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Unoccupied Play: अनऑक्यूपाइड प्ले क्या है, इससे क्या सीखते हैं बच्चे?

Unoccupied Play: अनऑक्यूपाइड प्ले क्या है, इससे क्या सीखते हैं बच्चे?

बचपन का नाम लेते ही अगर हमें सबसे पहले कुछ याद आता है, तो वह है मस्ती भरे दिन और खूब सारा खेल। जी हां! बचपन और खेल का गहरा संबंध है। जब बच्चा पैदा होता है, तो उसे अपने आसपास की चीजों का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं होता है। 1 से दो महीने का होने पर बच्चा धीरे-धीरे अपने आसपास की चीजों को ध्यान से देखता है उन्हें समझने की कोशिश करता है। उन्हें छू कर पहचानता है। यानी खेल सिर्फ वह नहीं है, जो खिलौनों से खेला जाए। बच्चों के इस खेल का अर्थ अपने आसपास की चीजों को निहारना, उन्हें समझना और फिर उन्हें छू कर खेलना भी है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये कौन-सा खेल है? इस खेल को अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) के नाम से जाना जाता है। अगर सच में कहा जाए तो यहीं से खेल की शुरुआत होती है। भले ही हो सकता है कि आपको इस बारे में जानकारी ना हो लेकिन खेल की यह विधा जाननी बहुत जरूरी है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) के बारे में बताएंगे और साथ ही यह भी जानकारी देंगे कि कैसे अनऑक्यूपाइड प्ले(Unoccupied Play) के माध्यम से बच्चा खेलने की शुरुआत करता है।

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अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) क्या होता है?

अनऑक्युपाइड प्ले

ऐसा माना जाता है कि बच्चों का दिमाग बहुत क्रिएटिव होता है। बचपन में वो जितनी आसानी से किसी चीज को सीखते हैं, शायद बड़े होने पर उनके लिए उतना ही वह काम कठिन हो सकता है। जी हां! यह बिल्कुल सही बात है। बच्चे खेल-खेल में बहुत सारी चीजें सीख जाते हैं। बच्चे खेल-खेल में पढ़ भी लेते हैं और खेल खेल में एक दूसरे से बातचीत भी कर लेते हैं। इससे उनके अंदर कॉन्फिडेंस पैदा होता है और साथ ही सीखने की स्किल भी। बच्चों के लिए खेल थोड़ा नहीं बल्कि बहुत ज्यादा जरूरी है। अब बात करते हैं उस खेल की, जो बच्चे सबसे पहले सीखते हैं। बच्चे खेल की शुरुआत अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) से ही करते हैं। एक महीने का होने पर बच्चे आपकी नजरों में नजरे डाल कर चेहरा पहचानने की कोशिश करता है।

बच्चे अपने आसपास की चीजों से डर भी सकता है और खुश भी हो सकता है। वो कुछ चीजों को छूने की या फिर उन्हें गिराने की कोशिश भी करता है। ये प्ले तीन से चार माह तक चलता है। पेरेंट्स को लगता है कि बच्चा चुपचाप बैठा या फिर लेटा हुआ है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं होता है। बच्चे की एक अलग दुनिया शुरू हो चुकी है और वो अब उसमें फोकस भी करने लगा है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) से फायदा क्या होता है? अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) एक नहीं बल्कि बहुत से फायदे होते हैं। क्योंकि ये खेल की शुरुआत माना जाता है। जब शुरुआत बेहतर होती है, तो यकीनन बच्चा खेल को एंजॉय करना सीख जाता है। जानिए अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) के फायदे क्या है?

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अनऑक्यूपाइड प्ले के फायदे (Unoccupied Play advantages)

अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) ऐसा लगता है जैसे बच्चे या छोटे बच्चे बिना किसी ग्रुप या फ्रेंड के अपने आस-पास की चीजों को खोजने की कोशिश कर रहे हों। ये स्टेज बच्चों को सामान या चीजों में हेरफेर करने, खुद में कंट्रोल करने और दुनिया के काम करने के तरीके के बारे में सीखाता है। अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) के माध्यम से बच्चों में सेल्फ कॉन्फिडेंस (Self confidence) का विकास होता है और साथ ही वो अपने आस-पास के वातावरण के बारे में भी जानकारी (Learn about their environment) हासिल करते हैं। आपको बच्चों का पूरा ख्याल रखने के साथ ही इस बात पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है कि कहीं वो कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं, जिससे उन्हें चोट या किसी प्रकार का परेशानी का सामना करना पड़े।

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अनऑक्यूपाइड प्ले में ऐसे दें बच्चे का साथ!

