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प्लाज्मा थेरिपी: डोनर के रूप में कैसा रहा इनका अनुभव, जानिए आस्था गुप्ता से...

प्लाज्मा थेरिपी: डोनर के रूप में कैसा रहा इनका अनुभव, जानिए आस्था गुप्ता से...

कोरोना (Corona) के इस महासंकट में लोगों के इलाज और बचाव के लिए कई तरीके अपनाए गए हैं, जिसमें से एक प्लाज्मा थेरिपी (Plasma therapy) है। शायद कई लोगों ने प्लाज्मा थेरिपी के बारे में सुना भी होगा। हम आपको बताते है कि प्लाज्मा थेरिपी (Plasma therapy) है क्या, हमारे रक्त में रेड ब्लड सेल्स (Red blood cells), व्हाइट ब्लड सेल्स (white blood cells) और येलो फ्लूइड होता है। तो इस पीले तरल भाग को ही प्लाज्मा (Plasma) कहा जाता है, जिसका 92 फीसदी हिस्सा पानी होता है।प्लाज्मा में प्रोटीन (Protein), हाॅर्मोंस (Hormones), मिनरल (Mineral) और कार्बन डायऑक्साइड (carbon dioxide) उपलब्ध होता है। हमारे ब्लड में लगभग 55 प्रतिशत भाग प्लाज्मा होता है। जब किसी काे कोरोना का संक्रमण हो जाता है, तो उसके शरीर में एंटीबॉडी (Antibodies) बनते हैं, जो वायरस से लड़ने का काम करते हैं। ऐसा सभी में हो यह जरूरी नहीं है। ऐसे में यह एंटी बाॅडी दूसरे मरीजों की जान बचा सकते हैं। जिसे प्लाज्मा थेरिपी (Plasma therapy) कहते हैं। आज हम बात कर रहे हैं ऐसे ही एक प्लाजमा डोनर से, जिनका नाम अस्थमा गुप्ता है और यह मेरठ की रहने वाली हैं। जिन्होंने अपना अनुभव शेयर किया।

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आपका नाम क्या है?

मेरा नाम आस्था गुप्ता है।

आपकी उम्र क्या है?

मेरी उम्र 30 साल है।

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प्लाज्मा डोनेशन से पहले आप हमें यह बताएं कि आप कोराेना की चपेट में कैसी आई और यह आपको कब हुआ था?

मुझे कोरोना (Corona) का संक्रमण 3 महीने पहले हुआ था। मैं अपने मायके दिल्ली गई थी, जहां मेरे भतीजे का जन्मदिन था। लेकिन किसी को पता नहीं था कि वो कोरोना से संक्रमित (Corona Infection)है। वहा से वॉपस लौटने के बाद मुझे और मेरी माता दोनों को यह हो गया। तीन माह हो गए हैं, लेकिन कमजोरी अभी भी बनी हुई है।

जब आपको कोरोना हुआ था, क्या अनुभव रहा, हमारे साथ शेयर करें?

क्या बोलूं, काफी गंभीर स्थिति हो गई थी, बस अस्पताल में भर्ती होने से बच गई, लेकिन उस समय ऐसा लग रहा था कि सही हो पाऊंगी कि नहीं, बस मन में एक डर था कि क्या होगा, ऑक्सिजन लेवल कम (Low oxygen Level) हो गया, तो (Ventilator) पर ही जाना होगा। उस समय आसपास के रिशतेदारों में कोरोना (Corona) के कारण हुई लोगों की मौत की खबर भी सुनने को मिल रही थी। आप समझ रहे हैं, एक तो कोरोना को लेकर ऐसी ही डर और ऊपर से किसी के मरने की खबर सुन लो, वो भी कोराेना की वजह से, तो मानसिक स्थिति (Mental situation) कैसी हो सकती है। लेकिन भगवान का शुक्र है कि मैं ठीक हो गई।

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आपने किसे प्लाज्मा डोनेट किया था?

मैनें प्लाज्मा डोनेशन अपने जीजू, यानि की बहने के पति को किया था। प्लाज्मा थेरिपी की वजह से वो अच्छे से ठीक भी हो गएं, नहीं तो उनकी हालत बहुत गंभीर हो गई थी।

एक प्लाज्मा डोनर (Plasma Donor) के रूप में आप हमशे अपना क्या अनुभव शेयर करना चाहेंगी?

प्लाज्मा डोनर (Plasma Donor) के रूप में मेरा अनुभव काफी नया रहा है। मैंने इसके बारे में सुना नहीं था, लेकिन जरूरत क्या से क्या न करा दे। मामला अपनों का था और जीजू का ऑक्सिजन लेवल 78 के लगभग हो गया था, जोकि एक महीने के लगभग वो अस्पताल में ही रहे हैं। तो उस गंभीर स्थिति में डाॅक्टरों के अनुसार प्लाज्मा थेरिपी (Plasma therapy) बचाव के लिए ज्यादा असरदार थी।

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क्या आपके घर वाले, आपके प्लाज्मा डोनेशन के सहयोग में थें?

हां, बात घर की थी और वो भी बहन के पति की, तो सभी घर वालों का सहायोग था। हां, लेकिन कहीं न कहीं खुद को डर लग रहा था। पर हिम्मत कर के किया और सबकुछ सही रहा है। लेकिन सामान्य बात कहूं, तो प्लाज्मा थेरिपी को लेकर लोगों के मन में काफी डर भी है, मेरे भी मन में था। इसकी वजह यह है कि प्लाज्मा थेरिपी के बारे में ज्यादा जानकारी किसी को है भी नहीं।

प्लाज्मा डोनेशन (Plasma Donation) के बाद आपको किसी तरह के शरीरिक समस्या, कमजोरी या कोई अन्य समस्या महसूस हुई क्या?

कमजोरी तो मुझमें अभी तक बनी हुई है, पर नहीं पता कि किसी वजह से है। यह कोरोना की वजह से है या प्लाज्मा थेरिपी के लिए किए गए डोनेशन की वजह से, यह कुछ नहीं कह सकती हूं । कमजोरी के अलावा मुझे किसी और बीमारी या शारीरिक दिक्कतों का समाना नहीं करना पड़ा। मैं ने ठीक होने के 15 दिन बाद ही प्लाज्मा डोनेट किया था।

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आपका डायट प्लान (Diet Plan) सामान्य है या अभी डॉक्टर से कुछ बोला है?

मेरा डायट प्लान बिल्कु नॉर्मल है। मैं ऐसे फूड का सेवन ज्यादा कर रही हूं, जिससे मेरी इम्यूनिटी अच्छी बनी रहे। मैं बकरी का दूध पी रही हूं, ताकि शरीर की कमोजोरी भी दूर हो। इसके अलावा मेरा डायट प्लान में सब्जी, फल और दालाें को ज्यादा शामिल किया है।

कोराेना मरीजों को आपका क्या संदेश है?

मैं कोराेना के मरीज (Corona Patient) या सामान्य लोगों को भी यही कहना चाहूंगी कि कोई भी गंभीर स्थिति होने पर घबराने की जगह हिम्मत से काम लें। हां, कहना आसान, पर आपके घबराने से भी कुछ होने वाला नहीं है, बल्कि हिम्मत और अच्छा मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) आपकी कई समस्याएं दूर हो सकती हैं।

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तो यह आपने प्लाज्मा डोनर की कहानी और उनका अनुभव जाना। प्लाज्मा थेरिपी को लेकर बहुत से लोगो के मन में गलत धारणा भी बनी हुई है कि यह खतरनाक है, पर ऐसा नहीं है। इसलिए कई लोगों ने प्लाज्मा थेरिपी में हिस्सा भी नहीं लिया। लेकिन हां, किसी को और काेई गंभीर रोग हो, तो अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
a week ago पर Niharika Jaiswal के द्वारा लिखा
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