CREST Syndrome : क्रेस्ट सिंड्रोम क्या है?

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Update Date दिसम्बर 15, 2019 . 5 मिनट में पढ़ें
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परिचय

क्रेस्ट सिंड्रोम क्या है?

क्रेस्ट सिंड्रोम को लिमिटेड स्क्लेरोडर्मा भी कहते हैं। इस सिंड्रोम में कनेक्टिव टिश्यू में बदलाव होते हैं, जिसके कारण खून की नसों, हड्डियों की मांसपेशियों और आंतरिक अंगों में बदलाव होने लगते हैं। क्रेस्ट सिंड्रोम सिस्टेमिक स्क्लेरोसिस का सामान्य प्रकार है। क्रेस्ट कैल्सिनोसिस, रेनॉड्स फेनामेनन, इसोफेजियल डिसफंक्शन, स्क्लेरोडेक्टाइल और टेलैंगिक्टेसिया है।

कितना सामान्य है क्रेस्ट सिंड्रोम होना?

क्रेस्ट सिंड्रोम कितना सामान्य है, इसकी जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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लक्षण

क्रेस्ट सिंड्रोम के क्या लक्षण हैं?

क्रेस्ट सिंड्रोम के सामान्य लक्षण निम्न हैं :

  • कैल्सिनोसिस : त्वचा पर कैल्शियम के उभार हो जाते हैं, जिसमें दर्द होता है। ये उभार शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकते हैं।
  • रेनॉड्स फेनामेनन : हाथ पैर की त्वचा ठंडी या सफेद हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ब्लड फ्लो में समस्या रहती है।
  • इसोफेजियल डिसफंक्शन : मुंह से पेट तक जाने वाली नली को इसोफेगस कहते हैं। इस समस्या में खाना या पानी निगलने समस्या होती है।
  • स्क्लेरोडेक्टाइल : इसमें अंगुलियां और अंगूठे टाइट और मोटे हो जाते हैं। जिस कारण अंगुलियों को मोड़ने में तकलीफ होती है।
  • टेलैंगिक्टेसिया : हाथ, हथेली, चेहरे और होंठों पर लाल चकते पड़ जाते हैं। ये खून के नसों के फैलने के कारण होता है।

जिन लोगों को क्रेस्ट सिंड्रोम होता है, उनमें ऊपर बताएं गए लक्षणों में से दो लक्षण तो दिखाई ही देते हैं। इसके अलावा क्रेस्ट सिंड्रोम के ज्यादा लक्षणों की जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।

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मुझे डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर आप में ऊपर बताए गए लक्षण सामने आ रहे हैं तो डॉक्टर को दिखाएं। साथ ही क्रेस्ट सिंड्रोम से संबंधित किसी भी तरह के सवाल या दुविधा को डॉक्टर से जरूर पूछ लें। क्योंकि हर किसी का शरीर क्रेस्ट सिंड्रोम के लिए अलग-अलग रिएक्ट करता है।

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कारण

क्रेस्ट सिंड्रोम होने के कारण क्या हैं?

क्रेस्ट सिंड्रोम से ग्रसित लोगों में फाइब्रोब्लास्ट सेल पाई जाती है, जो ज्यादा मात्रा में कोलैजन का निर्माण करती है। ऊतकों में फाइब्रोसिस का बढ़ना ही स्क्लेरोडर्मा की पहचान है। सामान्यतः फाइब्रोब्लास्ट ऐसे कोलैजन बनाती है जो घाव को भरने का काम करती है। लेकिन, स्क्लेरोडर्मा के मामले में ये कोलैजन के जगह प्रोटीन का निर्माण करने लगता है। जिसके कारण कनेक्टिव टिश्यू के बैंड त्वचा के कोशिकाओं के आसपास बनने लगते हैं। इसके अलावा ये कनेक्टिव टिश्यू के बैंड आंतरिक अंगों और खून की नसों में भी जमा होने लगती है।

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जोखिम

कैसी स्थितियां क्रेस्ट सिंड्रोम के जोखिम को बढ़ा सकती हैं?

क्रेस्ट सिंड्रोम होने के लिए कई तरह के रिस्क फैक्टर जिम्मेदार होते हैं, जैसे :

  • आनुवंशिक कारक
  • क्रेस्ट सिंड्रोम पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है
  • गोरे लोगों की तुलना में क्रेस्ट सिंड्रोम काले रंग के अमेरिकन में ज्यादा पाया जाता है
  • पर्यावरण कारक भी जिम्मेदार होते हैं, पॉलीविनाइल क्लोराइड, बेन्जीन, सिलिका और ट्राइक्लोरोइथाइलिन जैसे टॉक्सीन के कारण क्रेस्ट सिंड्रोम हो जाता है। 

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निदान और उपचार

यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

क्रेस्ट सिंड्रोम का निदान कैसे किया जाता है?

क्रेस्ट सिंड्रोम का पता लगाना थोड़ा कठिन होता है। क्योंकि ये पांच तरह के समस्याओं का एक सिंड्रोम है। साथ ही कनेक्टिव टिश्यू और ऑटोइम्यून डिजीज की एक बीमारी है। इसके साथ ही इसमें पॉलीमायोसाइटिस, ल्यूपस और रयूमेटॉइड आर्थराइटिस की समस्याएं भी होती है।

क्रेस्ट सिंड्रोम का पता लगाने के लिए डॉक्टर निम्न तरह के टेस्ट करते हैं :

  • ब्लड टेस्ट : ब्लड टेस्ट के जरिए स्क्लेरोडर्मा के लिए जिम्मेदार एंटीबॉडीज का पता लगाया जाता है।
  • स्किन बायोप्सी : डॉक्टर त्वचा का सैंपल लैब में जांच के लिए भेजते हैं। ताकि पता लगाया जा सके कि स्क्लेरोडर्मा है या नहीं।
  • अन्य टेस्ट : बायोप्सी और ब्लड टेस्ट के अलावा फेफड़े, दिल या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल आदि संबंधी टेस्ट होते हैं। कैल्सिनोसिस की पुष्टि करने के लिए एक्स-रे या एमआरआई करते हैं। इसके अलावा क्रेस्ट सिंड्रोम का पता लगाने के लिए रेडियोलॉजिकल बेरियम टेस्ट भी किया जाता है।

क्रेस्ट सिंड्रोम का इलाज कैसे होता है?

