Green Coffee : ग्रीन कॉफी क्या है?

By Medically reviewed by Dr. Pooja Bhardwaj

उपयोग

ग्रीन कॉफी (Green Coffee) किसलिए इस्तेमाल होती है?

ग्रीन कॉफी (Green Coffee) बीन्स, कॉफ़ी फ्रूट्स के वे बीज होते हैं जो भुने हुए नहीं होते हैं। आपको बता दें कि नियमित रूप से भुने हुए कॉफ़ी बीन्स की तुलना में ग्रीन कॉफ़ी में क्लोरेजेनिक एसिड की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। ग्रीन कॉफ़ी में मौजूद क्लोरेजेनिक एसिड स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।

साल 2012 में डॉ. ओजेड शो में प्रसारण होने के बाद ग्रीन कॉफ़ी वजन घटाने को लेकर बहुत प्रसिद्ध हुई।

मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अल्जाइमर (Alzheimer’s disease) और बैक्टीरियल इंफेक्शन में लोग ग्रीन कॉफ़ी का इस्तेमाल करते हैं।

ग्रीन कॉफी (Green Coffee) कैसे काम करती है?

ग्रीन कॉफी (Green Coffee) शरीर मे कैसे काम करती है इसको लेकर अभी ज्यादा शोध मौजूद नहीं है। इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप किसी डॉक्टर या हर्बल विशेषज्ञ से संपर्क करें। हालांकि ऐसा माना जाता है कि ग्रीन कॉफ़ी में मौजूद क्लोरेजेनिक एसिड खून की नालियों (Blood Vessels) को प्रभावित करता है जिसकी वजह से ब्लड प्रेशर कम होता है।

ऐसा मानना है कि ग्रीन कॉफ़ी में मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड शरीर के ब्लड शुगर और मेटाबोलिज्म को प्रभावित करके वजन कम करने में मदद करती है।

ग्रीन कॉफ़ी से जुडी सावधानियां और चेतावनी

ग्रीन कॉफ़ी के सेवन से पहले मुझे इसके बारे में क्या-क्या जानकारी होनी चाहिए?

ग्रीन कॉफ़ी का इस्तेमाल करने से पहले आपको डॉक्टर या फार्मासिस्ट या फिर हर्बल विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए, यदि

  • आप गर्भवती हैं या स्तनपान कराती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जब आप बच्चे को फीडिंग कराती हैं तो अपने डॉक्टर के मुताबिक़ ही आपको दवाओं का सेवन करना चाहिए।
  • आप कोई दूसरी दवा लेते हैं जोकि बिना डॉक्टर की पर्ची के आसानी से मिल जाते हैं।
  • अगर आपको ग्रीन कॉफ़ी और उसके दूसरे पदार्थों से या फिर किसी और दूसरे हर्ब्स से एलर्जी हो।
  • आप पहले से किसी तरह की बीमारी आदि से ग्रसित हैं।
  • आपको पहले से ही किसी तरह एलर्जी हो जैसे खाने पीने वाली चीजों से, या डाइ से या किसी जानवर आदि से।

हर्बल सप्लीमेंट के उपयोग से जुड़े नियम दवाओं के नियमों जितने सख्त नहीं होते हैं। इनकी उपयोगिता और सुरक्षा से जुड़े नियमों के लिए अभी और शोध की ज़रुरत है। इस हर्बल सप्लीमेंट के इस्तेमाल से पहले इसके फायदे और नुकसान की तुलना करना ज़रुरी है। इस बारे में और अधिक जानकारी के लिए किसी हर्बल विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करें।

ग्रीन कॉफ़ी का सेवन कितना सुरक्षित है?

सही तरीक़े से ग्रीन कॉफ़ी का सेवन करना बिल्कुल सुरक्षित है। अगर रोजाना 480 mg ग्रीन कॉफ़ी एक्सट्रैक्ट 12 हफ्तों तक आप लेते हैं तो आपके लिए सुरक्षित है। इसके अलावा एक खास किस्म का ग्रीन कॉफ़ी एक्सट्रैक्ट जिसे रोजाना पांच बार केवल 200 mg, 12 हफ्तों तक इस्तेमाल करना सुरक्षित होता है।

ग्रीन कॉफी से जुड़ी विशेष सावधानियां और चेतावनी

गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान: गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान ग्रीन कॉफ़ी के सेवन को लेकर अभी ज्यादा जानकारी मौजूद नहीं है। इसलिए इस दौरान आप इससे परहेज करें।

होमोसिस्टीन (homocysteine) के हाई लेवल के दौरान: कम समय में क्लोरेजेनिक एसिड को ज्यादा मात्रा में लेने से प्लाज्मा (Plasma) में होमोसिस्टीन (homocysteine) का लेवल बढ़ जाता है जिसकी वजह से हृदय संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।

घबराहट संबंधी बीमारियों में (Anxiety disorders): ग्रीन कॉफ़ी में मौजूद कैफ़ीन घबराहट या उलझन को और अधिक बढा सकता है।

ब्लीडिंग डिसॉर्डर(Bleeding disorders): कुछ शोध में यह पता चला है कि ग्रीन कॉफ़ी में मौजूद कैफीन ब्लीडिंग डिसॉर्डर(Bleeding disorders) को और अधिक खराब कर सकता है।

डायबिटीज: कुछ शोध के अनुसार ग्रीन कॉफ़ी में मौजूद कैफीन डायबिटिक लोगों के शुगर प्रोसेस को बदल सकता है। कैफीन ब्लड शुगर को घटाता भी है और बढ़ाता भी है। इसलिए वे लोग जिन्हें डायबिटीज की समस्या है वो सावधानीपूर्वक कैफीन का सेवन करें और ब्लड शुगर का रेगुलर चेकअप कराएं।

डायरिया: ग्रीन कॉफी में कैफीन होता है। ग्रीन कॉफ़ी का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से डायरिया की समस्या और अधिक बढ़ सकती है।

मोतियाबिंद (Glaucoma): ग्रीन कॉफ़ी के सेवन से आंखों के अंदर दबाव बढ़ सकता है। आंखों के अंदर का यह दबाव 30 मिनट के अंदर शुरू होता है और 90 मिनट तक रहता है।

हाई ब्लड प्रेशर: जो लोग हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं अगर वे ग्रीन कॉफ़ी का सेवन करते हैं तो उनका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। हालांकि जो लोग रेगुलर कॉफ़ी का सेवन करते हैं उनमें यह प्रभाव कम होता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल: बिना फिल्टर किये हुए कॉफ़ी में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढाने का काम करते हैं। ऐसे तत्व ग्रीन कॉफ़ी में भी पाए जाते हैं। हालांकि इस बारे में यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ग्रीन कॉफ़ी के सेवन से कोलेस्ट्रॉल लेवल भी बढ़ता है।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम(Irritable bowel syndrome, IBS): ग्रीन कॉफ़ी में कैफीन होता है। अगर ज्यादा मात्रा में कॉफ़ी का सेवन किया जाता है तो उससे डायरिया की समस्या हो सकती है और इससे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम(Irritable bowel syndrome, IBS) की समस्या और अधिक खराब हो सकती है।

ओस्टियोपोरोसिस यानी हड्डी के पतला होने में: ग्रीन कॉफ़ी में मौजूद कैफीन और दूसरे सोर्स कैल्शियम की मात्रा को बढ़ाते हैं जोकि मूत्र के माध्यम से बाहर निकल जाता है। इस वजह से आपकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। अगर आपको ऑस्टियोपोरोसिस को समस्या है तो आपको दिन में 300 mg से कम (लगभग दो से तीन कम नियमित रूप से) कॉफ़ी का सेवन करना चाहिए। कैल्शियम युक्त सप्लीमेंट लेने से कैल्शियम की कमी पूरी होती है। ऐसी महिलाएं जिनका मीनोपॉज (Menopause) समाप्त हो चुका हैं उन्हें ग्रीन कॉफ़ी का सेवन सावधानीपूर्वक करना चाहिए।

ग्रीन कॉफ़ी के साइड इफेक्ट

ग्रीन कॉफ़ी के सेवन से मुझे क्या साइड इफेक्ट हो सकते हैं?

कॉफी की ही तरह ग्रीन कॉफी के भी साइड इफेक्ट होते हैं जैसे, नींद ना आना, नर्वसनेस, बेचैनी, पेट खराब होना, मिचली, उल्टी और हार्ट रेट का बढ़ना आदि।

अधिक मात्रा में कॉफ़ी का सेवन करने से सिर दर्द, उलझन, उत्तेजना, कान में आवाज आना और हार्ट बीट का असामान्य होना आदि साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

हालांकि हर किसी को ये साइड इफ़ेक्ट हों ऐसा ज़रुरी नहीं है। कुछ ऐसे भी साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं जो ऊपर बताए नहीं गए हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी साइड इफ़ेक्ट महसूस हो या आप इनके बारे में और जानना चाहते हैं तो नज़दीकी डॉक्टर से संपर्क करें।

ग्रीन कॉफ़ी से जुड़े परस्पर प्रभाव/ ग्रीन कॉफ़ी से पड़ने वाले प्रभाव

ग्रीन कॉफ़ी के सेवन से अन्य किन-किन चीजों पर म्प्र्भाव पड़ सकता है?

ग्रीन कॉफ़ी के सेवन से आपकी बीमारी या आप जो वतर्मान में दवाइयां खा रहे हैं उनके असर पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सेवन से पहले डॉक्टर से इस विषय पर बात करें।

ग्रीन कॉफ़ी की खुराक

यहां पर दी गई जानकारी को डॉक्टर की सलाह का विकल्प ना मानें। किसी भी दवा या सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले हमेशा डॉक्टर की सलाह ज़रुर लें।

आमतौर पर कितनी मात्रा में ग्रीन कॉफ़ी का सेवन करना चाहिए?

इस हर्बल सप्लीमेंट की खुराक हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। आपके द्वारा ली जाने वाली खुराक आपकी उम्र, स्वास्थ्य और कई चीजों पर निर्भर करती है। हर्बल सप्लीमेंट हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं। इसलिए सही खुराक की जानकारी के लिए हर्बलिस्ट या डॉक्टर से चर्चा करें।

ग्रीन कॉफ़ी किन रूपों में उपलब्ध है?

ग्रीन कॉफ़ी निम्नलिखित रूपों में उपलब्ध हैः

  • कच्चा ग्रीन कॉफ़ी बीन्स
  • ग्रीन कॉफ़ी एक्सट्रैक्ट

रिव्यू की तारीख जुलाई 9, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया सितम्बर 21, 2019