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कभी नजरअंदाज न करें बच्चों में होने वाली इन त्वचा संबंधी समस्याओं को!

कभी नजरअंदाज न करें बच्चों में होने वाली इन त्वचा संबंधी समस्याओं को!

हम सभी के लिए हेल्दी रहना बेहद जरूरी है फिर वो चाहें बच्चे हों या बड़े। जब बात आती है बच्चों के स्वास्थ्य की, तो बच्चों की इम्युनिटी बड़ों से अलग होती है। ऐसे में वो बीमारियों का भी जल्दी शिकार बनते हैं। इसी तरह से अलग होती है, बच्चों की त्वचा। त्वचा सम्बन्धी समस्याएं केवल बड़ों को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी प्रभावित करती हैं। बच्चों की त्वचा पर रैशेस, लाल निशान या वार्ट होना बहुत सामान्य है। इनमें से अधिकतर परेशानियां चिंता का कारण नहीं होती, लेकिन कुछ चीजें परेशान करने वाली हो सकती हैं, जिन्हें सही उपचार की जरूरत होती है। जानिए, कौन सी हो सकती हैं बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children)।

त्वचा की भूमिका (Role of Skin)

बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children) कौन सी हैं, इससे पहले जानते हैं कि त्वचा और त्वचा की भूमिका क्या है। त्वचा शरीर का सबसे बड़ा अंग है। त्वचा एक्सटर्नल हानिकारक तत्वों से हमारे शरीर की रक्षा करती है। जब त्वचा हेल्दी होती है तो इसकी कई परतें हमें प्रोटेक्ट करने में मेहनत करती हैं। लेकिन जब इसकी स्थिति ठीक नहीं होती, तो इसकी प्रभावी अवरोधक के रूप में काम करने की क्षमता कम हो जाती है। त्वचा के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं:

यह भी पढ़ें : त्वचा की चमक बढ़ाने के घरेलू उपाय

  • शरीर में फ्लूइड की मात्रा को मेंटेन रखना (Maintaining the Balance of Fluids in Body)
  • तापमान को सही बनाए रखना (Regulating Body Temperature)
  • प्रेशर और दर्द को समझना (Sensing Pressure and Pain)
  • बाहरी हानिकारक तत्वों से पूरे शरीर की रक्षा (Guarding the Whole Body from External Aggressors)

बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं कौन सी हैं? (Skin Diseases in Children)

बच्चों की त्वचा संवेदनशील और कोमल होती है। ऐसे में छोटी से छोटी चीज भी उनकी त्वचा को हानि पहुंचा सकती है। जैसे छोटे बच्चों को डायपर रैशेस होना सामान्य है। जानिए कौन सी हैं बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children):

फिफ्थ डिजीज (Fifth Disease)

फिफ्थ डिजीज (Fifth Disease) एक वायरल रोग है, जिसमें ज्यादातर बच्चे जल्दी और बिना जटिलताओं के ठीक हो जाते हैं। इस रोग को “स्लैप्ड चीक डिजीज ” भी कहा जाता है। यह ब्राइट लाल रैशेज आमतौर पर चेहरे से शुरू होते हैं और उसके बाद गर्दन, बाजू और टांग में फैल सकते हैं। कुछ दिनों के बाद यह रैशेज खुजली भरे हो सकते हैं इसके लक्षण इस प्रकार हैं

  • रैशेज (Rashes)
  • सिरदर्द (Headache)
  • हल्का बुखार (Mild Fever)
  • नाक का बहना या बंद होना (Runny or Stuffy Nose)
  • थकावट (Fatigue)
  • जी मचलना nausea
  • गले में खराश (Sore Throat)

कारण (Causes) : पार्वोवायरस बी19 (Parvovirus B19) को फिफ्थ डिजीज (Fifth Disease) का कारण माना जाता है। यह एयरबोर्न वायरस अधिकतम 8 -11 साल के बच्चों में स्लाइवा और श्वसन स्राव (respiratory secretions) से फैलता है।

निदान और उपचार (Diagnosis and Treatment) : इस बीमारी के निदान के लिए डॉक्टर सबसे पहले बच्चे के रैशेस की जांच करेंगे। कुछ मामले में डॉक्टर आपको एंटीबॉडी का टेस्ट कराने के लिए भी कह सकते हैं। इस बीमारी को गंभीर नहीं माना जाता और स्वयं ही यह ठीक हो जाती है। इसके लक्षणों को दूर करने के लिए डॉक्टर आपको कुछ दवाइयां दे सकते हैं। इस बीमारी से बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें। इसके साथ ही बच्चा के लिए पर्याप्त तरल पदार्थों का सेवन और आराम करना भी जरूरी है

चेचक (Chickenpox)

कुछ बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children) बेहद सामान्य है, इनमें से एक है चेचक। चेचक एक वायरल इन्फेक्शन है, जिससे बच्चे को पूरे शरीर में बुखार या खुजली वाले रैशेज हो सकते हैं। हालांकि, उन बच्चों में यह समस्या बहुत सामान्य है जिन्हें पहले यह रोग न हुआ हो या जिन्होंने इसकी वैक्सीन का प्रयोग नहीं किया हो। इस समस्या के लक्षण इस प्रकार हैं :

  • खुजली वाले रैशेज (Itchy Rashes)
  • सिरदर्द (Headache)
  • हल्का बुखार (Low Fever)
  • भूख की कमी (Loss of Appetite)
  • गले में खराश (Sore Throat)
  • पेट में दर्द (Stomach Ache)

कारण (Causes) : वेरीसेल्ला जोस्टर (Varicella Zoster) नामक वायरस को चेचक का कारण माना जाता है। इस वायरस के कारण बच्चे के शरीर पर दर्द भरे स्किन रैशेज हो सकते हैं, जिन्हें शिंगल्स (Shingles) कहा जाता है।

निदान और उपचार (Diagnosis and Treatment) : चेचक का निदान डॉक्टर बच्चे के शरीर पर हुए रैशेस के अनुसार कर सकते हैं। इस समस्या के उपचार के लिए डॉक्टर बच्चे को असायक्लोवीर (Acyclovir) नाम की दवाई देते हैं, ताकि इस बीमारी के लक्षण कम हो सके। लेकिन, यह दवा कुछ ही मामलों में दी जाती है। इस रोग के उपचार के लिए बच्चे को हल्का आहार, आराम करने और तरल पदार्थों को लेने की सलाह दी जाती है।

रिंगवर्म (Ringworm)

कुछ बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children) परेशान करने वाली हो सकती हैं। रिंगवर्म एक फंगल स्किन इन्फेक्शन है। कवक सूक्ष्म पौधे जैसे जीव होते हैं, जो नम, गर्म वातावरण में पनपते हैं। कवक हालांकि भयानक नहीं होते, लेकिन बीमारियों का कारण बन सकते हैं। यह त्वचा को भी संक्रमित कर सकते हैं। अगर आपके बच्चे के सिर या त्वचा में कहीं भी पपड़ीदार गोल पैच हैं और उसके सिर के किसी हिस्से पर बाल कम हो रहे हों, तो इस समस्या को रिंगवर्म के रूप में जाना जाता है। एक संक्रामक संक्रमण हो सकता है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

  • त्वचा पर रिंगवर्म के लक्षण (Symptoms of Ringworm on Skin) : त्वचा पर इस समस्या के कारण लाल, स्केली पैच हो सकते हैं। कुछ समय के बाद यह उभरे हुए प्रतीत हो सकते हैं। यह त्वचा रूखी, स्केली या पैचेज भरी हो सकती है। इस स्थान पर आपको खुजली, दर्द, जलन महसूस हो सकती है।
  • स्कैल्प में दाद के लक्षण (Symptoms of Ringworm on Scalp): स्कैल्प में शुरुआत में रिंगवर्म एक छोटे मुंहासे की तरह लग सकता है। इसके बाद यह पैची, परतदार या खुरदरा हो सकता है। इसके कारण बाल झड़ सकते हैं और वहां पर गंजनपान हो सकता है। इसके साथ ही स्कैल्प सूजी हुई और लाल हो सकती है। इसमें खुजली भी सामान्य है।

यह भी पढ़ें: वर्ल्ड कोकोनट डे: जानें नारियल के फायदे, त्वचा से लेकर दिल तक का रखता है ख्याल

रिंगवर्म के कारण (Causes): बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children) कवक के कारण भी हो सकती है। रिंगवर्म कवक के कारण होता है जो त्वचा, बाल या नाखूनों में रहते हैं। जिन्हें डर्माटोफायटस कहा जाता है। जब वो वातावरण जिसमे यह कवक रहते हैं, वो गर्म और नमी भरा हो जाती है। तो कवक बहुत तेजी से बढ़ते हैं और लक्षणों का कारण बनते हैं।

रिंगवर्म का निदान और उपचार (Diagnosis and Treatment): डॉक्टर इस समस्या का निदान देख कर ही कर सकते हैं। इसके साथ ही वो बच्चे में लक्षणों के बारे में भी पूछेंगे। डॉक्टर प्रभावित त्वचा का नमूना लेकर भी उसकी जांच करा सकते हैं। इस समस्या के उपचार के लिए एंटी फंगल क्रीम, स्प्रे या पाउडर का प्रयोग कर सकते हैं। इनका प्रयोग तब किया जाता है जब यह समस्या हल्की हो। गंभीर इन्फेक्शन होने पर आपको टोपिकल दवाइयों या पिल्स/सिरप लेने की सलाह दी जा सकती है। बच्चों को यह दवाइयों का प्रयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना चाहिए।

मस्सा (Wart)

मस्सा कठोर त्वचा का एक छोटा क्षेत्र होता है, जो आमतौर पर उभरा हुआ होता है। मस्से कई आकार, रंगों और शेप्स के हो सकते हैं। यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं। बच्चों को यह अधिकतर हाथों, पैरों और चेहरे पर होते हैं। बच्चों को मस्से होने की समस्या होने की संभावना अधिक होती है। मस्सों के लक्षण इसके प्रकार के अनुसार हो सकते हैं। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

  • फिलिफॉर्म वार्ट्स (Filiform Warts) − यह देखने में छोटे स्किन टैगस की तरह होते हैं। यह अधिकतर आंखों के उपचार या मुंह और नाक के चारों तरफ होते हैं।
  • कॉमन वार्ट्स (Common Warts) −कॉमन वार्ट्स त्वचा पर खुरदरे बम्प्स की तरह लगते हैं।
  • प्लांटर वार्ट्स (Plantar Warts)−यह पैरों के तलवों पर खुरदरे पैच की तरह दिखते हैं।
  • फ्लैट वार्ट्स (Flat Warts) −फ्लैट वार्ट्स बहुत छोटे फ्लैट, स्मूद बम्प्स की तरह दिखते हैं।

कारण (Causes) :बहुत से बच्चों को यह समस्या होती है। लेकिन, कई बच्चों को यह समस्या नहीं होती। डॉक्टर्स को भी इस बात की जानकारी नहीं है कि कुछ बच्चों को यह समस्या क्यों होती है। हालांकि, एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (Human Papillomaviruses) को इस समस्या का कारण माना गया है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस अन्य जर्म्स की तरह है।

निदान और उपचार (Diagnosis and Treatment) : बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children) आसानी से ठीक हो सकती हैं। इस समस्या का निदान डॉक्टर इसके लक्षणों के अनुसार करते हैं। इस समस्या का उपचार इसके प्रकार पर निर्भर करता है। इसलिए खुद इसका उपचार करने की जगह डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है। कुछ वार्ट्स समय के साथ खुद ही ठीक हो जाते हैं। कुछ वार्ट्स के उपचार के लिए डॉक्टर इन तरीकों को अपना सकते हैं:

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बच्चों की स्किन प्रॉब्लमस से जुड़े रिस्क फैक्टर्स कौन से हैं? (Risk Factors of Skin Disease)

बच्चों की त्वचा नाजुक होती है, ऐसे में छोटी सी समस्या भी परेशान करने वाली हो सकती है। बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children) उन्हें और माता-पिता दोनों के जीवन को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन, कुछ स्थितियों में यह समस्याएं होने का जोखिम बढ़ सकता है। बच्चों की स्किन प्रॉब्लमस से जुड़े रिस्क फैक्टर्स इस प्रकार हैं:

  • त्वचा में चोट (Injuries to the Skin)
  • स्किन इन्फेक्शन्स (Skin Infections)
  • हाथों और पैरों में भारी और लगातार पसीना (Hands or Feet that Sweat Heavily)
  • नेल बायटिंग (Nail Biting)
  • स्किन प्रॉब्लम से प्रभावित व्यक्ति के सम्पर्क में आना जैसे वार्ट्स (Direct Contact with other People’s Warts)
  • बच्चों को सही समय पर वैक्सीन न लगवाना (Newborns and Infants never had the Vaccine)
  • गर्म या नमी वाली जगह पर रहना (Living in a Warm, Humid Climate)

बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याओं से बचाव (How to Prevent Skin Disease)

कुछ बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children) ऐसी होती हैं, जिनसे बचाव संभव नहीं है, जिनमें कुछ जेनेटिक स्थितियां या किसी बीमारी के कारण होने वाली समस्याएं हैं। हालांकि, कुछ समस्याओं का बचाव इस तरह से किया जा सकता है

  • बच्चों को साफ़-सफाई का ध्यान रखने को कहें। वो लगातार अपने हाथों को साबुन और पानी से धोते रहें।
  • बच्चे के बर्तन या अन्य सामान को दूसरे लोगों के साथ शेयर करने से बचें।
  • इन्फेक्शन से बचाने के लिए उन्हें प्रभावित व्यक्ति के पास न जानें दें।
  • बच्चों को चीजों को या जिन्हें वो बार-बार छूता है, उसे साफ़ करते रहें।
  • बच्चे की पर्सनल चीजों जैसे कंबल, तौलिया, कंघी आदि को भी शेयर न करने दें।
  • बच्चे को पौष्टिक और संतुलित आहार ही खाने को दें। उसे जंक फ़ूड की आदत न डालें। इसके साथ ही अधिक उसे अधिक पानी पीने की सलाह भी दें।

Quiz : हेल्दी स्किन के लिए करने चाहिए ये जरूरी उपाय

  • बच्चे के लिए पर्याप्त आराम भी जरूरी है।
  • रोजाना उसे कुछ देर शारीरिक गतिविधियां जैसे कोई खेल खेलना, सैर करना, साइकिलिंग या स्विमिंग आदि करने को कहें।
  • सही समय पर वैक्सीनेशन जरूरी है, ताकि संक्रामक त्वचा के रोगों से बचा जा सके।
  • हार्श केमिकल या अन्य इरिटेंट्स से बच्चों को दूर रखें।
  • बच्चे की त्वचा को अधिक गर्मी, हवा या सर्दी से बचाएं।

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बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं दूर करने के लिए होम रेमेडीज (Home Remedies for Skin Diseases in Children)

बच्चों को स्किन रैशेज, सनबर्न या बग बायट जैसी समस्याएं होना बेहद आम हैं। अधिकतर मामलों में डॉक्टर की सलाह जरूरी है। लेकिन, आप कुछ समस्याओं को होम रेमेडीज से भी दूर कर सकते हैं। बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children) दूर करने के लिए होम रेमेडीज इस प्रकार हैं

  • बर्फ (ICE) : बच्चों में होने वाले रैशेज के कारण खुजली भी होती है। यह खुजली शिशु के लिए परेशान करने वाली हो सकती है। ऐसे में प्रभावित स्थान पर बर्फ का प्रयोग करने से उसे कुछ हद तक राहत मिल सकती है।
  • पेट्रोलियम जेली (Petroleum Jelly) : पेट्रोलियम जेली बच्चे की रूखी और पपड़ीदार त्वचा को सही करने में लाभदायक है। इससे डायपर रैश की समस्या भी कम हो सकती है।
  • ओटमील बाथ (Oatmeal bath) : ओटमील बाथ से भी बच्चे को कई त्वचा सम्बन्धी समस्याओं से राहत मिल सकती है।
  • नारियल तेल (Coconut oil) :नारियल तेल का प्रयोग कई समय से स्किन मॉइस्चराइजर के रूप में किया जाता रहा है। यह सैचुरेटेड फैट में उच्च होता है और इसमें एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण अधिक होते हैं। बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children) दूर करने के लिए इसका प्रयोग भी किया जा सकता है
  • प्लांट ऑयल्स (Plant oils) : प्लांट ऑयल्स जैसे ओलिव आयल, सनफ्लावर सीड आयल, जोजोबा आयल, कैमोमाइल आयल बच्चों की त्वचा सम्बन्धी समस्याएं दूर करने में लाभदायक हो सकते हैं। हालांकि, इनके प्रयोग से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

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बच्चों में त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Diseases in Children) दूर करने के लिए सबसे पहले आपको त्वचा की देखभाल के बारे में पूरा पता होना चाहिए। क्योंकि, कुछ समस्याओं को आप घर पर ही आराम से ठीक कर सकती हैं लेकिन कुछ स्थितियों में डॉक्टर की जांच और उपचार जरूरी है। ऐसे में, आपको इनके लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए। सही उपचार के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह और मार्गदर्शन अवश्य लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र
लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
AnuSharma द्वारा लिखित
अपडेटेड 4 days ago
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