लिपोमा धीमी गति से बढ़ने वाला सौम्य वसा युक्त गांठ हैं, जो शरीर में कहीं भी विकसित हो सकता है और आमतौर पर यह किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता। यह गांठ किसी को भी हो सकती है, इससे घबराने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन आपको गांठ में यदि दर्द या कोई अन्य समस्या हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
लिपोमा स्किन के अंदर बनने वाली एक सौम्य गांठ है जो एक्स्ट्रा फैट जमा होने के कारण होता है। यह फैटी लम्पस हानिकारक नहीं होते हैं। कुछ लोगों को ये भ्रम हो जाता है कि कैंसरस हो सकता है लेकिन यह गांठ कैंसरस नहीं होती है, लेकिन आपको यदि दर्द हो तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है। लिपोमा के कारणों का सही-सही पता नहीं चला सका है, लेकिन आमतौर पर इसे अनुवांशिक ही माना जाता है। शरीर में जहां भी फैट सेल्स होते हैं, वहां लिपोमा हो सकता है, आमतौर पर यह गर्दन, छाती, पीठ, कंधे, बांह और जांघों पर होता है। कई बार लिपोमा शरीर के अंदर भी विकसित हो जाता है और आपको इस बारे में पता ही नहीं चल पाता।

अधिकांश मामलों में व्यक्ति को 1-2 लिपोमा ही होते हैं। दुर्लभ मामलों में किसी-किसी को ढेर सारे लिपोमा हो जाते हैं, ऐसा परिवार में बहुत सारे लिपोमाटोसिस होने के कारण होता है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकती हैं।
वैसे तो लिपोमा के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है और अधिकांश मामलों में यह अनुवांशिक होता है, लेकिन इसके अलावा लिपोमा के लिए अन्य कारक भी जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे-
इसके अलावा इन मेडिकल कंडिशन्स में भी लिपोमा होने की संभावना अधिक होती हैः
इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकती हैं।
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लिपोमा आमतौर पर घातक नहीं होते और दर्द भी नहीं होता है और अधिकांश लिपोमा कैंसरस नहीं होते। हालांकि दुर्लभ मामलों में लिपोमा लिपोसारकोमा, एक फैट सेल कैंसर बन सकता है। इसलिए इसे नजरअंदाज न करें।
जब भी आपको शरीर पर अजीब सी गांठ दिखें डायग्नोसिस के लिए डॉक्टर के पास जाएं, हो सकता है यह सामान्य लिपोमा हो, लेकिन गांठ किसी गंभीर बीमारी का भी संकेत हो सकती है, इसलिए शरीर में कहीं भी गांठ होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। क्योंकि हो सकता है आपका लिपोमा कैंसरस लिपोसारकोमा हो। यह सामान्य लिपोमा की तुलना में तेजी से बढ़ता है और दर्द भी होता है। डॉक्टर से मिलने पर कुछ अन्य बातों की जानकारी देना भी आवश्यक है जैसे-
कभी भी शरीर में गांठ का एहसास होने पर डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
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फिजिकल एग्ज़ाम के जरिए डॉक्टर लिपोमा को डायग्नोस करता है। यह सौम्य और दर्दरहित होता है, फैट टिशू से बने होने के बावजूद छूने पर लिपोमा आसानी से हिलता है।
कुछ मामलों में डर्मेटोलॉजिस्ट लिपोमा का बायोप्सी लेता है। इस प्रक्रिया के दौरान टिशू के छोटे हिस्से का सैंपल लेकर लैब में टेस्ट के लिए भेजा जाता है। यह टेस्ट कैंसर की संभावनाओं को खत्म करने के लिए किया जाता है। हालांकि लिपोमा कैंसरस नहीं होता है, लेकिन दुर्लभ मामलों में यह लिपोसारकोमा, एक घातक कैंसर हो सकत है।
यदि लिपोमा विकसित होता है या उसमें दर्द होता है तो डॉक्टर इसे निकाल देगा, जिससे आपको राहत मिलेगी और लिपोसारकोमा की संभावना भी खत्म हो जाएगी। यदि बायोप्सी में लिपोसारकोमा की आशंका होती है तो आगे MRI और CT स्कैन किया जाता है।
लिपोमा से यदि आपको किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है तो इसके इलाज की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन इससे किसी तरह की परेशानी होने पर डर्मेटोलॉजिस्ट इसके इलाज की सलाह देते हैं। इलाज कई कारकों पर निर्भर करता है जिसमें शामिल है-
