मिसकैरिज : ये 4 लक्षण हो सकते हैं खतरे की घंटी, गर्भपात के बाद खुद को कैसे संभालें?

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Update Date मई 28, 2020 . 5 mins read
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“पीसीओडी होने की वजह से अक्सर सुषमा के पीरियड्स मिस हो जाते थे लेकिन, कुछ महीनों बाद जब उसे थक्कों के साथ हैवी ब्लीडिंग हुई तो वो डॉक्टर के पास गई। वहां जाने पर पता चला कि वह सात सप्ताह से प्रेग्नेंट थी और उसका मिसकैरिज भी हो चुका था।” लखनऊ की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मालती पांडेय का कहना है कि “सुषमा की तरह ही कुछ अन्य महिलाओं की स्थिति भी ऐसी ही होती है, जिन्हें मिसकैरिज से पहले एहसास ही नहीं होता है कि वे प्रेग्नेंट हैं।” वहीं अगर आंकड़ों की बात की जाए तो लगभग 30 फीसदी महिलाओं को गर्भपात से पहले प्रेग्नेंसी का पता ही नहीं चल पाता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को मिसकैरिज के पहले के लक्षणों को पहले से पहचानना जरूरी है जिससे समय रहते ही वे डॉक्टर से संपर्क कर सकें।

 मिसकैरिज क्या है?

मेडिकल साइंस की भाषा में गर्भपात को ‘स्पॉन्टेनस अबॉर्शन’ या ‘प्रेग्नेंसी लॉस’ भी कहते हैं। 20वें सप्ताह से पहले गर्भ में भ्रूण की स्वतः मृत्यु हो जाना मिसकैरिज कहलाता है। अमेरिकन सोसायटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में कम से कम 10-25% प्रेग्नेंसी, गर्भपात की वजह से खत्म हो जाती है। वहीं पारस हॉस्पिटल, गुड़गांव की गायनेकोलॉजिस्ट व यूनिट हेड डॉ. नूपुर गुप्ता का हैलो स्वास्थय टीम से बात करने पे कहना कहना है कि, “मिसकैरिज का खतरा नॉर्मल प्रेग्नेंसी से कहीं ज्यादा केमिकल प्रेग्नेंसी में होता है। केमिकल प्रेग्नेंसी में गर्भपात की संभावना 50 से 75 प्रतिशत तक होती है।”

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मिसकैरिज के लक्षण क्या हैं?

हर महिला के लिए गर्भपात का अनुभव अलग हो सकता है लेकिन, कुछ सामान्य लक्षण हैं जो मिसकैरिज की ओर इशारा करते हैं। अगर गर्भावस्था के दौरान ऐसे कुछ लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

ब्लीडिंग (Vaginal bleeding or spotting)

वजायनल ब्लीडिंग, मिसकैरिज के सबसे आम लक्षणों में से एक है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर बार ब्लीडिंग का मतलब गर्भपात ही हो। अक्सर प्रेग्नेंसी के शुरूआती दौर में महिलाओं को हल्की-फुल्की ब्लीडिंग होना सामान्य है लेकिन, यदि थक्कों के साथ अधिक ब्लीडिंग हो रही हो और खासतौर पर अगर ब्लीडिंग भूरे या गहरे लाल रंग की हो। इसके साथ ही ब्लीडिंग के दौरान तेज ऐंठन होती हो तो ये सारे संकेत खतरे की तरफ इशारा करते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

पेट दर्द (Abdominal Pain)

गर्भावस्था के समय प्रेग्नेंट महिला को कई तरह की शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ गर्भवती महिलाओं को पूरे नौ महीने शरीर के अलग अलग-अलग हिस्सों में दर्द की समस्या रहती है जो सामान्य है। अगर आपको पेट के निचले हिस्से में पीरियड्स की तरह ऐंठन के साथ दर्द हो तो यह मिसकैरिज के पहले का लक्षण हो सकता है। इसलिए, इस अवस्था में अपने डॉक्टर से तुरंत परामर्श करना बेहतर होगा।

वाइट डिस्चार्ज (White Discharge)

गर्भावस्था में वाइट डिस्चार्ज होना बिलकुल सामान्य है। यदि अचानक यह डिस्चार्ज से अधिक होने लगे या फिर इसमें से गंध आने लगे तो यह इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।

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पीठ में तेज दर्द (Backache)

गर्भावस्था के दौरान पीठ में दर्द होना सामान्य है लेकिन, जब यह दर्द असहनीय हो जाए तो आप तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें। दरअसल पीठ के निचले या पेल्विक एरिया में दर्द होना भी गर्भपात होने के पहले का संकेत हो सकता है। कई बार इस दर्द के साथ ब्लीडिंग की भी समस्या होती है।

इसके अलावा, ब्लीडिंग के साथ टिश्यू का निकलना, अचानक से वजन में गिरावट आना, प्रेग्नेंसी के लक्षणों (बीमार महसूस करना, स्तनों में कोमलता आदि) का अनुभव न करना आदि भी खतरे की घंटी साबित हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं सतर्क रहें और किसी भी तरह का असामान्य संकेत मिलते ही डॉक्टर से सलाह लें।

ऐसे पता करें मिसकैरिज हुआ है या नहीं?

मिसकैरिज का सही समय पर निदान कर लिया जाए, तो इंफेक्शन जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है। समय रहते अगर गर्भपात का पता न चले तो महिला की जान को खतरा हो सकता है। नीचे हम बता रहे हैं कि गर्भपात का पता कैसे किया जाता है :

  • पेल्विक जांच : इस दौरान डॉक्टर ग्रीवा के फैलाव की जांच करेंगे।
  • अल्ट्रासाउंड : अल्ट्रासाउंड के दौरान, डॉक्टर भ्रूण के दिल की धड़कन की जांच करके पता लगाएंगे कि भ्रूण सामान्य रूप से विकसित हो रहा है या नहीं। अगर इससे कुछ पता नहीं चलता है, तो लगभग एक सप्ताह में फिर से अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है।
  • ब्लड टेस्ट : इस दौरान डॉक्टर रक्त का नमूना लेकर हृदय कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी) के स्तर की तुलना पहले के स्तर से कर सकते हैं। अगर यह बदला हुआ आए तो यह समस्या का संकेत हो सकता है। डॉक्टर यह भी जांच सकते हैं कि कहीं आपको एनीमिया तो नहीं है।
  • टिश्यू टेस्ट : अगर ग्रीवा से टिश्यू बाहर निकलने लगे हैं, तो डॉक्टर मिसकैरिज का पता लगाने के लिए इनकी जांच सकते हैं।
  • क्रोमोसोम टेस्ट : अगर आपको पहले भी गर्भपात हो चुका है, तो डॉक्टर क्रोमोसोम संबंधी परेशानी का पता लगाने के लिए आपका और आपके पति का ब्लड टेस्ट कर सकते हैं।

मिसकैरिज के बाद इन बातों का रखें ध्यान

मिसकैरिज के दौरान या बाद में उपचार का मुख्य उद्देश्य रक्तस्राव और/या संक्रमण को रोकना है। इसके लिए निम्न उपाय अपनाएं जाते हैं।

  • अगर गर्भावस्था की शुरुआत में ही मिसकैरिज हो जाता है, तो आपका शरीर भ्रूण के सभी टिश्यू को अपने आप योनी मार्ग से बाहर निकाल देता है। इस स्थिति में किसी तरह के मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती है।
  • यदि शरीर सभी टिश्यूज को निकालने में असफल होता है, तो रक्तस्राव और संक्रमण को रोकने के लिए डायलेशन एंड क्यूरेटेज (D&C) प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर गर्भाशय से भ्रूण के टिश्यू को बाहर निकालते हैं।

गर्भपात के बाद खुद को कैसे संभालें?

गर्भपात जितना शारीरिक कष्ट देता है उससे कहीं ज्यादा यह भावनात्मक रूप से परेशान करता  है। इसलिए खुद को समय दें और ये टिप्स अपनाएं-

  • इसके लिए आप किसी सपोर्ट ग्रुप से भी जुड़ सकते हैं। जहां आप अपने अनुभव और भावनाओं के बारे में दूसरों (जिनका गर्भपात हुआ है) से साथ बात कर सकते हैं।
  • इस दौरान महिलाएं परिवार और दोस्तों से मदद लें, उनसे बातचीत करें। यदि आप उनसे किसी तरह का सपोर्ट चाहती हैं, तो उन्हें बताएं कि आपको उनकी जरूरत है।
  • कुछ महिलाएं गर्भपात के लिए खुद को दोषी मानने लगती हैं या परिवार के कुछ लोग भी उन पर सवाल उठाना शुरू कर देते हैं। ऐसे में इन बातों को तूल न दें क्योंकि अधिकांश मामलों में गर्भपात के बाद भी सामान्‍य डिलिवरी हो जाती है।
  •  केवल 20% महिलाओं में ही (जिनका गर्भपात हुआ है) फिर से मिसकैरिज की संभावना होती है।
  • अगर आप वर्किंग वीमेन हैं तो मिसकैरिज के बाद जितनी जल्दी हो सके फिर से ऑफिस ज्वाॅइन कर लें और खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें। अपनी सेहत का ध्यान रखें। ज्यादा परेशानी हो तो काउंसलर से जरूर संपर्क करें।

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गर्भपात की रोकथाम कैसे करें?

अधिकांशत: गर्भपात का कारण क्रोमोसोम में असमान्यता होता है। इसलिए इस तरह के मिसकैरिज को रोकने के लिए तो कुछ नहीं किया जा सकता है लेकिन, गर्भधारण से पहले खुद को स्वस्थ रखना गर्भपात की संभावनाओं को काफी हद तक कम कर देता है। इसलिए:

  • नियमित रूप से व्यायाम करें
  • स्वस्थ खाना खाएं (विशेषकर फोलिक एसिड और विटामिन),
  • स्ट्रेस फ्री रहें
  • वजन संतुलित रखें
  • धूम्रपान न करें

और जब पता चले कि आप गर्भवती हैं, तो जितना संभव हो उतना स्वस्थ्य रहने की कोशिश करें ताकि आपके बच्चे को विकसित होने के लिए स्वस्थ वातावरण मिल सके:

  • धूम्रपान न करें और धुएं के आसपास न रहें।
  • एल्कोहॉल लेना छोड़ दें।
  • किसी भी ओवर-द-काउंटर दवाओं को लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।
  • कैफीन लेना बंद कर दें।
  • रेडिएशन और संक्रामक रोग से बचें।
  • ऐसी गतिविधियों से बचें जिनमें चोट लगने का खतरा हो।

मिसकैरिज के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर और सही डॉक्‍टरी सलाह अपनाकर गर्भपात की संभावना को कम किया जा सकता है। बता दें कि प्रेग्‍नेंसी के शुरू के 20 हफ्तों के दौरान डॉक्टर सबसे ज्‍यादा सावधानी बरतने को कहते हैं तो इसका ध्यान रखें।

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Written by Shikha Patel

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