दुर्भाग्यवश, क्रेस्ट सिंड्रोम का कोई सटीक इलाज नहीं है। इस बीमारी से ग्रसित लोगों को शारीरिक रूप से और मानसिक रूप से सामंजस्य बैठाने की जरूरत होती है। क्रेस्ट सिंड्रोम का इलाज लक्षणों के आधार पर होता है, रोकथाम ही इस समस्या का सबसे बड़ा इलाज है :

कैल्सिनोसिस : त्वचा पर कैल्शियम के उभार हो जाते हैं, जिसमें दर्द होता है। इसका कोई सटीक इलाज नहीं है। वहीं कुछ मामलों में ये छाले जैसे भी बन जाते है और इनके लक्षण अलग-अलग लोगों पर अलग होता है। कुछ दवाएं हैं, जिससे कैल्सिनोसिस में होने वाले दर्द से राहत मिलती है : 

  • कॉर्टकॉयड्स : ओरल या ऑइंटमेंट के रूप में
  • प्रोबेनेसाइड
  • डाइल्टियाजेम
  • वारफैरिन
  • एल्यूमिनियम हाइड्रॉक्साइड
  • बाइफॉस्फोनेट
  • मिनोसाइकलाइन
  • कॉल्चिसाइकलिन
  • इम्यूनोग्लोब्यूलिन थेरिपी

रेनॉड्स फेनामेनन : रेनॉड्स फेनामेनन का इलाज निम्न तरह से किया जाता है :

  • स्मोकिंग बंद करें, बीटा-ब्लॉकर दवाओं को छोड़ कर रेनॉड्स फेनामेनन के असर को कम किया जा सकता है।
  • हाथों और शरीर को गर्म करने जैसी एक्टिविटी करते रहें
  • लंबे समय तक काम करने वाले कैल्शियम चैनल ब्लॉकर का सेवन करें
  • जरूरत पड़ने पर नाइट्रोग्लिसरीन पेस्ट का प्रयोग कर सकते हैं

इसोफेजियल डिसफंक्शन : मुंह से पेट तक जाने वाली नली को इसोफेगस कहते हैं। इस समस्या में खाना या पानी निगलने समस्या होती है। इसके इलाज के लिए आपको अपने व्यवहार में बदलाव, एच 2 ब्लॉकर और इसोफेजियल डाइलेशन किया जाता है। इसोफेजियल डाइलेशन तब मददगार साबित होता है जब खाना निगलने में परेशानी होती है।

स्क्लेरोडेक्टाइल : इसमें अंगुलियां और अंगूठे टाइट और मोटे हो जाते हैं। जिस कारण अंगुलियों को मोड़ने में तकलीफ होती है। इसका इलाज कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेट्री दवाएं, डी-पेनिसिलामीन, आईएफएन-गामा, साइक्लोस्पोराइन और साइटोस्टैटिक ड्रग दे कर किया जाता है।

टेलैंगिक्टेसिया : हाथ, हथेली, चेहरे और होंठों पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। इन चकत्तों का इलाज पल्स्ड-डाई लेजर ट्रीटमेंट से किया जाता है। इसके अलावा एस्ट्रोजेन-प्रोजेस्ट्रॉन या डेसमोप्रेसिन, लेजर एब्लेशन या स्क्लेरोथेरिपी की जाती है। इन लक्षणों के इलाज के बावजूद 45 प्रतिशत लोग डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं, इसके साथ ही 64 प्रतिशत लोग को चिंता हो जाती है कि स्क्लेरोसिस के कारण उनका शरीर विकृत हो रहा है। क्रेस्ट सिंड्रोम के लिए आप फिजियोथेरिपी का सहारा भी ले सकते हैं।

घरेलू उपाय

जीवनशैली में होने वाले बदलाव क्या हैं, जो मुझे क्रेस्ट सिंड्रोम को ठीक करने में मदद कर सकते हैं?

क्रेस्ट सिंड्रोम के लिए निम्न घरेलू उपाय अपना सकते हैं :

  • रेनॉड्स फेनामेनन के लिए हाथों में ऊनी दस्ताने पहनें। साथ ही शरीर को गर्म रखें।
  • शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए पूरे शरीर को गर्म कपड़ों से ढक कर रखें।
  • स्मोकिंग करना छोड़ दें, क्योंकि निकोटिन आपके इलाज में बाधा बनता है।
  • अगर आपको खाना निगलने में समस्या हो रही है तो आप मुलायम, पतला खाना खाएं। साथ ही जो भी खाएं उसे अच्छे से चबा कर खाएं।
  • तीखा, मसालेदार, फैटी फूड्स, चॉकलेट, कैफीन और एल्कोहॉल का सेवन न करें। खाने के तुरंत बाद किसी भी तरह की एक्सरसाइज न करें।
  • हाथों पैरों की त्वचा को मुलायम रखने के लिए अच्छे क्वालिटी का साबुन इस्तेमाल करें। इसके बाद आप मॉस्चराइजर का भी प्रयोग करें।

इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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