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लिपोमा का सबसे बेहतरीन इलाज है सर्जरी के जरिए इसे निकाल देना। यदि आपको कई गांठ हैं और यह लगातार विकसित हो रहा है तो सर्जरी ही बेस्ट ऑप्शन हैं। यह सर्जरी एनिस्थिसिया देकर की जाती है। कई बार सर्जरी के बाद भी गांठ दोबारा विकसित हो सकती है।
लिपोसक्शन इलाज का एक अन्य विकल्प है। लिपोमा चूकि फैट से बने होते हैं इसलिए यह प्रक्रिया इसका आकार छोटा करने में मदद करती है। लिपोसक्शन में एक बड़ी सीरिंज में सुई अटैच होती है और लिपोमा वाले जिस हिस्से पर इसे लगाया जाना है उसे सुन्न कर दिया जाता है।
प्रभावित हिस्से में स्टेरॉयड इंजेक्शन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरीके से इलाज में लिपोमा सिकुड़ कर छोटा हो जाता है, लेकिन यह लिपोमा को पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकता है।
लिपोमा सौम्य ट्यूमर हैं। इसका मतलब है कि यह पूरे शरीर में नहीं फैलता है। यह मांसपेशियों या आसपास के अन्य ऊतकों में नहीं फैलता है और इससे जान को कोई खतरा नहीं है।लिपोमा का नैचुरल ट्रीटमेंट क्या है ?
नैचुरल ट्रीटमेंट की हेल्प से लिपोमा का इलाज संभव है या फिर नहीं, इस बात का प्रमाण मौजूद नहीं है, लेकिन कुछ पौधों और जड़ी बूटियों की मदद से लिपोमा का ट्रीटमेंट किया जा सकता है। जानिए लिपोमा के इलाज के लिए किन जड़ी बूटियों का प्रयोग किया जा सकता है।
लिपोमा को लेकर साल 2013 के एक अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकला कि थुजा ऑसीडेन्टलिस का प्रयोग करने पर वार्ट (eradicate warts) में कमी महसूस की गई। प्राकृतिक चिकित्सा अधिवक्ताओं का सुझाव है कि अगर लिपोमा के ट्रीटमेंट के लिए थुजा ऑसीडेन्टलिस का उपयोग किया जाता है तो ये फायदेमंद साबित हो सकती है।
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साल 2013 में क्लीनिकल स्टडी के दौरान ये बात सामने आई कि बोसवेलिया एंटी इंफ्लामेंट्री एजेंट की तरह काम करता है। साथ ही ये लिपोमा की समस्या से राहत दिलाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
जड़ी-बूटी और औषधी का प्रयोग करने से पहले चिकित्सीय की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए। अगर आपके शरीर में किसी भी स्थान में गांठ का अनुभव हो रहा है तो बेहतर होगा कि आप तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। घर पर किसी भी गांठ या उभार को छूकर ये पता कर पाना बहुत मुश्किल होता है कि वो कैंसर हो सकता है या फिर नहीं। अगर डॉक्टर जांच के बाद बताते हैं कि आपको लिपोमा की समस्या है तो आप डॉक्टर से उसके ट्रीटमेंट के बारे में जरूर पूछें।
लिपोमा को फैटी ट्यूमर भी कहा जाता है। आमतौर पर ये हार्मलेस होते हैं और दर्द न होने के स्थिति में इन्हें ट्रीटमेंट की जरूरत भी नहीं पड़ती है। आपको एक बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव को नजरअंदाज न करें। अगर आपको किसी भी प्रकार की गांठ का एहसास हो तो पहले उसकी जांच करें और फिर डॉक्टर से संपर्क करें। आपकी सावधानी बड़ी समस्या को आने से रोक सकती है।
आशा है कि आपको इस आर्टिकल के माध्यम से लिपोमा या चर्बी की गांठ के बारे में जानकारी मिल गई होगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए तो आप हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट में आर्टिकल पढ़ सकते हैं, साथ ही फेसबुक पेज की सहायता से आप हेल्थ से रिलेटेड न्यूज से अपडेट रह सकते हैं।
डिस्क्लेमर
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Lipoma nhs.uk/conditions/lipoma/ accessed/25/December/2019
Current Version
17/08/2020
Kanchan Singh द्वारा लिखित
के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. पूजा दाफळ
Updated by: Manjari Khare