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बच्चों को विटामिन डी की कमी से बचाने के लिए इन 9 लक्षणों को ना करें इग्नोर

बच्चों को विटामिन डी की कमी से बचाने के लिए इन 9 लक्षणों को ना करें इग्नोर

इंडियाबायोसाइंस (IndiaBioscience) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार भारतीय बच्चों में विटामिन डी की समस्या सामान्य है। इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 6 महीने से 30 महीने यानी ढ़ाई साल तक बच्चों में विटामिन डी की कमी से एक्यूट लोअर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Acute lower respiratory infection) की समस्या ज्यादा डायग्नोस की जाती है। इसलिए आज इस आर्टिकल में बच्चों के लिए विटामिन डी (Vitamin D for kids) से जुड़ी खास जानकारी आपके साथ शेयर करेंगे।

बच्चों में विटामिन डी की कमी (Vitamin D deficiency in kids) क्या है?

बच्चों के लिए विटामिन डी (Vitamin D for kids)

नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार अगर किसी भी कारण से अगर बच्चों में विटामिन डी की कमी हो जाए, तो ऐसी स्थिति में बच्चों को कई तरह की शारीरिक परेशानी शुरू हो सकती है। अगर बच्चों में विटामिन डी का लेवल 20 नैनोग्राम प्रति मिली लीटर से कम हो जाए, तो इसे विटामिन डी की कमी (Deficiency of Vitamin D) माना जाता है। बच्चों में विटामिन डी की कमी से हड्डियां (Bone) कमजोर होने के साथ-साथ कई अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है

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बच्चों के लिए विटामिन डी (Vitamin D for kids) क्यों महत्वपूर्ण है?

शरीर में विटामिन डी की कमी से बच्चों में हड्डियों से जुड़ी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं यूएस डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस (U.S. Department of Health and Human Services) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बच्चों में विटामिन डी की कमी के कारण हल्की फुल्की चोट लगने पर बोन फ्रैक्चर (Bone fracture) का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए शिशु एवं बच्चों के लिए विटामिन डी महत्वपूर्ण माना गया है। विटामिन डी एक ऐसा पोषक तत्व है, जिसे नियमित खानपान से प्राप्त किया जा सकता है। विटामिन डी हड्डियों के निर्माण के साथ-साथ बच्चों को इंफेक्शन (Infection) से बचाने में और हार्ट हेल्थ (Heart health) को हेल्दी बनाए रखने में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है। वही रिसर्च रिपोर्ट में इस बात की भी जिक्र की गई है कि शरीर को मिलने वाले कैल्शियम (Calcium) को भी एब्सॉर्ब करने में विटामिन डी की अहम भूमिका होती है। इसलिए बच्चों के लिए विटामिन डी (Vitamin D for kids) का सेवन आवश्यक माना गया है। बच्चों के शरीर में होने वाले बदलाव से विटामिन डी की कमी (Deficiency of Vitamin D) को समझा जा सकता है।

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बच्चों में विटामिन डी के कमी के लक्षण क्या हो सकते हैं? (Symptoms of Vitamin D deficiency in kids)

बच्चों में विटामिन डी की कमी होने पर निम्नलिखित लक्षण देखे जा सकते हैं। जैसे:

  1. हड्डियां कमजोर (Weak bone) होना।
  2. हड्डियों में दर्द (Pain) की शिकायत करना।
  3. शरीर के निचले हिस्से एवं पेट में दर्द (Stomach pain) रहना।
  4. बच्चे का जल्दी थक जाना।
  5. शरीर का विकास (Body growth) ठीक तरह से ना होना।
  6. मांसपेशियां कमजोर होना।
  7. बच्चों की कलाई पर सूजन (Wrist swelling) आना।
  8. बच्चे का चिड़चिड़ा (Irritating) होना
  9. बच्चे को बार बार निमोनिया (Pneumonia) होना।

बच्चों में विटामिन डी की कमी (Deficiency of Vitamin D) होने पर ये ऊपर बताये लक्षण आसानी से समझे जा सकते हैं। अगर इन लक्षणों को इग्नोर किया जाए तो कम उम्र में ही हड्डियों से जुड़ी परेशानियां एवं अन्य शारीरिक परेशानी शुरू हो सकती है। इसलिए ऐसी स्थिति होने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से कंसल्ट करें। बच्चों में विटामिन डी की कमी के लक्षण के साथ-साथ बच्चों में विटामिन डी की कमी के कारण को भी समझना बेहद जरूरी है।

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बच्चों में विटामिन डी के कमी के कारण क्या हो सकते हैं? (Cause of Vitamin D deficiency in kids)

बच्चों में विटामिन डी की कमी होने का कारण धूप (सूर्य की किरणों) के संपर्क ना आना। हालांकि भारत में सूर्य की रोशनी से मिलने वाले विटामिन की कमी नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसके बावजूद बच्चों में विटामिन डी की समस्या डायग्नोस की जा सकती है। इसके अलावा बच्चों में विटामिन डी की कमी (Deficiency of Vitamin D) के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। जैसे:

  • खाद्य पदार्थों से विटामिन डी (Vitamin D) की पूर्ति ना होना।
  • मालएब्जॉर्प्शन यानी खाद्य पदार्थों से विटामिन डी का अवशोषित नहीं कर पाना।
  • लिवर (Liver) से जुड़ी बीमारी होना।
  • बच्चे में कुपोषण की समस्या होना।
  • स्तनपान करने वाले बच्चों के माता में पोषण की कमी होना।

ये मुख्य कारण माने जाते हैं अगर बच्चों में विटामिन डी की समस्या होती है तो या फिर बच्चों में किसी हेल्थ कंडिशन की वजह से भी ऐसी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में बच्चों के लिए विटामिन डी (Vitamin D for kids) की पूर्ति के लिए ट्रीटमेंट शिरू की जाती सकती है।

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बच्चों के लिए विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए क्या है इलाज? (Treatment for Vitamin D deficiency in kids)

बच्चों के लिए विटामिन डी (Vitamin D for kids)

बच्चों में विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए निम्नलिखित तरह से इलाज की जा सकती है। जैसे:

सूर्य की रोशनी (Sun light)-

बच्चों के लिए विटामिन डी (Vitamin D for kids) की पूर्ति के लिए सूर्य की रोशन में बैठने से पूरी की जा सकती है। हालांकि सूर्य की रोशनी में जरूरत से ज्यादा बैठना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए बच्चों को सिर्फ सुबह की सूर्य की रोशनी में ही बैठाएं।

विटामिन डी रिच फूड (Vitamin D rich food)-

बच्चों के लिए विटामिन डी (Vitamin D for kids) की पूर्ति डेली डायट से भी की जा सकती है। इसलिए बच्चों को गाय का दूध, दही, मशरूम, मछली (ऑयली फिश), एग योल्क (Egg yolks), फलों के जूस (Fruits juice) जैसे खाद्य पदार्थों से पूरी की जा सकती है।

सप्लिमेंट्स (Supplements)-

बच्चों के लिए विटामिन डी सप्लिमेंट्स भी मेडिकल स्टोर से ली जा सकती है। हालांकि बच्चों को विटामिन डी सप्लिमेंट्स देना है या नहीं इसकी जानकारी डॉक्टर से लें। डॉक्टर भी बच्चे की हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखकर विटामिन डी सप्लिमेंट्स (Vitamin D Supplements) देने पर विचार करते हैं।

नोट: बच्चों के लिए विटामिन डी (Vitamin D for kids) के सप्लिमेंट्स आसानी से उपलब्ध होते हैं, लेकिन डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही दें। क्योंकि छोटे बच्चों को इससे साइड इफेक्ट्स होने की भी संभावना बनी रहती है।

इन अलग-अलग तरीकों से बच्चों में विटामिन डी की पूर्ति की जा सकती है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Center for Disease Control and Prevention) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार विटामिन डी बच्चे को मजबूत हड्डियों के निर्माण और रिकेट्स को रोकने में मदद करता है। रिकेट्स हड्डियों के नरम होने की स्थिति है, जो बढ़ते बच्चों में हो सकती है। रिसर्च रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 12 महीने से कम उम्र के बच्चों को 400 IU(400 IU) रोजाना आवश्यक है, वहीं 1 से 2 साल के बच्चों को प्रतिदिन 600-1000 IU विटामिन डी (Vitamin D) की आवश्यकता होती है।

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बच्चों के लिए विटामिन डी: ज्यादा विटामिन डी के सेवन से नुकसान भी हो सकता है? (Side effects of excess Vitamin D)

बच्चों के लिए विटामिन डी आवश्यक होता है, लेकिन यूएस डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस (U.S. Department of Health and Human Services) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार अगर बच्चों को जरूरत से ज्यादा विटामिन डी का सेवन (Vitamin D intake) करवाया जाए, तो इससे निम्नलिखित शारीरिक परेशानी का खतरा बना रहता है। जैसे:

  • हार्ट (Heart) और लंग्स (Lungs) के टिश्यू में कैल्शियम जमा होने लगते हैं।
  • किडनी स्टोन (Kidney stone) की समस्या हो सकती है।
  • किडनी डैमेज (Kidney damage) होने की भी संभावना हो सकती है।
  • बच्चे को कब्ज (Constipation) की समस्या हो सकती है।
  • बच्चे का वजन कम (Weight loss) हो सकता है।
  • मतली और उल्टी की समस्या हो सकती है।
  • बच्चे को खाने की इच्छा (Low appetite) नहीं हो सकती है।

इन तकलीफों के अलावा अगर बच्चे को पहले से कोई और बीमारी है, तो शारीरिक परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है। इसलिए बच्चों के लिए विटामिन डी (Vitamin D for kids) को आवश्यक बनायें, लेकिन संतुलित मात्रा में।

और पढ़ें : बच्चों के लिए विटामिन ए सप्लिमेंट्स लेने के पहले डॉक्टर से कंसल्टेशन है जरूरी

शिशु या बच्चों के शरीर में विटामिन डी की कमी (Deficiency of Vitamin D) होने पर पेरेंट्स को घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि इसका इलाज विटामिन डी ड्रॉप (Vitamin D drops) और बड़े बच्चों में विटामिन डी सप्लिमेंट्स के सेवन से दूर करने में मदद मिल सकती है। अगर आप बच्चों के लिए विटामिन डी (Vitamin D for kids) या किसी अन्य पोषक तत्वों से जुड़ी जानकारी पाना चाहते हैं, तो हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं हमारे हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों का जवाब देंगे। हालांकि अगर आपके बच्चे में विटामिन डी की कमी है, तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। क्योंकि हेल्थ एक्सपर्ट बच्चे की पूरी हेल्थ कंडिशन (Babies health condition) को ध्यान में रखकर सप्लिमेंट्स या अन्य मेडिकेशन देने का निर्णय लेते हैं, जिससे बच्चों को बीमारियों से दूर रखने में मदद मिलती है।

बच्चों को हेल्दी खाने की आदत डालें। इससे बच्चा स्ट्रॉन्ग होगा और इम्यून पावर भी बढ़ेंगी। नीचे दिए इस वीडियो लिंक को क्लिक करें और जानिए टेस्टी एंड हेल्दी फूड टिप्स।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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लेखक की तस्वीर badge
Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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