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बोन कैंसर कीमोथेरिपी (Bone cancer chemotherapy): कब जरूरत पड़ती है बोन कैंसर के लिए कीमोथेरिपी!

बोन कैंसर कीमोथेरिपी (Bone cancer chemotherapy): कब जरूरत पड़ती है बोन कैंसर के लिए कीमोथेरिपी!

कैंसर होने पर सबसे पहले अगर कोई दूसरा शब्द मन में आता है, तो वो है कीमोथेरिपी। क्योंकि कैंसर के इलाज में कीमोथेरिपी की खास भूमिका होती है और कैंसर पेशेंट की रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए आज इस आर्टिकल में बोन कैंसर कीमोथेरिपी (Bone cancer chemotherapy) से जुड़ी जानकारी आपके साथ शेयर करेंगे।

  • बोन कैंसर के लिए कीमोथेरिपी ट्रीटमेंट क्या है?
  • बोन कैंसर कीमोथेरिपी के दौरान कौन-कौन से ड्रग्स का इस्तेमाल किया जा सकता है?
  • बोन कैंसर पेशेंट को कीमोथेरिपी कैसी दी जाती है?
  • कीमोथेरिपी ड्रग्स के साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं?
  • हड्डी के कैंसर के लक्षण क्या हैं?
  • बोन कैंसर का खतरा किन लोगों में ज्यादा होता है?

चलिए अब बोन कैंसर कीमोथेरिपी (Bone cancer chemotherapy) से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं, जिससे इस गंभीर बीमारी और इलाज के बारे में समझने में मदद मिल सके।

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बोन कैंसर के लिए कीमोथेरिपी ट्रीटमेंट क्या है? (About Bone cancer chemotherapy treatment)

बोन कैंसर कीमोथेरिपी (Bone cancer chemotherapy)

बोन कैंसर कीमोथेरिपी (Bone cancer chemotherapy) कैंसर सेल्स को नष्ट करने के लिए इलाज का एक तरीका है। एडल्ट्स में होने वाले हड्डी के कैंसर के लिए कीमोथेरिपी की सहायता ली जाती है। बोन कैंसर कीमोथेरिपी (Bone cancer Chemotherapy) ज्यादातर वेन में दी जाती है, जिससे कैंसर सेल्स को नष्ट किया जाता है। कीमोथेरिपी की सहायता प्रायः वैसी स्थिति में की जाती है जब कैंसर सेल्स अपने शुरुआती हिस्से से दूसरे हिस्सों को अपना शिकार बना लेता है।

बोन कैंसर कीमोथेरिपी विशेष रूप से इविंग सरकोमा (Ewing sarcoma), ऑस्टियो सार्कोमा (Osteosarcoma) एवं अविभाजित हुए प्लीओमोर्फिक सारकोमा (Undifferentiated Pleomorphic Sarcoma) के साथ-साथ जाइंट सेल ट्यूमर (Giant cell tumors), कॉर्डोमास (Chordomas) एवं कॉन्ड्रोसार्कोमस (Chondrosarcomas) के इलाज में भी किया जाता है। बोन कैंसर कीमोथेरिपी ड्रग्स (Bone cancer chemotherapy drugs) भी अलग-अलग होते हैं।

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बोन कैंसर कीमोथेरिपी के दौरान कौन-कौन से ड्रग्स का इस्तेमाल किया जा सकता है? (Name of Chemotherapy drugs for Bone cancer)

नैशनल कैंसर इंस्टिट्यूट यूएसए (National Cancer Institute USA) द्वारा पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार हड्डी के कैंसर के लिए कीमोथेरिपी ड्रग्स (Chemotherapy drugs for Liver cancer) में निम्नलिखित ड्रग्स को शामिल किया गया है। जैसे:

  • डॉक्सोरूबिसिन (Doxorubicin)
  • सिस्प्लैटिन (Cisplatin)
  • एटोपोसाइड (वीपी-16) (Etoposide [VP-16])
  • आइफोसफोमाईड (Ifosfamide)
  • साईक्लोफॉस्फोमाईड (Cyclophosphamide)
  • मेथोट्रेक्सेट (Methotrexate)
  • विन्क्रिस्टाईन (Vincristine)

ये हैं बोन कैंसर के लिए कीमोथेरिपी ड्रग्स (Chemotherapy drugs) के नाम। कुछ केसेस में दो अलग-अलग कीमोथेरिपी ड्रग्स को एक साथ भी दिया जा सकता है। कीमोथेरिपी की डोज कैंसर की गंभीरता और पेशेंट की शारीरिक क्षमता को भी ध्यान में रखकर दिया जाता है।

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बोन कैंसर पेशेंट को कीमोथेरिपी कैसी दी जाती है? (Process of Chemotherapy for Bone cancer)

कीमो ड्रग्स को इंजेक्शन की सहायता से वेन में दिया जाता है या दवाओं का सेवन मुंह से भी किया जाता है। इसका निर्णय ऑन्कोलॉजिस्ट करते हैं कि पेशेंट को कीमो ड्रग्स इंजेक्शन की सहायता से देना है या पेशेंट को ओरली खिलाना है। ये ड्रग्स ब्लडस्ट्रीम से होते हुए पूरे शरीर में फैल जाती है। यह इसलिए भी लाभकारी माना जाता है क्योंकि कीमोथेरिपी ड्रग्स से बॉडी में फैले हुए कैंसर सेल्स (Cancer dells) को नष्ट करने में मदद मिलती है।

नोट: बोन कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर कीमोथेरिपी (Chemotherapy) के अलावा रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy), सर्जरी (Surgery), क्रायोसर्जरी (Cryosurgery) और टारगेटेट थेरिपी (Targeted therapy) की भी मदद ली जा सकती है, जिससे बोन कैंसर की समस्या को दूर किया जा सकता है। बोन कैंसर कीमोथेरिपी या इससे जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए आप डॉक्टर से बात करें।

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कीमोथेरिपी ड्रग्स के साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं? (Side effects of Chemotherapy)

कीमोथेरिपी के साइड इफेक्ट्स निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:

  • जी मिचलाने (Nausea) की समस्या होना।
  • उल्टी (Vomiting) होना।
  • भूख (Loss of appetite) नहीं लगना।
  • बाल (Hair loss) झड़ना।
  • मुंह में छाले (Mouth sores) आना।
  • डायरिया (Diarrhea) की समस्या होना।

नोट: कीमोथेरिपी की वजह से बोन मैरो (Bone marrow) डैमेज होने की संभावना बढ़ सकती है, जो ब्लड सेल्स काउंट को कम कर सकता है। अगर पेशेंट में लो ब्लड सेल काउंट की समस्या शुरू हो जाए तो इससे पेशेंट में कई और शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। जैसे:

  • इंफेक्शन की संभावना (In0creased chance of infection) बढ़ना।
  • कम चोट लगने या कटने पर (Easy bleeding or bruising after minor cuts or injuries) तुरंत ब्लीडिंग की समस्या शुरू हो जाना।
  • अत्यधिक थकान (Fatigue) महसूस होना।
  • सांस लेने में कठिनाई (Shortness of breath) महसूस होना।

कीमोथेरिपी के साइड इफेक्ट्स ट्रीटमेंट कम्प्लीट होने के बाद ठीक हो जाते हैं। जैसे अगर हेयर लॉस (Hair loss) हुआ है, तो कीमोथेरिपी (Chemotherapy) के बाद बाल फिर से आ जाते हैं। हालांकि बोन कैंसर के लिए कीमोथेरिपी (Chemotherapy for Bone cancer) के दौरान या बाद में किसी भी तरह की परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से इस बारे में डिस्कस करें। डॉक्टर इन ऊपर बताई तकलीफों को दूर करने के लिए दवा प्रिस्क्राइब कर सकते हैं।

अगर शरीर में होने वाले बदलाओं को शुरुआती दिनों से ही ध्यान दिया जाए तो किसी भी बीमारी को रोकने में मदद मिल सकती है। ठीक इसी तरह हड्डी के कैंसर के लक्षण भी अगर समझे जायें तो इसे बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।

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हड्डी के कैंसर के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Bone cancer)

हड्डी के कैंसर के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:

  • अत्यधिक दर्द (Pain) महसूस होना और रात के वक्त ज्यादा बढ़ जाना।
  • बिना कारण सूजन (Unexplained swelling) की समस्या होना।
  • एक जगह से दूसरे जगह आने जाने में तकलीफ (Difficulty moving around) होना।
  • अत्यधिक थका हुआ (Fatigue) महसूस होना।
  • बुखार (Fever) आना।

ये हैं हड्डी के कैंसर के लक्षण और इन परेशानियों को इग्नोर करना गंभीर बीमारियों को दावत देना है। इसलिए शरीर में होने वाले ऐसे बदलाओं को जरूर नोटिस करें जिससे परेशानी महसूस हो रही है।

नोट: इंडियन जर्नल ऑफ मस्कुलोस्केलेटल रेडियोलॉजी (Indian Journal of Musculoskeletal Radiology) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बोन ट्यूमर (Bone tumor) अन्य कैंसर के मुकाबले कम डायग्नोस किया जाता है, लेकिन अगर हड्डी के कैंसर का इलाज (Bone cancer treatment) भी जल्द से जल्द शुरू किया जाए तो इस बीमारी से खुद को दूर किया जा सकता है।

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बोन कैंसर का खतरा किन लोगों में ज्यादा होता है? (Risk factor of Bone cancer)

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी (American Cancer Society) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बोन कैंसर के रिस्क फैक्टर निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:

  • व्यक्ति की उम्र 20 वर्ष (20 Years) या इससे कम होना।
  • रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy) या अन्य कैंसर ट्रीटमेंट (Cancer Treatment) करवाना।
  • पहले कभी बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Bone Marrow Transplant) करवाना।
  • परिवार में हड्डी का कैंसर (Bone cancer) होना।

ये हैं बोन कैंसर के रिस्क फैक्टर, लेकिन यह ध्यान रखें कि बोन कैंसर का खतरा बड़ों की तुलना में बच्चों में ज्यादा रहता है।

अगर आप बोन कैंसर (Bone cancer) या बोन कैंसर कीमोथेरिपी (Bone cancer chemotherapy) से जुड़े किसी तरह के सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो आप हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज पर कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हैलो स्वास्थ्य के हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों का जवाब जल्द से जल्द देने की पूरी कोशिश करेंगे। कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान परेशान ना हों, इस बीमारी के इलाज में वक्त लग सकता है।

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 07/07/2022 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड