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फंगल इंफेक्शन (Fungal infection) के घरेलू उपचार, जल्द मिलेगी राहत

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील · फार्मेसी · Hello Swasthya


Sushmita Rajpurohit द्वारा लिखित · अपडेटेड 26/04/2021

फंगल इंफेक्शन (Fungal infection) के घरेलू उपचार, जल्द मिलेगी राहत

फंगल इंफेक्शन (Fungal infection) एक आम संक्रमण है और फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार भी उपलब्ध हैं। किसी व्यक्ति में फंगल इंफेक्शन तब होता है, जब कवक (फंगस) शरीर के किसी भाग को प्रभावित करती है। इम्यून सिस्टम जब इनसे लड़ने में सक्षम नहीं होता है, तब फंगल इंफेक्शन (Fungal infection) होने की संभावना बढ़ जाती है। इसमें त्वचा की ऊपरी सतह पर पपड़ी, पैरों में खुजली, पैरों के नाखूनों का पीला और मोटा होना, त्वचा पर लाल चकत्ते बनना और उनके चारों ओर खुजली होना, पसीने वाले हिस्सों में ज्यादा खुजली होना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। यह ज्यादातर पैर की उंगलियों के पोरों पर, उनके बीच की जगहों पर तेजी से फैलता है। फंगल इंफेक्शन (Fungal infection) कई प्रकार के होते हैं, जैसे :

फंगल इंफेक्शन के प्रकार? (Types of Fungal infection)

फंगल इंफेक्शन अलग-अलग तरह के होते हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • एथलीट फुट (Athlete’s Foot) – पैरों में होने वाली फंगल इंफेक्शन को एथलीट फुट कहा जाता है। इसके अलावा इसे टीनिया पेडिस (Tinea Pedis) मेडिकल टर्म से भी जाना जाता है। यह पैरों में होने वाली सामान्य प्रकार की फंगल इंफेक्शन है। एथलीट फुट प्रायः स्पोर्ट्स एक्टिविटी में शमिल होने वाले लोगों के साथ-साथ उन लोगों को  भी यह परेशानी होती है, जो लगातार कई-कई घंटों तक जूता पहनते हैं या आउटडोर कामों में व्यस्त रहते हैं।
  • जोक खुजली (Jock Itch)- जांघों में खुजली की समस्या को जोक इच या टीनिया क्रूरिस (Tinea Cruris) कहते हैं। शरीर के जिस हिस्से में पसीना ज्यादा होता है, उसी जगह पर जोक इच होने की संभावना ज्यादा रहती है। इसलिए ग्रोइन, हिप्स, थाइज या अंडरआर्म्स में यह फंगल इंफेक्शन ज्यादा होता है।
  • रिंगवार्म (Ringworm)- रिंगवर्म को दादटीनिया कॉर्पोरिस (Tinea Corporis) भी कहा जाता है। यह इंफेक्शन बालों और नाखूनों पर ज्यादा होता है। रिसर्च के अनुसार रिंगवर्म के अनुसार की वजह से जोक इच एथलीट फुट जैसी समस्या शुरू हो जाती है। लेकिन रिंगवर्म शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकता है।
  • कैंडिडिआसिस (Candidiasis)-  यीस्ट से होने वाले इंफेक्शन को कैंडीडायसिस कहा जाता है। अगर आप बीमार हैं या एंटीबायोटिक ले रहे हैं, तो यह इंफेक्शन का कारण बन सकता है।
  • अब इस आर्टिकल में आगे समझने की कोशिश करते हैं कि फंगल इंफेक्शन के लक्षण क्या होते हैं।

    और पढ़ें : अपनी डायट में शामिल करें ये 7 चीजें, वायरल इंफेक्शन से रहेंगे कोसों दूर

    फंगल इंफेक्शन के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Fungal infection)

    इसके लक्षण निम्नलिखित हैं। जैसे-

    • प्रभावित क्षेत्र लाल होना या छाले पड़ना
    • त्वचा में पपड़ी निकलना
    • संक्रमित क्षेत्र में खुजली या जलन होना
    • योनि के आसपास खुजली और सूजन
    • सफेद दाग आना और अत्यधिक खुजली होना
    • पेशाब करने या संभोग करने के दौरान जलन या दर्द होना
    • त्वचा रूखी हो जाना तथा दरारें पड़ जाना

    और पढ़ें : पेनिस फंगल इंफेक्शन के कारण और उपचार

    फंगल इंफेक्शन के कारण क्या हैं? (Cause of Fungal infection)

    इसका मुख्य कारण मिट्टी, हवा और पर्यावरण में मौजूद कवक (फंगस) होते हैं। यह समस्या किसी को भी हो सकती है। फंगल इंफेक्शन अक्सर फेफड़ों या त्वचा पर मुख्य रूप से अपना प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा भी फंगल इंफेक्शन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

    • इम्यून सिस्टम कमजोर होना 
    • ज्यादातर गर्म, नम वातावरण या त्वचा का नम रहना
    • एड्स रोग, एचआईवी संक्रमण, कैंसर, मधुमेह जैसी बीमारियां
    • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना
    • ज्यादा पसीना आना 
    • और पढ़ें : यीस्ट इंफेक्शन कैसे फर्टिलिटी को कर सकता है प्रभावित?

      फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार क्या हैं? (Home remedies for Fungal infection)

      फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं। जैसे-

      फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार दही (Cured):

      फंगल इंफेक्‍शन (Fungal infection) के घरेलू उपचार के लिए आप दही का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। समस्‍या होने पर दही को कॉटन में लेकर संक्रमित हिस्‍से पर लगाकर तीस मिनट के लिए छोड़ दें। फिर गुनगुने पानी से धो लें। इस उपाय को संक्रमण के साफ होने तक एक दिन में दो बार अपनाएं। इसके साथ ही दही में प्रोबायोटिक फैक्टर यानी ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो कि पेट को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इससे आपके डायजेशन में मदद मिलती है और साथ ही पेट में होने वाली हर परेशानी से राहत भी मिलती है। यह दूध के मुकाबले आसानी से पच जाता है।

      फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार लहसुन (Garlic):

      लहसुन में मौजूद उपयोगी एंटी-फंगल गुणों के कारण यह किसी भी प्रकार के इंफेक्शन का बहुत ही प्रभावी उपाय है। इसके अलावा, इसमें एंटी-बैक्‍टीरियल और एंटीबायोटिक गुण भी मौजूद होते हैं, जो रिकवरी की प्रक्रिया के लिए महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समस्‍या होने पर दो लहसुन की कली को अच्‍छे से पीसें। फिर इसमें जैतून के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर बारीक पेस्‍ट बना लें। फिर इस पेस्‍ट को संक्रमित हिस्‍से पर लगाकर तीस मिनट के लिए छोड़ दें। अब गुनगुने पानी से इसे धो लें। दरअसल लहसुन खाने में स्वाद और फ्लेवर डालने के साथ-साथ शरीर को पोषण देने का भी काम करता है। इसमें एंटीवायरल, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीफंगल गुण होते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन, मैंगनीज, कैल्शियम, आयरन आदि पोषक तत्व होते हैं।

      फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार हल्दी (Turmeric):

      हल्दी को प्राकृतिक एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और एंटी-फंगल गुणों के रूप में जाना जाता है। साथ ही, इसके हीलिंग गुण समस्या को ठीक करने और संक्रमण को दोबारा होने से रोकते हैं। फंगल इंफेक्शन से राहत पाने के लिए त्‍वचा के प्रभावित हिस्‍से पर कच्ची हल्दी की जड़ के रस को लगाएं। दो से तीन घंटे के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें। फिर फिर गुनगुने पानी से धो लें। संक्रमण के दूर होने तक इस उपाय को दिन में दो बार करें। हल्दी हम सभी के आहार में रोज शामिल होने वाला मसाला है। आयुर्वेद से लेकर आधुनिक चिकित्सा पद्धति तक हर जगह हल्दी के फायदों का उल्लेख मिलता है। इसकी जड़ का इस्तेमाल कई तरह की दवाओं में किया जाता है। इसका बोटेनिकल नाम करकुमा लोंगा (Curcuma longa) नाम है, जो कि जिंगीबरेसी (Zingiberaceae) फैमिली से आता है।

      फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार टी ट्री ऑयल (Tea tree oil):

      टी ट्री ऑयल में मौजूद प्राकृतिक एंटी-फंगल गुण फंगल इंफेक्शन को रोकने में मदद करते हैं। साथ ही इसके एंटीसेप्टिक गुण शरीर के अन्‍य भाग में इंफेक्शन के प्रसार को रोकते हैं। ट्री टी ऑयल में ऑलिव ऑयल और बादाम के तेल को बराबर मात्रा में लेकर मिलाएं फिर इस मिश्रण को संक्रमित त्‍वचा पर लगाएं। टी-ट्री ऑयल (Tea Tree Oil) को टी-ट्री (Tea Tree) की पत्तियों से निकाला जाता है। इसका बोटेनिकल नाम मेलेलुका अल्टरनिफोलिया (Melaleuca alternifolia) है जो कि Myrtaceae प्रजाति का है। यह मुख्यतः ऑस्ट्रेलियाई तटों पर पाया जाता है। इसा ऑयल त्वचा के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। यह मुंहासे, दाद, खुजली जैसी त्वचा संबंधित समस्याओं में काफी लाभदायक होता है

      पिछले कुछ वर्षों में इसका ऑयल पूरे विश्व में काफी इस्तेमाल किया जाने लगा है। वर्तमान में यह एसेंशसियल ऑयल कॉस्मेटिक, टॉपिकल मेडिसिन और दूसरे घरेलू उत्पादों में काफी इस्तेमाल किया जाने लगा है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-वायरल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं।

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      और पढ़ें : हर समय रहने वाली चिंता को दूर करने के लिए अपनाएं एंग्जायटी के घरेलू उपाय

      फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार नारियल का तेल (Coconut oil):

      यह फैटी एसिड इंफेक्शन के लिए जिम्‍मेदार फंगस को मारने में मदद करता है। नारियल के तेल को संक्रमित त्‍वचा पर लगाकर, थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। इंफेक्शन साफ होने तक इस उपाय को दिन में दो से तीन बार दोहराएं। आप चाहें तो नारियल तेल और दालचीनी के तेल (Cinnamon oil) को बराबर मात्रा में मिलाकर भी लगा सकते हैं। 

      फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार जैतून के पत्ते (Olive leaves):

      जैतून की पत्तों में एंटीफंगल के साथ-साथ एंटी-माइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं। इस कारण यह फंगस को दूर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा यह इम्यून सिस्टम (Immune system) को मजबूत बनाने में भी मदद करते हैं। इससे इंफेक्शन (Infaction) को तेजी से ठीक होने में मदद मिलती है। जैतून के पत्तों को पीसकर पेस्‍ट बना लें। फिर इसे संक्रमित त्‍वचा पर सीधा लगा लें। तीस मिनट लगा रहने के बाद इसे गुनगुने पानी से साफ कर लें।

      फंगल इंफेक्शन (Fungal infection) होने पर आप ऊपर बताए गए फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार के उपायों को अपना सकते हैं। ये इस समस्या को दूर करने में आपकी काफी मदद कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको लगे कि समस्या ज्यादा बढ़ रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी न करें। 

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