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कोरोना के कहर से लोगों को बचाने के लिए इन महिलाओं ने नहीं मानी हार, आप भी जानिए कोरोना वॉरियर्स के बारे में

कोरोना के कहर से लोगों को बचाने के लिए इन महिलाओं ने नहीं मानी हार, आप भी जानिए कोरोना वॉरियर्स के बारे में

कोरोना महामारी के दौरान सबको घर के अंदर रहने की सलाह दी जा रही है। डॉक्टर्स कह रहे हैं कि आप लोग घर में रहे और हम लोग हॉस्पिटल्स में आपकी सुरक्षा के लिए हर वक्त मौजूद हैं। पूरी दुनिया में सिर्फ डॉक्टर्स ही नहीं, बल्कि ऐसे कई लोग हैं जो कोरोना के कहर से बचाने के लिए दिन रात काम कर रहे हैं। डॉक्टर से पायलट और सरपंच तक, अनगिनत कोरोना वॉरियर्स महिलाएं कोरोना के खिलाफ लड़ रही हैं। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि किस तरह से महिलाओं की कोरोना के खिलाफ जंग लगातार जारी है। साथ ही किस तरह से ये महिलाएं अन्य लोगों को भी कोरोना से लड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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कोरोना वॉरियर्स महिलाएं : जानिए क्या किया वायरोलॉजिस्ट ने?

मीनल दखावे भोसले का नाम उन कोरोना वॉरियर्स महिलाओं में आता है, जिन्होंने मुश्किल समय में किट बनाने के चैलेंज को एक्सेप्ट किया। महिला वायरोलॉजिस्ट मीनल दखावे भोसले ने अपने बच्चे को जन्म देने से महज कुछ घंटे पहले तक लगातार काम करके भारत का पहला वर्किंग टेस्ट किट तैयार किया। भारत में लॉकडाउन को आगे बढ़ा दिया गया है लेकिन अब भी ये बात सामने आ रही है कि भारत में कोरोना वायरस के लिए जांच धीमी गति से हो रही है। मीनल ने टेस्ट किट तब तैयार की थी, जब भारत में विदेशों से किट मंगाई जा रही थी। विदेशों से मंगाई जाने वाली किट से जांच का रिजल्ट छह से सात घंटे में आ रहा था। जबकि मीनल ने जो किट तैयार की थी, वो मजह दो से ढाई घंटे में ही जांच का रिजल्ट दे रही थी। अब आप खुद ही सोच सकते हैं कि जब पूरी दुनिया और भारत कोरोना के कहर से परेशान था, तब मीनल ने टेस्ट किट बनाने की सोची। मीनल ने टेस्टिंग किट प्रोजेक्ट पर काम तब शुरू किया थी, जब वो प्रेग्नेंट थी। डिलिवरी के पहले तक मीनल ने टेस्ट किट के लिए काम किया।

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कोरोना के कर्मवीर: रेस्क्यू पायलट ने बच्चों को मिलाया माता-पिता से

जब भारत में तेजी से कोरोना महामारी फैल रही थी, उस दौरान भारत के उन माता-पिता का मन बहुत परेशान था जिनके बच्चे या परिवार का समदस्य इटली में फंसा हुआ था। इटली में कोरोना महामारी के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। 22 मार्च को भारत की बेटी और कैप्टन श्वेता रावल ने इतिहास रच दिया। एयर इंडिया की कैप्टन श्वेता इटली में फंसे हुए भारतीय स्टूडेंट्स को भारत लेकर आई। उनके साथ ही कैप्टन राजा चौहान भी इटली गए थे। बोइंग 777 की हेल्प से इटली में फंसे हुए भारतीय छात्रों को भारत लाया गया। कोरोना महामारी के दौरान श्वेता पहली ऐसी महिला बनी जिन्होंने रेस्क्यू एयरक्राफ्ट किया भारतीय छात्रों को इटली से अपने देश तक पहुंचाने का काम किया।

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कोरोना वॉरियर्स महिलाएं : हिम्मत नहीं होगी कम

​इंदौर में मेडिकल टीम पर हुआ हमला डॉ. जाकिया के मजबूत इरादों को नहीं तोड़ पाया। डॉ. तृप्ति कटदरे और डॉ. जाकिया सैय्यद, ये दोनों महिला डॉक्टर उस टीम में शामिल थीं, जिस पर इंदौर के टाटपट्टी बाखल में कोरोना पॉजिटिव मरीज की कॉन्टेक्ट हिस्ट्री मिलने के बाद संदिग्ध लोगों की जांच करने गई मेडिकल टीम पर पथराव हुआ था। इंदौर मेडिकल टीम पर हुए हमले के बाद भी ये दोनों डॉक्टर उसी इलाके में फिर से लोगों को कोरोना वायरस से बचाने के जुट गई। यानी डॉक्टर्स ने ये साबित कर दिया कि हमारा काम लोगों को बचाना है, भले ही आप हम पर हमले करें। ऐसे डॉक्टर्स की हिम्मत और उत्साह कई लोगों को प्रेरणा देता है। साथ ही उन लोगों को शर्मसार भी करता है, जो डॉक्टर्स के साथ कॉपरेट करने के बजाय उन पर हमला करते हैं।

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कोरोना वॉरियर्स महिलाएं : कम उम्र की सरपंच ने संभाली जिम्मेदारी

ऐसा नहीं की केवल डॉक्टर्स ही कोरोना वॉरियर्स महिलाएं हैं। तेलंगाना की यंगेस्ट सरपंच भी कोरोना के कर्मवीर की भूमिका निभा चुकी हैं। तेलंगाना के मदनापुरम विलेज की 25 साल की सरपंच की लॉकडाउन के दौरान खूब तारीफ हुई। सरपंच अखिला यादव ने अपने गांव के लोगों को अच्छी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब समझाया। साथ ही उन्होंने लोगों को लॉकडाउन के नियमों का मतलब भी समझाया ताकि लोग कोरोना महामारी से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का नियम लागू करें। सरपंच ने मीडिया रिपोर्टस में जानकारी दी कि गांव से बाहर के लोग लॉकडाउन के दौरान आसानी से एक गांव से दूसरे गांव में जा रहे थे। इसलिए मैंने तय किया कि गांव के इंटरेंस में बैठ कर लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब समझाऊं और किसी को भी बिना वजह से गांव में घूमने न दूं।

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कोरोना के कर्मवीर: भेदभाव न करने की दी सलाह

तमिलनाडू की हेल्थ सेकेट्री डॉ. बीला राजेश अपने राज्य की कोरोना कर्मवीर हैं। उन्होंने लोगों को समझाया कि कोरोना के पेशेंट के साथ भेदभाव न किया जाए। ये बीमारी किसी को भी आसानी से हो सकती है। उन्होंने लोगों को समझाया कि कोरोना पेशेंट के प्रति दयालू बने और साथ ही खुद के बचाव के लिए सरकार की ओर जारी किए गए नियमों का पालन करें। उन्होंने लोगों को तब अवेयर किया जब तमिलनाडू में अचानक से महामारी ने पांव पसारने शुरू कर दिए थे।

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कोरोना वारियर : डॉ प्रिया अब्राहम

भारत का एक लौता कोरोना वायरस टेस्टिंग सेंटर आईसीएमआर द्वारा एफिलिएटेड नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी का कहना है कि डॉ अब्राहम कोरोनावायरस से लड़ने के लिए पूरी टीम में सबसे एहम रही हैं।

इंस्टिट्यूट की मुख्य टीम डॉ अब्राहम के अंडर आती थी। जिसकी मदद से 12 घंटे में होने वाले टेस्टिंग पीरियड को घटा कर केवल 4 घंटे कर दिया गया।

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गर्भावस्था में भी नहीं रुकी ये कोरोना वारियर

एस विनोथि 25 वर्षीय महिला हैं जो की एक प्राइवेट अस्पताल में काम करती हैं। तमिल नाडु की यह जाबांज महिला गर्भावस्था के 8 वे महीने में भी जरूरत पड़ने पर 250 किमी दूर रामनाथपुरम के हेल्थ सेंटर पहुंच गई।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 20/08/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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