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Thrive Failure: थ्राइव फेलियर क्या है? बच्चों की सेहत से जुड़ी इस परेशानी को इग्नोर ना करें!

Thrive Failure: थ्राइव फेलियर क्या है? बच्चों की सेहत से जुड़ी इस परेशानी को इग्नोर ना करें!

बच्चे के जन्म के बाद शिशु की देखभाल से जुड़ी एक नहीं, बल्कि कई जिम्मेदारी होती है। वहीं अगर बच्चे की देखभाल में कोई कमी हो जाए या जेनिटकल कंडिशन की वजह से बच्चों के विकास पर असर पड़ता है। ऐसी ही एक शारीरिक समस्या है थ्राइव फेलियर (Thrive Failure)। बच्चों में थ्राइव फेलियर के कारण और इससे जुड़ी सभी जानकारी आपके साथ शेयर करेंगे।

  • थ्राइव फेलियर क्या है?
  • थ्राइव फेलियर के कारण क्या हैं?
  • थ्राइव फेलियर के लक्षण क्या हैं?
  • थ्राइव फेलियर का निदान कैसे किया जाता है?
  • थ्राइव फेलियर का इलाज क्या है?

चलिए अब एक-एककर थ्राइव फेलियर (Thrive Failure) से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं।

थ्राइव फेलियर (Thrive Failure) क्या है?

थ्राइव फेलियर (Thrive Failure)

थ्राइव फेलियर को अगर सामान्य शब्दों में समझें तो बच्चों वजन उम्र के अनुसार कम होना। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बच्चों में थ्राइव फेलियर होने की स्थिति में वेट (Weight) या रेट ऑफ वेट गेन (Rate of weight gain) उसी उम्र के बच्चों की तुलना में कम होना। नवजात शिशु या बच्चों में थ्राइव फेलियर होने पर बच्चों में शॉर्ट स्टैचर (Short Stature in kids) की समस्या भी देखी जाती है। हालांकि बच्चों में थ्राइव फेलियर होने की संभावना कई कारणों से बन सकती है, जिसके बारे में आर्टिकल में आगे समझेंगे।

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थ्राइव फेलियर के कारण क्या हैं? (Cause of Thrive Failure)

बच्चों में थ्राइव फेलियर के कारण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:

  • कैलोरी की कमी (Not enough calories)- बच्चों को आवश्यक कैलोरी की पूर्ति ना होना या जानकारी के अभाव में बच्चे को कैलोरी रिच फूड का सेवन कम करवाना।
  • कम खाना (Less eating)- कुछ बच्चे खाने-पीने में आनाकानी करते हैं और वो ठीक तरह से खाना नहीं खाते। ऐसी स्थिति थ्राइव फेलियर का कारण बन सकती है।
  • हेल्थ प्रॉब्लेम (Health problem)- हेल्थ प्रॉब्लेम खासकर अगर समस्या डायजेशन से जुड़ी हुई होने पर वजन बढ़ाना आसान नहीं होता है। इसके अलावा अगर बच्चे में गैस्ट्रोएसोफेगल रिफलक्स (Gastroesophageal reflux), क्रोनिक डायरिया (Chronic diarrhea), सिस्टिक फिब्रोसिस (Cystic fibrosis), क्रोनिक लिवर डिजीज (Chronic liver disease) या सीलिएक डिजीज (Celiac disease) की समस्या है, तो ऐसी स्थिति भी बच्चों में थ्राइव फेलियर का कारण बन सकती है।
  • फूड इन्टॉलरेंस (Food intolerance)- खाने-पीने की चीजों से भी वेट गेन में समस्या आ सकती है।
  • इंफेक्शन (Infections)- अगर बच्चा इंफेक्शन की समस्या का शिकार है,तो वजन नहीं बढ़ने का एक कारण यह भी माना जाता है। क्योंकि ऐसी स्थिति में कैलोरी की आवश्यकता ज्यादा होती है।

ऊपर बताई स्थिति बच्चों में थ्राइव फेलियर कारण बन सकती है। हालांकि इसके अलावा मेडिकल कंडिशन (Medical condition) और मेटाबॉलिक डिसऑडर (Metabolic disorders) भी थ्राइव फेलियर (Thrive Failure) की स्थिति पैदा कर सकती है।

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थ्राइव फेलियर के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Thrive Failure)

अमेरिकन एकैडमी ऑफ फेमली फिजिशियन (American Academy of Family Physicians) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार थ्राइव फेलियर की समस्या होने पर बच्चे का वजन आवश्यकता से कम होता है। इसके अलावा निम्नलिखित लक्षणों को ध्यान में रखकर बच्चों में थ्राइव फेलियर की समस्या को समझा जा सकता है। जैसे:

  • वेट गेन (Weight gain) करने में परेशानी होना।
  • बच्चे को चलने, बात करने या फिर क्रॉलिंग करने में परेशानी होना।
  • लर्निंग डिसएब्लिटी (Learning disabilities) की समस्या होना।
  • बच्चे का स्वभाव चिड़चिड़ा (Irritability) होना।
  • बच्चे का बिना कारण थका (Fatigue) हुआ महसूस करना।
  • प्यूबर्टी (Puberty) में देर होना।

ये लक्षण थ्राइव फेलियर (Thrive Failure) की पर इशारा करते हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में डॉक्टर से कंसल्टेशन बेहद जरूरी है।

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थ्राइव फेलियर का निदान कैसे किया जाता है? (Diagnosis for Thrive Failure)

थ्राइव फेलियर के डायग्नोसिस के दौरान डॉक्टर बच्चे की हेल्थ कंडिशन (Health condition) को समझने के साथ-साथ निम्नलिखित टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। जैसे:

इन टेस्ट रिपोर्ट्स के आधार पर थ्राइव फेलियर (Thrive Failure) का इलाज किया जाता है।

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थ्राइव फेलियर का इलाज क्या है? (Treatment for Thrive Failure)

अमेरिकन एकैडमी ऑफ फेमली फिजिशियन (American Academy of Family Physicians) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बच्चों में थ्राइव फेलियर के इलाज के लिए निम्नलिखित 5 बातों को डॉक्टर विशेष रूप से ध्यान रखते हैं और फिर इलाज शुरू करते हैं। इनमें शामिल है-

  • लक्षणों की गंभीरता (Severity of symptoms)
  • बच्चों का संपूर्ण स्वास्थ्य (Overall health of the child)
  • माता-पिता या देखभाल करने वालों की प्राथमिकताएं (Preferences of parents or caretakers)
  • पारिवारिक वातावरण (Family environment)
  • थ्राइव फेलियर का कारण (Cause of condition)

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इन 5 बातों को ध्यान रखकर थ्राइव फेलियर का इलाज (Treatment for Thrive Failure) किया जाता जाता है।

  • अगर बच्चे में न्यूट्रिशन की कमी है, तो ऐसी स्थिति में बच्चे के लिए डायट चार्ट डॉक्टर द्वारा बताई जाती है।
  • बच्चे को अगर नैचुरल तरीके से आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं होने पर सप्लिमेंट्स प्रिस्क्राइब किये जा सकते हैं।

इन दोनों पॉइंट्स के अलावा निम्नलिखित थेरिपी की भी सहायता ली जा सकती है। जैसे:

इन सबके साथ-साथ बच्चों का ध्यान रखने वाले या पेरेंट्स को भी बच्चे का विशेष ध्यान रखना पड़ता है और डॉक्टर से समय-समय पर कंसल्टेशन भी करवाते रहना चाहिए।

नोट: अगर बच्चों को मेडिकेशन (Medication) या सप्लिमेंट्स (Supplements) प्रिस्क्राइब की जाती है, तो डोज से ओवर डोज ना करें। जरूरत से ज्यादा मेडिकेशन या सप्लिमेंट्स के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।

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थ्राइव फेलियर का इलाज ठीक तरह से नहीं करवाने पर होने वाली स्थिति-

अगर बच्चे को थ्राइव फेलियर (Thrive Failure) की समस्या है और इलाज ठीक तरह से ना करवाने पर भविष्य में निम्नलिखित परेशानियां देखी जा सकती है। जैसे:

  • सीखने से जुड़ी समस्या (Learning disabilities) होना।
  • इमोशनल प्रॉब्लेम (Emotional problems) होना।
  • बच्चे का विकास (Restricted growth) ठीक तरह से नहीं होना।

बच्चों में थ्राइव फेलियर (Thrive Failure) होने पर पेरेंट्स को घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि इसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन ठीक तरह से डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह को ध्यान में रखना आवश्यक है। हालांकि जेनेटिकल कारणों को ध्यान में रखकर इलाज पर विचार किया जाता है। इसलिए बच्चे की पूरी हेल्थ कंडिशन (Babies health condition) को ध्यान में रखकर बच्चों में शॉथ्राइव फेलियर (Thrive Failure) का इलाज किया जाता है।

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ दिन पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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