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पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस: बच्चों में होने वाले इन संक्रमणों के बारे में क्या यह सब जानते हैं आप?

पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस: बच्चों में होने वाले इन संक्रमणों के बारे में क्या यह सब जानते हैं आप?

फंगल इंफेक्शन (Fungal Infection) आमतौर पर एक कॉमन समस्या है। लेकिन, अगर इसका जल्दी और सही इलाज न कराया जाए, तो यह परेशानी गंभीर हो सकती हैं। ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है, उन्हें यह बीमारी अधिक होती है। इसके साथ ही जो लोग एंटीबायोटिक लेते हैं, उनमें भी फंगल इंफेक्शन (Fungal Infection) की संभावना अधिक रहती है। बच्चे भी इस बीमारी से बच नहीं पाते हैं और कई बार बच्चों को भी यह इंफेक्शन हो सकता है। आज हम बात करने वाले हैं पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) के बारे में। जानिए क्या है पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) और किस तरह से संभव है इस समस्या का उपचार?

पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस क्या है?(Pediatric Fungal Infections)

फंगल इंफेक्शन को माइकोसिस (Mycosis) कहा जाता है। यह एक स्किन डिजीज (Skin Disease) है, जो फंगस के कारण होती है। फंगस हज़ारों तरह की होती है। यह धूल, पौधों, जमीन और त्वचा पर अधिक रहती है और यह त्वचा में रैशेज या बम्प्स का कारण बनती है। स्किन फ़ंगाई (Skin fungi) शरीर के नमी वाले हिस्से के स्किन सेल की ऊपरी लेयर में रहती है जैसे उंगलियों या अंगूठे के बीच या ग्रोइन और डायपर एरिया में आदि। बच्चों में होने वाले फंगल इंफेक्शंस को पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) कहा जाता है। फंगल इंफेक्शन के कई कारण हो सकते हैं।

कुछ फ़ंगाई इंफेक्शन (Fungi infection) कम परेशानी भरे हो सकते हैं। लेकिन अन्य तरह के फंगल इंफेक्शन खुजली, सूजन, ब्लिस्टरिंग आदि का कारण बन सकते हैं। कई बार फंगल इंफेक्शंस के कारण शरीर के अन्य हिस्सों में भी रिएक्शन हो सकते हैं। जैसे की पहले ही बताया गया है कि कई तरह के फंगल स्किन इंफेक्शंस होते हैं। बच्चों में सामान्य पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) इस प्रकार हैं:

और पढ़ें: क्या कभी फंगल इन्फेक्शन लिए होम्योपैथिक मेडिसिन लेने के बारे में सोचा है?

पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस में रिंगवर्म (Ringworm)

पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) में पहली समस्या है रिंगवर्म। रिंगवर्म को टिनिया इंफेक्शन (Tinea infection) भी कहा जाता है। बच्चे के शरीर पर उनकी लोकेशन के आधार पर विभिन्न कवक रिंगवॉर्म का कारण बनते हैं। रिंगवर्म को रिंग शेप के लाल, स्केली पैचेज जिनका सेंटर क्लियर होता है, इससे पहचाना जा सकता है। रिंगवर्म की समस्या इन स्थितियों में बच्चों में बढ़ जाती है, अगर:

  • बच्चा कुपोषित हो (Malnourished)
  • पुअर हाइजीन (Poor hygiene)
  • गर्म वातावरण में रहता हो (Lives in warm climate)
  • किसी ऐसे बच्चे या पालतू जानवर के संपर्क में आया हो, जिसे यह समस्या हो (Contact with other children or pets that have ringworm)
  • रोग या दवा द्वारा इम्यूनोकम्प्रोमाइज्ड हो (Immunocompromised by disease or medication)

अब जानत हैं इस समस्या के सामान्य प्रकारों के बारे में।

और पढ़ें: कैंडिडियासिस फंगल इंफेक्शन क्या है? जानें इसके लक्षण, प्रकार और घरेलू उपचार

क्या हैं रिंगवर्म के सामान्य प्रकार? (Types of Ringworm)

पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) में रिंगवर्म के कई प्रकार हो सकते हैं। इनके लक्षण अलग हो सकते हैं और उपचार भी विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है। जानिए कौन से हैं रिंगवर्म के सामान्य सामान्य प्रकार?

एथलिट’स फुट (Athlete’s foot)

यह वो समस्या है, जो अधिकतर टीन्स और वयस्क पुरुषों में पाई जाती है और युवावस्था से पहले बच्चों में यह समस्या बहुत दुर्लभ है। इस समस्या के कई कारण हो सकते हैं। जिनमे से एक है अधिक पसीना आना, नहाने या स्विमिंग करने के बाद पैरों को अच्छे से न सुखाना, तंग जूते या जुराबों को पहनना और गर्म मौसम आदि। एथलिट’स फुट के लक्षण इस प्रकार हैं :

  • उंगलियों या अंगूठे के बीच की त्वचा का सफेद होना (Whitening of skin between the toes)
  • पैरों की स्केलिंग (Scaling of feet)
  • पैरों पर खुजली वाले रैशेज (Itchy rash on feet)
  • पैरों पर ब्लिस्टर्स (Blisters on feet)

इसके अलावा भी इनके अलग कारण हो सकते हैं। अब जानते हैं पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) में रिंगवर्म के अन्य प्रकारों के बारे में।

और पढ़ें: कान में फंगल इंफेक्शन के कारण, कैसे किया जाता है इसका इलाज?

पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस

पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस में जोक इच (Jock itch)

यह कंडिशन पुरुषों यानी मेल्स में बेहद सामान्य है और यह बीमारी गर्म मौसम में अधिक होती है। यही नहीं, महिलाओं में यह बीमारी बेहद दुर्लभ है। जोक इच के लक्षण इस प्रकार हैं:

स्कैल्प रिंगवर्म (Scalp ringworm)

स्कैल्प रिंगवर्म बेहद संक्रामक है। अधिकतर दो से दस साल के बच्चों को यह समस्या होने की संभावना अधिक होती है। लेकिन, वयस्कों में यह दुर्लभ है। स्कैल्प रिंगवर्म के लक्षण इस प्रकार हैं:

  • स्कैल्प पर लाल और स्केली रैश (Red, scaly rash on scalp)
  • स्कैल्प में खुजली (Itching of scalp)
  • स्कैल्प पर हेयर लॉस (Hair loss on scalp)
  • शरीर में कहीं भी रैशेज होना (Rash elsewhere on body)

और पढ़ें: फंगल इंफेक्शन (Fungal infection) के घरेलू उपचार, जल्द मिलेगी राहत

पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस में नेल रिंगवर्म (Nail ringworm)

नेल रिंगवर्म उंगलियों या अंगूठे में होने वाला वो इंफेक्शन है, जो नेल्स को थिक और डिफ़ॉर्म कर सकता है। यह समस्या उंगलियों के मुकाबले अंगूठे के नाखूनों में अधिक होती है और छोटे बच्चों की तुलना में वयस्कों और किशोरों इसके होने की संभावना ज्यादा रहती है। नेल रिंगवर्म के लक्षण इस प्रकार हैं

बॉडी रिंगवर्म (Body ringworm)

इस स्किन इंफेक्शन को चेहरे या शरीर पर रिंग जैसे रैशेज के रूप में पहचाना जा सकता है। यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। बच्चों में भी यह सामान्य है। गर्म मौसम में इस इंफेक्शन के होने की संभावना अधिक रहती है। बॉडी रिंगवर्म के सामान्य लक्षण इस प्रकार है:

इस बीमारी के लक्षण अन्य इंफेक्शंस या किसी रोग के जैसे हो सकते हैं। ऐसे में अगर आपको अपने बच्चे में इंफेक्शन का कोई भी लक्षण नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अब जानिए कैसे संभव है पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) में रिंगवर्म का निदान?

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रिंगवर्म का निदान कैसे संभव है? (Diagnosis of ringworm)

रिंगवर्म का निदान आमतौर पर बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच से किया जा सकता है। इसके साथ ही लक्षणों से भी डॉक्टर इसका निदान कर सकते हैं। इस समस्या के निदान को कन्फर्म करने के लिए डॉक्टर स्किन स्क्रैपिंग (Skin scraping) के लिए भी कह सकते है। अब जानिए कैसे संभव है इसका उपचार?

पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस में रिंगवर्म का उपचार (Treatment of ringworm)

क्योंकि, कवक स्किन पर लंबे समय तक रह सकते हैं, ऐसे में यह समस्या भी रोगी को बार-बार हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर रोगी को बार-बार उपचार को रिपीट करने के लिए कह सकते हैं। यह उपचार इन चीजों पर निर्भर करता है:

  • बच्चे की उम्र, संपूर्ण स्वास्थ्य और मेडिकल हिस्ट्री (Child’s age, overall health, and medical history)
  • स्थिति की गंभीरता (Extent of condition)
  • रिंगवर्म की लोकेशन (Location of the ringworm)
  • बच्चे की खास दवाईयों, प्रोसीजर और थेरेपीज को सहन करने की क्षमता (Child’s tolerance for specific medications, procedures, or therapies)
  • बच्चे या माता-पिता की राय और प्राथमिकता (Child or parent’s opinion or preference)

इस समस्या का उपचार इन तरीकों से किया जा सकता है:

  • ओरल एंटी फंगल मेडिकशंस(Oral anti-fungal medication): इन दवाईयों की डॉक्टर बच्चों को चार से आठ हफ्तों तक लेने के लिए कह सकते हैं। कुछ बच्चों को लंबे समय तक इसकी सलाह दी जा सकती है।
  • खास शैम्पू का प्रयोग किया जा सकता है, ताकि फंगस से छुटकारा पाने में मदद मिल सके।
  • अगर केरियोन (Kerion) मौजूद है, जो बड़ा, टेंडर और सुजा हुआ घाव होता है। तो डॉक्टर कुछ दवाईयों जैसे स्टेरॉयड की सलाह दे सकते हैं, ताकि सूजन कम हो सके।
  • शरीर, ग्रोइन और पैरों के रिंगवर्म का उपचार टॉपिकल एंटी फंगल एजेंट्स (Topical anti-fungal agent) या ओरल एंटीफंगल मेडिकेशन (Oral antifungal medication) से किया जा सकता है। इस उपचार की लेंथ रिंगवर्म की लोकेशन पर निर्भर करती है

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पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस में टिनिया वेर्सिकलर (Tinea Versicolor)

पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) में टिनिया वेर्सिकलर सामान्य फंगल स्किन इंफेक्शन है। जिसमें बच्चे की छाती या पीठ पर हलके या गहरे पैचेज हो जाते हैं। हालांकि, यह समस्या अधिकतर युवावस्था या जवानी की शुरुआत में होती है। लेकिन, बच्चों को भी इसके होने की संभावना रहती है।

टिनिया वेर्सिकलर के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Tinea Versicolor)

हालांकि, इस बीमारी का एक ही लक्षण है और वो है सफेद और लाइट ब्राउन रंग के पैचेज। हालांकि, ऐसा बहुत कम होता है कि इनमें खुजली हो या यह परेशान करें। पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) में इस इंफेक्शन के लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

  • सफेद, पिंक या ब्राउन पैच (White, pink, or brown patches)
  • केवल स्किन की लेयर के ऊपर इंफेक्शन (Infection only on the top layers of skin)
  • फेस पर कोई भी रैश न होना (No rash on face)
  • हीट या ह्यूमिडिटी में पैचेज का बदतर होना (Patches worsen in the heat or humidity)

अगर बच्चा स्टेरॉयड थेरेपी (Steroid therapy) पर हो या किसी बच्चे की इम्युनिटी कमजोर हो, तो यह पैच बदतर हो सकते हैं। यह पैचेज अधिकतर गर्मी में नोटिस होते हैं। टिनिया वेर्सिकलर के लक्षण अन्य स्किन कंडीशंस की तरह भी हो सकते हैं। ऐसे में निदान के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लें।

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टिनिया वेर्सिकलर का निदान कैसे हो सकता है? (Diagnosis of Tinea Versicolor)

पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) में टिनिया वेर्सिकलर का निदान बच्चों की मेडिकल हिस्ट्री और फिजिकल जांच पर निर्भर करता है। यह पैचेज दुर्लभ होते हैं और इनका आमतौर पर फिजिकल जांच से निदान किया जा सकता है। डॉक्टर इन पैचेज को अधिक क्लियर देखने के लिए अल्ट्रावॉयलेट लाइट कर ? प्रयोग कर सकते हैं या फिर स्किन स्क्रैपिंग्स (Skin scrapings ) का इस्तेमाल भी निदान के लिए किया जा सकता है। जानिए कैसे संभव है इसका उपचार?

टिनिया वेर्सिकलर का उपचार (Treatment of Tinea Versicolor)

इस समस्या के उपचार में डैंड्रफ शैम्पू का प्रयोग शामिल है, जिसकी सलाह डॉक्टर देते हैं। इस शैम्पू को बच्चे की त्वचा पर पूरी रात लगा कर रखा जाता है और सुबह धो दिया जाता है। ऐसा कई रातों तक किया जाता है। यह समस्या फिर से हो सकती है, ऐसे में अतिरिक्त उपचार की जरूरत हो सकती है। इसके अलावा डॉक्टर अन्य टॉपिकल क्रीम, ओरल एंटीफंगल दवाईयों या मंथली शैम्पू ट्रीटमेंट की सलाह दे सकते हैं। इस इंफेक्शन के कारण स्किन कलर में बदलाव आ सकता है। जिसे त्वचा का सामान्य रंग वापस में आने में कई महीने लग जाते हैं। यह तो थी पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) के बारे में जानकारी अब जानिए कि आप अपने बच्चे को इस समस्या से कैसे बचा सकते हैं।

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पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस से बचाव कैसे संभव है? (Prevention of Pediatric Fungal Infections)

बच्चों में फंगल इंफेक्शन बेहद सामान्य है लेकिन कुछ तरीकों से इससे बचा भी जा सकता है। इस समस्या से बचने का सबसे बेहतरीन उपाय है गुड हाइजीन। जानिए पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) से बचने के अन्य उपायों के बारे में:

  • अपने बच्चे को फंगल इंफेक्शन से बचाने के लिए उसकी त्वचा को साफ़ और सुखी रखें खासतौर पर जिन हिस्सों में यह संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है।
  • बच्चे को बार बार हाथ धोनें को कहें, खासतौर पर अगर उसने किसी व्यक्ति या जानवर को छुआ हो।
  • बच्चों का तौलिया, साबुन, कंघी जैसी चीजें अलग रखें। इन चीज़ों को शेयर करने से बचें।
  • बच्चे को कम्युनिटी शावर्स, स्विमिंग पूल जैसी जगहों में हमेशा जूते पहन कर रखने को कहें।
  • ध्यान रहे बच्चों को अधिक तंग कपडे, जूते या जुराबें न पहनने दें।

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उम्मीद है कि पीडियाट्रिक फंगल इंफेक्शंस (Pediatric Fungal Infections) के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। यह समस्या बेहद बैचनी और दर्द भरी हो सकती है। कुछ मामलों में इस समस्या को ठीक होने में कई हफ्तों से महीनों भी लग सकते हैं। अगर आपको अपने बच्चे में फंगल इंफेक्शन का कोई भी लक्षण नजर आएं तो तुरंत डॉक्टर से बात करें। ताकि,जल्दी निदान और उपचार से किसी भी गंभीर परेशानी से बचा जा सके। कई मामलों में डॉक्टर रोगी को अपनी डायट या अन्य रोजाना की आदतों को बदलने के लिए भी कह सकते हैं ताकि भविष्य में इस समस्या के उपचार या इससे बचाव में मदद मिल सके।

अगर आपके दिमाग में इस समस्या के बारे में कोई भी चिंता या सवाल है तो डॉक्टर से बात करें। इसके साथ ही आप हमारे फेसबुक पेज पर भी अपने सवालों को पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/09/2021 को
और Hello Swasthya Medical Panel द्वारा फैक्ट चेक्ड