क्यों और किसे है ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर का खतरा ज्यादा?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जुलाई 10, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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आप सोच रहे होंगे ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर किस तरह का कैंसर हैं? शायद इस तरह के कैंसर का नाम आपने पहली बार सुना है। तो चलिये आपको इसके बारे में बताते हैं।असल में ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर रोग है और जल्द ही आपको सुशांत सिंह राजपूत, संजना सांघी, सैफ अली खान, जावेद जाफरी जैसे जाने माने कलाकारों की फिल्म ‘दिल बेचारा’ में आपको ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर से पीड़ित मैनी (Manny)  यानि सुशांत सिंह राजपूत नजर आने वाले हैं। फिल्म ‘दिल बेचारा’ के ट्रेलर में यह दिखाया गया है की मैनी यानि सुशांत सिंह राजपूत ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर की वजह से परेशान तो रहते हैं लेकिन, जिंदगी से हार नहीं मानते हैं। वहीं फिल्म में कीजी (Kizie) यानि संजना सांघी भी कैंसर पेशेंट बताई गईं हैं। इस फिल्म के ट्रेलर को देखकर यह समझना आसान है कि फिल्म में खुद कैंसर पेशेंट बने सुशांत कैसे संजना की मदद करते हैं। लेकिन, कौन जानता था की हमेशा हंसते रहने वाला इंसान खुद की जिंदगी समाप्त कर लेगा। बीते महीने 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत ने अपने घर पर फांसी लगा कर सुसाइड कर लिया। सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड की खबर सुन कर पूरा देश सकते में है और अभी भी उनके फैन्स ये मानने को तैयार नहीं हैं कि उन्होंने खुद से मौत को गले लगा लिया।

एक ओर जहां सुशांत सिंह राजपूत की चर्चा लोगों की जुवां पर बनी हुई है, तो हाल ही में रिलीज होने वाली सुशांत सिंह राजपूत और संजना सांघी स्टारर फिल्म ‘दिल बेचारा’ भी ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर (Osteosarcoma cancer) रोग पर ही आधारित है। एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ में ऑस्टियोजेनिक सार्कोमा (Osteogenic Sarcoma) कैंसर के बारे में ट्रेलर में देखकर कैंसर की जानकारी मिलती है। सुशांत सिंह राजपूत और संजना सांघी स्टारर फिल्म ‘दिल बेचारा’ फिल्म जॉन ग्रीन के उपन्यास ‘द फॉल्ट इन ऑर स्टार्स’ पर आधारित फिल्म है।

समझने की कोशिश करेंगे की ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर जिसे एक तरह का बोन कैंसर (हड्डी का कैंसर) भी कहा जाता है। क्या है यह बीमारी?

  • ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर रोग क्या है?
  • ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर क्यों हो सकता है?
  • ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर के लक्षण क्या हैं? 
  • ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर का इलाज कैसे होता है? 
  • ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर का डायग्नोसिस कैसे किया जाता है?
  • ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर के जोखिम और जटिलताएं क्या हैं? 
  • ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर से बचाओ कैसे संभव है?

और पढ़ें: Gallbladder Cancer: पित्त का कैंसर क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर (Osteosarcoma cancer) रोग क्या है?

ऑस्टियोजेनिक सार्कोमा या ऑस्टियो सार्कोमा हड्डियों में होने वाली एक तरह की परेशानी है। यह हड्डियों में होने वाला ऐसा घाव है जो कैंसर में बदल जाता है। इसे एक प्रकार का बोन कैंसर भी कहते हैं। यह आमतौर पर घुटने के पास पिंडली में होता है। इसके अलावा यह कैंसर जांघ की हड्डी और कंधे के पास की हड्डी में हो सकता है। जबड़े की हड्डियों और लंबी हड्डियों में ऑस्टियो सार्कोमा तेजी से फैलता है।

ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर क्यों हो सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और रिसर्च के अनुसार ऑस्टियो सार्कोमा उन लोगों में ज्यादा होता है जिन्हें किसी तरह की बीमारी नहीं होती है। यह कैंसर आनुवांशिक भी होता है लेकिन रेयर होता है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि ब्लड रिलेशन में यह बीमारी नहीं होने के बावजूद भी कैंसर की यह बीमारी हो सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह है कि यदि ब्लड रिलेशन में अगर कोई व्यक्ति ऑस्टियोजेनिक सार्कोमा से पीड़ित है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

और पढ़ें: ट्रिपल-नेगिटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) क्या है ?

ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर के लक्षण क्या हैं?

ऑस्टियोजेनिक सार्कोमा कैंसर जिस तरह से शरीर के अलग-अलग हिस्सों में हो सकते हैं, ठीक वैसे ही इसके लक्षण भी उसी पर निर्भर करते हैं। लेकिन, कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:

इन ऊपर बताये गए लक्षणों के अलावा अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। इसलिए परेशानी महसूस होने पर जल्द से जल्द से डॉक्टर से संपर्क करें।

और पढ़ें: जीभ का कैंसर क्या है? कब बढ़ जाता है ये कैंसर होने का खतरा?

ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर का डायग्नोसिस कैसे किया जाता है?

इस कैंसर का निदान निम्नलिखित तरह से किया जाता है। जैसे:

आवश्यकता पड़ने पर ऊपर बताये गए टेस्ट के अलावा अन्य जांच की भी सलाह दी जा सकती है।

क्या है ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर रोग का इलाज?

ऑस्टियोजेनिक सार्कोमा कैंसर बच्चों और वयस्कों दोनों में हो सकता है। बच्चे और बड़ों का इलाज अलग-अलग तरह से किया जा सकता है। इलाज के दौरान डॉक्टर यह ध्यान रखते हैं कि ट्यूमर तेजी से बढ़ रहा है या उसकी रफ्तार धीमी है और फिर इलाज निम्नलिखित तरह से की जाती है। जैसे:

  • सर्जरी की मदद से इन्फेक्टेड एरिया को निकाल दिया जाता है
  • बीमारी की गंभीरता और मरीज की सेहत को ध्यान में रखते हुए कीमोथेरिपी या रेडियो थेरिपी दी जाती है।

कैंसर पेशेंट को लगातार डॉक्टर के संपर्क रहना और डॉक्टर द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करना आवश्यक होता है।

और पढ़ें: जानें किस स्टेज पर कैसे होता है प्रोस्टेट कैंसर ट्रीटमेंट

ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर के जोखिम और जटिलताएं क्या हैं?

रिसर्च के अनुसार:-

  • वैसे लोग जिनकी उम्र 10 से 30 साल हो
  • ऑस्टियोजेनिक सार्कोमा कैंसर उन बच्चों में ज्यादा होता है, जिनकी हाइट उम्र से ज्यादा बढ़ जाती है
  • महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह कैंसर ज्यादा होता है
  • किसी अन्य कैंसर के इलाज में रेडिएशन थेरिपी भी ऑस्टियोजेनिक सार्कोमा कैंसर की संभावना बढ़ा देता है
  • कुछ खास तरह की हड्डियों की बीमारी

ऐसे लोगों में ऑस्टियोजेनिक सार्कोमा कैंसर के जोखिम ज्यादा देखे जाते हैं या इन लोगों में अगर ऑस्टियोजेनिक सार्कोमा कैंसर है, तो अत्यधिक सावधानी बरतनी पड़ती है।

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ में सुशांत का एक डायलॉग है “जन्म कब लेना है और मरना कब है, ये हम डिसाइड नहीं कर सकते हैं। लेकिन, जीना कैसे है ये हम डिसाइड कर सकते हैं।” इसलिए अपनी जीवनशैली को हमेशा हेल्दी बनायें रखें। सकारात्मक विचारधारा अपनाएं।

और पढ़ें: मेल ब्रेस्ट कैंसर के क्या हैं कारण, जानिए लक्षण और बचाव

मुंबई पुलिस के अनुसार सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड की वजह डिप्रेशन है। डिप्रेशन में होने की वजह से ही उन्होंने खुदकुशी की है। डिप्रेशन (अवसाद) एक ऐसी मानसिक परेशानी है, जिसका अगर समय पर पता न चले या जानकारी न मिले तो यह स्थिति अत्यधिक गंभीर हो सकती है। इन दिनों डिप्रेशन की परेशानी लगातार बढ़ते जा रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार भारत में डिप्रेस्सेड लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। भारत की कुल जनसंख्या में 6.5 प्रतिशत लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। डब्लूएचओ की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि साल 2020 तक ये संख्या बढ़कर 20 प्रतिशत तक हो सकती है। इसलिए अगर आप ऐसी किसी भी परेशानी से गुजर रहें हैं, तो अपने दोस्तों से बात करें, अपने परिवार या करीबियों से बात करें और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।

अगर आप ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर रोग, डिप्रेशन या तनाव से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझें। किसी भी शारीरिक परेशानी को नजरअंदाज न करें और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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