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गले में कफ की समस्या क्या है? जानिए इसके उपाय

गले में कफ की समस्या क्या है? जानिए इसके उपाय

गले में कफ (बलगम) एक बड़ी समस्या है। गले में कफ जमने पर भारीपन और जलन या खुजली का अहसास होता है। यह स्थितियां गले में एक बेचैनी पैदा कर देती हैं। गले में कफ जमने के अलावा यह छाती में भी चिपक जाता है। आमतौर पर किसी चीज से एलर्जी होने पर भी गले में बलगम बनने लगता है। रेस्पिरेटरी सिस्टम एक लिक्विड बनाती हैं, जिसमें कचरा, मृत कोशिकाएं होती हैं। यह गले में कफ के रूप में सामने आता है। समय रहते गले में बलगम का कारण पता लगाना बेहद ही जरूरी है। गले में बलगम के पीछे कुछ गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। आज हम आपको इस आर्टिकल में गले में कफ के संबंध में विस्तृत जानकारी देंगे। साथ ही संक्षिप्त रूप से इससे बचने के उपाय भी बताएंगे।

गले में कफ या बलगम क्या है?

कफ एक सामान्य चिपचिपा और गाढ़ा लिक्विड पदार्थ है, जिसे शरीर के ऊत्तकों के कई अस्तर (लाइनिंग) बनाते हैं। सामान्य भाषा में इसे रेस्पिरेटरी सिस्टम यानी हमारी श्वास प्रणाली बनाती है। कफ को बॉडी के फंक्शन के लिए जरूरी माना जाता है। यह अन्य अंगों को सूखने से बचाता है और उन्हें नमी भरा रखता है। गले में कफ एक प्रकार से एक जाल का काम करता है। यह बाहरी पदार्थ जैसे धूल, धुएं या बैक्टीरिया को जकड़ लेता है। इसमें एंटीबॉडी और बैक्टीरिया को मारने वाले एंजायम्स होते हैं, जो संक्रमण से लड़ते हैं। सामान्य तौर पर बॉडी में बनने वाला कफ चिंता का विषय नहीं होता है।

कफ की मात्रा बढ़ने और इसके रंग में बदलाव होने पर यह खतरनाक हो सकता है। यह स्थिति किसी अन्य बीमारी या स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकती है। इंफेक्शन के दौरान कफ में वायरस या बैक्टीरिया होते हैं, जो संक्रमण के लिए जिम्मेदार होते हैं। अधिक मात्रा में गले में बलगम आना गंभीर समस्या का संकेत होता है। गले में कफ श्वास नली को ब्लॉक कर सकता है। हालांकि, खांसी आने पर यह गले से बाहर निकल जाता है।

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गले में कफ के प्रकार

  • किसी भी बीमारी में गले में बलगम मोटा और गहरे रंग का होता है। सामान्य कफ के मुकाबले यह पीले रंग का होता है।
  • हरे रंग के कफ में इंफेक्शन से लड़ने वाली सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं।
  • खूनी बलगम या मटीले रंग का कफ भी सामान्यतः अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन विशेषकर यदि नाक के भीतरी हिस्से में खुजली और खरोंच आ जाती है।

गले में कफ के लक्षण

गले में बलगम है या नहीं, इसके कई संकेत होते हैं। अक्सर लोगों को खांसने की आदत होती है। हालांकि, इसे सामान्य माना जाता है।

गले में कफ के दौरान निम्नलिखित लक्षण सामने आ सकते हैं:

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गले में कफ के कारण

आमतौर पर आपके आसपास के वातावरण में बदलाव होने पर गले में बलगम की समस्या होती है। कफ की समस्या के लिए एलर्जी जिम्मेदार होती है, जो एक सामान्य कारण है। मौसमी एलर्जी भी गले में बलगम का कारण बनती है। इस दौरान पौधे पोलेन छोड़ते हैं, जो खांसी और कफ के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन पोलेन्स को बाहर निकालने के लिए बॉडी अधिक मात्रा में कफ बनाती है।

सर्दियां या ठंडी हवा गले में बलगम का एक बड़ा कारण होती है। ठंडी हवा लेना या रूखी नमी रहित हवा हमारी नाक और गले में खुजली पैदा करती है। इस स्थिति में नमी देने के लिए हमारी बॉडी कफ बनाती है, जो गले में कफ का कारण बनता है। यह कफ श्वास नलियों को गर्माहट और नमी देता है, जिससे जलन कम होती है।

हालांकि, सर्दियों के मौसम में वायरल इंफेक्शन जैसे फ्लू, साइनस इंफेक्शन और सामान्य सर्दी जुकाम होता है। यह इंफेक्शन कई लक्षणों जैसे गले में कफ के लिए जिम्मेदार होते हैं।

बैक्टीरिया को बॉडी से बाहर निकालने के लिए शरीर अधिक मात्रा में कफ बनाता है। यह असहज हो सकता है, लेकिन असल में यह एक संकेत होता है कि शरीर स्वस्थ रहने के लिए कार्य कर रहा है।

  • गले में कफ के कुछ अन्य कारण
  • अधिक मसालेदार भोजन खाना
  • प्रेग्नेंसी
  • नाक में कुछ फंस जाना
  • परफ्यूम्स, क्लीनिंग प्रोडक्ट्स या पर्यावरण में फैला धुआं, जिसमें जलन पैदा करने वाले कैमिकल्स होते हैं
  • गर्भनिरोधक और ब्लड प्रेशर की दवाइयां
  • क्रोनिक रेस्पिरेटरी की समस्या जैसे सीओपीडी (COPD)
  • नाक का कफ जब वॉल और नथुनों (नॉस्ट्रिल्स) के बीच से हट जाता है, तो इसके बीच कुछ बलगम बच जाता है। बॉडी के लिए इसे उचित ढंग से बाहर निकाल पाना मुश्किल हो जाता है।
  • इस स्थिति में यह बचे हुए बलगम में बैक्टीरिया पड़ जाएं और साइनस या ईयूस्टैचिन ट्यूब (Eustachian tube) में फंसा रह जाए तो संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। इओस्टेचिन ट्यूब एक कैनाल है, जो गले को कान के मध्य हिस्से से जोड़ती है।
  • इस स्थिति से बचने के लिए शुरुआती दौर में गले में बलगम के लक्षण नजर आते ही इसका इलाज होना चाहिए। यदि गले में कफ 10 दिन से अधिक रहता है तो लोगों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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गले में कफ के उपाय

  • ह्यूमिडफायर का इस्तेमाल: घर की हवा को स्वच्छ रखने से गले के कफ को ढीला करने में मदद मिलती है। इससे यह गले से आसानी से बाहर आ जाता है।
  • नमक के पानी से गरारा: आधे या 1-2 कप में आप आधा या 3/4 टी स्पून नमक मिलाकर इससे गरारा कर सकते हैं। इससे एलर्जी से गले के कफ को ढीला करने में मदद मिलेगी। आप साइनस की स्थिति में कफ की समस्या में भी यह तरीका अपना सकते हैं।
  • यूकेलिप्टस ऑयल (eucalyptus oil): यूकेलिप्टस एक एसेंशल ऑयल है, जो सीने और गले में बलगम को ढीला करता है। यह विक्स वेपोरब जैसे प्रोडक्ट्स के समान ही कार्य करता है।
  • ओवर-दि-काउंटर दवाइयां (guaifenesin): यदि आपके गले में कफ काफी जकड़ गया है तो आप ओवर-दि-काउंटर दवा म्युसिनेक्स (Mucinex) का इस्तेमाल कफ को ढीला करने में कर सकते हैं। ऐसा होने पर यह खांसी के जरिए आसानी से गले से बाहर आ जायेगा। हालांकि, यह दवा बच्चों और बड़ों के लिए अलग फॉर्म्युलेशन में आती है।
  • कैफीन को कम करें: कैफीन वाले बेवरेज प्रोडक्ट्स बॉडी में पानी की कमी करते हैं। यहां तक कि एल्कोहॉल भी समान प्रभाव डालता है। यदि आपको गले में बलगम की समस्या है तो इस स्थिति में दोनों ही तरह के प्रोडक्ट्स से दूरी बनाकर रखें। जितना संभव हो सके उतना पानी पिएं, जिससे आपकी बॉडी हाइड्रेट रहेगी।
  • सिर के नीचे तकिया रखें: रात में सोते वक्त अक्सर लोगों के गले में बलगम की समस्या बढ़ जाती है। लोगों को सोने में दिक्कत होती है। इस स्थिति में आपको अपना सिर बॉडी के मुकाबले थोड़ा ऊपर रखना है। ऐसा करने से गले और श्वास नली से बलगम नीचे की तरफ चला जाता है।
  • पानी पिएं: गले में बलगम की समस्या में बॉडी से पानी की मात्रा कम हो जाती है, जिसके चलते सूखा बलगम बनने लगता है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से गले में बलगम पतला हो जाता है, जिससे यह आसानी से बाहर आ जाता है और बॉडी डीहाइड्रेट नहीं होती है। हालांकि, गर्म चाय इस समस्या में थोड़ा राहत देते हैं। आप साइनस को साफ करने के लिए भाप भी ले सकते हैं।

अंत में हम यही कहेंगे कि यदि आपको भी गले में कफ की समस्या परेशान कर रही है तो अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे।

 

 

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सूत्र
लेखक की तस्वीर
Sunil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 20/05/2021 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड