सुरक्षित सेक्स (Safe Sex) सेक्शुअल वेलनेस (Sexual Wellness) का बड़ा उदाहरण है। असुरक्षित यौन संबंध महिला (Female) और पुरुष (Male) दोनों में कई तरह के रोगों (Diseases) को जन्म देता है। इनमें से एक है क्लैमाइडिया संक्रमण (Chlamydia Infection), जो अत्यधिक लोगों के साथ यौन संबंध बनाने और असुरक्षित यौन संबंध बनाने समेत कई कारणों से फैलता है। क्लैमाइडिया के फैलने का एक कारण बार-बार सेक्स करते समय कंडोम का इस्तेमाल न करना भी है। मेडिकल साइंस के अनुसार, क्लैमाइडिया से ठीक होने के बाद इसके दोबारा फैलने की भी संभावना होती है। क्लैमाइडिया का खतरा युवा महिला और पुरुष में अधिक होता है, क्योंकि यह यौन संबंध बनाने में बहुत सक्रिय (Active) होते हैं।
क्लैमाइडिया (Chlamydia)क्या है?
क्लैमाइडिया (Chlamydia) एक सामान्य यौन संचारित (Sexually Transmitted Diseases) रोग है। यह क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस नाम बैक्टीरिया से फैलता है। क्लैमाइडिया के लक्षण गोनोरिया (Gonorrhea) एक यौन संक्रमित जीवाणु के कारण होने वाले संक्रमण रोग से मिलते-जुलते हैं। क्लैमाइडिया के लक्षण पुरुष और महिला दोनों में आसानी से देखने को नहीं मिलते हैं।
महिलाओं की बात करें तो यह रोग उनके गर्भाशय ग्रीवा (Cervix), मलाशय (Rectum) और गले में फैलता है। क्लैमाइडिया महिलाओं के लिए बहुत हानिकारक रोग है। इससे महिलाओं की गर्भाशय नलिकाओं (Fallopian Tube) को नुकसान पहुंचता है, जो बांझपन का एक बड़ा कारण भी हो सकता है। साथ ही महिलाओं में एक्टोपिक गर्भावस्था (Ectopic Pregnancy)
का खतरा बढ़ सकता है। एक्टोपिक गर्भावस्था वह अवस्था होती है जब भ्रूण का निर्माण गर्भाशय में होने के बजाय गर्भाशय नलिकाओं में होने लगता है।
गर्भावस्था के दौरान क्लैमाइडिया से पीड़ित महिला को प्रीटर्म लेबर (Preterm Labor) से भी जूझना पड़ सकता है। साथ ही जन्म के समय बच्चे का वजन भी कम हो सकता है। वहीं, पुरुषों में इस रोग का विकास मलाशय, मूत्र मार्ग (लिंग के अंदर) और गले में होता है।
क्लैमाइडिया के घरेलू उपचार
आमतौर पर क्लैमाइडिया के उपचार के लिए डॉक्सीसाइक्लिन (Doxycycline) और एजिथ्रोमाइसिन (Azithromycin) एंटीबायोटिक दवाओं सेवन करने की सलाह दी जाती है। लेकिन, इसके इलाज के लिए अन्य एंटीबायोटिक दवाओं को भी लिया जा सकता है। क्लैमाइडिया से संक्रमित गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए एजिथ्रोमाइसिन (Azithromycin), इरिथ्रोमाइसिन (Erythromycin ) को लिया जा सकता है। वहीं, जब बात आती है क्लैमाइडिया के घरेलू उपचार की तो वह इस प्रकार है…
हल्दी एक नेचुरल एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सिडेंट पदार्थ है। हल्दी शरीर के लिए कई तरह से लाभदायक होती है। जब बात आती है क्लैमाइडिया की तो हल्दी से नष्ट हुए टिश्यू की मरम्मत में बड़ा लाभ मिलता है।
साथ ही हल्दी को भोजन या दूध में डालकर पीने के भी कई फायदे हैं। आप हल्दी की चाय भी सकते हैं जो शरीर को बीमारियों से दूर रखेगी। हल्दी का सेवन दिन में दो बार या उससे ज्यादा बार करना अधिक लाभदायक हो सकता है।
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इसमें कई औषधीय गुण हैं। लहसून का सेवन हजारों वर्षों से कई बीमारियों से लड़ने के लिए किया जा रहा है। लहसून एंटीफंगल, एंटीप्रोटोजोल, एंटीवायरल और जीवाणुरोधी गुणों से पूर्ण है।
इस कारण यह बैक्टीरियल इंफेक्शन को दूर करने में कारगार साबित होता है। क्लैमाइडिया से इंफेक्टेड होने पर नियमित रूप से लहसून का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है।
ध्यान रहे दिन में लहसून की चार फांक से ज्यादा का सेवन करने से उल्टी, दस्त और मतली की समस्या हो सकती है।
जैतून का तेल ( Olive Oil)
जैतून का तेल रोगाणुरोधी और एंटीवायरल गुणों से भरपूर होता है। इसी कारण इसे क्लैमाइडिया में बड़ा कारगार माना जाता है। क्लैमाइडिया की समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि आप जैतून के कैप्सूल का सेवन भी कर सकते हैं।
कई घरेलू उपचारों में एकिनेशिया का इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन यह नेचुरल कोल्ड (Natural Cold) और फ्लू रेमिडी (Flu Remedies) के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है। एकिनेशिया इम्यूनिटी को बूस्ट करता है जो बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन से लड़ने में बहुत ही मददगार है।
