डिप्रेशन का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? आयुर्वेद के अनुसार क्या करें और क्या न करें?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अक्टूबर 10, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
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परिचय

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को उम्मीद है कि डिप्रेशन अन्य बीमारी का दूसरा बड़ा कारण बन सकता है। अवसाद और चिंता को अक्सर एक साथ देखा जाता है। बहुत ज्यादा मानसिक तनाव के चलते मेंटल डिस्टर्बेंस, अवसाद या चिंता का कारण बन सकता है। स्ट्रेस एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है।

हालांकि, बहुत ज्यादा तनाव मानसिक विकारों जैसे डिप्रेशन और एंग्जायटी सहित कई मेंटल डिसऑर्डर का परिणाम हो सकता है। ऐसे मानसिक विकारों के लिए कई ट्रीटमेंट मौजूद हैं। अल्टरनेटिव ट्रीटमेंट के रूप में डिप्रेशन का आयुर्वेदिक इलाज 100% सुरक्षित और इफेक्टिव सिद्ध होता है। आयुर्वेद में डिप्रेशन से कैसे छुटकारा पाएं? डिप्रेशन की आयुर्वेदिक दवा क्या है, डिप्रेशन का घरेलू इलाज कैसे करें, जानते है सब “हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में –

आयुर्वेद में डिप्रेशन का मतलब क्या होता है?

आयुर्वेद में अवसाद तीन प्रकार से आता है। हर अवसाद का इलाज अलग-अलग होता है। कोलन से वात, आंत से पित्त या पेट से कफ सामान्य सर्क्युलेशन में प्रवेश करता है और नर्वस सिस्टम (nervous system) को प्रभावित करता है। इससे नर्वस सिस्टम फंक्शन भी हस्तक्षेप करता है।

  • आमतौर पर वात-प्रकार के अवसाद से जुड़ी भावनाएं भय, चिंता, घबराहट और अनिद्रा हैं।
  • पित्त अवसाद बहुत गंभीर और खतरनाक होता है। इसकी वजह से आत्महत्या के विचार भी आ सकते हैं। इस प्रकार के अवसाद में क्रोध, असफलता का डर या नियंत्रण खोने की भावनाएं रोगी पर हावी होती हैं। पित्त डिप्रेशन, सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (Seasonal effective disorder) यानी सर्दियों में होने वाले अवसाद का कारण बनता है।
  • कफ अवसाद से भारीपन की भावना अवसाद ग्रस्त व्यक्ति पर हावी रहती हैं। अधिक नींद, उनींदापन, वजन बढ़ना और सुस्ती जैसी समस्या व्यक्ति को घेरे रहती हैं।

और पढ़ें: पार्टनर को डिप्रेशन से निकालने के लिए जरूरी है पहले अवसाद के लक्षणों को समझना

लक्षण

आयुर्वेद में अवसाद के लक्षण क्या हैं?

  • उदासी, खालीपन या निराशा की भावना
  • छोटी-छोटी बातों को लेकर गुस्सा, चिड़चिड़ापन या निराशा
  • सामान्य गतिविधियों, जैसे कि सेक्स, खेल में रुचि की कमी
  • अनिद्रा, नींद में कमी या बहुत अधिक नींद आना
  • थकान और ऊर्जा की कमी,
  • भूख और वजन में कमी या भूख ज्यादा लगना या वजन बढ़ना
  • चिंता या बेचैनी
  • अतीत की असफलताओं के बारे में सोचना और उसे ठीक करने की कोशिश करना
  • ध्यान केंद्रित करने या निर्णय लेने में परेशानी
  • चीजों को याद रखने में मुश्किल होना
  • आत्महत्या के विचार आना
  • सुइसाइड करने का प्रयास करना या आत्महत्या के बारे में लगातार बातें करना
  • बेवजह शारीरिक समस्याएं, जैसे पीठ दर्द या सिरदर्द आदि।

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डिप्रेशन के प्रकार

डिप्रेशन कितने दिन तक रहता है? यह बात अवसाद के प्रकार पर निर्भर करती है। अवसाद निम्न प्रकार के हो सकते हैं-

रिकरेन्ट डिप्रेसिव डिसऑर्डर (Recurrent depressive disorder)

इस प्रकार के अवसाद में पीड़ित में बार-बार डिप्रेसिव एपिसोड आते हैं। इन एपिसोड के दौरान, व्यक्ति उदास, भूख में कमी, रुचि और ख़ुशी की कमी का अनुभव करता है और कम से कम यह दो सप्ताह के लिए रहता है।

बाइपोलर इफेक्टिव डिसऑर्डर (Bipolar effective disorder)

इस प्रकार के अवसाद में आमतौर पर मैनिक और डिप्रेसिव एपिसोड दोनों देखने को मिलते हैं। यह सोशल, साइकोलॉजिकल और बायोलॉजिकल फैक्टर्स के परिणामस्वरूप होता है।

और पढ़ें: सोशल मीडिया से डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं बच्चे, ऐसे करें उनकी मदद

कारण

डिप्रेशन के कारण क्या हैं?

Fight Depression 

  • फैमिली में डिप्रेशन की हिस्ट्री।
  • वित्तीय समस्याओं, किसी रिश्ते के टूटने या किसी प्रिय की मृत्यु जैसी चीजों के कारण होने वाला ट्रामा और तनाव अवसाद का कारण बन सकता है।
  • कुछ बिमारियों जैसे स्ट्रोक, हार्ट अटैक, कैंसर, पार्किंसंस रोग और हार्मोनल विकारों से व्यक्ति अवसाद का शिकार हो सकता है।
  • कई दवाइयाँ जैसे कि स्टेरॉयड, पेन किलर, हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं, कैंसर की दवाएं आदि डिप्रेशन को ट्रिगर या बढ़ा सकते हैं।
  • मनोवैज्ञानिक विकार जैसे कि चिंता विकार, खाने के विकार, सिज़ोफ्रेनिया से डिप्रेशन हो सकता है।
  • मादक द्रव्यों का सेवन आदि।
  • अकेले रहने से अवसाद हो सकता है।

और पढ़ें: महिलाओं में डिप्रेशन क्यों होता है, जानिए कारण और लक्षण

उपचार

डिप्रेशन का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

डिप्रेशन का आयुर्वेदिक इलाज : थेरिपी

निदान परिवर्जना (Nidana parivarjana)

आयुर्वेद में अवसाद का इलाज करने के लिए, ट्रामा, स्टेरॉयड का उपयोग, दर्द निवारक दवाएं जैसे कारकों से बचना होता है। यदि कोई पुरानी बीमारी है तो पहले इससे ही निपटना चाहिए और अकेले रहने से बचना चाहिए।

शोधन चिकित्सा (बायो-क्लिनिंग थेरिपी) के बाद समन चिकित्सा (Palliative therapy) की जा सकती है। डिप्रेशन से बाहर निकलने का उपाय शोधन प्रक्रिया के अंतर्गत शामिल हैं :

स्नेपना (internal oleation)

आयुर्वेद में डिप्रेशन के इलाज के लिए स्नेपना की सलाह दी जाती है।

विरेचन (Purgation)

विरेचन में जड़ी बूटियों के मिश्रण से तैयार रेचक को अवसाद पीड़ित को दिया जाता है जिससे शरीर के विषाक्‍त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।

नास्य कर्म

पुराने गाय के घी या अनु तेल (Anu taila) या पंचगव्य घी को सात दिनों तक नोस्ट्रिल्स में 8-8 बूँद डालकर अवसाद को ठीक किया जाता है।

शिरो वस्ति

इस विधि से आयुर्वेद में अवसाद के इलाज के लिए सात दिन तक रोजाना 45 मिनट तक सिर पर मालिश की जाती है।

अभ्यंगम

इसमें औषधीय हर्बल तेलों के साथ पूरे शरीर की मालिश की जाती है। अभ्यंगम चिकित्सा से शरीर से अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों को हटाने में मदद मिलती है। यह शरीर के महत्पूर्ण प्रेशर पॉइंट्स को उत्तेजित करता है, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद में कमी होती है।

शिरोधारा

इस उपचार में एक निश्चित समय के लिए पेंडुलम गति के साथ माथे पर लगातार तेल डाला जाता है। माथे पर लगातार तेल डालने से तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है। 0 से 60 मिनट तक यह आयुर्वेदिक प्रक्रिया की जाती है। हाई ब्लड प्रेशर और अनिद्रा के इलाज के लिए यह प्रभावी होता है।

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डिप्रेशन का आयुर्वेदिक इलाज : जड़ी-बूटियां

अश्वगंधा

अश्वगंधा में स्टेरॉइडल लैक्टोन, सैपोनिन, एल्कलॉइड्स और विथेनाओलाइड्स जैसे सक्रिय यौगिक होते हैं। इससे तनाव और चिंता को दूर करने में मदद मिलती है। इसके लिए अश्वगंधा चूर्ण या अर्क का सेवन किया जा सकता है।

ब्राह्मी

ब्राह्मी तनाव को ठीक करने की एक पुरानी जड़ी-बूटी है। ब्राह्मी एडाप्टोजेन के रूप में कार्य करता है, जिसका मतलब है कि यह शरीर को नई या तनावपूर्ण स्थितियों के अनुकूल बनाने में मदद करता है। इसके सेवन से मस्तिष्क में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है जो मन को शांत रखने में मदद करता है और चिंता और घबराहट में राहत देता है।

जटामांसी (स्पाइकेनार्ड)

जटामांसी अनिद्रा और अन्य नींद संबंधी विकारों को ठीक करने में मदद करती है। यह अपने अवसाद-रोधी, तनाव-रोधी और थकान-रोधी गुणों के लिए जानी जाती है। मूड स्विंग और तनाव विकारों के लिए यह बहुत ही प्रभावकारी है।

अवसाद का इलाज आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से करने के लिए वच, शतावरी, मुलेठी, गुडुची (Guduchi), कपिकछु (बेनसिसा हेस्पिडा) आदि भी सहायक होती हैं।

और पढ़ें: मूड स्विंग्स से जुड़ी ये जरूरी बातें नहीं जानते होंगे आप, क्विज खेलें और बढ़ाएं अपना ज्ञान

डिप्रेशन की आयुर्वेदिक दवा

  • ब्राह्मी वटी : 250-500 मि.ग्रा को शहद के साथ 15 दिनों तक लेने से अवसाद से राहत मिलती है।
  • महाकल्याणक घृत की 6 ग्राम मात्रा को गुनगुने पानी के साथ 15 दिनों तक लेना डिप्रेशन के उपचार में मददगार साबित होता है।
  • सारस्वतारिष्ट (Sarasvatarishta) की 10-20ml मात्रा को पानी के साथ15 दिन तक लेने से अवसाद ग्रस्त व्यक्ति को आराम मिलता है।
  • 10 ग्राम ब्रह्म रसायन को दूध के साथ लेने की सलाह दी जाती है इससे अवसाद के लक्षण कम होते हैं।

ऊपर बताई गई दवाओं के अलावा अश्वगंधारिष्ठ (Ashvagandharishta), कल्याण घृत आदि को भी डिप्रेशन की आयुर्वेदिक दवा के रूप में डॉक्टर द्वारा दी जाती है। डिप्रेशन का होम्योपैथिक इलाज हो या आयुर्वेदिक किसी भी दवा को लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी जरूरी है। उपचार की अवधि हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती है।

डिप्रेशन के लिए योग

निम्नलिखित योगाभ्यास डिप्रेशन में फायदेमंद हैं; हालाँकि, ये केवल योग एक्सपर्ट के मार्गदर्शन में किए जाने चाहिए।

  • पद्मासन, शवासन, सूर्यनमस्कार, भुजंगासन, पस्चीमोत्तानासन, सर्वांगासन
  • प्राणायाम (कपालभाति, भस्त्रिका, अनलोम-विलोम)
  • मेडिटेशन (ध्यान)

क्या डिप्रेशन का आयुर्वेदिक इलाज प्रभावी है?

