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टाइप 1 डायबिटीज में निकोटिनामाइड का सेवन करने से क्या होता है असर?

टाइप 1 डायबिटीज में निकोटिनामाइड का सेवन करने से क्या होता है असर?

टाइप 1 डायबिटीज बच्चों में या किशोरावस्था में होने वाली एक कंडीशन है। हमारे शरीर को ग्लूकोज के रूप में एनर्जी प्राप्त होती है। हम जो भी खाते हैं, वो ग्लूकोज में परिवर्तित होकर ब्लड के माध्यम से शरीर के विभिन्न हिस्सों में पहुंचता है। ब्लड में ग्लूकोज या शुगर का लेवल मेंटन रखने में इंसुलिन हॉर्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब किन्हीं कारणों से इंसुलिन बहुत कम मात्रा में या फिर बिल्कुल नहीं बनता है, तो टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) की समस्या का सामना करना पड़ता है। टाइप 1 डायबिटीज में निकोटिनामाइड (Nicotinamide in Type 1 Diabetes) को लेकर कई स्टडी हो चुकी हैं, जिसमें इसके सेवन से डायबिटीज पेशेंट्स के प्रभाव के बारे में जानकारी दी गई है। टाइप 1 डायबिटीज में निकोटिनामाइड (Nicotinamide in Type 1 Diabetes) का सेवन करने से क्या असर होता है या फिर क्या ये बुरा प्रभाव डालता है, इस विषय में अध्ययन हो चुके हैं। आइये पहले जानते हैं टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) के बारे में।

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टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) क्या है?

आपने अक्सर टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) के बारे में जरूर सुना होगा, जबकि टाइप 1 डायबिटीज के बारे में कम सुनने को मिलता है। टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) ऑटोइम्यून कंडिशन (Autoimmune condition) है। इसे जुवेनाइल डायबिटीज (Juvenile diabetes) या फिर इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज (Insulin-dependent diabetes) के नाम से भी जाना जाता है। इस कंडीशन के कारण पैंक्रियाज कम मात्रा में या फिर बिल्कुल भी इंसुलिन प्रोड्यूस नहीं करता है। इंसुलिन हॉर्मोन (Insulin hormone) के कारण शुगर से सेल्स में एनर्जी प्रोड्यूस करने का काम होता हैं। टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) जेनेटिक या कुछ वायरस के कारण भी हो सकता है। टाइप 1 डायबिटीज मुख्य रूप से बच्चों या फिर किशोरावस्था में होता है।

टाइप 1 डायबिटीज का बचाव संभव नहीं है। ट्रीटमेंट की हेल्प से ब्लड शुगर के लेवल (Blood sugar levels) को ठीक किया जाता है। साथ ही डायट में बदलाव और लाइफस्टाइल में सुधार डायबिटीज के कॉम्प्लीकेशन को कम करने का काम करता है। टाइप 1 डायबिटीज के कारण बार-बार प्यास लगना, फ्रीक्वेंट यूरिनेशन, बच्चों का बार-बार बिस्तर गीला करना, भूख लगना, थकान या कमजोरी का एहसास, ब्लर विजन आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर ऐसा कोई भी लक्षण दिखे, तो ऐसे में डॉक्टर से जांच कराना बहुत जरूरी हो जाता है। जानिए टाइप 1 डायबिटीज में निकोटिनामाइड (Nicotinamide in Type 1 Diabetes) के बारे में अहम जानकारी।

क्या है निकोटिनामाइड (Nicotinamide)

निकोटिनामाइड (NAM) और निकोटिनिक एसिड ( Nicotinic acid) विटामिन B3 समूह से संबंधित हैं, जिन्हें नियासिन (Niacin) भी कहा जाता है। इस बात के सुबूत सामने आएं है कि ह्युमन डायट के नैचुरल कम्पाउंड नियासिन का इस्तेमाल पोटेंशियल थेराप्युटिक ड्रग के रूप में किया जा सकता है, जो मेटाबॉलिक और इम्यूनोलॉजिकल डिसऑर्डर (Immunological disorders) को ठीक करने में इस्तेमाल की जा सकती है। टाइप 1 डायबिटीज में निकोटिनामाइड (Nicotinamide in Type 1 Diabetes) अपना प्रभावी असर डालता है। ये कैंसर के ट्रीटमेंट के साथ ही संक्रामक रोगों के इलाज में भी इस्तेमाल किया जाता है।

