बच्चों के जूते खरीदने से पहले किन बातों का ख्याल रखना है जरूरी

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट September 15, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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बच्चों के जूते खरीदने से पहले उनके पैरों के बारे में जानना बहुत जरूरी होता है। पैर 26 हड्डियों और 35 जोड़ों की एक जटिल संरचना है, जो एक साथ स्नायुबंधन (Ligaments) द्वारा जुड़ा हुआ होता है। बच्चों के पैर वसा के कारण कोमल और अत्यधिक लचीला होते हैं। ज्यादातर बच्चे 8 से 18 महीने की उम्र के बीच चलना शुरू कर देते हैं। जब वे पहली बार चलना शुरू करते हैं, तो अधिकांश टॉडलर के फ्लैट फुट होते हैं और वो अपने पैरों को अंदर की ओर मोड़ते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि धीरे-धीरे मांसपेशियों की ताकत और लिगामेंट की जकड़न विकसित होती है।

यदि आप अपने बच्चे के पैरों या उनके चलने के तरीके (उनकी चाल) के बारे में चिंतित हैं, तो हमेशा अपने बाल रोग विशेषज्ञ या डॉक्टर को दिखाएं।

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बढ़ता हुआ बच्चा जब चलना सीख रहा होता है और जैसे ही उसके पैर जमीन पर पड़ते हैं, तो उसे एक सेंसर फीलिंग महसूस होती है। बच्चों को जूते इसलिए पहनाए जाते हैं, क्योंकि ये उनके पैरों को चोट, गर्मी और ठंड से बचाने में मदद करते हैं।

जब टॉडलर चलना सीख रहे हैं, तो उन्हें नंगे पैर या जितना संभव हो उतना नरम तलवे वाले जूते पहनाने चाहिए। ताकि वे महसूस कर सकें कि वे अपने पैरों से क्या छूते हैं? जब बच्चा कॉन्फीडेंस के साथ अपने पैरों पर चलने लगे तब उनको अलग-अलग जूते पहनाएं। अपने बच्चों के लिए जूते अच्छी फीटिंग के लें, जो लंबाई और चौड़ाई दोनों तरह से उन्हें फिट बैठे। बच्चों के पैर बहुत जल्दी बढ़ते हैं। उनके जूते कुछ समय के बाद ही बदलने पड़ सकते हैं। बच्चों के जूते न बहुत तंग होने चाहिए और न ही बड़े या वजनी हो, क्योंकि इससे उन्हें चलने में दिक्कत पैदा होगी।

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बच्चों के जूते खरीदने के लिए टिप्स

बच्चों के जूते आदर्श रूप में कैसे होने चाहिए :

  • बच्चों के जूते खरीदते समय ध्यान दें कि ये लंबाई और चौड़ाई में आरामदायक और फिट हो।
  • बच्चों के जूते में अंगुलियों के लिए सही स्पेस होना चाहिए।
  • बच्चों के जूते ऐसे होने चाहिए कि ये लचीला, सपाट जो पैर की अंगुली के पास झुक सके।
  • पैर के प्राकृतिक आकार से मेल करने के लिए एड़ी के सामने का जूता चौड़ा होना चाहिए।
  • जूते के अंदर पैर की बहुत अधिक गति या फिसलन को रोकने के लिए लेस, पट्टियां का ख्याल रखें।
  • महंगे जूते हमेशा बेहतर नहीं होते हैं।

हार्ड सॉल्ड बनाम सॉफ्ट (Hard vs Soft) :

एडल्ट शूज की तरह ही, सोल वाले शूज भी स्लिप और गिरने का कारण बन सकते हैं। बोस्टन के चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में जनरल पीडियाट्रिक्स के एसोसिएट चीफ जोएन कॉक्स (Joanne Cox) कहते हैं, “आप दुर्घटनाओं को कम करने के लिए एकमात्र जूता चाहते हैं। आमतौर पर एक चमड़े या रबर आपके बच्चे की जरूरत के अनुसार घर्षण (Traction) प्रदान करने में मदद करेगा।”

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स्नीकर्स बनाम जूते (Sneakers vs shoes) :

पैर और टखने के विशेषज्ञ स्टीवन जी टीलेट, डीपीएम, कहते हैं “स्नीकर्स अच्छे हैं क्योंकि वे आमतौर पर पैर को बाधित नहीं करते हैं और उचित विकास में मदद करते हैं।” इसके अलावा, वह कहते हैं कि, स्नीकर्स आमतौर पर कैनवास और अच्छे लेदर से निर्मित किए जाते हैं, जिससे बच्चे के पैर में फिट आता है और अच्छे से समा जाता है।”

बच्चों के जूते, खुले पंजे बनाम बंद : (Open toed vs closed)

कॉक्स कहते हैं “बच्चों को चलना सीखाने के लिए खुले पैर के जूते न चुनें। इस तरह के जूते सुरक्षा प्रदान नहीं करते। इसलिए बंद पैर के जूते आम तौर पर बेहतर होते हैं। इस तरह के जूतों में बच्चे आसानी से चल पाते हैं। यदि वे चलना सीख रहे हैं और पूरी तरह से नहीं सीखे हैं, तो उनके लिए बंद पैर वाले जूते ही लें।”

बच्चों में पैरों की समस्याओं के लक्षण (Symptoms of foot problems in children) :

बच्चे इन समस्याओं से ग्रस्त लक्षणों में शामिल हो सकते हैं :

बच्चों के शूज खरीदते समय शूज मैटेरियल का भी रखें ध्यान

बच्चों के लिए जूते खरीदते समय हमेशा ध्यान रखें कि बच्चों के जूते का मैटेरियल फ्लेक्सिबल और एंटी बैक्टिरियल होना चाहिए। साथ ही आप यह भी जान लें कि बच्चों के पैरों में पसीना बड़ों से ज्यादा आता है। ऐसे में उनके पैरों की हाइजीन का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। ज्यादा पसीना आने के कारण बच्चों के पैरों में बैक्टिरिया के पैदा होने और फंगस की दिक्कत होने की आशंका बढ़ जाती है, जिस कारण उनके पैरों से बदबू आने लगती है।

कैसा होना चाहिए बच्चों के जूते का आउटर शेल

बच्चों के जूतों के लिए सबसे सही मैटेरियल प्राकृतिक ही होना चाहिए जैसे कि कैनवास और लेदर। दोनों ही मैटेरियल के जूतों के कारण बच्चों के पैरों में ज्यादा पसीना नहीं आता है और साथ ही एयर सर्कुलेशन भी बना रहता है। जिस कारण बच्चों के पैरों में बैक्टिरिया पनपने की आशंका भी कम होती है। इसके अलावा बच्चों के जूते खरीदते समय यह भी देखें कि उनका आउटर शेल इतना सख्त हो कि बच्चों को पैरों की सुरक्षा कर पाएं और उन्हें पहनकर बच्चे पूरा दिन खेल पाएं। वहीं प्लास्टिक और सिंथेटिक में ये सारी क्वालिटिज नहीं होती हैं। ऐसे में बच्चों के जूते खरीदते समय इन दोनों मैटेरियल्स को अवॉयड करना चाहिए।

बच्चों के जूते खरीदते समय इनसॉल्स का ख्याल रहना भी है जरूरी

इनसॉल्स जूते के अंदर का हिस्सा होता है। जूते के सॉल का अंदरूनी हिस्से को इनसॉल्स कहा जाता है। ऐसे में बच्चों के जूते खरीदते समय भी इनका भी ख्याल रखना जरूरी हो जाता है। इनसॉल्स भी ऐसे होना चाहिए कि बच्चे के पैरों में ज्यादा पसीना न आए। वरना बच्चों के पैरों में बैक्टिरिया के पनपने का खतरा बना रहता है। साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें कि बच्चे के जूतों के इनसॉल्स आरामदायक भी हों, जिससे काफी समय तक जूते पहनने के बाद भी बच्चों को इनसे परेशानी न हो।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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