क्लैमाइडिया के लक्षणों को कम करने में एकिनेशिया अहम भूमिका निभाता है। अगर आप क्लैमाइडिया से बचना चाहते हैं तो एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इसका सेवन भी कर सकते हैं।
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गोल्डन सील कई बीमारियों में घरेलू नुस्खे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसका सेवन करने से शरीर के कई रोगों को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
यह दावा किया गया है कि गोल्डन सील अपर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Upper Respiratory Infections) और कंकेर सोर्स (Canker Sores) समेत कई बीमारियों को दूर करने में लाभदायक साबित होता है।
साथ ही यह भी दावा किया गया है कि गोल्डनसील एसटीआई, गोनोरिया (Gonorrhea) और क्लैमाइडिया के इलाज में कारगार हो सकता है। गोनोरिया एक यौन संक्रमित जीवाणु के कारण होने वाला एक संक्रमण है जो पुरुषों और महिलाओं दोनों को संक्रमित करता है।
कई गुणकारी गुणों से भरपूर अजवाइन का तेल क्लैमाइडिया से बचाने में मदद करता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, अजवाइन में कारवाकरोल और थायमोल जैसे तत्व प्राकृतिक संक्रमण को दूर में सहायक होते हैं। अजवाइन में हीलिंग कैपिसिटी होती भी है।
क्लैमाइडिया से इंफेक्टेड लोगों के लिए साबुत अजवाइन और इसके तेल का सेवन कारगार साबित होता है। अजवाइन के तेल को इंफेक्टेट अंग पर लगाने से बहुत राहत मिलती है। बता दें कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं इसका सेवन करने से बचें।
हेल्दी डायट लें (Healthy Diet)
क्लाईमैडिया से संक्रमित व्यक्ति को अपने संतुलित और पौष्टिक आहार पर भी ध्यान देना होगा। भोजन में दही शामिल करनी चाहिए। दही इम्यूनिटी पॉवर को बूस्ट करती है और वह क्लैमाइडिया से बचाव भी करती है।
साथ ही विटामिन सी से भरपूर चीजों का सेवन करें, जैसे कि संतरे, नींबू और आंवला। अपनी खाने की थाली में हरी पत्तेदार सब्जियों की भी मात्रा बढ़ाएं। साथ ही बादाम, साबुत अनाज, फलियां और सरसों का भी सेवन करें। इससे शरीर हेल्दी रहेगा और संक्रमण का खतरा कम बना रहेगा।
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हल्दी की तरह अदरक में भी कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। अदरक में मैक्रो, माइक्रोलेमेंट्स(MICRO ELEMENTS), विटामिन, अमीनो एसिड और अन्य तत्व होते हैं। अदरक से शरीर में एनर्जी और जोश बढ़ता है। क्लैमाइडिया से बचने के लिए अदरक का सेवन बहुत ही लाभदायक होता है।
अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो मासिक धर्म में महिलाओं के दर्द को कम करने का भी काम करता है। क्लैमाइडिया से महिला को बांझपन की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है। लेकिन अदरक बांझपन की समस्या की संभावना को घटाती है।
पुरुषों के लिए अदरक एक प्राकृतिक कामोद्दीपक के रूप में काम करता है। यह ब्लड सर्कुलेशन और मांसपेशियों की टोन में सुधार करता है। अदरक पुरुष की कामेच्छा और शक्ति को बढ़ाता है। प्रोस्टेटाइटिस में पुरुषों के लिए अदरक के कई लाभ बताए गए हैं।
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क्लैमाइडिया से ऐसे करें बचाव
क्लैमाइडिया जैसे हानिकारक संक्रमण से बचने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी हो जाता है। आइए जानते हैं क्लैमाइडिया से कैसे बचा सकता है।
1. ज्यादा लोगों से संबंध बनाने से बचें।
2. पार्टनर संग सेक्स करते समय कंडोम का इस्तेमाल जरूर करें।
3. बार-बार सेक्स करने वाले इस बात को समझ लें कि असुरक्षित यौन संबंध न बनाएं।
4. असंक्रमित के साथ ही यौन क्रिया को अंजाम दें।
5. अत्यधिक यौन इच्छाओं पर काबू करें।
6. संक्रमित होने की अवस्था में यौन संपर्क करने से बचें और डॉक्टर की सलाह भी लें।
7. पेशाब करते वक्त में जलन महसूस होने पर संबंध बनाने से बचें और डॉक्टर को दिखाएं।
8. क्लैमाइडिया से संक्रमित होने पर पार्टनर को बताएं ताकि वह यौन संबंध बनाने की जिद्द न करे। पार्टनर के लिए जरूरी है कि वह इस अवस्था में उनका साथ दें और इलाज करवाएं।
9. क्लैमाइडिया संक्रमण के लक्षण आसानी से पता नहीं चलते हैं, इसलिए थोड़ी भी परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
10. सेक्स लाइफ हेल्दी रहे, इसके लिए नियमित रूप से क्लैमाइडिया का टेस्ट करवाते रहें।
अपनी हेल्दी सेक्स लाइफ के लिए आप इस तरह के टिप्स अपना सकते हैं। इके अलावा, अधिक परेशानी होने पर आप डॉक्टर से संपर्क करें।