हाइपरग्लेसेमिया के दौरान रीनल रिस्पॉन्स में सेक्स डिफरेंस के संबंध में स्टडी के दौरान क्या आया सामने?

    हाइपरग्लेसेमिया के दौरान रीनल रिस्पॉन्स में सेक्स डिफरेंस के संबंध में स्टडी के दौरान क्या आया सामने?

    एलर्जिलाइन और नाइट्रिक ऑक्साइड हाइपरग्लासेमिया में ग्लूकोज लेवल को मेंटेन करने में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक मदद करता है। नाइट्रिक ऑक्साइड ब्लड शुगर लेवल मेंटन करने में हेल्प कर सकता है। हाइपरग्लेसेमिया के दौरान रीनल रिस्पॉन्स में सेक्स डिफरेंस (Sex Differences In Renal Responses To Hyperglycemia In T1DM) के संबंध में कई स्टडी की गई है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको टाइप 1 डायबिटीज के साथ ही हाइपरग्लेसेमिया के दौरान रीनल रिस्पॉन्स में सेक्स डिफरेंस (Sex Differences In Renal Responses To Hyperglycemia In T1DM) के संबंध में जानकारी देंगे।

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    क्या होता है टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes)?

    डायबिटीज या मधुमेह की समस्या का सामना किसी भी व्यक्ति को करना पड़ सकता है। हमारे शरीर में हॉर्मोन का अहम रोल होता है। हम लोग जो कुछ भी खाते हैं, वो ग्लूकोज में बदल जाता है। ग्लूकोज ब्लड के माध्यम से शरीर के विभिन्न हिस्सों में जाता है। हमारे अग्नाशय या पैंक्रियाज से इंसुलिन हॉर्मोन रिलीज होता है। इंसुलिन का काम ब्लड में ग्लूकोज लेवल को मेंटेन करना होता है। टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति के पैंक्रियाज इंसुलिन नहीं बना पाता है। पैंक्रियास इंसुलिन नहीं बना पाता है क्योंकि पेशेंट के शरीर का इम्यून सिस्टम (Immune System) पैंक्रियाज सेल्स पर अटैक कर के उन्हें नष्ट कर देता है, जो इंसुलिन बनाते हैं। समय के साथ यह हाय ब्लड ग्लूकोज के कारण हार्ट, किडनी, नर्वज, गम और टीथ आदि को भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जानिए टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण।

    • बार-बार बाथरूम जाना (Excess Urination)
    • अधिक पानी पीने की इच्छा (Feeling Thirsty)
    • भूख लगना (Extreme Hunger)
    • जी मचलना और उल्टी आना (Nausea and Vomiting)
    • मूड में बदलाव (Mood Changes)
    • घाव का धीरे -धीरे ठीक होना (Having Sores that Heal Slowly)
    • यीस्ट इंफेक्शंस (Yeast Infections)
    • वजन का कम होना Unexplained Weight Loss)
    • बिस्तर गीला करना (Bed Wetting)
    • सांस से दुर्गंध आना (Smelling Breath)

    टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) की समस्या टाइप 2 डायबिटीज के मुकाबले कम होती है। जानिए हाइपरग्लेसेमिया के दौरान रीनल रिस्पॉन्स में सेक्स डिफरेंस (Sex Differences In Renal Responses To Hyperglycemia In T1DM) के बारे में।

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    हाइपरग्लेसेमिया के दौरान रीनल रिस्पॉन्स में सेक्स डिफरेंस (Sex Differences In Renal Responses To Hyperglycemia In T1DM)

    डायबिटीज की बीमारी के दौरान ब्लड में शुगर का लेवल कंट्रोल में नहीं रह पाता है। अगर आपको भी डायबिटीज की समस्या है, तो ऐसे में ब्लड में शुगर का लेवल कभी भी अचानक से बढ़ सकता है। ब्लड में शुगर का लेवल कंट्रोल करने का काम इंसुलिन हॉर्मोन करता है। अगर किसी कारण सेइंसुलिन हॉर्मोन (insulin hormone ) पैंक्रियाज से नहीं निकल पाता है या फिर हॉर्मोन का प्रोडक्शन नहीं हो पाता है, तो डायबिटीज की बीमारी पैदा हो जाती है। मधुमेह मेलिटस (Diabetes mellitus) प्रोग्रेसिव रीनल डिजीज के हाय रिस्क से जुड़ा हुआ है। डायबिटीज की बीमारी के कारण कई बीमारियां पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। किडनी से संबंधित बीमारियां भी उन्हीं में से एक है। T1DM हाइपरग्लेसेमिया के दौरान रीनल रिस्पॉन्स में सेक्स डिफरेंस (Sex Differences In Renal Responses To Hyperglycemia In T1DM) के संबंध में कई स्टडी की जा चुकी हैं। इसके परिणाम पुरुषों और महिलाओं के आधार पर अलग निकले हैं।

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    हालांकि नॉन डायबिटिक डिजीज में एंड स्टेज रीनल डिजीज के खिलाफ फीमेल जेंडर प्रोटक्ट रहता है। वहीं डायबिटीज की समस्या होने पर ये प्रोटक्शन टूट सकता है या फिर स्थिर नहीं रह पाता है। प्रोटक्शन या फिर सुरक्षा के इस नुकसान के लिए जिम्मेदार सिस्टम को पूरी तरह से स्पष्ट नहीं किया गया है। बढ़ा हुआ रीनल प्लाज्मा फ्लो और ग्लोमेरुलर हायपरफिल्टरेशन भी डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic neuropathy) के लिए जिम्मेदार माना जा सकता है। स्टडी के माध्यम से ये जानने की कोशिश की गई कि हाइपरग्लाइसेमिया के लिए रीनल हीमोडायनेमिक रिस्पॉन्स में जेंडर डिफरेंस क्या हो सकता है। एल-आर्जिनिन (l-arginine) इन्फ्यूजन द्वारा नाइट्रिक ऑक्साइड ( nitric oxide) उत्पादन में वृद्धि टाइप 1 डायबिटीज मेलिटस (type 1 diabetes mellitus) वाली महिलाओं में क्लैम्प्ड हाइपरग्लेसेमिया (Clamped hyperglycemia) के लिए इस हानिकारक रिस्पॉन्स को रिवर्स कर सकता है।

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    डायबिटीज का कोई इलाज नहीं है लेकिन कुछ बातों का ध्यान रख कर इसे रिवर्स किया जा सकता है। आपको इसके बारे में डॉक्टर से जानकारी लेनी चाहिए। अगर आप डायबिटीज की बीमारी से पीड़ित हैं, तो बेहतर होगा कि आप डायट में ऐसी चीजों को शामिल न करे, जो ब्लड में शुगर के लेवल को बढ़ाने का काम करें। आप खानपान में ध्यान रखने के साथ ही रोजाना एक्सरसाइज भी कर सकते हैं। शरीर को फिट रखने के लिए एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी होता है। आप समय-समय पर ब्लड शुगर लेवल की जांच करना भी बहुत जरूरी है। आप हाइपरग्लेसेमिया के दौरान रीनल रिस्पॉन्स में सेक्स डिफरेंस (Sex Differences In Renal Responses To Hyperglycemia In T1DM) के बारे में डॉक्टर से जानकारी ले सकते हैं।

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    इस आर्टिकल में हमने आपको हाइपरग्लेसेमिया के दौरान रीनल रिस्पॉन्स में सेक्स डिफरेंस (Sex Differences In Renal Responses To Hyperglycemia In T1DM) के बारे में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/01/2022 को
    Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड