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सर्पगंधा के फायदे एवं नुकसान - Health Benefits of Indian snakeroot (Sarpagandha)

के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. पूजा दाफळ · Hello Swasthya


Mona narang द्वारा लिखित · अपडेटेड 02/07/2020

सर्पगंधा के फायदे एवं नुकसान - Health Benefits of Indian snakeroot (Sarpagandha)

परिचय

सर्पगंधा (Indian snakeroot) क्या है?

सर्पगंधा एक पौधा है। इसकी जड़ का उपयोग दवा बनाने के लिए किया जाता है। स्वाद में यह कड़वा होता है। सर्पगंधा को इंडियन स्नेक रूट (Indian Snakeroot) और डेविल पेपर (Devil Pepper) के नाम से भी जाना जाता है। यह एपोसाइनेसी (Apocynaceae) परिवार से ताल्लुक रखता है। इसका वानस्पातिक नाम रौवोल्फिया सर्पेन्टाइना (Rauwolfia Serpentina) है।

इसका इस्तेमाल भारत में पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा में मुख्य रूप से उच्च रक्तचाप और मानसिक रोगों के लिए किया जाता है। कई शोध के अनुसार, इसमें रेसिसिनमाइन, रिसरपाइन और डीसेरपिडिन तत्व पाए जाते हैं। भारत में इसका इस्तेमाल सालों से किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल वैदिक समय से स्नेक बाईट, हाइपरटेंशन, इंसेक्ट स्टिंग, अनिद्रा, मनोवैज्ञानिक विकार, मिर्गी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर, फीवर, घाव और सिजोफ्रेनिया के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में भी इसका वर्णन है। साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर में इस्तेमाल किए जाने के कारण इसे ‘पागलपन की जड़ीबूटी’ के नाम से भी जाना जाता है।

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सर्पगंधा (Indian snakeroot) का उपयोग किस लिए किया जाता है?

सर्पगंधा का प्रयोग निम्न परेशानियों में किया जाता है:

एंटीसाइकॉटिक एक्टिविटी (Antipsychotic activity)

इंडियन स्नेकरुट का इस्तेमाल सिजोफ्रेनिक (schizophrenic) और टार्डिव डिस्केनेसिया (tardive dyskinesia) के इलाज के लिए किया जाता है। यह जड़ी बूटी बुखार से भी निजात दिलाने में मदद करती है।

एंटी-हायपरटेंसिव एक्टिविटी (Anti-hypertensive activity)

आयुर्वेद में सर्पगंधा का इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर के लिए भी उपयोगी बताया गया है। इसका इस्तेमाल कई दवाओं में भी किया जाता है। इसमें मौजूद एल्कलॉइड का सीधा प्रभाव उच्च रक्तचाप पर पड़ता है। इसके अलावा यह पित्ती में खुजली से भी राहत देता है।

कैंसर के इलाज में भी फायदेमंद (Helpful in Cancer Treatment)

ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में भी सर्पगंधा का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इस बात की पुष्टि को लेकर अधिक शोध की जरूरत है।

एंटी-इन्फलामेटरी प्रॉपर्टीज (Anti-Inflammatory Properties)

इसमें एंटी-इन्फ्लैमटोरी प्रॉपर्टीज होती है जिस वजह से यह स्नेक बाइट, इंसेक्ट बाइट और दूसरे सूजन से भरे जख्मों के इलाज के लिए लाभदायक होता है। यह टॉक्सिन्स को न्युट्रिलाइज कर दर्द और सूजन को दूर करने का काम करता है। एंटी-इन्फ्लैमटोरी प्रॉपर्टीज होने के कारण यह अर्थराइटिस, गाउट और टेनडिनिटिस के लिए प्रभावी है।

पीरियड्स की समस्या (Menstruation Problems)

जिन महिलाओं को पीरियड्स में दिक्कत होती है उनके लिए भी यह बेहतर इलाज है। इसमें एंटी-इन्फ्लैमटोरी और मूड मॉडयूलेटिंग प्रॉपर्टीज होती हैं जो पीरियड्स में होने वाले दर्द, ब्लोटिंग और मूड स्विंग्स की परेशानी से राहत दिलाते हैं।

स्किन संबंधित परेशानियां (Skin Related Problems)

सर्पगंधा स्किन संबंधित परेशानियों के लिए भी बेहद उपयोगी है। स्किन डिसऑर्डर जैसे उर्टीकेरिया (Urticaria) के इलाज में इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस हर्ब में एंटी बैक्टीरियल और एंटी-फंगल एजेंट होते हैं जिस वजह से इसे बॉयल, एक्ने, एक्जिमा, सेलुलाइटिस के इलाज के लिए बेहतर बताया गया है।

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स्ट्रेस और एंग्जायटी (Stress and Anxiety)

सर्पगंधा की जड़ को चबाने से स्ट्रेस और एंग्जायटी से राहत मिलती है। यह शरीर में हॉर्मोन को प्रभावित करता है जो मन को शांत कर स्ट्रेस और एंग्जायटी से छुटकारा दिलाता है।

पेट संबंधित परेशानियों में आराम (Stomach Related Problems)

सर्पगंधा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रेस के लिए उपयोगी इलाज है। डायरिया और कब्ज में भी इसे लेने की सलाह दी जाती है। यह पेट को साफ कर उसे नैचुरल तरीके से काम करने के लिए प्रमोट करता है।

हिस्टेरिया  के इलाज में लाभदायक (Helpful in treatment of hysteria)

इस हर्ब का इस्तेमाल हिस्टेरिया के इलाज के लिए किया जाता है। इसके लिए एक ग्राम पाउडर इंडियन स्नेकरुट को दूध के साथ तीन बार लेने की सलाह दी जाती है।

इंसोम्निया में मददगार (Relieves Insomnia)

इंडियन स्नेकरुट में सिडेटिव प्रॉपर्टीज होती है जिस वजह से इसका प्रयोग इंसोम्निया के इलाज के लिए किया जाता है। मानसिक रोगों के लिए इस हर्ब को वरदान समान माना जाता है।

सर्पगंधा (Indian snakeroot) कैसे काम करता है?

औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण इस पौधे की जड़ का इस्तेमाल कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है। इसकी जड़ में अच्छी मात्रा में कई एक्टिव पदार्थ होते हैं जिसमें एंटी-एंग्जायटी और एंटी-हायपरटेंसिव प्रॉपर्टीज होती हैं। ये पदार्थ एंग्जायटी और हायपरटेंशन के इलाज में मदद करते हैं। इसमें एजमलिसिडिने (Ajmalicidine), रॉहिमबिने (Rouhimbine), इंडोबिनिन (Indobinine), रिसरपिलाइन (Reserpiline) एरिसिन (Aricine), रेसिनामिडिन (Rescinnamidine), इरोसिरफिन (Ioreserpine), इंडोबिने (Indobine), सेरपेंटिनिन (Serpentinine), योहिमबाइन (Yohimbine), अजमलिसिने (Ajmalicine) रासायनिक घटक मौजूद होते हैं।

सर्पगंधा में निम्नलिखित औषधीय गुण होते हैं:

  • एंटी-हायपरटेंसिव (Anti-hypertensive)
  • एंटी-माइक्रोबियल (Anti-microbial)
  • एंटी-इन्फलामेटरी (Anti-inflamatory)
  • एंटी-ड्युरेटिक (Anti-diuretic)
  • एंटी-एंग्जायटी (Anti-anxiety)
  • एंटी-प्रोलिफेराटिव (Anti-proliferative)
  • हायपनोटिक (Hypnotic)
  • सिडेटिव (Sedative)

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सावधानियां और चेतावनी

सर्पगंधा (Indian snakeroot) का उपयोग करना कितना सुरक्षित है?

  • एंग्जायटी (Anxiety): कुछ शोध बताते हैं कि एंग्जायटी पेशेंट्स में सर्पगंधा का सेवन फायदा करता है। लेकिन इसमें कुछ ऐसे केमिकल होते हैं जो एंग्जायटी की कंडिशन को पहले से बदतर बना सकते हैं। इसलिए एंग्जायटी पेशेंट्स को इसका इस्तेमाल करते समय खास सावधानी बरतने की जरूरत है।
  • गॉलस्टोन (Gall stones): जिन लोगों के पित्त में पथरी हो वो भी इसका सेवन न करें। क्योंकि इससे उनकी तकलीफ बढ़ सकती है।
  • शॉक थेरेपी (Shock therapy): सर्पगंधा का सेवन उन लोगों को नहीं करना चाहिए जो शॉक थेरेपी (ईसीटी) ले रहे हो। इन लोगों को थेरेपी से लगभग एक हफ्ते इसका सेवन बंद कर देना चाहिए।
  • अल्सर (Ulcer): पेट में अल्सर, इंटेस्टाइनल अल्सर और अल्सरेटिव कोलाइटिस के पेशेंट्स को इस हर्ब का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • जिन लोगों को रेसेरपाइन पदार्थ से एलर्जी है उन्हें भी इंडियन स्नेकरुट के सेवन से परहेज करना चाहिए।
  • जिन लोगों का ब्लड प्रेशर लो की समस्या है वो भी इससे दूरी बनाकर रखें। इसका सेवन करने से उनका ब्लड प्रेशर अत्यधिक लो हो सकता है।

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साइड इफेक्ट्स

सर्पगंधा (Indian snakeroot) से क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?

सर्पगंधा का सेवन ज्यादातर सभी लोगों के लिए सुरक्षित है। कुछ लोगों में इसका सेवन करने से निम्नलिखित साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं:

  • सिर चकराना (Dizziness)
  • दस्त (Diarrhea)
  • बुरे सपने या सुबह जल्दी नींद न आना (Nightmares or early morning sleeplessness)
  • जी मिचलाना और उल्टी (nausea and vomiting)
  • भूख न लगना (Loss of appetite)
  • डिप्रेशन (Depression)
  • नाक बंद (nasal congestion)
  • मांसपेशियों में दर्द (muscle aches)
  • सिरदर्द (headaches)
  • ठंड लगना (chills)
  • पैरों और टांगों के निचले हिस्से में सूजन (Swelling of feet and lower legs)
  • इलाज के रोकने के बाद दुष्प्रभाव:

    • मानसिक अवसाद (Mental depression)
    • ऊर्जा की कमी या कमजोरी महसूस होना (Lack of energy or weakness)
    • नपुंसकता या यौन रुचि में कमी (Impotence or decreased sexual interest)
    • अनियमित या धीमा दिल की धड़कन (Irregular or slow heart beat)
    • घबराहट या चिंता (nervousness or anxiety)

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    इन चीजों के साथ इंडियन स्नेकरुट का सेवन बिल्कुल न करें:

    एल्कोहॉल (Alcohol): एल्कोहॉल के कारण नींद और उनींदापन हो सकता है। इंडियन स्नेकरुट का सेवन करने से भी उनींदापन और नींद आती है। इन दोनों का सेवन साथ में करने से आपके लिए परेशानी हो सकती है।

    डिप्रेशन की दवाएं (Medications for depression): सर्पगंधा में कुछ ऐसे रसायन होते हैं जो शरीर को प्रभावित करते हैं। यह रसायन अवसाद के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं के दुष्प्रभाव को बढ़ा सकते हैं। अवसाद के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में फेनेल्जिन (Phenelzine), ट्रानयलकायप्रोमाइन (tranylcypromine) आदि शामिल हैं।

    डिगोक्सिन (Digoxin): डिगोक्सिन हृदय गति को मजबूत बनाता है। इंडियन स्नेकरुट दिल की धड़कन को धीमा करता है। इंडियन स्नेकरुट डिगोक्सिन की प्रभावशिलता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए यदि आप डिगोक्सिन का सेवन कर रहे हैं तो इस हर्ब को एवॉइड करना बेहतर होगा।

    मेंटल कंडिशन के लिए दवाएं (Medications for mental conditions ): जो लोग मेंटल कंडिशन के लिए दवाएं ले रहे हैं उन्हें भी इस हर्ब का सेवन एवॉइड करना चाहिए। मेंटल कंडिशन की दवाएं आपके मन को शांत करती हैं। सर्पगंधा में भी मन को शांत करने वाली प्रॉपर्टीज होती हैं। इन दवाओं के साथ इस हर्ब को लेने से दवा के साइड इफेक्ट होने का खतरा बढ़ सकता है। मेंटल कंडिशन में दी जाने वाली दवाओं मे क्लोरप्रोमाजाइन (chlorpromazine), क्वेटायापीन (quetiapine), क्लोजपाईन (clozapine), रिसपेरीडोन (risperidone), फ्लूफेनाजाइन (fluphenazine), हेलोपेरिडोल (haloperidol), ओलैंजपिन (olanzapine), परफेंजाइन (perphenazine), थाइओरिजाडाइन (thioridazine), प्रोक्लोरपेराजाइन (prochlorperazine), थिओथेक्सेन (thiothixene) आदि शामिल हैं।

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    प्रॉप्रैनोलॉल (Propranolol): प्रॉप्रैनोलॉल का इस्तेमाल ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए किया जाता है। इंडियन स्नेकरुट भी ब्लड प्रेशर को कम करता है। इन दोनों का साथ में सेवन करने से ब्लड प्रेशर अत्यधिक कम हो सकता है। इसलिए इनका साथ में सेवन करने से बचें।

    स्टीमुलेंट ड्रग्स (Stimulant drugs): स्टीमुलेंट ड्रग्स नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाती हैं। ये दवाएं आपके दिल की धड़कन को तेज कर सकती हैं। इंडियन स्नेकरुट का सेवन करने से भी नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है। बेहतर होगा कि आप स्टीमुलेंट दवाओं के साथ इंडियन स्नेकरुट का सेवन न ही करें। इससे आपको तेज दिल की धड़कन और उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है। स्टीमुलेंट ड्रग्स में डायएथाइलप्रोपिन (Diethylpropion), एपिनेफ्रीन (Epinephrine), फेन्टेरमाइन (Phentermine), स्यूडोएफीड्रीन (pseudoephedrine) आदि शामील हैं।

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    सिडेटिव मेडिकेशन (Sedative medication): इंडियन स्नेकरुट का सेवन करने से नींद आती है। सिडेटिव दवाओं के कारण भी नींद आती है। इन दोनों का साथ में सेवन करने से जरूरत से ज्यादा नींद आने की परेशानी हो सकती है।

    ड्युरेटिक ड्रग्स (Diuretic drugs): इंडियन स्नेकरुट हृदय को प्रभावित करता है। यदि आप ड्युरेटिक ड्रग्स जैसे वॉटर पिल्स ले रहे हैं तो ये शरीर में पोटेशियम की मात्रा को कम कर सकता है। लो पोटेशियम लेवल भी हृदय को प्रभावित कर सकता है। दोनों का साथ में सेवन करना खतरनाक साबित हो सकता है। वॉटर पिल्स जो पोटेशियम लेवल को कम कर सकती है उनमें क्लोरोथिजाइड (Chlorothiazide), फ्यूरोसेमाइड (furosemide ), हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड (hydrochlorothiazide) आदि शामिल हैं।

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    डोसेज

    सर्पगंधा (Indian snakeroot) को लेने की सही खुराक क्या है?

    इंसोम्निया और स्ट्रेस के लिए सर्पगंधा रूट पाउडडर (Sarpagandha root powder for insomnia and stress): सोने से पहले 250 ग्राम रूट पाउडर को दूध या गुनगुने पानी के साथ लेने से अच्छी नींद आती है। साथ ही स्ट्रेस से भी राहत मिलती है।

    शीघ्रपतन (premature ejaculation): सर्पगंधा और अश्वगंधा को 1:4 के अनुपात में पाउडर बना लें। इसे घी और शहद के साथ लें। शीघ्रपतन के लिए यह नुस्खा बेहद असरदार है।

    अल्सर को हील करने के लिए सर्पगंधा रूट का पेस्ट (Root paste for healing Ulcers): सर्पगंधा की फ्रेश रूट से पेस्ट तैयार कर लें। इसे हल्दी पाउडर में मिलाकर इंसेक्ट बाइट और ठीक न होने वाले अल्सर पर लगाएं। कुछ दिनों में आपको आराम मिल जाएगा।

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    सर्पगंधा की पत्ती का जूस कंजंक्टिवाइटिस के लिए (Leaf juice for Conjunctivitis): सर्पगंधा की फ्रेश पत्तियों को पीसकर जूस निकाल लें। इस रस को दोनों आंखों में डालें। यह मौसमी कंजंक्टिवाइटिस से निजात दिलाता है।

    मोटापे के लिए सर्पगंधा रूट पाउडर (Sarpagandha root powder for Obesity): 150 से 250 मिलीग्राम सर्पगंधा रूट पाउडर को गुनगुने पानी और नींबू के रस के साथ लेने से मोटापे की परेशानी दूर की जा सकती है।

    सिरदर्द के लिए सर्पगंधा के फूल का पेस्ट (Sarpagandha flower paste for Headache): सर्पगंधा के सफेद फूल को अच्छे से पीसकर पेस्ट तैयार कर लें। इसे फॉरहेथ पर लगाएं। इससे सिरदर्द और सिर में भारीपन से राहत मिलती है।

    दी गई जानकारी को मेडिकल एडवाइस के रूप में न समझे। सर्पगंधा का डोज लेने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या हर्बलिस्ट से सलाह लें।

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    उपलब्ध

    सर्पगंधा (Indian snakeroot) किन रूपों में उपलब्ध है?

    सर्पगंधा निम्नलिखित रूपों में उपलब्ध है:

    • सर्पगंधा रूट पाउडडर (Sarpagandha root powder)
    • सर्पगंधा रूट का पेस्ट (Sarpagandha Root paste)
    • सर्पगंधा की पत्ती का जूस (Sarpagandha Leaf juice)
    • सर्पगंधा के फूल का पेस्ट (Sarpagandha flower paste)

    अगर आपका इससे जुड़ा किसी तरह का कोई सवाल है, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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