आप सोच रहे होंगे कि जब बच्चा अकेले खेल रहा है, तो आखिर उसका साथ कैसे दिया जाए? लेकिन आप ऐसा कर सकते हैं। बच्चा अकेले खेल रहा है, लेकिन उसके आसपास की चीजों का ध्यान तो आपको ही रखना होगा। बच्चे के आसपास कोई ऐसी चीज नहीं होनी चाहिए, जो उसे नुकसान पहुंचा सके। अगर बच्चा किसी चीज को छूने की कोशिश करता है, तो ध्यान रखें कि उसके आसपास कोई भी नुकीली चीज या फिर ऐसी चीज ना हो, जिसे वह गलती से अपने मुंह में डाल ले। इन बातों को ध्यान में रखकर आप बच्चे की मदद कर सकती हैं। अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) के दौरान वो क्या कर रहा है, इस पर भी नजर रखें।

सीन करें सेट (Set the scene)

जब भी बच्चा खेलना शुरू करता हैं, तो उन्हें अकेले खेलने दें लेकिन उनके लिए सीन सेट कर दें। जी हां! आप बच्चों के लिए कई तरह से मदद कर सकती हैं। आप बच्चों के लिए ऐसी अपॉर्चुनिटी क्रिएट करें, जिससे कि बच्चा आसानी से खेल सके। अगर बच्चा कुछ खींचने या पकड़ने की कोशिश कर रहा है,तो आप उसके पास ऐसी चीज रखें जो उसे कोई नुकसान ना पहुंचाएं। आप बच्चों के आस-पास ब्लॉक भी रख सकते हैं, जिससे बच्चे आसानी से खेलते हैं। आप चाहे तो बच्चों के आसपास ऐसी नई जगह भी क्रिएट कर सकते हैं, जिन्हें बच्चे खोजने की कोशिश करें। कुछ मटेरियल या कपड़े भी उसके पास रख दें। बच्चे कपड़े को हटाने की कोशिश भी करते हैं।

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बच्चे से न लगाएं उम्मीदें!

अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) में बच्चे से ये उम्मीद न लगाएं कि आप उसे जो खेलने के लिए देंगे, वो वही खेलेगा। अगर आपको इस बात की चिंता है कि बच्चा क्या खेलेगा, तो आपको उसके सामने कुछ खिलौने रख देने चाहिए। बच्चे अपनी पसंद के अनुसार चीजों का चयन कर लेंगे। अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) में पहले से कुछ भी डिसाइड नहीं होता है। बच्चा हो सकता है कि कुछ चीजों को ऑब्जर्व करें कुछ समय बाद उससे खेलें। आपको उसकी पसंद समझनी होगी। अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) विकासात्मक भूमिका में अहम रोल निभाता है।

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बच्चे को करें सपोर्ट और गाइड!

आप बच्चे को सपोर्ट और गाइड भी कर सकते हैं। बच्चे को सपोर्ट करने के लिए आप कुछ समय तक उसके पास बैठे और वह जो भी हरकत करता है, आप उसका समर्थन करें। ऐसा करने से उसे अच्छा महसूस होगा और वह अपने काम को जारी रखेगा। अगर उसे कोई चीज चाहिए तो आप उसे लाकर भी दे सकते हैं। बच्चे कई बार इशारा भी करते हैं, जिसे समझने की जरूरत होती है। कई बार वह चीजों को अपने पास देखकर अधिक खुश महसूस करता है।

इस आर्टिकल में हमने आपको अनऑक्यूपाइड प्ले (Unoccupied Play) के बारे में बारे में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Accessed on 2/11/2021

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https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/29356027/

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड