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बच्चों में मम्प्स होने पर दिखाई देते हैं ऐसे लक्षण, ना करें इनको इग्नोर!

बच्चों में मम्प्स होने पर दिखाई देते हैं ऐसे लक्षण, ना करें इनको इग्नोर!

मम्प्स (Mumps) एक संक्रामक (Contagious) वायरल इलनेस है जो कानों के सामने स्थित सलाइवरी ग्लैंड्स (Salivary glands) को संक्रमित करती है। इन्हें पैरोटिड ग्लैंड्स (Parotid glands) कहा जाता है। यह बीमारी कई प्रकार के कॉम्प्लिकेशन का कारण भी बन जाती है। मम्प्स के लक्षणों में गले और जबड़े में सूजन, फीवर और सिर दर्द आदि शामिल हैं। ज्यादातर बच्चों में मम्प्स की समस्या देखी जाती है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकती है। बच्चों को एमएमआर वैक्सीन (MMR vaccine) के दो डोज दिलवा कर उन्हें इस बीमारी से बचाया जा सकता है। इस आर्टिकल में हम बच्चों में मम्प्स (Mumps in children) की बीमारी से संबंधित जानकारी दी जा रही है।

बच्चों में मम्प्स के कारण (What causes mumps in a child?)

मम्प्स वायरस के कारण होने वाली बीमारी है जिसे पैरामाइक्सोवायरस (Paramyxovirus) कहा जाता है। संक्रमित बच्चे के खांसने, छींकने या बात करने पर मुंह, नाक और गले से तरल पदार्थ के संपर्क में आने से दूसरे बच्चों में मम्प्स (Mumps in children) फैलता है। बता दें कि यह वायरस दरवाजे की कुंडी, खाने के बर्तन और पीने के कप जैसी सतहों पर भी रह सकता है। वायरस तब फैलता है जब कोई अन्य बच्चा इन वस्तुओं का उपयोग करता है और फिर अपनी नाक या मुंह को छूता है। बच्चा लक्षण दिखाई देने के एक से सात दिन पहले से संक्रामक रहता है और लक्षण दिखाई देने के पांच से नौ दिनों के बाद तक संक्रामक रह सकता है।

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बच्चों में मम्प्स होने का रिस्क कब होता है? (Which children are at risk for mumps?)

अगर वे ऐसे बच्चों के आसपास रहते हैं जिन्हें ये बीमारी है तो बच्चों में मम्प्स (Mumps in children) होने का रिस्क बढ़ जाता है। मम्प्स (Mumps) के लिए वैक्सीन नहीं लेने पर भी इस बीमारी का खतरा रहता है। मम्प्स 3 साल से कम उम्र के बच्चों और 40 से अधिक उम्र के वयस्कों में दुर्लभ है।

बच्चों में मम्प्स के लक्षण क्या हैं? (Mums symptoms in child)

वायरस (Virus) से संक्रमित होने के बाद बच्चों में मम्प्स (Mumps in children) के लक्षण दिखाई देने में 2 से 3 हफ्ते का समय लग सकता है। कई बच्चों में ना के बराबर या बहुत कम लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। इसके सबसे आम लक्षणों में निम्न शामिल हैं।

  • लार ग्रंथियों में सूजन और दर्द खास तौर पर जबड़े के पास
  • बात करने और चबाने में परेशानी
  • कान में दर्द (Earache)
  • फीवर (Fever)
  • सिर में दर्द (Headache)
  • मांसपेशियों में दर्द
  • थकान (Fatigue)
  • भूख कम लगना (Loss of Apatite)

ये लक्षण किसी दूसरी हेल्थ कंडिशन के भी हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। वे डायग्नोसिस के बाद बीमारी के बारे में बताएंगे।

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मम्प्स का डायग्नोसिस कैसे किया जाता है? (Diagnosis of Mumps)

डॉक्टर बच्चे के लक्षण और हेल्थ हिस्ट्री के आधार पर बीमारी का डायग्नोसिस करेंगे। वे बच्चे का फिजिकल एग्जामिनेशन भी करवा सकते हैं। इसके लिए डॉक्टर बच्चे का सलाइवा, यूरिन टेस्ट (Urine test) कर सकते हैं। जिनके जरिए बच्चों में मम्प्स (Mumps in children) का पता लगाया जा सकता है।

बच्चों में मम्प्स का इलाज कैसे किया जाता है? (How is mumps treated in a child?)

बच्चों में मम्प्स (Mumps in children)

बच्चों में मम्प्स (Mumps in children) का इलाज उनके लक्षणों, उनकी उम्र और ओवरऑल हेल्थ पर निर्भर करता है। साथ ही बीमारी की गंभीरता के आधार पर भी डॉक्टर इलाज करते हैं। इस बीमारी का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) का उपयोग नहीं किया जाता है। ट्रीटमेंट का लक्ष्य लक्षणों को कम करना होता है। टीट्रमेंट में निम्न शामिल हो सकते हैं।

  • बेड रेस्ट
  • अधिक मात्रा में फ्लूइड्स का सेवन
  • फीवर या डिस्कंफर्ट होने पर एसिटामिनोफेन या आईबुप्रोफेन का उपयोग

डॉक्टर से सभी दवाओं के जोखिम, लाभ और संभावित दुष्प्रभावों के बारे में पूछ लें। 6 महीने से कम उम्र के बच्चे को इबुप्रोफेन न दें, जब तक कि डॉक्टर ऐसा करने के लिए न कहे। बच्चों को एस्पिरिन न दें। एस्पिरिन रेई सिंड्रोम (Reye syndrome) नामक एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति पैदा कर सकती है।

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बच्चों में मम्प्स होने पर क्या कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं? (Complications of Mumps in children)

मम्प्स के कॉम्प्लिकेशन बच्चों की तुलना में व्यस्कों में अधिक दिखाई देते हैं। जिसमें निम्न शामिल हैं।

  • मेंनिनजाइटिस (Meningitis) इसमें ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को कवर करने वाली मेम्ब्रेन पर सूजन आ जाती है। ज्यादातर बच्चे इससे पूरी तरह रिकवर हो जाते हैं।
  • इंसेफ्लायटिस (Encephalitis) यह ब्रेन की सूजन है। ज्यादातर बच्चे इससे भी रिकवर हो जाते हैं।
  • ऑर्कायटिस (Orchitis) इसमें टेस्टिकल्स पर सूजन आ जाती है। इसकी वजह से टेस्टिकल्स में दर्द हो सकता है। दुलर्भ मामलों में यह इनफर्टिलिटी का कारण बन सकता है।
  • पैंक्रियाटायटिस (Pancreatitis) पैंक्रियाज पर आने वाली इंफ्लामेशन को पैंक्रियाटायटिस कहा जाता है। यह भी मम्प्स का कॉम्प्लिकेशन है।
  • बहरापन (Deafness)- सुनने की क्षमता में कमी आ सकती है।

बच्चे को मम्प्स से कैसे बचाया जा सकता है? (How can I help prevent mumps in my child?)

बच्चों को मम्प्स से बचाने का आसान तरीका मीजल्स (Measles), मम्प्स (Mumps) और रुबेला (Rubella) वैक्सीन का कॉम्ब्निनेशन यानी (MMR) वैक्सिनेशन है। एमएमआर वैक्सीन ज्यादातर लोगों को इम्यूनिटी प्रदान करती है। एमएमआर वैक्सीन (MMR Vaccine) के दो डोज दिए जाते हैं। पहला डोज 12 महीने से 15 महीने की उम्र में दिया जाता है। वहीं सेकेंड डोज 4-6 साल की उम्र में दिया जाता है। सेकेंड डोज फर्स्ट डोज के कम से कम 4 हफ्ते बाद दिया जाना चाहिए।

बता दें कि बच्चों को एमएमआर वैक्सीन देने के बाद कुछ साइड इफेक्ट्स भी दिख सकते हैं। वैक्सिनेशन के बाद हल्का बुखार या फिर माइल्ड रैशेज होना आम है। वैक्सिनेशन के साइड इफेक्ट्स में ज्वाइंट पेन (joint pain), लो प्लेटलेट काउंट भी हो सकते है। कुछ बच्चों में एलर्जिक रिएक्शन या सूजन भी हो सकती है। सभी बच्चों में ये लक्षण दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ बच्चों में साइड इफेक्ट्स बहुत कम होते हैं, वहीं कुछ में मॉडरेट या फिर सीरियस साइड इफेक्ट्स भी दिख सकते हैं। इस बारे में पहले ही डॉक्टर से जानकारी प्राप्त कर लें।

कुछ कंडिशन्स में बच्चों को एमएमआर वैक्सीन नहीं दी जाती है। वैक्सीन में मौजूद जिलेटिन और एंटीबायोटिक नियोमायसिन (Gelatin and the antibiotic neomycin) रिएक्शन का कारण बन सकते हैं। अगर बच्चे को पहली डोज के बाद गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हुआ है, तो दूसरी डोज नहीं दी जाती है। साथ ही अगर बच्चे को अगर कोई ऐसा डिसऑर्डर है, जो इम्यून सिस्टम पर बुरा असर डालेगा, तो ऐसे केस में वैक्सीन नहीं दी जाती है। इस बारे में डॉक्टर सही जानकरी देंगे।

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दूसरों में मम्प्स (Mumps) को फैलने से रोकने के लिए टिप्स

  • जब तक बच्चे में मम्प्स के लक्षण पूरी तरह ठीक नहीं हो जाते उन्हें स्कूल या डेकेयर में ना भेजें।
  • बच्चों की देखभाल करने से पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह से धोएं।
  • ध्यान रखें घर के दूसरे सदस्य खाना खाने से पहले हाथों को धोएं।
  • बच्चे के छींकते या खांसते वक्त मुंह को ढककर रखें इस बात का ध्यान रखें।
  • घर के हार्ड सरफेस, खिलौनों और दरवाजे की कुंडी को डिसइंफेक्टेंट से साफ करें।

उम्मीद करते हैं कि आपको बच्चों में मम्प्स (Mumps in children) के कारण और इससे बचाव कैसे करें इससे संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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सूत्र

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Mumps Vaccination/ https://www.cdc.gov/mumps/vaccination.html/

Accessed on 12th October 2021

Mumps/https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/15007-mumps/

Accessed on 12th October 2021

 

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ दिन पहले को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड