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इलाज के बाद भी कोरोना वायरस रिइंफेक्शन का खतरा!

इलाज के बाद भी कोरोना वायरस रिइंफेक्शन का खतरा!

कोरोना वायरस क्या है?

कोरोना वायरस, उन वायरसों का एक परिवार है, जो जानवरों और मनुष्यों के रेस्पिरेटरी ट्रैक पर हमला करते हैं। यह उपचार करने में आसान जैसे गले में खराश, फ्लू और बुखार से लेकर गंभीर मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS-CoV) और गंभीर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS-CoV) का कारण बनता है। चीन के शहर वुहान को नोवल कोरोना वायरस फैलने का केंद्र माना जा रहा है।

दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। नोवल कोरोना वायरस को सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (Severe Acute Respiratory Syndrome; SARS) के प्रकार का बताया जा रहा है। इस वायरस से ग्रसित लोगों को सामान्य जुकाम से लेकर रेस्पिरेटरी सिस्टम की गंभीर समस्या तक हो सकती हैं। ये वायरस जानलेवा है। डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस को लेकर एडवाइजरी भी जारी की है। जिन व्यक्तियों को कार्डियोपल्मनरी रोग ( cardiopulmonary disease) या कमजोर इम्युन सिस्टम है, उन वयस्कों, बूढ़ों और बच्चों में ये वायरस आसानी से प्रवेश कर जाता है। वायरस का इंफेक्शन होने पर आपको सर्दी-जुकाम के लक्षण नजर आ सकते हैं।

कोरोना वायरस के क्या लक्षण हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, रेस्पिरेटरी की समस्या, खांसी, सूखी खांसी, जठरांत्र की समस्याएं, डायरिया और तेज बुखार संक्रमण के संपर्क में आने के लक्षण हैं। एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, किडनी फेलियर और मृत्यु के कारणों के साथ निमोनिया का निदान किया जा सकता है।कोरोना वायरस इंफेक्शन होने पर व्यक्ति में निम्नलिखित कुछ अन्य लक्षण जैसे कि नाक का बहना, सिर में दर्द की समस्या होना, लगातार खांसी आना, गले में समस्या महसूस होना, बुखार यानी शरीर का तापमान अधिक होना, अस्थमा की समस्या आदि लक्षण दिखाई देते हैं।

कोरोना वायरस रिइंफेक्शन का निदान करने के लिए डॉक्टर सीरम (ब्लड का पार्ट) को जांच के लिए लैबोरेट्री भेजेंगे। अगर आपको पहले से ही कोई गंभीर बीमारी है या MERS होने की आशंका है तो लैब्रोटरी टेस्ट जरूरी हो जाता है। अगर आपको उपरोक्त लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर को अपनी हालिया यात्राओं और जानवर से संपर्क में आने के बारे में जानकारी दें।

सर्दियों में लोगों को संक्रमण सबसे ज्यादा होता है। सामान्य सर्दी लगने पर कुछ दिन बाद ठीक हो जाती है, लेकिन कोरोना वायरस का संक्रमण हो जाने पर ये महीनों तक सही नहीं होता है। अगर सही हो भी गया तो कुछ महीनों बाद फिर से समस्या हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे शरीर में कोरोना के खिलाफ लड़ने वाली एंटीबॉडी लंबे समय तक नहीं रह पाती हैं। यहीं कारण है कि कोरोना वायरस से ठीक होने वाले व्यक्ति में कोरोना वायरस का संक्रमण दोबारा होने का खतरा रहता है। कोरोना वायरस के लक्षण को देखकर इग्नोर न करें।

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कोरोना वायरस रिइंफेक्शन का खतरा

कोरोना वायरस के बड़े परिवार में उन वायरसों को शामिल किया जाता है, जो सार्स, मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम और सामान्य सर्दी जुकाम का कारण बनते हैं। ज्यादातर कोरोना वायरस हल्के से ज्यादा अपर-रेस्पिरेटरी इंफेक्शन फैलाते हैं। इनमें से कई जानवरों से मनुष्यों में फैल जाते हैं। जब एक वायरस मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है तो वह कोशिकाओं से जुड़ने का प्रयास करता है। इसकी प्रतिक्रिया में हमारा इम्यून सिस्टम एंटीबॉडीज; प्रोटीन बनाता है। वह इनकी पहचान करके वायरसों को बाहर निकाल देता है। इसी तरह से मनुष्यों का शरीर कुछ बीमारियों के प्रतिरक्षा तंत्र बनाता है। उदाहरण के लिए चिकनपॉक्स के संपर्क में आए बच्चों का इम्यून सिस्टम बीमारियों के प्रति व्यस्कों के समान इम्यून सिस्टम बना लेता है। इसके अतिरिक्त, इस प्रतिरक्षा को विकसित करने का वैक्सीन एक अन्य तरीका है।

कोरोना वायरस रिइंफेक्शन पर जानकारों की राय

इस पर जॉर्ज मेसॉन यूनिवर्सिटी में ग्लोबल हेल्थ और महामारी की प्रोफेसर एमिरा रोइसस ने मीडिया से कहा कि कई संक्रामक बीमारियां में व्यक्ति के संक्रमण के संपर्क में आने पर वह रोग रोधी ताकत विकसित कर लेता है। कोरोना वायरस रिइंफेक्शन पर उन्होंने कहा कि अक्सर पुनः ऐसे संक्रमण के संपर्क में आने पर व्यक्ति बीमार नहीं पड़ता है। हालांकि, कोरोना वायरस से दोबारा संक्रमित होने के खतरे के बारे में वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं।

कोरोना वायरस रिइंफेक्शन पर डॉक्टर और वायरोलॉजिस्ट भी आश्वस्त नही हैं। वुहान कोरोना वायरस के संपर्क में आने के बाद मनुष्य का शरीर इसके प्रति रोग रोधी क्षमता विकसित करता है या नहीं, इस संबंध में पर्याप्त जानकारी मौजूद नहीं है। डॉक्टर इसको लेकर भी आवश्वस्त नही हैं कि मरीज कोरोना वायरस के दोबारा संपर्क में आने पर इससे बचने के लिए मजबूत या लंबे वक्त तक एंटीबॉडीज बनाते हैं या नहीं। वायरस तेजी से म्युटेशन बना लेते हैं। ऐसे में एक वायरस के प्रति रोग रोधी क्षमता का मतलब यह नहीं है कि वह इसकी म्युटेशन के खिलाफ भी इम्यूनिटी विकसित कर सकता है।

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सबसे पहले कोरोना वायरस कब फैला था?

कोरोना वायरस रिइंफेक्शन के बारे में जानने के लिए हमें इसकी पृष्ठ भूमि में जाना जरूरी है। कोरोना वायरस उन वायरस का परिवार है, जो जानवरों में बीमारी फैलाते हैं। नए कोरोना वायरस को मिलाकर इसमें सात वायरस आते हैं। नया कोरोना वायरस मनुष्यों के शरीर में प्रवेश करने में कामयाब रहा है, लेकिन इसके लक्षण सामान्य सर्दी जुकाम के होते हैं। मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटीर सिंड्रोम (Mers) और गंभीर सेवेर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (severe acute respiratory syndrome) (Sars) को सबसे गंभीर कोरोना वायरस माना जाता है। 200-03 के बीच इसने दुनियाभर में हजारों लोगों की जान ली थी। तब से अब तक यह 1,500 से ज्यादा लोगों की जान ले चुके हैं।

नए वायरस को वुहान कोरोना वायरस (2019-nCoV) के नाम से जाना जाता है। वुहान कोरोना वायरस काफी गंभीर है। अभी तक इससे संक्रमित लोगों को अस्पताल में भर्ती कराए गए करीब 15-20 % मामलों को ‘गंभीर’ के रूप में चिन्हित किया गया है। इसकी मौजूदा मृत्यु दर दो प्रतिशत है। ऐसे में कोरोना वायरस रिइंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

ऐसे होता है कोरोना वायरस रिइंफेक्शन

चीन-जापान फ्रेंडशिप अस्पताल के डॉक्टर झांन क्विनग्युआन (Zhan Qingyuan) ने कहा कि कोरोना वायरस से ठीक हुए लोगों को इंफेक्शन दोबारा हो सकता है। ऐसे लोगों को अपनी सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर वायरस इंफेक्शन के बाद शरीर में कुछ एंटीबॉडीज बनती हैं, जिनका मनुष्य के शरीर पर सुरक्षात्मक प्रभाव होता है। हालांकि, कुछ एंटीबॉडी लंबे वक्त तक जीवित नहीं रह पाती हैं।’ डॉ. झांन ने कोरोना वायरस रिइंफेक्शन से बचने के लिए सुरक्षा को मजबूत बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि संक्रमण से ठीक हुए लोगों को घर पर हल्की एक्सरसाइज से इसकी शुरुआत करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘हमें मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और रिहेब्लिटेशन पर भी ध्यान देना चाहिए। चूंकि, कई लोग बीमारी के बाद डिप्रेशन में चले जाते हैं। ऐसे लोगों को हम मनोवैज्ञानिक के पास जाकर परामर्श लेने की सलाह देते हैं।’ यदि व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर है तो उसे कोरोना वायरस का रिइंफेक्शन हो सकता है। कोरोना वायरस से बचने के लिए सावधानी रखना बहुत जरूरी है। कोरोना की अफवाह पर यकीन न करें।

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कोरोना वायरस में सावधानियां, जिन्हें आप अपना सकते हैं:

यदि आपने किसी प्रभावित देश की यात्रा की है और आपको ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई देते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें। कोरोना वायरस रिइंफेक्शन से बचने के लिए अपने फिजिशयन के साथ पूरी मेडिकल हिस्ट्री साझा करें। आपको यह सुनिश्चित करना है कि आप मानक एहतियात बरतें, जिसमें हाथों और रेस्पिरेटरी की उचित हाइजीन शामिल है:

  • अपने वातावरण को हर वक्त साफ सुथरा रखें।
  • यदि लक्षण नजर आते हैं तो एक मास्क को पहनकर रखें।
  • खांसे और छींकते वक्त अपनी नाक और मुंह को ढक कर रखें।
  • रेस्पिरेटरी सिक्रेशन के संपर्क में आने के बाद हाथों को जरूर साफ करें।
  • सर्दी और फ्लू के लक्षण वाले किसी व्यक्ति के करीब जाने से बचें।

कोरोना वायरस रिइंफेक्शन से बचाव सिर्फ सावधानी बरतने से ही किया जा सकता है। हालांकि, इसके नए प्रकार पर वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। अगर आपको कोरोना वायरस रिइंफेक्शन के लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अगर किसी भी व्यक्ति को ये संक्रमण हो चुका है तो पूरी संभावना है कि आसपास के लोगों का इस संक्रमण से प्रभावित होने का अधिक खतरा है। कोरोना वायरस रिइंफेक्शन से बचने के लिए आप एहतियात बरतें। सर्दी जुकाम से पीढ़ित लोगों के नजदीक जानें से बचें। कोरोना वायरस रिइंफेक्शन से बचने के लिए उपरोक्त उपायों के अलावा भी कुछ अन्य उपाय अपनाए जा सकते हैं। इसकी विस्तृत जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। कोरोना की अफवाह पर यकीन न करें।

कोरोना वायरस रिइंफेक्शन के संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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Sunil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/06/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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