सबसे आम मानसिक विकार अवसाद, चिंता और नशे की लत है। अवसाद के लिए उपचार में एंटीडिप्रेसेंट दवा शामिल है जिसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। अवसादग्रस्तता विकार के उपचार के लिए एक हर्बल और शिरोधारा थेरिपी की प्रभावशीलता बहुत ही कारगर है। एनसीबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार हर्बल और शिरोधारा का उपयोग अवसाद के इलाज में किया जा सकता है। यह बहुत ही प्रभावी होता है और इसके कोई भी साइड इफेक्ट्स नहीं दिखाई दिए।

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दुष्प्रभाव

कैंसर के मरीजों को अश्वगंधा का सेवन थोड़ी मात्रा में ही करना चाहिए, अन्यथा इसके दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं। इसके अलावा ब्राह्मी का सेवन करने से खुजली का खतरा रहता है, इसलिए उसकी खुराक को अपने अनुसार न बढ़ाएं। डॉक्टर या अपने स्वास्थ्य प्रदाता से सलाह लें।

इसके अलावा आयुर्वेदिक दवाएं संपूर्ण रूप से सुरक्षित होती हैं और इनके अधिक दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

और पढ़ें: आयुर्वेद और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के बीच क्या है अंतर? साथ ही जानिए इनके फायदे

आयुर्वेद के अनुसार डिप्रेशन का आयुर्वेदिक इलाज करते समय जीवनशैली में बदलाव

क्या करें?

  • एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर आहार लें। इसके लिए डायट में अनार, आंवला, अंगूर, मौसमी फल शामिल करें।
  • हरी सब्जियां और पीले फल (विटामिन बी 1, बी 2, बी 12 और बायोटिन) पर्याप्त मात्रा में लें।
  • कम वसा वाला आहार लें।
  • ध्‍यान, योग और प्राणायाम करें।
  • ज्यादा से ज्यादा समय अपनों के साथ बिताएं।
  • सामाजिक कार्यों में हिस्‍सा लें।
  • पर्याप्‍त नींद लें।

क्या न करें?

  • अकेले ड्राइविंग करने से बचें।
  • जंक फूड्स, एल्कोहॉल और स्मोकिंग से दूर रहें।
  • बार-बार न खाएं।
  • बासी और मसालेदार खाने से बचें।
  • हाई कैलोरी वाले फूड्स से बचें।

और पढ़ें: पार्टनर को डिप्रेशन से निकालने के लिए जरूरी है पहले अवसाद के लक्षणों को समझना

प्रभाव

आयुर्वेदिक उपचार कितने प्रभावशाली होते हैं?

अश्वगंधा पर किए गए अध्ययन में यह पाया गया कि वह एक एंटीडिप्रेसेंट दवा की ही तरह काम करता है और मन को शांत करने में मदद करता है। इसके अलावा अश्वगंधा में कई ऐसे गुण होते हैं, जो व्यक्ति को अवसाद और चिंता से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। इसमें मौजूद एंग्जियोलाइटिक प्रभाव व्यक्ति को और डर से बचाने में भी मदद करते हैं।

इसके अलावा ब्राम्ही आयुर्वेदिक दवा भी बेहद कारगर होती है। इसमें भी अश्वगंधा की ही तरह एंग्जियोलाइटिक गुण होते हैं, जो याददाश्त की क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। चूहों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार ये प्रभाव बौद्धिक शक्तियों को बढ़ावा देते हैं।

और पढ़ें: टांगों में दर्द का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? टांगों में दर्द होने पर क्या करें और क्या ना करें?

डिप्रेशन के घरेलू उपाय

मानसिक रोगों का आयुर्वेदिक इलाज करने के दौरान ये बातें भी ध्यान दें

  • किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें, जिस पर आप अपनी भावनाओं के बारे में भरोसा करते हैं।
  • ज्यादातर लोग किसी ऐसे व्यक्ति से बात करने के बाद बेहतर महसूस करते हैं, जो उनकी परवाह करते हैं।
  • काउंसलिंग की मदद लें। याद रखें कि सही मदद से आप बेहतर हो सकते हैं।
  • उन गतिविधियों को करें, जिनसे आप खुश रहते हैं।
  • परिवार और दोस्तों के संपर्क में रहें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें, भले ही वह एक लंबी वॉक क्यों न हो।
  • नियमित खाने और सोने की आदतों से जुड़े रहें।
  • यदि आपके मन में आत्महत्या के विचार आते हैं, तो तुरंत किसी की मदद लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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