मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी मांसपेशियों की एक ऐसी बीमारी है, जिसमें मांसपेशियों के समूह धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगते हैं। ऐसा होने पर मरीज को चलने, उठने-बैठने में परेशानी होने लगती है। मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी (Muscular dystrophy) या मांसपेशियों की बीमारी कई तरह की होती हैं। लड़कों में बचपन या बढ़ती उम्र से ही यह समस्या शुरू हो सकती है।

डचेन मस्कुलर डिस्ट्रोफी (Duchenne muscular dystrophy)- बीमार पड़ने का यह सबसे सामान्य कारण है। यह प्रायः 5 साल से कम उम्र के बच्चों में होती है और यह परेशानी तेजी से बढ़ती जाती है। कई बच्चे तो 12 साल की उम्र में ही चलने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे बच्चों को बढ़ती उम्र में काफी शारीरिक परेशानियों (Physical problem) का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है।
बेकर मस्कुलर डिस्ट्रोफी (Becker muscular dystrophy)- डचेन मस्कुलर डिस्ट्रोफी (Muscular dystrophy) की तरह ही बेकर मस्कुलर डिस्ट्रोफी भी है। सिर्फ यह डचेन मस्कुलर डिस्ट्रोफी की तुलना में धीरे-धीरे विकसित होता है।
मायोटोनिक मस्कुलर डिस्ट्रोफी (Myotonic muscular dystrophy)- यह परेशानी अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग होती है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है। इस बीमारी के दौरान पैर, हाथ, चेहरे, दिल की बीमारी, और मोतियाबिंद (Cataract) जैसी परेशानी हो सकती है। कुछ पुरुषों में इस बीमारी के कारण बाल भी झड़ जाते हैं।
कॉनजेनाइटल (Congenital)- यह परेशानी जन्म के समय से ही या दो वर्ष की आयु से शुरू हो सकती है। यह परेशानी लड़के और लड़कियों दोनों में हो सकती है। बच्चों में यह परेशानी धीरे-धीरे बढ़ने लगती है।
एफएसएचडी (Facioscapulohumeral)- FSHD की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन, सबसे ज्यादा टीनेज इस समस्या से पीड़ित होते हैं। FSHD की समस्या होने के दौरान मसल्स कमजोर होने लगते हैं और इसकी शुरुआत चेहरे और कंधे से होती है। FSHD से पीड़ित व्यक्तियों के सोने के दौरान और गहरी नींद (Sound sleep) के समय में भी आंखें हल्की खुली होती हैं।
लिंब-गिर्डल (Limb-girdle)- चाइल्डहुड के दौरान या टीनेज में इसकी परेशानी होती है। सबसे पहले इसका नकारात्मक प्रभाव शोल्डर, और हिप मसल्स पर पड़ता है। कुछ लोगों को पैर के सामने वाले हिस्से में परेशानी शुरू हो सकती है।
ओकियोफरेंजियल मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Oculopharyngeal muscular dystrophy)- ओकियोफरेंजियल मस्कुलर डिस्ट्रॉफी 40 साल से 70 साल के उम्र के बीच के लोगों में होने वाली परेशानी है। इस दौरान आंखों की पलकें, गला और चेहरा सबसे पहले प्रभावित होता है।
यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी या मांसपेशियों की बीमारी पर अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी (Muscular dystrophy) के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। मांसपेशियों का सिर्फ एक खास ग्रुप या पेल्विस, शोल्डर या फेस के आसपास के हिस्सों में यह हो सकता है।
इसके कुछ निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं:
इन लक्षणों के अलावा और भी लक्षण हो सकते हैं। इसलिए अपनी परेशानी डॉक्टर से अवश्य बताएं।
हमें डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करना चाहिए। यह भी ध्यान रखें कि आपके परिवार में कोई इसी बीमारी से पीड़ित तो नहीं, अगर ऐसा है तो आप भी इसका शिकार हो सकती हैं।
कुछ जीन प्रोटीन (Protein) बनाने में शामिल होते हैं, जो मांसपेशियों को नुकसान से बचाते हैं। मांसपेशियों में डिस्ट्रॉफी (Muscular dystrophy) तब होती है जब इनमें से किसी जीन में विकार मौजूद हो।
जेनेटिक म्यूटेशन की वजह से मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी (Muscular dystrophy) की बीमारी होती है। लेकिन, कभी-कभी मां के गर्भ में पल रहे शिशु (भ्रूण) को उसी वक्त से होता है।
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निम्न कारणों की वजह से बढ़ सकती है मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी (Muscular dystrophy) की समस्या:
दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टर इलाज शुरू करने से पहले बॉडी चेकअप करते हैं और फैमली हिस्ट्री भी जानना चाहते हैं। चेकअप के दौरान मरीज का एलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG), अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) और इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी (ECG) भी करते हैं। नर्वस और मसल्स ठीक तरह से काम कर रहें हैं या नहीं इसकी जानकारी EGM से आसानी से मिल जाती है। कुछ रिसर्च के अनुसार जेनेटिक टेस्ट और ब्लड टेस्ट (Blood test) से क्रिएटिन किनेज (CK) एंजाइम्स से जुड़ी जानकारी भी मिलती है।
मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी के लिए कोई खास इलाज नहीं है। लेकिन, लक्षणों को समझकर इसका इलाज किया जाता है। इन उपचारों में शामिल हैं:
निम्नलिखित जीवनशैली और घरेलू उपचार आपको मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी से निपटने में मदद कर सकते हैं:
अगर आप मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी (Muscular dystrophy) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।
डिस्क्लेमर
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Current Version
15/12/2021
Nidhi Sinha द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr Sharayu Maknikar
Updated by: Bhawana Awasthi
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
Dr Sharayu Maknikar