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बच्चों के लिए एमएमआर वैक्सीन क्यों है जरूरी, जानिए यहां

बच्चों के लिए एमएमआर वैक्सीन क्यों है जरूरी, जानिए यहां

वैक्सीनेशन या टीकाकरण की प्रोसेस में हमारे शरीर में माइक्रोऑर्गेनिज्म की कुछ मात्रा को पहुंचाया जाता है, ताकि हमारा शरीर उस माइक्रोऑर्गेनिज्म के खिलाफ एंटीबॉडी बनाना शुरू कर दे। वैक्सिनेशन की प्रोसेस बच्चे के जन्म के बाद ही शुरू कर दी जाती है ताकि उसका शरीर वायरस, बैक्टीरिया आदि के खिलाफ खुद को तैयार कर सके। बच्चों के लिए एमएमआर वैक्सीन (MMR vaccine for school kids) भी ऐसी ही एक वैक्सीन है, जो बच्चों को मीजल, मम्प्स और रुबेला (Measles, mumps, and rubella) से बचाने का काम करती है। बच्चों के लिए एमएमआर वैक्सीन में एक नहीं बल्कि तीन वैक्सीन का कॉम्बिनेशन होता है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको बच्चों के लिए एमएमआर वैक्सीन के बारे में जानकारी देंगे और साथ ही ये भी बताएंगे कि आपको अपने बच्चों को किस उम्र में एमएमआर वैक्सीन लगवानी चाहिए। जानिए बच्चों के लिए एमएमआर वैक्सीन (MMR vaccine for school kids) क्यों जरूरी होती है।

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बच्चों के लिए एमएमआर वैक्सीन (MMR vaccine for school kids)

एमएमआर वैक्सीन, MMR vaccine

एमएमआर वैक्सीन एक साथ तीन बीमारियों से बचाने का काम करती है। बच्चों को इसकी दो डोज की जरूरत होती है। पहला डोज 12 से 15 महीने की उम्र में लगता है, वहीं दूसरा डोज चार से छह साल की उम्र में लगता है। जब बच्चों को ये वैक्सीन नहीं लग पाती है, तो टीन और एडल्ट्स होने पर भी वैक्सीन लगवाई जा सकती है। वैसे तो एमएमआर वैक्सीन की बच्चों को दो डोज लगती हैं लेकिन डोज न पाने की स्थिति में आप इस वैक्सीन को लगवाने के संबंध में अधिक जानकारी डॉक्टर से प्राप्त कर सकते हैं। वहीं जिन एडल्ट्स में इम्युनिटी को लेकर समस्या है, उन्हें भी एक डोज दी जा सकती है। वहीं कुछ लोगों को दो डोज की जरूरत पड़ सकती है। मीजल, मम्प्स और रुबेला (Measles, mumps, and rubella) के कारण सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती है। अगर बच्चों को सही समय पर टीका नहीं लग पाया है, तो आपको डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

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बच्चों के लिए एमएमआर वैक्सीन : बच्चों को इन बीमारियों से बचाता है ये टीका

जैसा कि हमने आपको बताया कि बच्चों के लिए एमएमआर वैक्सीन ( MMR vaccine for school kids) एक नहीं बल्कि तीन बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। जानिए मीजल, मंप और रुबेला (Measles, mumps, and rubella) शरीर पर क्या असर करती हैं और ये संक्रमण शरीर में कैसे लक्षण पैदा करते हैं।

मीजल ((Measles) : मीजल की समस्या वायरस के कारण फैलती है। इस कारण से पूरे शरीर में लाल चक्ते के साथ ही बुखार, खांसी की समस्या, नाक बहना आदि समस्या होती है। इस संक्रमण के कारण लंग्स पर बुरा असर पड़ता है और मृत्यु भी हो सकती है।

मम्प्स (Mumps) : मम्प्स वायरस के कारण फैलने वाली बीमारी है। मम्प्स वायरस के कारण बच्चों की लार ग्रंथियों यानी सलाइवा ग्लैंड में सूजन आ सकती है। साथ ही आधे मुंह में भी सूजन दिख सकती है। इस संक्रमण के कारण बुखार, सिरदर्द, मसल्स पेन, भूख में कमी आदि लक्षण भी दिख सकते हैं।

रूबेला (Rubella): रूबेला भी वायरस के कारण फैलने वाली बीमारी है। रुबेला संक्रमण (Rubella) के कारण स्किन रैशेज के साथ ही ज्वाइंट्स पेन, फीवर आदि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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बच्चों के लिए एमएमआर वैक्सीन : क्या वैक्सिनेशन के बाद दिखते हैं दुष्प्रभाव?

बच्चों को एमएमआर वैक्सीन देने के बाद उनमें कुछ साइड इफेक्ट्स भी दिख सकते हैं। कुछ बच्चों में दुष्प्रभाव बहुत हल्के होते हैं, वहीं कुछ बच्चों में मॉडरेट या फिर सीरियस साइड इफेक्ट भी दिख सकते हैं। वैक्सिनेशन के बाद हल्का बुखार या फिर माइल्ड रैश आम बात है। वैक्सिनेशन के बाद ज्वाइंट पेन (joint pain) या फिर लो प्लेटलेट काउंट की संभावना भी हो सकती है। कुछ बच्चों में एलर्जिक रिएक्शन या फिर सूजन की समस्या भी हो सकती है। सभी बच्चों में ये लक्षण दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है।

बच्चों को एमएमआर वैक्सीन कब नहीं देनी चाहिए?

कुछ कंडीशन में बच्चों को एमएमआर वैक्सीन नहीं दी जाती है। अगर बच्चे को पहली डोज से सीरियस एलर्जी रिएक्शन हो गया हो, तो दूसरी डोज नहीं दी जाती है। वैक्सीन में मौजूद जिलेटिन और एंटीबायोटिक नियोमाइसिन (gelatin and the antibiotic neomycin) रिएक्शन का कारण बन सकते हैं। साथ ही अगर बच्चे को अगर कोई ऐसा डिसऑर्डर है, जो इम्यून सिस्टम पर बुरा असर डालेगा, तो ऐसे केस में वैक्सीन नहीं दी जाती है।अगर बच्चे को ऐसी मेडिसिन दी जा रही है, जो इम्यून सिस्टम (immune system) को कमजोर कर रहा हो, तो ऐसी स्थिति में भी वैक्सीन नहीं दी जाती है।अगर बच्चे को कैंसर है और कीमोथेरिपी (chemotherapy) से गुजरना पड़ रहा है, तो भी वैक्सीन देने की सिफारिश नहीं की जाती है। आप इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श कर सकते हैं।

अगर आपका बच्चा बीमार है या फिर उसे कोल्ड की समस्या है या फिर कोई साधारण बीमारी है, तो डॉक्टर से पूछें कि ऐसे में वैक्सीन की डोज लेनी चाहिए या फिर नहीं। अगर आपने बच्चे को हाल ही में अन्य वैक्सीन लगवाई है, तो इस बारे में भी डॉक्टर को जरूर बताएं। अगर बच्चे को कभी भी लो प्लेटलेट काउंट की समस्या रही है, तो डॉक्टर को जरूर बताएं। अगर वैक्सिनेशन के बाद बच्चे को रैशेज हो जाते हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि रैशेज कुछ समय बाद ठीक हो जाएंगे। आप डॉक्टर से बुखार के लिए दवा का नाम जरूर लिखवा सकती हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल कर सकें।

प्रेग्नेंट महिला और एमएमआर वैक्सीन (Pregnant women and the MMR vaccine)

वैसे तो बच्चों को एमएमआर वैक्सीन के दो डोज दिए जाते हैं लेकिन कंसीव करने से पहले भी इस वैक्सीन की डोज ली जा सकती है। अगर आप कंसीव करने की सोच रहे हैं, तो चार सप्ताह पहले एमएमआर वैक्सीन की डोज लेनी चाहिए ताकि होने वाले बच्चे को किसी तरह की समस्या से बचाया जा सके। अगर आपको लग रहा है कि आपने वैक्सिनेशन के करीब दो सप्ताह बाद ही कंसीव कर लिया है, तो इस बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं। वैसे तो वैक्सिनेशन के बाद प्रेग्नेंट महिलाओं में होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन आप इस बारे में डॉक्टर से एक बार जानकारी जरूर लें।

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अगर किसी कारण से बच्चे को वैक्सीन नहीं लग पाई है, तो आपको इस संबंध में डॉक्टर से बात करनी चाहिए। हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता। इस आर्टिकल में हमने आपको बच्चों के लिए एमएमआर वैक्सीन (MMR vaccine for school kids) के संबंध में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 11/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड