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Viral Syndrome: वायरल सिंड्रोम क्या है?

परिचय|लक्षण|कारण|जोखिम|उपचार|घरेलू उपाय
Viral Syndrome: वायरल सिंड्रोम क्या है?

परिचय

वायरल सिंड्रोम क्या है?

वायरल सिंड्रोम एक टर्म है, जिसका इस्तेमाल वायरस की वजह से होने वाले इंफेक्शन के लिए किया जाता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हवा के जरिए आसानी से फैल जाता है। साथ ही यह एक दूसरे की चीजों के इस्तेमाल करने से भी फैलता है।

बच्चों में वायरल सिंड्रोम फैलने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है। वायरल सिंड्रोम में आपके बच्चे को बुखार, मांसपेशियों में दर्द या उल्टी हो सकती है। इसके साथ ही बच्चे को खांसी, चेस्ट कंजेशन या नेजल कंजेशन (बंद नाक) हो सकता है।

ये भी पढ़े Encephalitis : इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) क्या है?

वायरल सिंड्रोम कितना सामान्य है?

वायरस से फैलने वाला वायरल सिंड्रोम किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। हालांकि, बच्चों में वायरल सिंड्रोम होने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। यदि आप वायरल सिंड्रोम को लेकर चिंतित हैं तो अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।

लक्षण

वायरल सिंड्रोम के क्या लक्षण हैं?

वायरल सिंड्रोम में लक्षण धीरे-धीरे या अचानक नजर आने लगते हैं। वायरल सिंड्रोम के लक्षण कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक रह सकते हैं। वायरल सिंड्रोम के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर हो सकते हैं। यह दिन या घंटों के हिसाब से परिवर्तित हो सकते हैं।

वायरल सिंड्रोम में आपको निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं:

उपरोक्त लक्षणों के अलावा भी वायरल सिंड्रोम के कुछ अन्य लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें ऊपर सूचीबद्ध नहीं किया गया है। यदि आप वायरल सिंड्रोम के लक्षणों को लेकर चिंतित हैं तो अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

मुझे डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको उपरोक्त लक्षणों या संकेतों में से किसी एक का अनुभव होता है या आपका कोई प्रश्न है तो डॉक्टर से परामर्श लें। हालांकि, वायरल सिंड्रोम में प्रत्येक व्यक्ति की बॉडी अलग प्रतिक्रिया देती है। स्थिति की बेहतर जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर परामर्श करें।

कारण

वायरल सिंड्रोम का क्या कारण है?

वायरल सिंड्रोम का कारण निम्नलिखित है:

  • वायरस

यह भी पढ़ें: मेनोपॉज और हृदय रोग : बढ़ती उम्र के साथ संभालें अपने दिल को

जोखिम

किन कारकों से वायरल सिंड्रोम का जोखिम बढ़ता है?

निम्नलिखित कारकों से वायरल सिंड्रोम का जोखिम बढ़ता है:

  • यदि आपकी उम्र अधिक है या आप बुजुर्ग हैं
  • बीमारी या स्टेम सेल्स (Stem cell) या अंग प्रत्यारोपण से आपका इम्यून सिस्टम कमजोर हुआ हो
  • यदि आप अक्सर ट्रैवलिंग करते हैं
  • यदि आप किसी स्विमिंग पूल में तैरते हों, जो क्लोरीन से साफ न किया गया हो

यह भी पढ़ें: HELLP syndrome: हेल्प सिंड्रोम क्या है?

उपचार

यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

वायरल सिंड्रोम का निदान कैसे किया जाता है?

वायरल सिंड्रोम का पता लगाने के लिए डॉक्टर इस संबंध में जानकारी मांग सकता है। इन लक्षणों की शुरुआत कब हुई थी, यह जानकारी भी पूछी जा सकती है। डॉक्टर यह पूछ सकता है कि आप अक्सर यात्रा करते हैं या आपको कभी किसी कीड़े ने काटा है। डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी मांग सकता है।

वायरल सिंड्रोम का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपको निम्नलिखित टेस्ट कराने की सलाह दे सकता है:

  • कल्चर: नाक से बहने वाले द्रव्य, बाउल मूवमेंट या अन्य प्रकार के बॉडी फ्लूड का सैंपल लिया जा सकता है। सैंपल लेने के लिए डॉक्टर यह जानकारी इक्कट्ठा करेगा कि यह बीमारी किन कारणों से हो रही है। आपने जो भोजन या ड्रिंक ली है, उसके नमूने भी लिए जा सकते हैं।
  • ब्लड टेस्ट: वायरस का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट के लिए ब्लड का सैंपल लिया जा सकता है।
  • चेस्ट एक्स-रे: दिल के आसपास के फ्लूड या तरल का पता लगाने के लिए डॉक्टर चेस्ट एक्स-रे कराने की सलाह दे सकता है। फेफड़ों में भी संक्रमण का कारणों का पता चेस्ट एक्स-रे से लगाया जा सकता है।

वायरल सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाता है?

आमतौर पर वायरस की वजह से होने वाली एक बीमारी 10-14 दिन के भीतर बिना इलाज के ठीक हो जाती है। इसके अतिरिक्त, संकेत और लक्षणों को कम करने के लिए निम्नलिखित दवाइयां दी जा सकती हैं:

  • एंटीपायरेटिक्स (Antipyretics): यह दवा बुखार को कम करती है।
  • एंटीहिस्टामाइन (Antihistamines): यह दवा रैश, खुजली और सांस लेने में आने वाली समस्या में राहत प्रदान करती है।
  • डीकंजेस्टेंट्स (Decongestants): यह बंद नाक में राहत प्रदान करती है, जिससे आप आसानी से सांस ले सकें।
  • एंटीटुस्सिव्स (Antitussives): यह दवा खांसी को निंयत्रण में मदद करती है।
  • एंटीवायरल दवा: यह दवा वायरस को मारने और लक्षण को नियंत्रण करने में मदद करती है।

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घरेलू उपाय

जीवन शैली में होने वाले बदलाव क्या हैं, जो मुझे वायरल सिंड्रोम को ठीक करने में मदद कर सकते हैं?

निम्नलिखित उपाय और जीवनशैली आपको वायरल सिंड्रोम का सामना करने में मदद कर सकते हैं:

  • पर्याप्त लिक्विड लें: उचित मात्रा में लिक्विड लें। यह आपकी बॉडी में पानी की कमी को रोकेगा। आपको प्रतिदिन कितना पानी पीना है और कौन सा लिक्विड आपके लिए बेहतर होगा, इसकी जानकारी डॉक्टर से मांगे। यदि आपको एक ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्युशन (ORS) पीना है तो डॉक्टर से इस संबंध में पूछें। ORS में सही मात्रा में पानी, नमक और चीनी होती है, जिसकी आपको बॉडी फ्लूड को रिप्लेस करने के लिए जरूरत होती है।
  • ORS उल्टी या डायरिया की वजह से होने वाले डीहाइड्रेशन को रोकता है। आपको कैफेन वाले ड्रिंक नहीं पीने हैं। कैफेन वाले ड्रिंक आपकी बॉडी में डीहाइड्रेशन की स्थिति और बदतर कर सकते हैं।
  • शरीर को पर्याप्त आराम दें: बॉडी को उचित आराम देने के लिए दिन में नींद की छोटी झपकियां जरूर लें। आप ऑफिस के काम और सामान्य दिनचर्या में कब लौट सकते हैं, इस संबंध में डॉक्टर से परामर्श लें।
  • स्वच्छ हवा लें: यदि आपको नेजल कंजेशन या चेस्ट कंजेशन की समस्या है तो आसानी से सांस लेने के लिए मिस्ट हुमिडिफायर (mist humidifier) का इस्तेमाल करें। हालांकि, इस मशीन को कैसे इस्तेमाल करना है, इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से चर्चा करें।
  • गले के इंफेक्शन को कम करने के लिए शहद या खांसी के ड्रॉप लें। प्रतिदिन आपको कितने शहद का सेवन करना है, इसकी जानकारी अपने डॉक्टर से लें। हालांकि, खांसी के ड्रॉप बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के मार्केट में खरीद के लिए उपलब्ध हैं। इनके इस्तेमाल के लिए दवा के लेबल पर छपे दिशा निर्देशों का सावधानी पूर्वक पालन करें।
  • स्मोकिंग न करें। साथ ही स्मोकिंग करने वाले लोगों से दूरी बनाकर रखें। निकोटिन और सिगरेट और सिगार में मौजूद अन्य कैमिकल्स फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्मोकिंग करने से आपको वायरल सिंड्रोम में जल्दी राहत नहीं मिलेगी। यदि आप मौजूदा समय में स्मोकिंग करते हैं और इसे छोड़ने की आवश्यकता है तो अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से सलाह लें। ई-सिगरेट और धुंआ रहित तंबाकू में निकोटिन होता है। इस प्रकार के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
  • बार-बार अपने हाथों को साफ करें। इससे अन्य लोगों में वायरस नहीं फैलेगा। इसके लिए आप साबुन और पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं। पानी और साबुन न उपलब्ध होने की स्थिति में हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें। बाथरूम, खांसी या छींकने के बाद अपने हाथों को अवश्य धो लें। खाना बनाने से पहले हमेशा अपने हाथ साफ कर लें।

इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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Sunil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 26/05/2020 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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