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कोरोना वायरस: महिलाओं और बच्चों में कोरोना वायरस का खतरा कम, पुरुषों में ज्यादा

कोरोना वायरस: महिलाओं और बच्चों में कोरोना वायरस का खतरा कम, पुरुषों में ज्यादा

कोरोना वायरस से प्रलयकारी स्थिति बन चुकी है। चीन के वुहान से शुरू इस वायरस ने लगभग पूरी दुनिया को अपना शिकार बना लिया है। दुनिया के हर कोने में वैज्ञानिक इस पर रिसर्च करने में लगे हैं। अभी तक इसकी वैक्सीन नहीं बन पाई है। एक शोध के अनुसार, यह खतरनाक वायरस महिलाओं और बच्चों की तुलना में पुरुषों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है।

महिलाओं और बच्चों में कोरोना वायरस का खतरा कम

चाइनीज सेंटर्स ऑफ डिजीज कंट्रोल ने एक अध्ययन किया है जिसमें यह सामने आया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं और बच्चों में कोरोना वायरस का असर कम देखने को मिल रहा है। यह शोध कोरोना वायरस से संक्रमित 44 हजार लोगों पर किया गया था। इसमें 2.8 प्रतिशत पुरुषों की और 1.7 प्रतिशत महिलाओं की मौत हुई है। वहीं उम्र पर नजर डाले तो इस वायरस से संक्रमित 15 प्रतिशत बुजुर्गों और 0.2 प्रतिशत बच्चे और किशोरों की मौत हुई है। आंकड़ों को देखकर यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि महिलाओं और बच्चों में कोरोना वायरस होने का डर कम है…

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क्या कहते हैं इटली और रोम के आंकड़े?

इटली में भी कोरोना वायरस से संक्रमित औऱ मरने वाले लोगों में महिलाओं की तुलना पुरुष अधिक हैं। एक नजर डालते हैं रोम की रिपोर्ट पर। 25 मार्च की आखिरी अपडेट के मुताबिक रोम के एक उच्च सावास्थ्य संस्थान के अनुसार कोरोना वायरस के 25,058 मामलों में 5 फीसदी महिला मरीजों की तुलना में 8 फीसदी पुरुष मरीजों की मौत हो चुकी है।

पुरुषों से कम महिलाओं और बच्चों में कोरोना वायरस का खतरा

एक रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं का इम्यून सिस्टम ज्यादा मजबूत होता है। इसलिए हो सकता है महिलाओं को इसलिए कोरोना वायरस का खतरा कम है। वहीं यह भी बताया गया है कि पुरुषों में धूम्रपान ज्यादा और हाथ कम धोने की आदत होती है। पुरूषों की तुलना में महिलाओं और बच्चों में कोरोना वायरस से मौत होने का खतरा इसलिए भी कम होता है।

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महिलाओं और बच्चों में कोरोना वायरस का खतरा कम होने के ये कारण

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बच्चों में संक्रमण कम होने का एक कारण यह भी होता है कि माता पिता बच्चों को ज्यादा सुरक्षित रखते हैं। पेरेंट्स अपने बच्चों को संक्रमण के खतरे से बचाने का हर प्रयास करते हैं।

कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या कम है। आपको जानकार हैरानी होगी कि अन्य संक्रमणों में भी ऐसा ही देखने को मिलता है। इसलिए कोरोना वायरस से होने वाली मौतों के आंकड़ों से वैज्ञानिक बिल्कुल हैरान नहीं है।

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कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में पूरुषों की संख्या ज्यादा होने का एक कारण यह भी है कि पुरुषों का स्वास्थ्य महिलाओं के मुकाबले खराब रहता है। महिलाओं की तुलना में पुरुष धूम्रपान और शराब ज्यादा लेते हैं। बता दें, चीन में 52 प्रतिशत पुरुष और सिर्फ तीन प्रतिशत महिलाएं धूम्रपान करते हैं।

बच्चों में कोरोना वायरस (Coronavirus in Kids)

कोरोना वायरस के अभी तक सामने आए मामलों में सबसे कम उम्र का बच्चा एक दिन का है। बच्चे में इसके लक्षण कम नजर आए हैं लेकिन हल्का बुखार, नाक बहना और खांसी की शिकायत थोड़ी बहुत देखने को मिली है। जिस तरह छोटे बच्चे को फ्लू होता है उसी तरह कोरोना वायरस भी हो सकता है। कम उम्र में बीमार होने की संभावना ज्यादा होती है क्योंकि ऐसे में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ज्यादा उम्र के लोगों में कमजोर प्रतिरोधक क्षमता होने के कारण यह संक्रमण ज्यादा देखने को मिला है लेकिन बच्चों में यह वायरस बहुत कम पाया गया है।

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प्रेग्नेंसी में कोरोना वायरस (Coronavirus in Pregnancy) का असर?

हम सभी इस बात से अच्छे से वाकिफ हैं कि गर्भवती महिला का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है। ऐसी स्थिति में उन्हें किसी भी संक्रमण, वायरस या फ्लू की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। इसका असर मां के साथ-साथ बच्चे के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। कई बार बच्चा जन्मजात स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हो सकता है। ऐसे में कोरोना वायरस को लेकर प्रेग्नेंट महिला में होने वाले बुरे असर के बारे में सिर्फ सोचा जा सकता है। बता दें, कोरोना वायरस की तरह SARS और MERS आदि रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को प्रभावित करने वाले वायरस भी गर्भवती महिलाओं पर बुरा असर करते पाए गए हैं। लेकिन कोरोना वायरस का गर्भावस्था में खतरे को लेकर कोई खास जानकारी नहीं है, लेकिन कुछ शोध में नीचे बताई गई बाते सामने आई हैं…

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आइए जानते हैं प्रेग्नेंट महिलाआ में कोरोना वायरस को लेकर क्या कहती है रिसर्च

चीन में हुआझोंग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के येलन लियू और उनके सहकर्मियों द्वारा प्रेग्नेंसी में कोरोना वायरस के ऊपर स्टडी की गई। इस स्टडी में चार गर्भवती महिलाओं का अध्ययन किया गया। बता दें, ये सभी महिलाएं बच्चे को जन्म देते समय कोरोना वायरस से संक्रमित थी। प्रेग्नेंसी में कोरोना वायरस के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाने का यह अध्ययन बहुत जरूरी था। शोध में मालूम हुआ, जब इन महिलाओं ने बच्चे को जन्म दिया, तो उनमें से किसी भी नवजात को कोरोना वायरस (COVID- 19) के लक्षण नहीं थे। यहीं नहीं चारों नवजात शिशु पूरी तरह से स्वस्थ थे। इन नवजातों में से एक शिशु को सांस लेने में जरा सी तकलीफ थी और दो को शरीर पर रैशेज थे। लेकिन, कुछ दिनों के अंदर वह सभी स्वस्थ थे और कोरोना वायरस का टेस्ट करने पर वह नेगेटिव भी रहे।

इसके अलावा, प्रेग्नेंट महिलाओं पर एक और स्टडी की गई। इस शोध में नौ गर्भवती महिलाओं पर अध्ययन किया गया। इन प्रेग्नेंट महिलाओं ने 10 बच्चों को जन्म दिया। इस अध्ययन में 9 बच्चे सर्वाइव हुए। इनमें किसी बच्चे को कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं पाया गया। लेकिन, पैदा हुए बच्चों में 6 को सांस लेने में थोड़ी तकलीफ थी और दो को हल्का बुखार था। कुछ दिनों में ये बच्चे ठीक हो गए।

हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में पुरुषों की तुलना में महिलाओं और बच्चों में कोरोना वायरस के खतरे कम होने के कारण बताए गए हैं। यदि आप कोरोना से बचाव या इससे जुड़ी अन्य कोई जानकारी पाना चाहते हैं तो आप अपना सवाल कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं। हम अपने एक्सपर्ट्स द्वारा आपके सवालों का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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लेखक की तस्वीर
26/03/2020 पर Mona narang के द्वारा लिखा
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
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