ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस (Glomerulonephritis) किडनी की आंतरिक सरंचना जिसे ग्लोमेरूली कहते हैं, में सूजन है। जिसके कारण किडनी अपना काम सही तरह से नहीं कर पाती और पीड़ित शख्स को किडनी फेलियर भी हो सकता है। ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस के बारे में जानिए सबकुछ इस आर्टिकल में।
किडनी के अंदर रक्त वाहिकाओं का एक समूह होता है जिसे ग्लोमेरूली कहते हैं और यही शरीर से अतिरिक्त तरल, इलेक्ट्रोलेट्स और अपशिष्ट पदार्थों को रक्तवाहिका से निकालकर यूरीन तक पहुंचाता है। जब कभी ग्लोमेरूली में किसी कारण से सूजन आ जाती है तो इसे ही ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस कहा जाता है। यह अपने आप हो सकता है या किसी बीमारी के परिणामस्वरूप भी हो सकता है जैसे ल्यूपस या डायबिटीज। ग्लोमेरूली में सूजन यदि लंबे समय तक रहता है तो इससे किडनी क्षतिग्रस्त हो सकती है। कई मामलों में किडनी फेलियर भी हो जाता है। ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस को कभी-कभी नेफ्राइटिस भी कहा जाता है और यदि इसका समय पर उपचार न कराया जाए तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस अचानक यानी एक्यूट हो सकता है या लंबे समय का यानी क्रॉनिक हो सकता है।

ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस दो प्रकार के होते हैं एक्यूट और क्रॉनिक और इसके आधार पर ही इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। एक्यूट ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस के लक्षणों में शामिल हैः
क्रॉनिक ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस अचानक नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे लंबी अवधि में होता है। इसके लक्षणों में शामिल हैः
यदि किसी शख्स को किडनी फेलियर है तो उसकी भूख कम हो जाएगा, मितली या उल्टी जैसा महसूस होगा। नींद के पैर्टन में बाधा आने के कारण थकान महसूस होना, रात के सम मसल्स मे ऐंठन और त्वचा रूखी हो जाएगी और खुजली होती है।
एक्यूट और क्रॉनिक ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस के कारण अलग-अलग हो सकते है।
एक्यूट ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस किसी तरह के संक्रमण जैसे स्ट्रेप थ्रोट या एब्सेस्ड टूथ के कारण हो सकता है। ऐसा संक्रमण को लेकर आपके इम्यून सिस्टम के ओवररिएक्ट करने के कारण भी हो सकता है। आमतौर पर यह समस्या बिना किसी इलाज के ठीक हो जाती है, लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो आपको उपचार की जरूरत है, ताकि किडनी को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। एक्यूट ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस के कारणों में शामिल हैः
क्रॉनिक ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस लंबे समय में विकसित होता है। इस दौरान कुछ लक्षण दिख भी सकते हैं और नहीं भी। यह किडनी को बहुत अधिक हानि पहुंचाता है और किडनी फेलियर का कारण बनता है। क्रॉनिक ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस का हमेशा कोई स्पष्ट कारण नहीं होता है। कई बार अनुवांशिक बीमारी के कारण यह हो सकता है। अन्य संभावित कारणों में शामिल हैः
इसके अलावा यदि किसी को एक्यूट ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस है तो बाद में इसके क्रॉनिक होने की बहुत अधिक संभावना रहती है।
ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस के निदान के लिए सबसे पहले यूरिनैलिसिस टेस्ट किया जाता है। आपके यूरिन में मौजूद प्रोटीन और रक्त से बीमारी का पता लगाया जाता है। इसके अलावा ब्लड में एंटीजेन्स और एंटीबॉडी का भी पता लगाया जाता है। कई बार अन्य बीमारी के लिए कराए जाने वाले रूटीन फिजिकल एग्जाम में भी ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस का पता चल जाता है।
किडनी बायोप्सी भी की जाती है जिसमें एक छोटी सुई के जरिए किडनी टिशू का सैंपल निकाला जाता है और लैब में टेस्ट के लिए दिया जाता है। इससे स्थिति की गंभीरता का पता चलता है।
ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस का पता लगाने के लिए किडनी फंक्शन टेस्ट भी किया जाता है जिसमें ब्लड और यूरिन सैंपल का टेस्ट शामिल है।
आपका डॉक्टर निम्न की जांच के लिए इम्यूनोलॉजी टेस्ट भी कर सकता हैः
ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस के निदान के बारे में अधिक जानने के लिए डॉक्टर कुछ इमेजिंग टेस्ट भी कर सकता है जिसमें शामिल हैः
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ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि आपको एक्यूट ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस है या क्रॉनिक और यह कितना गंभीर है। यदि ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस का कारण कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है तो उसका उपचार करने पर ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस अपने आप ठीक हो जाता है। उपचार का मकसद किडनी को क्षतिग्रस्त होने से बचाना है।
ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस के कारण यदि किडनी को गंभीर क्षति पहुंचती है या किडनी फेलियर होता है तो आपको डायलासिस या किडनी ट्रांस्प्लांट की जरूरत हो सकती है।
ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस के अधिकांश मामलों में बचाव संभव नहीं होता। हालांकि कुछ कदम इसे कुछ हद तक रोकने में फायदेमंद साबित हो सकते हैः
ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस से उबरने और भविष्य में इससे बचने के लिए कुछ छोटी लेकिन अहम बातों का ध्यान रखेः
हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।