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टाइप 1 डायबिटीज में निकोटिनामाइड (Nicotinamide in Type 1 Diabetes)

निकोटिनामाइड (Niacinamide) को विटामिन बी3 भी कहते हैं। एनसीबीआई में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार टाइप 1 डायबिटीक में निकोटिनामाइड का सेवन बीटा-सेल फंक्शन में सुधार करता है। निकोटिनामाइड (Niacinamide) का सेवन NAD + की खपत को कम करने के साथ ही जीन एक्प्रेशन (Gene expression) पर भी मुख्य प्रभाव डालने का काम करता है। पॉलीमरेज़ (Polymerase (PARP)) एक्टिविटी एपोप्टोसिस के शुरुआती चरणों को नियंत्रित करती है। एनिमल्स में किए गए अध्ययन में ये बात सामने आई है कि निकोटिनामाइड या नियासिनमाइड या विटामिन बी 3 (Vitamin B3) की हाय डोज अगर ट्रीटमेंट के रूप में दी जाए, तो ये शरीर में इंसुलिन की कमी को रोकने का काम करता है और साथ ही इन विट्रो में साइटोटोक्सिक क्रियाओं (Cytotoxic actions) के खिलाफ आइलेट सेल्स की रक्षा करता है। टाइप 1 डायबिटीज में, निकोटीनामाइड बीटा-सेल फ़ंक्शन में सुधार करता है, बिना इंसुलिन की आवश्यकताओं वाले रोगियों में ब्लड शुगर के स्तर में काफी कमी पायी गयी है।

टाइप 1 डायबिटीज में निकोटिनामाइड (Nicotinamide in Type 1 Diabetes) से संबंधित जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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टाइप 1 डायबिटीज से बचने के लिए सावधानी है जरूरी

डायबिटीज की बीमारी से बचने के लिए या फिर बीमारी के लक्षणों को कम करने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार बहुत जरूरी है। खानपान में सुधार और एक्सरसाइज बीमारी के लक्षणों को कम करने में मदद करती है। टाइप 1 डायबिटीज के बारे में बात की जाए, तो अध्ययनों में यह पाया गया है कि गर्भावस्था में वायरस के संपर्क में आने के कारण बच्चे को टाइप-1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) होने का खतरा हो सकता है। मैटरनल वायरल इंफेक्शन के साथ टाइप 1 डायबिटीज एक-दूसरे से संबंधित हो सकते हैं। सूर्य का एक्सपोजर कम होने पर भी टाइप-1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) का खतरा बढ़ जाता है। नॉनजेनेटिक फैक्टर्स ऑटोइम्यून स्ट्रेस को बढ़ाकर टाइप-1 डायबिटीज होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान, होने वाली मां को अधिक सावधानी रखने की आवश्यकता होती है। प्रेग्नेंसी के दौरान टेस्ट कराने के साथ ही अगर किसी प्रकार के अन्य लक्षण दिखाई पड़ते हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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टाइप 1 डायबिटीज का खतरा ऐसे करें कम!

बच्चे के पैदा होने के बाद अगर उसकी देखभाल ठीक की जाए, तो कई रिस्क से बचा जा सकता है। टाइप 1 डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए शुरुआती समय में ब्रेस्टफीड कराने से बच्चों में आगे की लाइफ में टाइप 1 डायबिटीज होने की संभावना कम हो जाती है। टाइप 1 डायबिटीज में निकोटिनामाइड (Nicotinamide in Type 1 Diabetes) की जो जानकारी आपको दी गई है, वो स्टडी बेस है और इस संबंध में अभी भी अध्ययन चल रहे हैं। जानिए टाइप 1 डायबिटीज के खतरे को कम कैसे किा जा सकता है।

  • नवजात शिशु को 6 महीने तक स्तनपान जरूर करवाएं।
  • बच्चों को इंफेक्शन से बचाने के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
  • डॉक्टक से जरूरी वैक्सीन के बारे में जानकारी लें और उन्हें लगवाएं।
  • बच्चों के आसपास सफाई रखें और उन्हें उसका मतलब भी समझाएं।
  • बच्चों को हेल्दी डायट के बारे में जानकारी दें और खिलाएं।

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हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता है। इस आर्टिकल में हमने आपको टाइप 1 डायबिटीज में निकोटिनामाइड (Nicotinamide in Type 1 Diabetes) क्या है, इस बारे में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ दिन पहले को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड