क्या उम्र बढ़ने के साथ-साथ हो सकती है आई फ्लोटर्स की बीमारी?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट January 21, 2021 . 6 मिनट में पढ़ें
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अगर आंखें ना होती, तो इस खूबसूरत सी दुनिया का दिदार ना हो पाता। साल 2015 में मीडिया से बातचीत में इंट्रा ऑकुलर इम्प्लांट एंड रेफ्रेक्टिव सोसायटी ऑफ इंडिया (IIRSI) के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि देश में तकरीबन 550 मीलियन लोगों को आंखों से संबंधित परेशानी है। लेकिन ऐसा नहीं है कि आप अपने आंखों स्वस्थ्य नहीं रख सकते हैं। आंखों से जुड़ी कई अलग-अलग तरह की तकलीफ हो सकती है।

आंखों से संबंधित कई अलग-अलग तरह की तकलीफ जैसे आंखों की रोशनी कम होना, मोतियाबिंद, आईलिड ट्विचिंग या आई फ्लोटर्स (Eye Floaters) की समस्या हो सकती है। आज इस आर्टिकल में समझेंगे आई फ्लोटर्स से जुड़ी परेशानियों के बारे में।

  • क्या है आई फ्लोटर्स की समस्या?
  • आई फ्लोटर्स के लक्षण क्या हैं?
  • आई फ्लोटर्स के कारण क्या हैं?
  • आई फ्लोटर्स का निदान कैसे किया जाता है?
  • आई फ्लोटर्स की तकलीफ कैसे हो सकती है दूर?

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आई फ्लोटर्स (Eye Floaters) क्या है?

आई फ्लोटर्स (Eye Floaters)

आंखों में जब विट्रोस ह्यूमर (vitreous humour) जमा होने लगे, तो ऐसी स्थिति को आई फ्लोटर्स कहते हैं। विट्रोस ह्यूमर एक तरह का चिपचिपा पदार्थ होता है, जो आंख के पिछले हिस्से में भर जाता है। यह विट्रोस ह्यूमर आंखों के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक फैल जाता है। जिन लोगों को आई फ्लोटर्स (आंख फ्लोटर्स) की समस्या होती है, तो उन्हें धब्बे या डॉट्स नजर आने लगते हैं। आई मूवमेंट के साथ-साथ इन धब्बों को भी व्यक्ति देख सकते हैं। आंखों की यह समस्या एक आंख में या दोनों आंखों में हो सकती है। दरअसल कॉर्निया (Cornea) और रेटिना (Retina) पर प्रकाश की किरणें फोकस होती हैं और रेटिना पर पड़ने वाली किरणें हमें देखने में मदद करती हैं। यह ध्यान रखें कि लाइट यानी प्रकाश रेटिना से गुजरने से ‎पहले, विट्रस ह्यूमर से होकर गुजरती हैं। जन्म के वक्त और छोटी उम्र के शुरुआती सालों में यह बिल्कुल साफ नजर आता है, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है या वृद्धावस्था में आई फ्लोटर्स की समस्या भी बढ़ने लगती है। अगर आपको काले या भूरे धब्बे नजर आते हैं, तो आपको ऑप्टोमेट्रिस्ट से कंसल्ट करना चाहिए। इस आर्टिकल में आगे जानेंगे आंखों की इस बीमारी के लक्षण क्या हो सकते हैं।

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आई फ्लोटर्स के लक्षण क्या हैं?

आई फ्लोटर्स के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • आंखों के सामने डॉट या धब्बा नजर आना (ऐसा एक या दोनों आंखों के सामने हो सकता है)।
  • लाइट या आसमान की ओर देखने पर आंखों में धागे जैसी संरचना नजर आना।
  • आंखों के मूवमेंट के साथ-साथ डॉट या धब्बा दिखाई देना।

इन लक्षणों के अलावा अन्य लक्षण भी हो सकते हैं।

आई फ्लोटर्स के कारण क्या हैं?

यह एक सामान्य सी आई प्रॉब्लम है, जो उम्र बढ़ने के साथ-साथ बढ़ती है। दरअसल विट्रोस ह्यूमर रेटिना से अलग होने लगती है, जो आई फ्लोटर्स का कारण बन सकती है। इसके अन्य कारण इस प्रकार हैं:

  • आंखों से ब्लीडिंग होना
  • आंख में चोट लगना
  • आई इंफेक्शन होना
  • आंखों में सूजन या जलन होना
  • आंखों से निकलने वाले आंसु से चिपचिपा पदार्थों का आना
  • रेटिना का अपने स्थान से खिसकजाना
  • आंख के किसी दवा का साइड इफेक्ट्स होना

इन कारणों के अलावा अन्य कारण भी हो सकते हैं। हालांकि आई फ्लोटर्स होने के प्रमुख कारण पर अभी भी रिसर्च जारी है।

आई फ्लोटर्स का निदान कैसे किया जाता है?

आंखों के फ्लोटर्स के इलाज के लिए खासतौर से वाई ए जी (YAG) लेजर का उपयोग किया जाता है। हालांकि इस तरह से आई फ्लोटर्स का निदान अत्यधिक सफल नहीं माना जाता है। इसलिए नेत्र रोग विशेषज्ञ हमेशा यही सलाह देते हैं कि आंख से संबंधित कोई भी परेशानी महसूस होने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से कंसल्ट करें।

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आंख की इस बीमारी को दूर करने में कितना खर्च हो सकता है?

भारत के अलग-अलग इलाकों में इसकी फी अलग हो सकती है। लेकिन अगर ‎सर्जिकल प्रोसेस से इसे ठीक करने की कोशिश की जा रही है, तो 65,000 रुपये से 1,80,000 रुपये के बीच हो सकती है।

आंखों के फ्लोटर्स की सर्जरी के बाद ठीक होने में कितना वक्त लग सकता है ?

आई फ्लोटर्स के सर्जरी से रिकवरी में ज्यादा समय नहीं लगता है। अगर आराम किया जाए और जीवनशैली को हेल्दी रखा जाए तो आप जल्द ही अपने काम पर वापस लौट सकते हैं। इसलिए डॉक्टर जो दिशा निर्देश दें उसका ठीक तरह से पालन करें।

आई फ्लोटर्स की तकलीफ कैसे हो सकती है दूर?

जिस तरह से ऊपर बताया गया है कि आई फ्लोटर्स की तकलीफ को दूर करने के लिए वाई ए जी (YAG) लेजर अभी तक सक्सेसफुल नहीं हुई है। इसलिए कुछ बातों को ध्यान में रखते हुए आंखों की इस तकलीफ को दूर किया जा सकता है। जैसे:

पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करें-

  • मछली- मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड की उच्च मात्रा होती है, जो आंखों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए आप टूना, सैल्मन, ट्राउट, सार्डिन, हिलसा आदि ऐसी मछलियां का सेवन कर सकते हैं
  • नट्स और फलियां- अगर आप मछली खाना पसंद नहीं करते हैं या आप वेजिटेरियन हैं, तो आप नट्स और फलियां को अपने डायट में शामिल कर सकते हैं। क्योंकि इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचूर मात्रा में मौजूद होती हैं। नट्स में विटामिन-ई भी हाई होता है, जो बढ़ती उम्र से संबंधित आंखों के नुकसान को बचा सकता है। अखरोट, ब्राजील नट्स, काजू, मूंगफली और फलियां आंखों की सेहत के लिए बेस्ट माना जाता है।
  • बीज- नट और फलियों की तरह कुछ बीजों में भी ओमेगा-3 और विटामिन ई की अधिक मात्रा पाई जाती है जैसे-चिया और अलसी का बीज।
  • खट्टे फल- खट्टे फल जैसे-नींबू और संतरे विटामिन-सी से भरपूर होते हैं। विटामिन-ई की तरह, विटामिन-सी एक तरह का एंटीऑक्सिडेंट है, जो बढ़ती उम्र की वजह से होने वाले आंखों से संबंधित परेशानी को दूर करने में सहायक होते हैं।
  • पत्तेदार हरी सब्जियां- पत्तेदार हरी सब्जियां ल्यूटिन और जेक्सैथीन दोनों में समृद्ध होती हैं और यह विटामिन-सी का भी अच्छा स्रोत हैं। जैसे-पालक और कोलार्ड्स।
  • गाजर- गाजर में विटामिन-ए और बीटा कैरोटीन दोनों से भरपूर मात्रा में होते हैं। बीटा कैरोटीन की वजह से ही गाजर को प्राकृतिक रंग मिलता है
  • विटामिन-ए- आंखों के लिए बहुत ही जरूरी होता है। यह रेटिना को प्रकाश को अवशोषित करने में मदद करता है।
  • शकरकंद- गाजर की तरह, शकरकंद भी बीटा कैरोटीन से भरपूर होता है। इसके साथ ही यह एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन-ई का भी एक अच्छा स्रोत है
  • अंडे- अंडे, ल्यूटिन और जेक्सैंथिन का एक उत्कृष्ट स्रोत हैं, जो उम्र से संबंधित दृष्टि हानि के जोखिम को कम कर सकते हैं। अंडे भी विटामिन सी, ई और जिंक के अच्छे स्रोत हैं।
  • पानी- यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि जीवन के लिए आवश्यक तरल पदार्थ नेत्र स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। भरपूर पानी पीने से डिहाइड्रेशन को रोका जा सकता है, जिससे ड्राई आंखों के लक्षण को कम कर सकते हैं।

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आई फ्लोटर्स से बचने के लिए करें आई एक्सरसाइज-

आंखों की एक्सरसाइज करके आप ना केवल आंखों को आराम और स्वस्थ बना सकते हैं, बल्कि आपको सिरदर्द और अन्य समस्याओं से भी मुक्ति मिल सकती है, जिससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है। इसलिए नियमित रूप से निम्नलिखित एक्सरसाइज करें। जैसे:

  • पलके झपकना- पलकों का झपकना प्राकृतिक तारिक है, लेकिन अगर आप थोड़ा ध्यान रखें और काम के बीच-बीच भी आंख झपकते हैं, तो यह आंखों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। इसलिए अगर आप कम्प्यूटर पर ज्यादा देर तक काम करते हैं, तो हर 20 मिनट पर 20 फिट की दूरी पर देखें और २० बार पलकों को झपकायें ।
  • आंख को कवर करें- आंखों को कुछ देर ढ़कने से ही आप आंखों की एक्सरसाइज कर सकते हैं। इससे आंखों और उसकी मांसपेशियों को आराम मिलता है। इससे आपकी आंखों का स्ट्रेस भी दूर होगा।
  • अंगूठे से करें आंखों की एक्सरसाइज- इस एक्सरसाइज को करने से आंखों की मसल्स मजबूत होती हैं और आंखों को आराम भी मिलता है। इसे करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।इस एक्सरसाइज को आप कहीं भी कर सकते हैं। सबसे पहले एक स्थान पर खड़े हो जाएं या बैठ जाएं। अब अपने हाथ के अंगूठे को अपने मुंह से कुछ इंच की दूरी पर सीधा रखें। इसके बाद अपने सामने 10 या 15 फीट दूर पड़ी किसी भी चीज पर अपने ध्यान को केंद्रित करें। पहले अपने अंगूठे को देखें, उसके बाद उस वस्तु पर ध्यान केंद्रित करें। अब इस प्रोसेस को दोहरायें।

इनसभी एक्सरसाइज के अलावा आप डॉक्टर से संपर्क कर दूसरी आंखों की एक्सरसाइज भी कर सकते हैं ।

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आंखों की तकलीफ को योग से करें दूर-

सर्वांगासन (Sarvangasana)-

आई फ्लोटर्स (Eye Floaters)

सर्वांगासन या कंधों के सहारे किए जाने वाले इस आसन को सर्वांगासन कहते हैं। इस आसन से पूरे शरीर को कंधों पर बैलेंस किया जाता है। मनुष्य के संपूर्ण शारीरिक अंगों को स्वस्थ्य रखने के लिए ये काफी प्रभावी माना जाता है। यह आसन से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में बेहद फायदेमंद है और इसे ‘आसन की रानी’ भी कहा जाता है।

शवासन (Corpse Pose)-

आई फ्लोटर्स (Eye Floaters)

शवासन को योगा निद्रा और योगिक स्लीपिंग जैसे नाम से भी जानते हैं। यह काफी लाभकारी योगासन माना जाता है। इस आसन से आप शरीर और मस्तिष्क को रिलैक्स करने के साथ-साथ यह आंखों के लिए भी विशेष लाभकारी माना जाता है। इसलिए नियमित अपने दिनचर्या में योगासन के सबसे आखरी में इस आसन को करें।

अगर आप आई फ्लोटर्स (Eye Floaters) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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