डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर को दूर करने के लिए प्रभावकारी है स्पीच थेरिपी!

    डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर को दूर करने के लिए प्रभावकारी है स्पीच थेरिपी!

    कई लोगों ने बच्चों में यह बात नोटिस की होगी कि बच्चे से कुछ पूछने पर वो पूरा जवाब देने में सक्षम नहीं होता है और कुछ ही शब्दों को बोल पाता है। ऐसे में पैरेंट्स को लगता है कि बच्चा छोटा है, इसलिए पूरा नहीं बोल पा रहा है। लेकिन ऐसा बच्चों में डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर (Developmental expressive language disorder [DELD]) कारण भी हो सकता है। यदि आपके बच्चे को डीईएलडी (DELD) है, तो उन्हें शब्दावली यानि कि कठिन शब्दों को याद रखने में और जटिल वाक्यों का उपयोग करने में कठिनाई हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि 5 साल के बच्चे से कोई सवाल पूछें और वह उसका पूरा जवाब न दे पाए या खुद ही बात भी ठीक से न बताए पाए, तो उसमें डेवलपमेंट एक्सप्रेस लैंग्वेज डिसऑर्डर हो सकता है। इसमें बच्चा केवल छोटे-छोटे वाक्य ही बोल पाता है। तो आइए जानते हैं कि डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर (Developmental expressive language disorder) क्या है?

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    डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर (Developmental expressive language disorder)

    जब किसी बच्चे को बात करने और अपनी प्रतिक्रिया अभिवयक्त करने में दिक्कत हो, यानि कि उसे अपनी ही बात बालने की शब्दों के चुनाव में कठनाई हो, तो उसे डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर (Developmental expressive language disorder) कहा जाता है। यानि कि इसमें बच्चे काे पता नहीं होता है कि उसे बोलना क्या है। ऐसा बच्चा उपयुक्त शब्दावली, व्याकरणिक रूप से सही और लंबे जटिल वाक्यों, शब्दों को याद करने में सक्षम नहीं होता है। जिस कारण उसे कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डेवलपमेंट एक्सप्रेस लैंग्वेज डिसऑर्डर को जानने के लिए आपको पहले एक्सप्रेसिव लैंग्वेज (Expressive language) क्या है, इसके के बारे में भी थोड़ा जानना होगा। इससे आपको इस डिसऑर्डर को समझने में काफी आसानी होगी।

    एक्सप्रेसिव लैंग्वेज यानि कि आपने भावों को या रिएक्शन को अभिव्यक्त करने का एक जरिया। फिर चाहें वो शब्दों से हो, वाक्यों से हो, इशारों से हो और लेखन के माध्यम से। इसमें व्यक्ति को पता होता है कि उसे किसी को जवाब देने के लिए या आपनी बात बोलने के लिए क्या शब्द बोलने हैं या क्या रिएक्शन व इशारे देने हैं। यह बात पता होता है। लेकिन जब कोई बच्चा ऐसा न कर पाए, यानि उसे क्या बोलने के लिए क्या शब्द बोलने हैं। इस बात का पता न हो, तो इसे डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर कहते हैं।

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    एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर के प्रकार (Types of Expressive Language Disorder)

    एक्प्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर दो प्रकार के होते हैं, जिनमें शामिल हैं:

    • डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर (Developmental expressive language disorder)
    • एक्वायर्ड एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर (Acquired expressive language disorder)

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    जानें डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर के कारणों के बारे में (Causes of Developmental expressive language disorder)

    डीईएलडी (DELD)की समस्या बच्चे के विकास के लिए खराब मानी जाता है। यह आमतौर पर, बच्चे के बुद्धि के स्तर से संबंधित नहीं होता है। आमतौर पर, कोई विशिष्ट कारण नहीं होता है। कई बच्चाें में इसका अनुवांशिक कारण हो सकता है यानि जेने। बहुत ही दुर्लभ मामलों में, यह मस्तिष्क की चोट या कुपोषण के कारण बच्चे को हो सकता है। ये समस्याएं आपके बच्चे के लक्षणों को और खराब कर सकती हैं। यदि बच्चे को डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर की समस्या है, तो उनमें इस तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं।

    यदि किसी बच्चे को अभिव्यंजक भाषा में कठिनाई होती है, तो वे निम्न चीजें कर सकते हैं:

    • वस्तुओं और वस्तुओं को पहचानने और बोलने में कठिनाई होना
    • शब्दों को एक साथ न जोड़ पाना और वाक्यों को जोड़ने में दिक्कत होना
    • अपनी उम्र के अनुसार वाक्यों को बोलने में दिक्कत होना
    • सही शब्दों को खोजने में कठिनाई होती है
    • किसी बात को दोहराने में दिक्कत होना।
    • कहानी लिखने में कठिनाई हाेना।

    ये मुश्किलें हर बच्चे की उम्र के आधार पर अलग-अलग होंगी।

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    डीईएलडी के लक्षण (Symptoms of DELD)

    डीईएलडी के शिकार बच्चों में कई तरह लक्षण नजर आ सकते हैं। ऐसे बच्चों में लक्षण की बात करें, तो वो आमतौर पर शब्दावली मुद्दों और दोषपूर्ण शब्द स्मृति तक सीमित होते हैं। उदाहरण के लिए, हो सकता है कि आपका बच्चा उन शब्दों को याद न कर पाए, जो उन्होंने अभी-अभी सीखे हैं। आपके बच्चे की शब्दावली समान आयु वर्ग के अन्य बच्चों की तुलना में बहुत कम हो सकती है। इसके लक्षणों में यह भी हो सकता है कि आपका बच्चा लंबे वाक्य बोल ही न पाएं या हो सकता है कि वो गलत क्रम में शब्दों को बोलें, जैसे कि मुेझ भूख लगी है, बोलने की बजाए यह बोलना कि लगी मुझे भुख।

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    डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर वाले बच्चों में होने वाली कठनाईयां

    जब किसी बच्चे को एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑडर्र होता है, तो उसे इस तरह की कठिनाइयां हो सकती हैं:

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    डीईएलडी के लिए लैंग्वेज थेरिपी (Language therapy and counseling)

    भाषा कौशल विकसित करने के लिए बच्चों को निम्नलिखित करने में सक्षम होना चाहिए:

    स्पीच थेरिपी इसके परीक्षण के साथ इस डिसऑर्डर को दूर करने में मदद करती है। इससे आपके बच्चे को उनकी शब्दावली को वाक्यों के उपयोग बढ़ाने में मदद करती है। इसमें स्पीच थेरिपिस्ट आपके बच्चे के संचार और बातचीत में मदद करते हैं। इसमें बच्चे को ट्रेन किया जाता है कि क्या बोलने के लिए किन शब्दों का उपयोग करना चाहिए और वाक्य कैसे बनाना चाहिए आदि।

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    काउंसलिंग है जरूरी (Counseling)

    जिन बच्चों को खुद को व्यक्त करने में कठिनाई होती है, वे सामाजिक रूप से खुद को अलग-थलग महसूस कर सकते हैं। यह उनके लिए तनाव भरा हो सकता है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन्हें स्कूल में आती हैं, जहां वो दूसरे बच्चे से झगड़ा होने पर अपनी बात नहीं बोल पाते हैं या दूसरे बच्चे की बात का जवाब नहीं दे पाते हैं, तो ऐसे में बच्चे के लिए स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। डीईएलडी के शिकार वाले बच्चों के लिए काउंसलिंग जरूरी होती है। जब विकार को किसी अन्य स्थिति, जैसे सुनने की दुर्बलता, मस्तिष्क की चोट, या सीखने की अक्षमता के साथ नहीं जोड़ा जाता है।

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    कौन सी गतिविधियां डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं?

    यदि बच्चे को डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर है, तो कुछ गतविधियों द्वारा बच्चे को बोलने में मदद मिल सकती है, इसे आप घर पर ही कर सकते हैं, जिनमें शामिल है:

    • बच्चे को किताबों में चित्रों द्वारा समझाने की कोशिश करें कि किस चीज को क्या बोलते हैं और किन स्थितियों में इन शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।
    • बच्चों को पसंदीदा चीजें जानने की कोशिश करें ताकि बच्चे के अंदर जिज्ञासा हो अपनी पंसद की चीज के बारे में बताने की।
    • उसके साथ ऐसे खेल खेलें, जो बच्चे को वास्तव में पसंद आए और पूरे खेल के दौरान नए शब्दों का उपयोग करें, ताकि बच्चा कुछ नया सिखे।
    • बच्चों के साथ बुक्स रिडिंग करते सयम उस टॉपिक के बारे में भी बात करें।
    • बच्चे के साथ मिलकर गाने गाएं।
    • शब्दों के क्विज या पिक्चर क्विज खेलें।

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    थेराप्यूटिक इंटरवेंशन (Therapeutic intervention)

    • अपनी इच्छाओं और जरूरतों को व्यक्त करने के लिए बच्चे की क्षमता में सुधार करें।
    • अपने विचारों को कैसे व्यक्त करना है, इसके लिए बच्चे की क्षमता में सुधार करें।
    • कहानियों को बताने और घटनाओं को दूसरों से जोड़ने क्षमता बच्चे में विकसित करें।
    • प्रश्नों के उचित उत्तर देने की बच्चे की क्षमता में सुधार करें।
    • बच्चे की शब्दावली विकसित करें
    • खेल-खेल में बच्चे को शब्दावली सिखाएं।
    • एक बच्चे में निराशा को कम करने में मदद करें जो अपने संदेश को समझ नहीं पा रहा है

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    जब बच्चों को अभिव्यंजक भाषा में कठिनाइयाँ होती हैं, तो उन्हें निम्न में भी कठिनाई हो सकती है:

    • दोस्ती बनाना और सामाजिक बातचीत में शामिल होना।
    • हायर एज्युकेशन में दिक्कत आना।
    • एक साक्षात्कार और लिखित आवेदन दोनों में नौकरियों के लिए आवेदन करना।
    • पढ़ने और लिखने के कौशल का विकास करना।
    • शैक्षणिक कार्यों को पूरा करना।

    यदि बच्चे को डेवलपमेंट एक्सप्रेसिव लैंग्वेज डिसऑर्डर की समस्या है, तो आपको बच्चे के साथ स्पीच थेरिपी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे बच्चे को काफी आसानी होगी। घर पर छोटी-छोटी एक्टिविटीज से भी बच्चे को बाेलने में काफी मदद मिल सकती है। अधिक जानकारी के लिए डाॅक्टर से संपर्क करें।

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    लेखक की तस्वीर badge
    Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 30/06/2022 को
    और Nidhi Sinha द्वारा फैक्ट चेक्ड