हार्ट अटैक एक ऐसी समस्या है जो महिला या पुरुष दोनों में हो सकती है, उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ने लगता है। महिलाओं में हार्ट अटैक और पुरषों में हार्ट अटैक के लक्षणों में कुछ अंतर स्पष्ट होते है। कार्डियोलाजिस्ट लेस्ली चो, एमडी के अनुसार, सीने में दर्द दिल का दौरा पड़ने का सबसे आम लक्षण माना जाता है, महिलाओं में ऐसे लक्षण हो सकते हैं जो सीने में दर्द से अलग हो सकते हैं। डॉक्टर का कहना है कि हमें किसी अन्य प्रकार के लक्षणों पर ध्यान देने और उन्हें तलाश करने की आवश्यकता है। डॉ.चो कहते हैं,, हमें पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए सीने में दर्द के लक्षण को और बेहतर ढ़ंग से जानने की जरुरत है।’

महिलाओं में जो सबसे आम हार्ट अटैक (Heart attack in women) आने का लक्षण होता है वो साधारण रुप से पुरुषों की तरह होता है। इसमें आपको सीने में दर्द, दबाव जैसा महसूस हो सकता है, जो कुछ मिनट के लिए हो सकता है। लेकिन खासतौर पर महिलाओं में सीने में दर्द बहुत अधिक ध्यान देने वाला लक्षण नहीं होता है। महिलाएं ज्यादातर इसको तेज दबाव के रुप में बताती हैं, लेकिन बिना सीने में दर्द हुए हार्ट अटैक आना संभव नहीं होता है। आपको बताएं कि ये लक्षण सीने में तेज दर्द जितना ध्यान देने योग्य नहीं होते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में जो लक्षण पाए जाते हैं वो इस प्रकार हो सकते हैं।
महिलाओं में आराम करते समय या सोते समय भी लक्षण स्पष्ट हो सकते है महिलाओं में भावनात्मक रुप से अधिक तनाव हार्ट अटैक के लक्षण का कारण बन सकता है।
महिलाओं में हार्ट अटैक का कारण (Causes of heart attack in women) क्या हैं?
महिलाओं में हार्ट अटैक (Heart attack in women) ज्यादातर कारण कोरोनरी हार्ट या धमनी की बीमारी होता है,यह तब भी होता है जब हृदय की मांसपेशी का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है या ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। आपको बताएं की जब आपकी कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज होता है,उस वक्त रक्त और ऑक्सीजन दिल तक पहुंचने में असफल हो जाता है। तो यह हार्ट अटैक का कारण बन सकता है,यदि इसका समय पर इलाज नहीं है। हार्ट अटैक के कारण इस प्रकार से हो सकते हैं।
यदि आपको अपने अंदर हार्ट अटैक के लक्षण दिखाई देते हैं कि आपको तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता पर कॉल करके उन्हें मदद के लिए बुलाना चाहिए। जब तक डॉक्टर यह सुनिश्चित न कर दे की आप अब खतरे से बाहर हैं तब तक चिकित्सालय में ही रहें।
आपके द्वारा बताए गए लक्षणों के आधार पर निदान करने के लिए डॉक्टर आपके कई प्रकार के परीक्षण कर सकता है। जो इस प्रकार हो सकते हैं।
इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी या ईकेजी)- यह परीक्षण आपके दिल की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। यह हर्ट बीट समस्याओं का निदान करने में मदद कर सकता है। यह रक्त के प्रवाह में हो रही समस्या को पता बी लगा सकता है।
रक्त परीक्षण- जब आपके शरीर मे रक्त प्रवाह कम हो जाता है, तो रक्त में कई विशेष प्रकार के प्रोटीन का रिसाव होता है। रक्त परीक्षण द्वारा इन प्रोटीनों का पता लगाया जा सकता है। आपका डॉक्टर आपके लक्षणों की शुरुआत के बाद पहले 24 से 48 घंटों के दौरान कई बार आपके रक्त का परीक्षण कराने की सलाह दे सकता है।
इकोकार्डियोग्राम- यह परीक्षण आपके दिल का पिक्चर बनाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है। बनाए गए पिक्चर से पता चलता है कि आपका दिल सही रुप से कार्य कर पा रहा है या नहीं, यह ये भी दिखा सकता है कि क्या आपके दिल के वाल्व में कोई समस्या है।
चेस्ट का एक्स-रे- यह आपके दिल के आकार को देखता है। यह दिखा सकता है कि क्या आपके फेफड़ों में कोई तरल पदार्थ है।
परमाणु इमेजिंग- इस परीक्षण के दौरान आपके रक्त में एक छोटे रेडियोधर्मी पदार्थ को इंजेक्ट कराया जाता है। इससे यह भी पता चलता है कि आपका दिल कितनी अच्छी तरह से पंप कर रहा है। रेडियोधर्मी पदार्थ पूरी तरह से सुरक्षित है।
कोरोनरी एंजियोग्राफी- इस परीक्षण को कभी-कभी कार्डियक कैथीटेराइजेशन कहा जाता है। इसमें रक्त वाहिका में एक लंबी ट्यूब डाला जाता है। ट्यूब दिल या धमनियों को यह निर्देश देता है, जो हृदय तक रक्त ले जाती है। एक पदार्थ को ट्यूब में इंजेक्ट किया जाता है जो इसे एक्स-रे द्वारा दिखाई देता है। जिसे आपके डॉक्टर बेहतर तरीके से समझ सकता है कि आपके हृदय में रक्त के प्रवाह में कमी के कारण रुकावट किस जगह पर स्थित है।
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सबसे पहले आपको बता दें की इसका इलाज आपके लक्षण पर निर्भर करता है, यदि आपके सीने में दर्द है, तो आपका डॉक्टर शायद आपको नाइट्रोग्लिसरीन और एस्पिरिन लेने की सलाह देगा। नाइट्रोग्लिसरीन आपके हृदय में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाता है। यह अस्थायी रूप से हृदय तक रक्त ले जाने वाली धमनियों को चौड़ा करके आपके लक्षणों को दूर कर सकता है। यदि आपको दिल का दौरा पड़ रहा है, तो आपका डॉक्टर इस प्रकार इलाज कर सकता है।
दवाई– जो दवा डॉक्टर आपको देगा उसे थ्रोम्बोलिटिक कहा जाता है। यह रक्त के थक्के को भंग करने में मदद कर सकता है जो कोरोनरी धमनी को रहा है।
एक एंजियोप्लास्टी करें- एंजियोप्लास्टी में आपके हाथ या पैर की धमनी में एक छोटा,पतला गुब्बारा डालने की प्रक्रिया शामिल होती है। यह खुली अवरुद्ध कोरोनरी धमनियों को धकेलता है। एंजियोप्लास्टी नामक एक छोटी धातु की छड़ को धमनी में रखा जा सकता है जिस जगह रुकावट उत्पन्न हुई थी।
कोरोनरी धमनी बाईपास सर्जरी करें- यदि एंजियोप्लास्टी द्वारा किया गया इलाज काफी नहीं है, तो आपको इस बड़ी सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। आपका डॉक्टर आपके पैर से एक स्वस्थ नस या आपके ऊपरी शरीर से एक धमनी को निकालता है। वह आपकी कोरोनरी धमनी में रुकावट के आसपास बाईपास बनाता है। यह रुकावट के चारों ओर रक्त प्रवाह करने की अनुमति देता है।
– आपको बता दें की हार्ट अटैक के उपचार में कुछ दवाएं भी शामिल हैं, जिन्हें आपको अस्पताल से आने के बाद भी लेने की आवश्यकता होगी। ये दवाएं आपके दिल में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाने, थक्के को रोकने और हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने में मदद करती हैं। आपका यह जानना आवश्यक है की आपका डॉक्टर आपके लिए वही दवाएं लिखेगा जो आपके लिए बेहतर है, यदि आपके पहले कभीहार्ट अटैक पड़ चुका है तो आपको अपने जीवनशैली में कुछ बदलाव करने की जरुरत है, जिससे दोबारा हार्ट अटैक आने का खतरा आप कम कर सकें। डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली दवा इस प्रकार से हैं।
महिलाओं के हार्ट अटैक (Heart attack in women) जोखिम में कोरोनरी धमनी की बीमारी शामिल है जिसके कई पारंपरिक जोखिम कारक हैं – जैसे उच्च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप और मोटापा।यह महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही प्रभावित करते हैं। लेकिन अन्य कारक महिलाओं में हृदय रोग के विकास में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं।
महिलाओं में हृदय रोग (Heart attack in women) के जोखिम इस प्रकार हो सकते हैं।
गर्भावस्था की जटिलताओं- गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर या मधुमेह मां के उच्च रक्तचाप और मधुमेह के लंबे समय के जोखिम को बढ़ा सकता है। स्थितियों से महिलाओं को हृदय रोग होने की अधिक संभावना है।
मधुमेह- मधुमेह से पीड़ित महिलाओं में हृदय रोग विकसित होने की संभावना मधुमेह से पीड़ित पुरुषों की तुलना में अधिक होती है। क्योंकि मधुमेह आपको दर्द महसूस करने के तरीके को बदल सकता है, इसलिए आपको लक्षणों के बिना – साइलेंट हार्ट अटैक होने का अधिक खतरा होता है।
निष्क्रियता- प्रत्येक व्यक्ति के लिए शारीरिक गतिविधि की कमी हृदय रोग के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है। कुछ शोध में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम सक्रिय पाया गया है।
सूजन की बीमारियां- संधिशोथ, ल्यूपस और अन्य दोनों पुरुषों और महिलाओं में हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
रजोनिवृत्ति- रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन का निम्न स्तर छोटी रक्त वाहिकाओं में रोग के विकास का एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करता है।
मानसिक तनाव और अवसाद– तनाव और अवसाद पुरुषों की तुलना में महिलाओं के दिलों को अधिक प्रभावित करते हैं। अवसाद एक स्वस्थ जीवन शैली को बनाए रखने और अनुशंसित उपचार का पालन करना मुश्किल बना देता है।
धूम्रपान– बता दें की पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय रोग के लिए धूम्रपान एक बड़ा जोखिम कारक है।
प्रारंभिक हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास- यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक जोखिम कारक प्रतीत होता है।
तो हमारा जवाब होगा ‘नहीं’ चाहे आप उम्र के किसी भी पड़ाव पर हो लेकिन सभी उम्र की महिलाओं को हृदय रोग (Heart attack in women) को गंभीरता से लेना चाहिए। 65 वर्ष से कम उम्र की महिलाएं – विशेष रूप से हृदय रोग के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को लोगों को हृदय रोग जोखिम कारकों पर भी ध्यान देना जरुरी होता है।
डिस्क्लेमर
हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।
Heart Attack Symptoms in Women/https://www.heart.org/en/health-topics/heart-attack/warning-signs-of-a-heart-attack/heart-attack-symptoms-in-women
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Accessed on 13-07-2020
Current Version
28/07/2021
shalu द्वारा लिखित
के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. पूजा दाफळ
Updated by: Bhawana Awasthi