शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही बन रही है कोरोना से मौत की वजह?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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कोरोना वायरस की बीमारी कोविड- 19 (Coronavirus Infection COVID- 19) एक मिस्ट्री है, जो कि सुलझने का नाम नहीं ले रही है। वैज्ञानिकों और डॉक्टर्स के लिए यह बात भी रहस्य बनी हुई है कि, आखिर इस इंफेक्शन के कारण जहां कुछ लोगों में इंफेक्शन के सिर्फ मामूली लक्षण दिख रहे हैं, वहीं कुछ लोगों में यह गंभीर रूप क्यों ले रही है और यहां तक कि मौत का कारण भी बन जा रही है। हालांकि, इस रहस्य के पीछे का कारण साइटोकाइन स्टॉर्म को माना जा रहा है। कुछ शुरुआती स्टडी में देखा गया है कि, कोरोना से मौत होने वाले मामलों में अधिकतर लोगों में साइटोकाइन स्टॉर्म (Cytokine Storm) देखा गया है और इन लोगों में इंफेक्शन की बजाय यह समस्या जान गंवाने का मुख्य कारण बन रही है। तो आइए, जानते हैं आखिर साइटोकाइन स्टॉर्म क्या है और यह कोविड- 19 से मौतों की संख्या क्यों बढ़ा रही है।

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कोरोना से मौत के पीछे साइटोकाइन स्टॉर्म (Cytokine Storm) क्या है?

SARS-CoV-2 से होने वाली मौतों के पीछे साइटोकाइन स्टॉर्म की आशंका जताई जा रही है, दरअसल यह प्रक्रिया एक इम्यून रिस्पॉन्स (रोग प्रतिरोध की प्रतिक्रिया) होती है। इस प्रक्रिया में इम्यून सिस्टम साइटोकाइन नामक प्रोटीनों के ग्रुप का उत्पादन करता है और यह साइटोकाइन वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के बजाय शरीर की स्वस्थ सेल्स को ही नष्ट करने लगता है। साइटोकाइन स्टॉर्म जुवेनाइल अर्थराइटिस (Juvenile Arthritis) जैसी ऑटोइम्यून डिजीज (Autoimmune Diseases) के दौरान होती है। इसके अलावा, यह कुछ खास प्रकार के कैंसर ट्रीटमेंट और फ्लू जैसे इंफेक्शन के दौरान भी होता है। पहले हुई एक स्टडी के मुताबिक, एच1एन1 इंफ्लुएंजा (H1N1 Influenza) की वजह से मारे जाने वाले 81 प्रतिशत लोगों में साइटोकाइन स्टॉर्म की समस्या देखी गई थी।

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साइटोकाइन स्टॉर्म से जुड़ी स्टडी में क्या पाया गया है?

एक मेडिकल वेबसाइट के मुताबिक अटलांटा की जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी में बतौर वायरोलॉजिस्ट और इम्यूनोलॉजिस्ट मुकेश कुमार (पीएचडी) SARS-CoV-2 वायरस से शरीर पर होने वाले प्रभाव पर अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने पाया कि, जीका और वेस्ट नाइल वायरस इंफेक्शन के मुकाबले कोविड- 19 इंफेक्शन के मामलों में साइटोकाइन रेस्पांस 50 गुना अधिक देखने को मिल रहा है। हालांकि, अभी इसकी वजह से गंभीर रूप से कोविड- 19 के मरीजों में से कितने प्रतिशत लोगों की मौत हुई है, इसका पता नहीं लगाया जा सका है और यह भी पता नहीं लग पाया है कि, क्यों यह सिर्फ कुछ लोगों में हो रही है और कुछ लोगों में नहीं। वहीं, चीन के एक अस्पताल में भर्ती कोविड- 19 के 21 मरीजों पर हुए अध्ययन में पता लगा है कि, कोरोना वायरस से मध्यम रूप से संक्रमित मरीजों के मुकाबले ऑक्सीजन की जरूरत वाले 11 गंभीर मरीजों में साइटोकाइन का स्तर काफी अधिक पाया गया है।

वहीं, एक दूसरी स्टडी में चीन के अस्पताल में भर्ती 191 कोविड- 19 पेशेंट में पाया गया कि शरीर में साइटोकाइन आईएल- 6 के उच्च स्तर और कोरोना वायरस इंफेक्शन से होने वाली मौत में कुछ संबंध है। मरीजों में साइटोकाइन स्टॉर्म को रोकने और शरीर में उनके नियंत्रित स्तर को जारी रखने के लिए कुछ ड्रग का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इससे कोरोना वायरस के मरीजों की मौतों को कम करने का कोई सबूत नहीं है। हालांकि, इसे प्रयोग के तौर पर देखा जा सकता है, मगर यह ड्रग काफी महंगे हैं, जिस वजह से सुलभ रूप से उपलब्ध होने में दिक्कत हो सकती है।

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कोविड- 19 से मौत- साइटोकाइन स्टॉर्म सेल को कैसे नष्ट करता है?

मुकेश कुमार ने कहा कि, जब SARS-CoV-2 वायरस शरीर की एक सेल को संक्रमित कर लेता है, जो यह बहुत तेजी से खुद को बढ़ाता है। जिससे काफी कम समय में शरीर की कोशिकाओं (सेल्स) पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और यह इम्यून सिस्टम को इमरजेंसी सिग्नेल भेजने लगती हैं। जब हमारे शरीर की कोई सेल यह संकेत भेजती है कि उसमें किसी बाहरी तत्व, वायरस, बैक्टीरिया आदि ने प्रवेश कर लिया है, तो इम्यून सिस्टम उसे उसी वक्त नष्ट होने के संकेत भेजता है, जिससे यह संक्रमण दूसरी स्वस्थ सेल्स में न फैले। यही संकेत साइटोकाइन के रूप में होते हैं। जब कोविड- 19 इंफेक्शन हमारे शरीर की कई कोशिकाओं को संक्रमित कर देता है, तो हमारा इम्यून सिस्टम काफी ज्यादा मात्रा में साइटोकाइन का उत्पादन करता है, जिसे साइटोकाइन स्टॉर्म कहा जाता है। इस प्रतिक्रिया से एक समय में कई सारी सेल्स नष्ट हो जाती है और यह कई स्वस्थ कोशिकाओं को भी नष्ट करने लगता है।

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फेफड़ों को ऐसे पहुंचता है नुकसान

चूंकि, कोरोना वायरस इंफेक्शन फेफड़ों को मुख्य रूप से प्रभावित करता है, इसलिए कोविड- 19 की बीमारी में साइटोकाइन स्टॉर्म फेफड़ों की कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है। जिस वजह से फेफड़ों के टिश्यू टूट जाते हैं और फेफड़ों की सुरक्षात्मक परत नष्ट हो जाती है। इसके बाद फेफड़ों में मौजूद छोटे एयर सैक में छेद होने लगता है और फिर उनमें पदार्थ भरने लगता है, जिसके बाद निमोनिया और ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। मुख्य रूप से साइटोकाइन स्टॉर्म की वजह से आपके फेफड़ों की कई सेल्स काफी जल्दी समय में नष्ट हो जाती है और अधिक कोरोना वायरस से मौत होने के मामलों में यही वजह देखने को मिली है। जब हमारे फेफड़े खराब होने लगते हैं और शरीर को ऑक्सीजन नहीं दे पाते तो दूसरे अंग भी कार्य करना बंद करने लगते हैं।

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