकी वजह से बच्चे की तबयित कई बार खराब हो जाती है। बच्चे के पेट के दर्द का कारण भी कई बार इस तरह के इंफेक्शन होते हैं, जो उनके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जिन बच्चों की इम्यूनिटी काफी कमजोर होती है, उनके लिए इसका खतरा अधिक होता है। कई बार बच्चों में गंभीर पेट के रोग का कारण भी यह बैक्टीरिया हो सकते हैं। इतना हीं, नहीं कई बार बच्चे में अचानक से देखी जाने वाली दस्त की समस्या का कारण भी यह इंफेक्शन होते हैं। इसलिए बच्चों को खाने में फूंक मारने की गलती पेरेंट्स कभी भी नहीं करनी चाहिए। फिर चाहें खाने का कितना ही लेट क्यों न हो रहा हो। बच्चों के खाने में फूंक मारना हर तरह से नुकसानदेह है।

इतना ही नहीं कई बार पेरेंट्स में होने वाली गंभीर बीमारी, जैसे कि कैंसर, डायबिटीज या और कोई डिजीज, जिसके बारे में पहले से पेरेंट्स को पता नहीं होता है, वो भी इस गलती के कारण बच्चे के अपने चपेट में ले सकती है। इसलिए बच्चों में बैक्टीरिया ट्रांसफर से बचाने के लिए जरूरी है कि आप उनके खाने में फूंक मारने की गलती न करें। उनकी हेल्थ से रिस्क न लें।

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बच्चों के खाने में फूंक मारना : प्‍लाक जमने लगता है (Plaque builds up)

कई बार बैक्‍टीरिया के संपर्क में आने के कारण शिशु के दांत पूरी तरह ठीक से निकलने से पहले ही उनपर प्‍लाक जमने लगता है, जिस कारण बच्‍चे के दांतों में कैविटी हो जाती है। बैक्‍टीरिया के पनपने से लेकर बच्चे के दांत में कीड़ा लगना शुरू हो जाता है। वहीं दांत आने की उम्र में बच्‍चों के दांत इस बैक्‍टीरिया की चपेट में आ सकते हैं। ऑस्‍ट्रेलियन स्‍टडी के अनुसार अधिकतर बच्‍चों को स्‍ट्रेप्‍टोकोकस म्‍यूटन नामक बैक्टीरिया अपनी मां से ही मिलते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, जब पेरेंट्स खाने पर फूंक मार कर, उसे शिशु को खिलाते हैं, तो उस दौरान इस बैक्‍टीरिया के फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसलिए खाने को ठंडा करना का इंतजार करना ज्यादा अच्छा विकल्प है, बजाए खाने में फूंक मारने के।

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बच्चे को खाना खिलाते समय इन बातों का ध्यान रखें (Keep these things in mind while feeding the baby)

बच्चों की अच्छी हेल्थ के लिए उन्हें फूंक कर खाना न खिलाएं। लेकिन साथ ही इन बातों का भी ध्यान रखें कि कुछ ऐसी और भी गलतियां न करें, जो बच्चे के सेहत पर भारी पड़ सकती है। जानिए कि बच्चे को खाना खिलाते समय पेरेंट्स को किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है, जानिए यहां:

  • जब आप बच्चे को खाना खिलाते हैं तो वह खाना पंखे के नीचे रखकर के भी ठंडा किया जा सकता है। किसी और तरीके से ठंडा करें, जैसे कि खाने पर हैंड फै से हवा करें।
  • यदि आपको दांतों से जुडी समस्या है या कोई डिजीज है या डायबिटीज पेशेंट्स है, तो बच्चे को अपनी झूठी चम्मच से खाना नहीं खिलाएं और न ही अपने झूठे गिलास में पानी दें।
  • हो सके तो बच्चे के होंठों पर डायरक्ट किस न करें।
  • बच्चे के मुंह की साफ सफाई और हायजिन का भी पूरा ध्यान रखें।
  • धीमी गति से खिलाए जाने वाले बेहतर भोजन नालाएं। छोटे-छोटे मील्स और आराम से लताएं। एक दम से खराब खाने वाले बच्‍चों में भोजन करने से ये रोग ठीक हो जाते हैं।
  • बच्चे को लेटाकर खाना बिल्कुल खाना न खिलाएं।
  • खाने के साथ बच्चे को तुरंत पानी न पीने दें।
  • बच्चे की हायजीन का पूरा ध्यान रखें, इसलिए यदि चम्मक खाते समय जमीन पर गिर जाता है, तो खाली पानी से धूलकर दोबारा न खिलाएं। क्योंकि खाली पानी से धाेने से बैक्टीरिया जाते नहीं हैं।

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तो आपने यहां जाना कि बच्चों के खाने में फूंक मारना क्यों नहीं खिलाना चाहिए। यदि आप भी ऐसा करते हैं तो ऐसा करने से बचें। यदि आपक बच्चे के खाने में फूंक मारने की गलती करते हैं, तो इससे बच्चे के लिवर या बैक्टीरिया संबंधी कई गंभीर बीमारी हो सकती है। वर्किंग पेरेंट्स समय की बचत के लिए सबसे ज्यादा यह गलती करते हैं, जो कि आगे जाकर आपके बच्चे की सेहत पर भारी पड़ सकता है। इसलिए पेरेंट्स को ऐसी गलती नहीं करना चाहिए। यदि आपको बहुत ज्यादा लेट हो रहा है, तो खाने को 5 मिनट के लिए फ्रिज में रख सकते हैं, इमरजेंसी केस पर। हमेशा नहीं, इसे अपनी आदत न बनाएं। खाने को ठंडा करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उसे पंखे के नीचे ठंडा करें। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड