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जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी है खतरनाक! खड़ी हो सकती है ये जानलेवा समस्या!

जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी है खतरनाक! खड़ी हो सकती है ये जानलेवा समस्या!

पानी से हमारा जीवन है, ये तो आप बखूबी जानते होंगे। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स हमें रोजाना भरपूर पानी पीने की सलाह देते हैं। पानी पीने से हमारे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं , जिससे हम बीमारियों से बचे रहते हैं। लेकिन यदि आपको ये पता चले कि पानी पीने से आपकी सेहत को नुक्सान पहुंच सकता है, तो आपका रिएक्शन कैसा होगा? ये बात हम नहीं, बल्कि साइंस खुद मान्य करता है कि जरूरत से ज्यादा पिया जाए, तो आपको गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ये तकलीफ वॉटर इंटॉक्सीकेशन (Water intoxication) कहलाती है। लेकिन वॉटर इंटॉक्सीकेशन (Water intoxication) क्या है और ये कैसे होता है, ये जानना भी बेहद जरूरी है। आइये जानते हैं इस ख़ास जानकारी को।
जैसा कि आप जान गए हैं कि जरूरत से ज्यादा मात्रा में पानी पीने से आपके स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हो सकता है, जिसे वॉटर इंटॉक्सीकेशन का नाम दिया गया है। इसके कुछ और नाम भी है, जिसमें हायपर हायड्रेशन (Hyperhydration), वॉटर टौक्सीमिया (Water toxemia) और वॉटर पॉयजनिंग (Water poisoning) जैसे नामों का समवेश भी होता है। हालांकि कितने अमाउंट में पानी पीने से आपको यह समस्या हो सकती है, इस बात की सटीक जानकारी अब तक नहीं प्राप्त हुई है, लेकिन आमतौर पर 1 घंटे में 1 लीटर से ज्यादा पानी, कई घंटों तक लगातार पीने पर आपको इस समस्या के होने की चांसेस बढ़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में शरीर में वॉटर इंबैलेंस की समस्या हो जाती है, जिसकी वजह से आपको वॉटर पॉयजनिंग हो सकती है। आइए अब जानते हैं इसके लक्षणों के बारे में।

वॉटर इंटॉक्सीकेशन (Water intoxication) : ध्यान दें इन लक्षणों पर

वॉटर इंटॉक्सीकेशन के लक्षण आपको कुछ घंटों में 3 से 4 लीटर पानी पीने के बाद दिखाई दे सकते हैं, जिसमें –
  • सिर दर्द (Head pain)
  • क्रैंपिंग (Cramping), स्पाज्म और मांसपेशियों में कमजोरी
  • नौशिया (Nausea) और वॉमिटिंग
  • फटीग (Fatigue)
इन जैसी समस्या हो सकती है। यह लक्षण आपको तब दिखाई देते हैं, जब आप वॉटर इंटॉक्सीकेशन के शिकार हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए आइए जानते हैं।

क्या करें, जब हो जाए वॉटर पॉयजनिंग? (Water poisoning)

वॉटर पॉयजनिंग(Water poisoning)

यदि आप या आपके किसी करीबी को वॉटर इंटॉक्सीकेशन (Water intoxication) यानी कि वॉटर पॉयजनिंग के यह लक्षण दिखाई देते हैं, जिसमें यदि खास तौर पर कमजोरी की समस्या होती है, तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। जब आपके शरीर में जरूरत से ज्यादा फ्लूइड जमा होने लगता है, तो शरीर में मौजूद सेल्स, जिनमें ब्रेन सेल्स का भी समावेश होता है, इन में सूजन आने लगती है। ब्रेन में सूजन (Swelling in brain) आने से आप सीजर्स (Seizures), कोमा (Coma) और यहां तक कि मौत के शिकार भी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में नमक युक्त खाना खाने से कुछ समय तक के लिए आराम हो सकता है, लेकिन इसके अलावा आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

वॉटर इंटॉक्सीकेशन (Water intoxication) या डिहायड्रेशन?

आपको एक बात की जानकारी दे दें कि वॉटर इंटॉक्सीकेशन (Water intoxication) और डिहायड्रेशन दोनों के लक्षण एक जैसे होते हैं, इसीलिए आपको इस बात का पता लगाना बेहद जरूरी है कि आपको दोनों में से कौन सी तकलीफ हुई है। यदि आप इन लक्षणों को सटीकता से नहीं पहचान पा रहे हैं, तो आपको तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। ऐसी स्थिति में पानी का इस्तेमाल कम मात्रा में करना ही आपके लिए फायदेमंद माना जाएगा। चिकित्सक की सलाह के अनुसार आपको इसके बाद पानी का सेवन करना चाहिए।

कितना पानी सही, कितना नहीं?

अब तक यह नहीं पता लगाया जा सका है कि पानी की कितनी मात्रा आपकी जिंदगी पर खतरा बन सकती है, लेकिन 1 घंटे में आपको कितना पानी पीना चाहिए, इसका ट्रैक रखकर आप इस स्थिति से बच सकते हैं। यह आपकी उम्र, जेंडर और ओवरऑल हेल्थ (Overall health) के मुताबिक जांचा जा सकता है। एक हेल्दी व्यक्ति की किडनी 1 दिन में 20 से 28 लीटर पानी बाहर निकाल सकती है, लेकिन किडनी 1 घंटे में सिर्फ 1 लीटर पानी की शरीर से बाहर निकालने का काम करती है। इसीलिए 1 घंटे में 1 लीटर से ज्यादा पानी पीने पर इसका सीधा प्रभाव किडनी पर पड़ता है और किडनी से संबंधित समस्याएं (Kidney Problems) पैदा हो सकती है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों में किडनी धीरे काम करती है और इसीलिए उन्हें सही अमाउंट में पानी पीना बेहद जरूरी है। साथ ही वॉटर इंटॉक्सीकेशन (Water intoxication) की समस्या बुजुर्गों और बच्चों में जल्दी हो सकती है।

क्यों होता है वॉटर इंटॉक्सीकेशन? (Causes of Water intoxication)

जब आप जरूरत से ज्यादा मात्रा में पानी पीते हैं, तो यह हाइपोनेट्रिमिया (Hyponatremia) की समस्या पैदा करता है। इसी वजह से खून में सोडियम कॉन्संटरेशन कम हो जाता है। यदि आप जरूरत से ज्यादा पानी पीते हैं, तो आपकी किडनी यह पानी बाहर नहीं निकाल पाती, जिसकी वजह से आपके रक्त में सोडियम की मात्रा कम हो जाती है और शरीर में मौजूद सेल्स फूलने लगते हैं। जो आगे चलकर वॉटर इंटॉक्सीकेशन (Water intoxication) में बदल जाता है। कुछ लाइफ थ्रेटनिंग केस में अक्सर देखा गया है कि व्यक्ति फिजिकल एक्टिविटी में इंवॉल्व होकर जरूरत से ज्यादा पानी पी लेता है, जिसकी वजह से उन्हें वॉटर इंटॉक्सीकेशन की समस्या हो सकती है।

क्या इससे बचाव है मुमकिन? (Prevention of Water intoxication)

यदि आप रोजाना जरूरत से ज्यादा पानी पी रहे हैं, तो आपको वॉटर इंटॉक्सीकेशन से बचने के लिए कुछ रूल्स फॉलो करने चाहिए।
  • इसमें सबसे पहला रूल है कि पानी तभी पियें, जब आपको प्यास लगी हो। जब तक आपको अच्छी तरह से प्यास ना लगे, पानी का सेवन ना करें।
  • आपके यूरिन का रंग (urine color) भी आप को समझने में मदद करेगा कि आपको पानी पीने की जरूरत है या नहीं। यदि आपकी यूरिन क्लियर रंग की है, तो समझना चाहिए कि आप जरूरत से ज्यादा पानी पी रहे हैं। लेकिन इस लक्षण को देखकर ये भी समझना चाहिए कि आपके शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी है और अब आपको कुछ समय तक पानी पीने की जरूरत नहीं है।
  • यदि आप फिजिकल एक्टिविटी (Physical activity) करने जा रहे हैं, तो सादे पानी की बजाय आप इलेक्ट्रोलाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें जरूरत के अनुसार सोडियम की मात्रा होती है। इस तरह आप वॉटर इंटॉक्सीकेशन से बच सकते हैं और खुद की सेहत को बेहतर बना सकते हैं।
  • सबसे बेहतर तरीका यही है कि आप अपने हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार पानी का सेवन करें, जिससे आपके शरीर में जरूरत से ज्यादा पानी न बढ़ जाए और आप वॉटर पॉयजनिंग (Water poisoning) के शिकार ना बने।
यदि आप इन बातों को ध्यान में रखते हुए पानी पिएंगे, तो सेहतमंद बन पाएंगे। लेकिन यदि इन बातों को नजरअंदाज करेंगे, तो बेहतर स्वास्थ्य को अचीव नहीं कर पाएंगे।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 20/03/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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