ब्लड प्रेशर की है समस्या, ऐसे करें घर पर ही बीपी चेक

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Update Date मई 22, 2020 . 4 mins read
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ब्लड प्रेशर की बीमारी आज के समय में बहुत आम है। हाई ब्लड प्रेशर से हार्ट अटैक का खतरा भी हो सकता है। इस बीमारी से जूझते लोगों को हर थोड़ी देर में अपना ब्लड प्रेशर चेक करते रहने की जरूरत होती है। डॉक्टर भी हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों निश्चित समय पर घर पर ही ब्लड प्रेशर जांचते रहने की सलाह देते हैं। ऐसा करते समय जरूरी कि आप अपने रक्तचाप के उतार-चढ़ाव का रिकॉर्ड रखें। यही डेटा आगे चलकर डॉक्टर को आप की हेल्थ कंडिशन को समझने में मददगार होगा। अगर आप अपने ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिए कोई दवा ले रहे हैं, तो यह भी अंदाजा लगाना आसान हो जाएगा कि वह दवा कितनी असरदार है।

ब्लड प्रेशर हाई और लो ब्लड प्रेशर दोनों हो सकता है। ब्लड प्रेशर नॉर्मल 120/80 होता है लेकिन, इससे ज्यादा बढ़ना या कम होना शारीरिक परेशानी शुरू करने के साथ-साथ कई सारी बीमारियों को दस्तक देने के लिए भी काफी है।

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ब्लड प्रेशर चेक करने के लिए किस उपकरण की होगी जरूरत 

घर बैठे ब्लड प्रेशर चेक करने के दो तरीके है :

  1. मैन्युअल मॉनिटर
  2. डिजिटल

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ऐसा मॉनिटर चुनें, जो आपकी जरूरतों पर सटीक बैठता हो। मॉनिटर खरीदते समय आप को इन विशेषताओं का ध्यान रखना जरूरी है:

  • आकर (Size) : मशीन खरीदते वक्त ध्यान रखें कि कफ साइज आपकी बाहों के नाप से मिलता जुलता हो। आप अपने डॉक्टर, नर्स या फार्मासिस्ट की मदद ले सकते हैं।अगर आप की मशीन का कफ साइज गलत होगा, तो आपको ब्लड प्रेशर की रीडिंग भी गलत मिलेगी।
  • कीमत : कीमत भी विशेष किरदार निभाती है। घरेलू ब्लड प्रेशर मापने की मशीनें अलग-अलग दाम पर बाजार में मौजूद हैं। आपको सही दाम में मशीन खरीदने के लिए कई मशीनों के दाम की तुलना करनी होगी। ध्यान रहे कि मशीन का बेहतर होना उसकी कीमत पर निर्भर नहीं करता।
  • डिस्प्ले : मॉनिटर पर दिखाए जाने वाले अंक आपको आसानी से समझ आने चाहिए।
  • साउंड : स्टेथोस्कोप के जरिए दिल की धड़कन सुनने में कोई परेशानी नहीं आनी चाहिए।

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मैन्युअल मॉनिटर :

मैन्युअल मॉनिटर से आप रक्तचाप को मैन्युअल रूप से जांच सकते हैं। इसमें एक गेज होता है, जिसे आप डायल पर एक पॉइंटर को देखकर पढ़ते हैं। कफ आपके ऊपरी बांह के चारों ओर लपेटते हैं, एक रबर का बलून होता है, जिसे हाथ से दबाना होता है।

एनीरॉयड मॉनिटर डिजिटल मॉनिटर की तुलना में सस्ते होते हैं। कफ में एक स्टेथोस्कोप लगा होता है, जिसके कारण अलग से दूसरा स्टेथोस्कोप खरीदना जरूरी नहीं। कफ एक हाथ से भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा, यह पोर्टेबल होता है और आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।

मैन्युअल मॉनिटर की कमियां

हालांकि, एनीरॉयड मॉनिटर में कुछ कमियां हैं। यह एक जटिल उपकरण है, जो जल्द ही खराब हो जाता है, जिसके बाद गलत रीडिंग बताता है। कफ ठीक से पहनने के लिए एक मेटल रिंग का होना बहुत जरूरी है। अगर वह रिंग न हो, तो डिवाइस का इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, अगर रबर बलून सख्त होता है, तो उसे दबाना भी मुश्किल हो जाता है। अगर किसी को सुनने में दिक्कत होती है, तो स्टेथोस्कोप के माध्यम से दिल की धड़कन सुनना भी मुश्किल हो सकता है।

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डिजिटल मॉनिटर

ब्लड प्रेशर चेक करने के लिए डिजिटल मॉनिटर ज्यादा लोगों की पसंद है। यह मैन्युअल मॉनिटर की तुलना में आसानी से इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसमें एक एरर इंडिकेटर भी होता है। ब्लड प्रेशर रीडिंग स्क्रीन पर दिखाई देती है। कुछ डिवाइस में तो पेपर प्रिंटआउट के जरिए आप की रीडिंग बताई जाती है।

मॉडल के आधार पर, कफ की बनावट या तो स्वचालित या मैनुअल होती है। डिजिटल मॉनिटर श्रवण-बाधित (कम सुनने वाले) लोगों के लिए अच्छे हैं, क्योंकि ऐसी डिवाइस में स्टेथोस्कोप के माध्यम से दिल की धड़कन को सुनने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

डिजिटल मॉनिटर की कमियां

वहीं, डिजिटल मॉनिटर में भी कुछ कमियां हैं। शरीर की हलचल या अनियमित हृदय गति इसकी सटीकता को प्रभावित कर सकती है। कुछ मॉडल केवल बाएं हाथ पर काम करते हैं। इसके अलावा, डिजिटल मॉनिटर बहुत महंगे होते  हैं और उन्हें बैटरी की भी आवश्यकता होती है।

घर पर ब्लड प्रेशर कैसे चेक करें?

अगर आप घर पर ही ब्लड प्रेशर जांचना चाहते हैं, तो इन निम्नलिखित स्टेप्स को फॉलो कर ब्लड प्रेशर चेक कर सकते हैं:

  • ब्लड प्रेशर चेक करने के लिए सबसे पहले मरीज के बाएं हाथ पर BP चेक करने का कफ बांधें। कफ को इस तरह से बांधा जाना चाहिए कि कफ का नीचे का हिस्सा कोहनी के ऊपर खत्म हो। इसके अलावा, कफ पर लगी दोनों नली मरीज के हाथ के अंदर की ओर होनी चाहिए। 
  • अब स्टेथोस्कोप को कान में लगाएं और रोगी की कोहनी पर डायाफ्राम को रखें।
  • मशीन पर मौजूद वॉल्व को घुमाकर टाइट करें। रबर बल्ब को दबाते हुए BP Machine के प्रेशर को बढ़ाएं। कोहनी में पल्स की आवाज, जिस प्रेशर पर स्टेथोस्कोप से सुनना बंद हो जाती है, उससे 10 अंक ज्यादा तक प्रेशर को बढ़ाएं।
  • वॉल्व को ढीला कर मशीन के प्रेशर को कम करें।
  • बीपी मशीन (BP Machine) में पारा जिस अंक पर पहली बार स्टेथोस्कोप से पल्स की जो आवाज सुनाई देगी उसे कहीं पर नोट कर लीजिए। इसे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहते हैं।
  • अब धीरे-धीरे वॉल्व को घुमाकर ढीला करें और जब पल्स की आवाज सुनाई देना बंद हो जाए तो, अंक को नोट कर लें। इसे डायास्टोलिक ब्लड प्रेशर कहते हैं।
  • आखिरी में पूरा वॉल्व खोल दें और कफ को दबाकर पूरी हवा निकाल लें। 
  • ब्लड प्रेशर मशीन के इस्तेमाल के बाद फिर से इसके ठीक तरह से रख दें और बच्चों की पहुंच से दूर रखें।

तो आप चाहें तो घर पर मैन्युअल मॉनिटर या डिजिटल मॉनिटर का इस्तेमाल कर ऊपर बताए गए स्टेप्स को फॉलो कर के ब्लड प्रेशर जांच सकते हैं। यह तरीके बेहद आसान हैं, जो आपको नियमित रूप से ब्लड प्रेशर जांचने में मदद करेंगे। अगर आप ब्लड प्रेशर से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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