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हायजीन मैंटेन करेंगे, तो आप बच सकते हैं नाक के रोगों से

हायजीन मैंटेन करेंगे, तो आप बच सकते हैं नाक के रोगों से

हमारा नाक शरीर के बाकी अंगों की तरह ही हमारे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। नाक हम जिस हवा को सांस के माध्यम से अंदर ले जाते हैं, उसे साफ करता है। यानी, यह धूल-मिट्टी, जर्म्स और अन्य हानिकारक चीजों को फिल्टर करता है। नाक में नर्व सेल्स भी होते हैं, जो हमें सूंघने में मदद करते हैं। नाक की तकलीफ या नाक की बीमारियां (Nose Conditions) हमारे पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती हैं। जैसे अगर नाक बंद होगी, तो आपको सांस लेने और सोने में परेशानी होगी और आप बेचैन महसूस करेंगे। पाएं, जानकारी नोज के रोग के बारे में।

नाक की बीमारियां कौन सी हैं? (What are Nose Conditions)

नाक से संबंधित इशूज में साइनस इन्फेक्शन (Sinus Infections), कंजेशन (Congestion) और एयरवे ब्लॉकेज (airway blockage) आदि मुख्य हैं। नाक के रोग गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में आपको इन नाक के रोगों के बारे में पूरी तरह से पता होना चाहिए। ताकि आप सही समय पर इनके लक्षणों को पहचान कर इलाज करा पाएं। यह इस प्रकार हैं:

यह भी पढ़ें: नाक से जुड़ी ये स्थिति बन सकती है शिशु की मौत की वजह, जान लें इसके कारण, लक्षण और उपाय

साइनोसाइटिस (Sinusitis)

नाक की बीमारियां (Nose Conditions) सामान्य है, इसमें पहली है साइनोसाइटिस। साइनसाइटिस एक ऐसी स्थिति है, जिसे पैरानेजल साइनस (Paranasal Sinuses) की सूजन के रूप में जाना जाता है। साइनस कैविटीज़ (Sinus Cavities) बलगम का उत्पादन करती हैं, जिससे नेजल पैसेजस (Nasal Passages) को प्रभावी ढंग से काम करने में मदद मिलती है। साइनसाइटिस एक्यूट या क्रोनिक हो सकता है। साइनस की सूजन के कारणों में वायरस, बैक्टीरिया, कवक, एलर्जी और एक ऑटोइम्यून रिएक्शन शामिल है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

नाक की बीमारियां

  • नेजल डिस्चार्ज (Nasal Discharge)
  • चेहरे में दर्द और प्रेशर (Facial Pain or Pressure)
  • नाक का बहना या बंद हो जाना (Blocked or Runny Nose)
  • गले में खराश (Sore Throat)
  • खांसी (Cough
  • मुंह से दुर्गन्ध आना (Bad Breath)
  • बुखार (Fever)
  • सिरदर्द (Headaches)
  • स्वाद या गंध की सेंस का कम होना (Reduced Sense of Smell and Taste)
  • आंखों, नाक, गाल और माथे के आसपास कोमलता और सूजन (Tenderness and Swelling around the Eyes, Nose, Cheeks, and Forehead)
  • दांत में दर्द (Toothache)

साइनोसाइटिस के कारण (Cause of Sinusitis)

साइनसाइटिस के लिए विभिन्न कारक जिम्मेदार हैं, लेकिन यह हमेशा तरल पदार्थ से होता है। जो साइनस में फंस जाता है, जिससे रोगाणु बढ़ने लगते हैं। इसके अन्य कारण इस प्रकार हैं:

  • इसका मुख्य कारण वायरस है।
  • बैक्टीरियल इंफेक्शन (Bacterial Infection) के कारण भी साइनोसाइटिस हो सकता है।
  • एलर्जी या अस्थमा होने पर इसकी संभावना बढ़ सकती है।
  • इसके साथ ही हवा में मौजूद प्रदूषक, केमिकल और अन्य चीजें भी इसे बढ़ा सकती हैं।
  • फंगल इन्फेक्शन्स या मोल्ड्स भी फंगल साइनोसाइटिस का कारण बन सकते हैं।

साइनोसाइटिस का निदान (Diagnosis of Sinusitis)

डॉक्टर इस रोग के निदान के लिए आपसे लक्षणों के बारे में जानेंगे। इसके साथ ही शारीरिक जांच भी की जाएगी। यही नहीं, एंडोस्कोप की मदद से नेजल पैसेज के अंदर देखा जा सकता है और डॉक्टर आपको इन टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं:

  • मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic Resonance Imaging) या सिटी स्कैन (CT Scan)
  • एलर्जी टेस्ट (Allergy Test)
  • डॉक्टर ऑटोस्कोप से नेजल कैविटी की भी जांच करेंगे। अगर उन्हें कानों की तकलीफ के लक्षण नजर आएंगे, तो आपको ENT स्पेशलिस्ट के पास जाने की जरूरत हो सकती है।

साइनोसाइटिस का उपचार (Treatment of Sinusitis)

साइनोसाइटिस को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसका उपचार संभव है और इसके उपचार के लिए इन तरीकों का सहारा लिया जा सकता है:

  • अगर कानों की तकलीफ का कारण बैक्टीरियल इंफेक्शन है, तो डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक दे सकते हैं
  • कुछ दवाइयां या स्प्रे भी सूजन को मैनेज करने में मदद कर सकती हैं।
  • अगर अन्य उपचार काम नहीं करते हैं तो सर्जरी भी कराने की सलाह दी जा सकती है।
  • कुछ घरेलू उपचार जैसे स्टीम इनहेलेशन (Steam inhalation), नेजल इरीगेशन (Nasal irrigation), गर्म सेक (Warm compresses) भी नाक की बीमारियां (Nose Conditions) दूर करने में आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

नेजल पोलिप्स (Nasal polyps)

नेजल पोलिप्स नेजल पैसेज या साइनस की लाइनिंग में नरम, दर्द रहित या नॉनकैंसरस ग्रोथ है। नेजल पोलिप्स की समस्या किसी को भी प्रभावित कर सकती है। लेकिन वयस्कों को नाक की बीमारियां (Nose Conditions) अधिक होती हैं खासतौर पर नेजल पोलिप्स। यह पुरानी सूजन से उत्पन्न होते हैं और अस्थमा (Asthma), बार-बार होने वाले इंफेक्शन (Recurring Infection) एलर्जी (Allergy) या कुछ प्रतिरक्षा विकारों (Immune Disorder) से जुड़े होते हैं।

नेजल पोलिप्स के लक्षण और कारण (Causes of Nasal polyps)

छोटे नेजल पोलिप्स के कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। लेकिन, जब यह बड़े हो जाते हैं तो यह नेजल पैसेजस को ब्लॉक कर देते हैं। जिससे ब्रीदिंग समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही गंध न आना या लगातार इंफेक्शन भी इसके लक्षण हो सकते हैं। नेजल पोलिप्स के होने का कारण क्या है इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त नहीं है।

निदान और उपचार (Diagnosis and Treatment)

नेजल पोलिप्स के निदान के लिए डॉक्टर आपसे लक्षणों के बारे में जानेंगे और शारीरिक जांच की जाएगी। आमतौर पर शारीरिक जांच से ही इसका निदान संभव है। इस समस्या के उपचार के लिए दवाइयों का प्रयोग किया जा सकता है और कई बार इन्हें निकालने के लिए सर्जरी भी की जा सकती है। नाक की बीमारियां (Nose Conditions) आमतौर पर आसानी से ठीक हो जाती हैं हालांकि, कई बार सफलतापूर्वक उपचार के बाद भी नेजल पोलिप्स समस्या फिर से हो सकती है।

डेविएटेड सेप्टम (deviated septum)

डेविएटेड सेप्टम की समस्या तब होती है, जब नेजल पैसेज के बीच की पतली दीवार एक तरफ डिस्प्लेस हो जाती है। अगर यह समस्या गंभीर हो तो इससे एक साइड का नाक ब्लॉक हो सकता है और एयरफ्लो कम हो सकता है। जिससे सांस लेने में समस्या हो सकती है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

  • एक या दोनों नोस्ट्रिल्स में बाधा होना (Obstruction of one or both Nostrils)
  • नाक से खून निकलना (Nosebleeds)
  • चेहरे पर दर्द (Facial Pain)
  • सोते हुए सांस लेते हुए आवाज आना (Noisy breathing during Sleep)

डेविएटेड सेप्टम के कारण (Causes of Deviated Septum)

नाक की बीमारियां (Nose Conditions) जैसे डेविएटेड सेप्टम की समस्या परेशान करने वाली हो सकती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

यह भी पढ़ें: जल नेति क्रिया करे नाक संबंधित रोगों से मुक्त, जानें इसकी विधि और सावधानियां

डेविएटेड सेप्टम का निदान (Diagnosis of Deviated Septum)

इस समस्या के निदान के लिए सबसे पहले डॉक्टर आपसे इसके लक्षणों के बारे में पूछेंगे और आपके नाक की जांच की जाएगी। इसके साथ ही डॉक्टर डिकंजेस्टेन्ट स्प्रे (Decongestant) का प्रयोग करने से पहले और बाद में आपके नेजल टिश्यू की जांच भी कर सकते हैं। इसी जांच के आधार पर वो डेविएटेड सेप्टम का निदान करेंगे और इसकी गंभीरता के बारे में जानेंगे।

डेविएटेड सेप्टम का ट्रीटमेंट (Treatment of Deviated Septum)

डेविएटेड सेप्टम का शुरुआती उपचार इसके लक्षणों को मैनेज करना है। इसका उपचार इस तरह से किया जा सकता है:

  • डिकंजेस्टेन्टस (Decongestants)
  • ओरल डीकन्जेस्टेंटस (Oral Decongestants)
  • एंटीहिस्टामिनस (Antihistamines)

नाक की बीमारियां

दवाएं केवल सूजन वाले म्यूकस मेमब्रेन (Mucous Membranes) का इलाज करती हैं और एक डेविएटेड सेप्टम को ठीक नहीं करेगी। इसके लिए आपको सर्जिकल रिपेयर की जरूरत हो सकती है जिसे सेप्टोप्लास्टी (Septoplasty) कहा जाता है। इसके साथ ही नाक को सही शेप में लाने के लिए भी सर्जरी की जरूरत हो सकती है जिसे राइनोप्लास्टी (Rhinoplasty) कहा जाता है।

नेजल फ्रैक्चर (Nasal Fracture)

एक टूटी हुई नाक, जिसे नाक फ्रैक्चर भी कहा जाता है, नाक में हड्डी का टूटना या उसमे दरार आना है। यह हड्डी नाक के ब्रिज के ऊपर की हड्डी है। नाक की बीमारियां (Nose Conditions) जैसे नेजल फ्रैक्चर किसी खेल, झगड़ा, गिरना या एक्सीडेंट आदि के कारण हो सकता है। जानिए क्या हैं इसके लक्षण:

  • नाक में दर्द या कोमलता (Pain or tenderness)
  • नाक और आसपास के क्षेत्र में सूजन (Swelling of Nose and Surrounding Areas)
  • नाक से ब्लीडिंग होना (Bleeding from Nose)
  • नाक और आंखों के आसपास नील आना (Bruising around Nose or Eyes)
  • नाक के सामान्य आकार का बिगड़ना (Crooked or Misshapen Nose)
  • नाक से सांस लेने में समस्या (Difficulty Breathing Through Nose)
  • नाक से पस निकलना (Discharge of Mucus from Nose)
  • ऐसा महसूस होना कि आपका एक या दोनों नेजल पैसेज ब्लॉक हैं (Feeling that one or both of your Nasal Passages are Blocked)

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नेजल फ्रैक्चर के कारण (Causes of Nasal Fracture)

नेजल फ्रैक्चर आमतौर पर किसी ट्रामा के कारण होता है। यह फ्रैक्चर किसी भी चोट के कारण हो सकता है। जैसे:

  • फुटबॉल, हॉकी खेलने के दौरान चोट लगना (Injury from Sports, such as Football or Hockey)
  • हिंसा में लगी चोट (Physical Altercations)
  • एक्सीडेंट (Motor Vehicle Accidents)
  • गिरना (Falls)

नेजल फ्रैक्चर का निदान (Diagnosis of Nasal Fracture)

नेजल फ्रैक्चर के निदान के लिए डॉक्टर नाक को धीरे से प्रेस करेंगे। इसके साथ ही वो आपके नाक के अंदर भी जांचेंगे। आपको एक्स-रे कराने के लिए भी कहा जाएगा। यही नहीं, अगर चोट गंभीर है, तो आपको सिटी स्कैन की सलाह भी दी जा सकती है।

नेजल फ्रैक्चर का उपचार (Treatment of Nasal Fracture)

अगर आपके नाक का फ्रैक्चर माइनर है और इससे आपके नाक को अधिक हानि नहीं हुई है, तो आपको मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए डॉक्टर आपको दर्द कम करने की दवाइयां, प्रभावित स्थान पर बर्फ का प्रयोग आदि की सलाह दे सकते हैं। लेकिन, अगर चोट गंभीर है तो आपके डॉक्टर आपकी नाक को मैन्युअल रीएलाइनमेंट (Manual Realignment) करने की कोशिश करेंगे या आपको सर्जरी की आवश्यकता भी हो सकती है।

नकसीर (Nosebleed)

नाक से खून आना यानी नकसीर भी आम है। यह नाक की बीमारियां (Nose Conditions) होने की स्थिति में शायद ही किसी गंभीर मेडिकल हेल्प की ज9ADD-VEरूरत पड़ सकती है। नाक में कई ब्लड वेसल्स (Blood Vessels) हैं, जो नाक के सामने और पीछे की सतह के करीब स्थित होते हैं। यह बहुत नाजुक होते हैं और इनमें से आसानी से खून आ सकता है। 3 से 10 साल की उम्र के बीच बच्चों को नकसीर आना सामान्य है।

नकसीर के कारण (Causes of Nosebleed)

नकसीर के कई कारण हैं। कभी-कभी या कम मात्रा में नाक से खून निकलना गंभीर नहीं होता। लेकिन, अगर यह खून लगातार आ रहा हो, तो यह अधिक गंभीर समस्या की तरफ संकेत हो सकता है। इसके अन्य कारण इस प्रकार हैं:

नकसीर का निदान (Diagnosis of Nosebleed)

नकसीर का निदान करने के लिए डॉक्टर आपकी शारीरिक जांच करेंगे और आपकी मेडिकल हिस्ट्री और मेडिकेशन्स के बारे में भी जानेंगे। आपको यह टेस्ट कराने की सलाह भी दी जा सकती है:

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नकसीर का उपचार (Treatment of Nosebleed)

नकसीर के लिए उपचार नकसीर के प्रकार और कारण के आधार पर अलग-अलग होगा। इसका उपचार इस तरह से किया जा सकता है:

एंटीरियर नोज़ब्लीड (Anterior Nosebleed)

अगर आप एंटीरियर नोजब्लीड से पीड़ित हैं, तो इसका उपचार घर पर ही संभव है। इसके लिए आपको नाक के ऊपरी हिस्से को धीरे से दबाते हुए नोस्ट्रिल्स को दस मिनटों तक बंद रखना है और मुंह से सांस लेनी है। इसके साथ ही आप नाक के ब्रिज पर कोल्ड कंप्रेस का प्रयोग भी कर सकते हैं या नेजल स्प्रे का प्रयोग भी कर सकते हैं। लेकिन अगर इतने उपाय के बाद भी नकसीर बंद नहीं होती है, तो डॉक्टर की सलाह लें।

यह भी पढ़ें: जानें प्रीमैच्याेर शिशु के आंख और नाक की देखभाल कैसे करें, साथ में किन बातों का रखें ध्यान

पोस्टीरियर नोजब्लीड (Posterior Nosebleed)

पोस्टीरियर नोजब्लीड अर्थ है कि आपके नाक के पिछले हिस्से से ब्लीडिंग हो रही है। यह एक गंभीर स्थिति है। इसके लिए आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। यह नोजब्लीड फॉरेन ऑब्जेक्ट्स की वजह से हो सकती है। ऐसे में, डॉक्टर उस ऑब्जेक्ट को रिमूव करेंगे।

दाग़ना (Cauterization)

इस मेडिकल तकनीक की मदद से भी डॉक्टर आपकी नोज़ब्लीड को रोक सकते हैं

नाक की बीमारियों से जुड़े रिस्क फैक्टर्स कौन से हैं (Risk Factors of Nose Conditions)

कोई भी स्थिति जो आपके नेजल पैसेज या साइनस में लंबे समय तक जलन और सूजन को ट्रिगर करती है, जैसे कि संक्रमण या एलर्जी आदि नाक की बीमारियों से जुड़े जोखिम को बढ़ा सकती है। यह रिस्क फैक्टर्स इस प्रकार हैं:

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नाक की बीमारियों से बचने के लिए आपको अपने लाइफस्टाइल में क्या परिवर्तन करने चाहिए?(Lifestyle change for Nose Conditions)

नाक की बीमारियां (Nose Conditions) आमतौर पर सामान्य होती हैं लेकिन किन्ही स्थितियों में यह जान का जोखिम भी बन सकती हैं। अगर आप इनसे बचना चाहते हैं तो इन चीजों का ध्यान रखें और अपने लाइफस्टाइल में कुछ ऐसे परिवर्तन करें, जैसे :

  • हायजीन बनाए रखें (Maintain Hygiene) : नाक की बीमारियां (Nose Conditions) से बचने के लिए आपको हायजीन का भी ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए अपने हाथों को धोते रहें। ताकि आप बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन से बचे।
  • अपने घर को ह्यूमिडिफाई करें ( Humidify your home): घर पर ह्यूमिडिफायर का प्रयोग करें ताकि हवा की गुणवत्ता बढे।
  • नेजल रिंस (Nasal Rinse) : अपने नेजल पैसेज को रिंस करने के लिए आप नमक वाले पानी के स्प्रे का प्रयोग करें।
  • अपने खानपान का ध्यान रखें (Eat Right): आपका सही खानपान अपने पूरे स्वास्थ्य के साथ ही आपके नाक के लिए भी फायदेमंद है। इसलिए, मिर्च-मसाले, तले हुए या जंक फ़ूड की जगह फल-सब्जियां, साबुत अनाज, दालों आदि का सेवन करें।
  • योग का सहारा लें (Do Yoga) : अगर आप अपने आपको फिट और स्वस्थ रखना चाहते हैं तो व्यायाम करना न भूलें। योगा भी नाक की बीमारियां (Nose Conditions) दूर करने में आपके लिए मददगार हो सकता है। प्राणायाम, आलोम-विलोम आदि नाक के स्वास्थ्य के लिए अच्छे आसन हैं।
  • नाक के फ्रैक्चर से बचने के लिए जब भी बाहर खेलने जाएं हेलमेट और मिड फेस मास्क अवश्य पहने।
  • नाक के फ्रैक्चर से बचने के लिए जब भी गाडी में बैठे सीट बेल्ट अवश्य पहनें।
  • नेजल पोलिप्स के विकास की संभावना को कम करने और नेजल पोलिप्स की समस्या फिर से न हो, इसके लिए एलर्जी और अस्थमा को मैनेज करें। इसके बारे में अपने डॉक्टर की सलाह लें।
  • नेजल इरिटेंट्स से बचें जैसे धुआं, केमिकल फ्यूम्स, धूल-मिट्टी आदि।

यह भी पढ़ें: Nasal Polyps: नेजल पॉलिप्स क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

नाक की बीमारियां (Nose Conditions) कई लोगों को प्रभावित करती हैं और दर्द, थकावट, सिरदर्द, सांस लेने में समस्या आदि का कारण बनती हैं। लेकिन, इन नाक की बीमारियों का इलाज आसानी से संभव है। इसलिए कोई भी समस्या होने या लक्षण नजर आने पर डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 24/03/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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